गाय के दस्त बंद करने की देसी और अंग्रेजी दवा के बारे में जानिए

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एक पशु का स्वस्थ रहना पशुपालक की आय के लिए बहुत जरूरी है। पशु की जरा भी हालत बिगड़ती है तो इसका सीधा असर पशुपालक की आय पर भी पड़ने लगता है। ऐसी ही एक समस्या है जो अक्सर भैंस और गाय आदि को परेशान करती रहती है। हम बात कर रहे हैं गाय को लगने वाली बीमारी दस्त के बारे में। सुनने में बेहद समान लगने वाला यह रोग, गाय को शारीरिक रूप से कमजोर बना देता है। इसके अलावा दस्त लगने की वजह से गाय की दूध देने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इसलिए आज हम अपने इस लेख में आपको गाय के दस्त की देसी और अंग्रेजी दवा के बारे में बताएंगे। अगर आपकी गाय को अक्सर दस्त की समस्या रहती है, तो आप भी अपनी गाय को दस्त की दवा दे सकते हैं। 

गाय को दस्त लगने का कारण 

यूं तो दस्त लगना एक आम समस्या है जो पशुओं और इंसानों को हो जाती है। कई बार तो दस्त लगने की वजह का पता भी नहीं चल पाता। हालांकि दस्त लगने के कुछ सामान्य कारण भी हैं, जिन्हें जानकर दस्त की समस्या का उपचार किया जा सकता है। इसलिए चलिए जानते हैं दस्त लगने के क्या कारण हो सकते हैं।  

  1. अगर गाय को अधिक हराई खिलाई जाए तो इसकी वजह से भी दस्त की समस्या हो सकती है। 
  2. गाय को अगर जरूरत से ज्यादा आहार या चारा खिला दिया जाए तो इसकी वजह से भी उसे दस्त लग सकते हैं।
  3. कई बार पशुपालक घर का सड़ा गला भोजन गाय को दे देते हैं। जिसकी वजह से पशु को दस्त लग सकते हैं। 
  4. गाय को अगर गंदा पानी पिलाया जाए या वह किसी दूषित तालाब का पानी पी ले तो इसकी वजह से भी दस्त हो सकते हैं। 
  5. घास में अगर अधिक मात्रा में कीटनाशक या दवाएं डाली गई हों और यह घास पशु खा ले तो उसे दस्त हो सकते हैं। 
  6. अगर गाय चारे के साथ किसी कीड़े आदि को खा ले तो इसकी वजह से भी उसे दस्त लग सकते हैं। 
  7. गाय को अधिक मात्रा में खल या बिनौला खिलाने की वजह से भी दस्त की समस्या हो सकती है। 

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गाय के दस्त के लक्षण

गाय या किसी भी पशु को दस्त लगे हैं या नहीं इसका बहुत आसानी से पता लगाया जा सकता है। गाय ने कितनी बार गोबर किया है और वह गोबर कैसा है उसे देखकर गाय के दस्त का पता लगाया जा सकता है। गाय को दस्त लगने की सूरत में आपको जो लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वह कुछ इस प्रकार हैं। 

  • गाय जब गोबर करती है तो किसी पिचकारी की तरह निकलता है। 
  • गाय को दस्त होने की सूरत में आपको उसके मल में झाग दिखाई देने लगेंगे। 
  • गाय के गोबर से बहुत गंदी बदबू आती है। 
  • गाय बार – बार गोबर करने लगती है। 
  • गोबर करते समय गाय के गोबर में खून आने लगता है। 
  • गाय शारीरिक रूप से कमजोर हो जाती है। 
  • गाय को दस्त लंबे समय तक रहे तो उसे बुखार होने लगता है। 
  • लंबे समय तक गाय को दस्त होने पर उसके शरीर की हड्डियां दिखने लग जाती है। 

गाय के दस्त बंद करने की दवा 

किसान और पशुपालक आमतौर पर पशु को लगे दस्त की समस्या पर ध्यान नहीं देते। लेकिन ऐसा करना पशु की जान भी ले सकता है। ऐसे में अगर गाय को दस्त लगे हो उसे दवा देना बेहद जरूरी है। गाय के दस्त की अंग्रेजी और देसी दवा दोनो ही दी जा सकती है। लेकिन यह गाय की स्थिति पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं किस स्थिति में गाय को देसी और अंग्रेजी दवा दी जाती है।  

गाय के दस्त बंद करने की देसी दवा 

गाय को दस्त की देसी दवा तब दी जाती है, जब उसकी स्थिति सामान्य हो। यानी दस्त में खून आदि न आ रहा हो। इस स्थिति में गाय को देसी दवा के तौर पर ठंडी चीजें और आसानी से पचने वाली चीजें दी जानी चाहिए जैसे दही, छाछ, सरसों का खल, सरसों का तेल आदि। इसके अलावा ध्यान रहे कि गाय को जब दस्त लगे हो तो उन्हें किसी भी सूरत में  उन्हें बिनौला और अन्य अनाज नहीं देने चाहिए। 

गाय के दस्त की अंग्रेजी दवा 

गाय को दस्त की अंग्रेजी दवा आप तभी दें जब गाय की स्थिति अधिक गंभीर हो। वह भी डॉक्टर के परामर्श पर ही गाय को अंग्रेजी दवा दे। अगर गाय के दस्त से खून गिर रहा है या गाय अधिक गोबर कर रही है तो इस सूरत में उन्हें आप रिहाइड्रेशन फ्लूइड और अन्य खनिज पदार्थ दे सकते हैं। ध्यान रहे कि गाय को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। इसके अलावा गाय की समय – समय पर जांच कराते रहें। 

हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारी दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होंगे। आप यही और पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हमारी Animall App के जरिए भी डाउनलोड कर सकते हैं। एनिमॉल ऐप के जरिए न केवल आप जानकारियां पढ़ सकते हैं। बल्कि पशु बेच और खरीद भी सकते हैं। इसके अलावा ऐप पर चल रहे अलग ऑफर की जानकारी भी आपको ऐप के जरिए मिल सकती है। इसके साथ ही पशु चिकित्सक से भी ऐप के जरिए संपर्क किया जा सकता है। हमारी एनिमॉल ऐप को डाउनलोड करने के लिए दिए गए हुए विकल्प का चुनाव करें।

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जानिए कैसे करें दुधारू भैंस की पहचान

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आज के समय में शहर भले ही आगे निकल गए हों। लेकिन ग्रामीण इलाकों में रहने वाले पशुपालक और किसानों की जिंदगी में कोई खास बदलाव नहीं आया है। इनका गुजारा आज भी गाय या भैंस के जरिए दूध बेचकर ही होता है। यही कारण भी है जिसकी वजह से पशुपालक दुधारू भैंस की नस्ल या दुधारू पशु खोजते रहते हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अगर पशु की दूध देने की क्षमता अच्छी नहीं हुई तो पशुपालक अपने परिवार को भी ठीक से नहीं पाल पाएंगे।

इसके साथ ही वह अपनी लगाई हुई धनराशि को भी गंवा बैठेंगे। अगर आप भी एक दुधारू भैंस खरीदना चाहते हैं, तो आपको बता दें कि दुधारू भैंस की पहचान आप कुछ खास तरीकों से कर सकते हैं। आज हम अपने इस लेख में दुधारू भैंस की इन्ही पहचान के ऊपर से पर्दा उठाने वाले हैं। अगर आप दुधारू भैंस के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को अंत तक पढ़ सकते हैं। 

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कैसे करें दुधारू पशु की पहचान 

किसान और पशुपालक अपनी बचत का एक मोटा हिस्सा पशु खरीदने में लगा देते हैं। ऐसे में अगर वह दुधारू भैंस की नस्ल के बारे में नहीं जानते तो इससे उनके द्वारा लगाई जाने वाली रकम पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। 

इस तरह करें दुधारू भैंस की नस्ल की पहचान 

  • दुधारू पशु के शरीर की बनावट पीछे की तरह से चौड़ी और आगे की तरफ से पतली होगी। इस पशु को सामने से देखने पर आपको यह तिकोनी दिखाई देगी। 
  • दुधारू पशु की चमड़ी चिकनी और अधिक चमकदार होती है। इनकी आंखें चमकीली होती हैं और इनकी आंखों पर बेहद कम ही बाल देखने को मिलते हैं। 
  • दुधारू भैंस की नस्ल में मुर्रा को सबसे अधिक बेहतर माना जाता है। इस भैंस की नस्ल न केवल अधिक दूध देती है। बल्कि इसके दूध में फैट और प्रोटीन भी अधिक पाया जाता है। 
  • अधिक दूध देने वाली भैंस के थन थोड़े टेड़े हो सकते हैं और इनके थनो पर सफेद रंग की झलक दिखाई देती है।
  • अगर आप एक अधिक दूध देने वाली भैंस की नस्ल खरीद रहे हैं तो ध्यान रहे कि उसकी दूसरी या तीसरी ब्यात हो। ऐसा इसलिए क्योंकि अच्छी नस्ल की भैंस अपने दूसरे और तीसरे ब्यात में सबसे अधिक दूध देती है। 
  • ज्यादा दूध देने वाली भैंस की नस्ल के सभी थन एक समान होंगे और एक ही दूरी पर होंगे। 
  • एक अच्छी नस्ल का पशु लगभग दूसरी ब्यात से लेकर सातवीं ब्यात तक सबसे अधिक दूध देता है। 
  • दुधारू भैंस खरीदते समय अगर आपको ऐसी भैंस मिल रही हो, जिसने मादा बच्चे को जन्म दिया हो, तो यह आपके लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है। दरअसल ऐसा होने पर आपको भविष्य के लिए दूसरा दुधारू पशु भी मिल जाता है। 
  • किसी भी पशु को खरीदते समय कम से कम तीन बार उसका दूध दुहते हुए जरूर देखें। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार पशु बेचने वाला व्यक्ति दूध की क्षमता अधिक बताकर भी पशु बेच देता है। 
  • अगर भैंस या गाय खरीद रहे हैं तो उनकी आयु का भी पता जरूर लगाएं। क्योंकि अगर पशु की आयु पूरी होने वाली होगी, तो दुधारू पशु खरीदने के बाद भी आपको नुकसान ही होगा। आपको बता दें कि एक भैंस का जीवनकाल 20 से 22 साल तक का होता है। 
  • भैंस की आयु का अंदाजा आप उनके दांतों और उनके सींग के जरिए लगा सकते हैं। अगर भैंस के आगे के सभी दांत सीधे हो और घीस चुके हों तो यानी उनकी आयु अधिक है। वहीं भैंस के सींग उम्र के साथ अधिक गोल हो जाते हैं। आप इन चीजों को देखकर भैंस की नस्ल की पहचान कर सकते हैं। 
  • भैंस की सेहत को देखकर भी उसकी उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर भैंस शारीरिक रूप से कमजोर दिखाई दे तो हो सकता है कि उसकी उम्र अधिक हो। इसके अलावा आप भैंस बेचने वाले से उसका पशु कार्ड भी मांग सकते हैं। 

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किसान और पशुपालक भाई दुधारू गाय या भैंस की पहचान इस तरह कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आपके पास पशु की पहचान का कोई खास तरीका है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं। 

Animall  ब्लॉग की तरह ही आप यह जानकारी Animall App पर भी पढ़ सकते हैं। यही नहीं ऐप के जरिए पशु चिकित्सक से भी बात कर सकते हैं और गाय या भैंस खरीदने बेचने के लिए भी ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस ऐप को आप दिए गए लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं। 

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पशु लोन के लिए क्या दस्तावेज होना जरुरी है ?

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भारत सरकार द्वारा किसानों और पशुपालकों के लिए बहुत सी योजनाएं चलती रहती है। इन योजनाओं के जरिए पशुपालकों को कई तरह से आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती हैं। वहीं कुछ योजनाओं में पशु खरीदने या डेयरी निर्माण के लिए लोन तक दिया जाता है। लेकिन ज्यादातर पशुपालक इन योजना का लाभ ले ही नहीं पाते।

ऐसा इसलिए क्योंकि पशुपालकों को यह समझ ही नहीं आता कि लोन हेतु किस तरह के दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। वहीं कई मामलों में तो किसानों और पशुपालकों को बैंक के कर्मचारी भी गुमराह करते रहते हैं। पशुपालकों की इसी समस्या का अंत करने के लिए आज हम यह लेख लिख रहे हैं। अगर आप भी किसी सरकारी या निजी बैंक के जरिए किसी योजना से जुड़ा लोन लेने की सोच रहे हैं तो यह लेख आपके लिए है। 

जानिए SBI से पशुपालन के लिए लोन कैसे ले सकते हैं

पशु लोन के लिए दस्तावेज

किसान और पशुपालक भाइयों को यह बता दें कि किसी भी योजना में आवेदन हेतु पहले अपनी पात्रता जांच लेना बहुत जरूरी है। अगर आप योजना या लोन के लिए पात्रता नहीं रखते तो दस्तावेज होने के बाद भी आपको लोन नहीं मिलेगा। इसलिए किसी भी योजना में आवेदन की योग्यता क्या होनी चाहिए। इसके बारे में संपूर्ण जानकारी लेनी जरूरी है। 

  • अगर आप एक पशुपालक हैं और बैंक से लोन लेना चाहते हैं तो सबसे पहले आपके पास उस जमीन की रजिस्ट्रेशन का दस्तावेज होना चाहिए। जहां आप पशुओं को रखने वाले हैं। वहीं अगर किसान या पशुपालक भाई किसी किराए की जमीन पर पशु रख रहे हैं तो इसके लिए आपके पास एग्रीमेंट होना चाहिए। 
  • किसान और पशुपालक भाई को अपने पशु का पूरा ब्यौरा देना होगा और वह यह जानकारी खुद नहीं बल्कि किसी डॉक्टर से ही लिखवाकर देंगे।  
  • किसान को कितने पैसे की आवश्यकता है और किस चीज के लिए वह लोन लेना चाहता है। यह भी बैंक को बताना होगा। ध्यान रहे कि यह एक जरूरी कदम है अगर आवेदनकर्ता इस चीज की जानकारी सही तरह से नहीं देते, तो ऐसे में लोन की अर्जी खारिज हो सकती है। 
  • किसान और पशुपालक भाई किस जगह रहते हैं या उनका निवास का प्रमाण पत्र क्या है यह भी बैंक को बताना होगा। इसके लिए बिजली बिल या पानी का बिल जमा कराना होगा। 
  • किसान या पशुपालक को अपनी जाति का प्रमाण पत्र देना होगा। आपको बता दें कि ऐसी कई योजनाएं चलाई जाती हैं। जिनमें कुछ विशेष जातियों को अधिक लाभ दिया जाता है। इसलिए अपनी जाति का प्रमाण पत्र जरूर बनवाएं।  

आशा करता हूं हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपके काम आएगी। इसी तरह की महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के लिए आप हमारे ब्लॉग और ऐप से जुड़े रह सकते हैं। आप हमारी Animall App को डाउनलोड कर के पशु खरीद और बेच भी सकते हैं। आप इस ऐप के माध्यम से पशु चिकित्सक से भी बात कर सकते हैं और पशुओं की समस्याओं का तुरंत समाधान पा सकते हैं। हमारी Animall App डाउनलोड करने के लिए इस लिंक को चुनें। 

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जानिए भारत की सबसे दुधारू भैंस की नस्लों से जुड़ी जानकारी

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एक दुधारू पशु किसान या पशुपालक की आय को दोगुना कर सकता है। यही कारण भी है कि ज्यादातर पशुपालक अक्सर एक अच्छी नस्ल के दुधारू पशु की खोज करते रहते हैं। अगर आप भी एक पशुपालक हैं और अपनी डेयरी के लिए एक अच्छी नस्ल की देसी भैंस खरीदना चाहते है, तो बता दें कि आप बिल्कुल सही जगह आए हैं।आज हम अपने इस लेख में आपको भारत की कुछ प्रमुख दुधारू भैंस की नस्लों के बारे में बताने वाले हैं। हमारे द्वारा बताई जा रही सभी देसी नस्ल की दूध उत्पादन क्षमता काफी अधिक है। आइए जानते हैं आखिर भारती वह कौन सी भैंस है जो अधिक दूध उत्पादन क्षमता रखती हैं।

मुर्रा भैंस

इस भैंस का इतिहास भारत के हरियाणा और पंजाब से जुड़ा हुआ है। मुर्रा भैंस की पहचान उसका जेट काला रंग है। मुर्रा भैंस को दुनिया की सबसे अधिक दूध देने वाली भैंस की श्रेणी में गिना जाता है। यह एक ब्यात में 1678 किलो दूध दे सकती है। 

जाफराबादी भैंस

डेयरी उद्योग के कारोबारियों के लिए जाफराबादी भैंस किसी सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की तरह है। आपको बता दें कि गुजरात के जामनगर से आने वाली यह भैंस, एक ब्यात में 2150 किलोग्राम तक दूध दे सकती है। इस भैंस के दूध में से 7 से 8 प्रतिशत तक फैट होता है। 

सुरती भैंस 

गुजरात की सुरती भैंस भी पशुपालकों को बेहद पसंद है। यह हर तरह के मौसम में आसानी से रह सकती है। आपको बता दें कि यह भैंस एक ब्यात में 1400 किलोग्राम तक दूध देती है।

मेहसाणा भैंस 

छोट किसान और पशुपालक अक्सर एक शांत स्वभाव की भैंस रखना चाहते हैं। ऐसे पशुपालकों के लिए गुजरात की मेहसाणा भैंस काफी फायदेमंद हो सकती है। आपको बता दें कि मेहसाणा भैंस एक ब्यात में 1200 से 1500 किलो तक दूध दे सकती है। इस भैंस के दूध में 7 प्रतिशत तक फैट भी पाया जाता है। 

भदावरी भैंस 

भदावरी भैंस उन पशुपालकों के लिए बेहद खास है, जो दूध के जरिए घी और दूसरे उत्पाद का कारोबार करते हैं। उत्तर प्रदेश की इस भैंस की न केवल दूध उत्पादन क्षमता अधिक है। बल्कि इसके दूध में 13 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है, जो किसी अन्य भैंस के दूध में नहीं होता। 

नागपुरी भैंस 

इस भैंस के नाम से ही कुछ लोग अंदाजा लगा लेते हैं कि नागपुरी भैंस का अस्तित्व महाराष्ट्र से जुड़ा होगा। छोटे पशुपालक इस भैंस को दोहरे काम के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यह भैंस अपनी एक ब्यात में 1060 किलोग्राम तक दूध दे सकती है। 

तराई भैंस 

तराई नस्ल भैंस की उत्पत्ति तमिलनाडु के नीलगिरी पहाड़ियों से हुई है। तराई भैंस के दूध में भी फैट अधिक मात्रा में पाया जाता है। तराई फैंस अपनी एक ब्यात में करीब 500 से 600 किलो तक दूध दे सकती है। 

हम आशा करते हैं कि किसान और पशुपालक भाइयों को हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई होगी। अगर किसान और पशुपालक भाई ऐसी ही रोचक जानकारियां हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारी Animall App को डाउनलोड कर सकते हैं। हमारी इस ऐप के जरिए आप पशु खरीद और बेच भी सकते हैं। इसके अलावा पशु से संबंधित चिकित्सीय सलाह के लिए आप ऐप को उपयोग कर सकते हैं। अब आप चाहें तो इस लिंक के जरिए Animall App डाउनलोड कर सकते हैं

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ऐसे करें अपनी गाय और भैंस के ब्याने के लक्षणों की पहचान!

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किसान और पशुपालकों को न केवल पशुओं का ध्यान रखना चाहिए। बल्कि उनके व्यवहार को भी समझना चाहिए। क्योंकि पशु के व्यवहार को समझकर ही पशुपालक पशु की समस्या और उसकी तकलीफ का पता लगा सकता है। इसके अलावा पशुपालक पशु के बदले हुए व्यवहार के जरिए ही उसके ब्याने के लक्षण का भी पता लगा सकता है। 

अगर आप एक पशुपालक हैं और गाय या भैंस से प्राप्त दूध के जरिए ही गुजारा करते हैं, तो आपके लिए गाय या भैंस के ब्याने के लक्षणों की पहचान रखना बहुत जरूरी है। आज हम अपने इस लेख में आपको बताएंगे कि गाय या भैंस में ब्याने से पहले कौन से लक्षण देखें जा सकते हैं। हमारे द्वारा बताए गए इन लक्षणों के आधार पर न केवल आपको भैंस और गाय के ब्याने का सही अंदाजा हो जाएगा। बल्कि अगर भैंस और गाय को कोई समस्या है तो इसका भी पता चल जाएगा

जानिए कैसी होनी चाहिए एक गाभिन गाय की खुराक!

गाय भैंस के ब्याने से पहले की अवस्था 

गाय और भैंस ब्याने से पहले एक लंबे समय तक गर्भावस्था में होती हैं। ऐसे में एक पशुपालक के लिए जरूरी है कि वह उनके प्रसव के इंतजाम सही समय पर करके रखें। आपको बता दें कि गाय और भैंस ब्याने से पहले तीन स्थितियों से गुजरती हैं जो कुछ इस प्रकार हैं। 

  1. ब्याने से 24 घंटे पहले के लक्षण 
  2. ब्याना
  3. गर्भनाल या जेर निकलना

गाय और भैंस के ब्याने से पहले लक्षण 

गाय और भैंस ब्याने से पहले कुछ ऐसे संकेत देती हैं, जिन्हें देखकर आप पता लगा सकते हैं कि उनके ब्याने का समय नजदीक आ गया है। ब्याने के यही लक्षण कुछ इस प्रकार हैं। 

  • भैंस या गाय ब्याने से पहले दूसरे पशुओं से दूर रहने लगती है। 
  • ब्याने से कुछ समय पहले पशु खाने पीने में दिलचस्पी नहीं दिखाता। 
  • अगर पशु की योनि से श्लेष्मा निकलने लगा हो और थनों में दूध भरने लगा हो तो इसका मतलब है कि गाय के ब्याने का समय करीब आ गया है। 
  • गाय या भैंस ब्याने से पहले पेट पर लात मारने लगते हैं और बेचैन हो जाते हैं। 
  • भैंस या गाय के ब्याने से पहले उनका आकार बड़ा हो जाता है। 
  • प्रसव का समय आने से पहले गाय और भैंस के पेट का आकार बदलने लग जाता है। 

ग्याभिन पशु की पहचान कैसे की जा सकती है?

गाय के ब्याने के सही दिन का पता लगाना

अगर पशुपालक भाई गाय या भैंस के ब्याने के सटीक समय का पता लगाना चाहते हैं तो वह ऐसा बहुत आसानी से कर सकते हैं। इसका पता करने के लिए पशुपालकों को कुछ बातों का पता होना जरूरी है। जिनके बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं।

  1. गाय या भैंस का जिस दिन भी गर्भाधान करवाया है उस तारीख को लिखकर रख लें। 
  2. अगर गर्भधान की तारीख जानते हैं तो आपको बता दें कि फिर पशु के प्रसव के समय का पता लगाना और भी आसान है। आपको पता हो कि गाय का गर्भकाल करीब 280 से 290 दिन का होता है। वहीं भैंस का गर्भकाल 305 से 318 दिन तक का होता है। ऐसे में इस आधार पर गर्भधान की तारीख से प्रसव की तारीख आप निकाल सकते हैं। 

गाय और भैंस के ब्याने से कुछ देर पहले के लक्षण

  1. अगर पशु के प्रसव का समय आ गया है तो ऐसे में आपको बछड़े के आगे पैर और मुंह बाहर निकलता हुआ दिखाई दे जाएगा। 
  2. गाय या भैंस के ब्याने से पहले पानी की थैली दिखाई दे जाएगी। 
  3. पशु के पानी का थैला फटने के आधे घंटे के अंदर प्रसव हो जाएगा। 
  4. अगर पशु पहली बार ब्या रहा है तो ऐसे में उसे ब्याने में 4 घंटे तक लग सकते हैं। 
  5. अगर पशु को ब्याने से पहले पानी का थैला दिखाई न दें तो तुरंत डॉक्टर को बुलाना चाहिए। 

ब्यात के बाद पशु को कब गाभिन करवाना चाहिए?

जेर का निकलना 

  1. जब पशु ब्या चुका होता है तो उसके तीन से आठ घंटे बाद जेर निकल आती है। 
  2. अगर पशु के ब्याने के बारह घंटे बाद तक जेर न निकले तो इसे गर्भनाल के रूकाव के नाम से जाना जाता है। 
  3. गर्भनाल के खुद न निकलने पर इसे जोर लगाकर नहीं खींचना चाहिए। ऐसा करने से पशु के शरीर से रक्त निकलने लगता है और कई बार पशु की मौत तक हो जाती है।

अगर आप एक किसान या पशुपालक हैं तो हमारे द्वारा शुरू की गई ऐप आपके काफी काम आ सकती है।  आप हमारी Animall App के जरिए पशु को खरीद और बेंच सकते हैं। इसके अलावा आप पशु चिकित्सक से भी सीधीा बात कर सकते हैं। Animall App को अपने फोन में डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें। Click Here 

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