एचएफ गाय पर होने वाला खर्च और कमाई की संपूर्ण जानकारी

देश में गाय का दूध बेचकर आय अर्जित करने का काम बहुत से पशुपालक करते हैं। यही कारण भी है कि पशुपालक गाय खरीदने से पहले कई सवालों के जवाब जानना चाहते हैं, जैसे गाय की कीमत, गाय के रखरखाव में होने वाला खर्च, गाय के दूध देने की क्षमता और गाय से होने वाली आय आदि। इसलिए आज हम अपने पशुपालक भाइयों के लिए एचएफ गाय से जुड़ी जानकारी लेकर आए हैं।

अपने इस लेख के जरिए हम पशुपालक भाईयों को बताएंगे कि एचएफ गाय को रखने का खर्च कितना हो सकता है। इसके अलावा गाय के दूध को बेचकर कितनी आय अर्जित की जा सकती है। अगर आप एक पशुपालक हैं और एचएफ गाय को खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आप हमारे इस लेख पर अंत तक बने रह सकते हैं।

एचएफ गाय की जानकारी 

यह गाय दुनियाभर में अधिक दूध देने वाली गायों की श्रेणी में गिनी जाती है। आपको बता दें कि यह गाय रोजाना 25 से 30 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। इसका शरीर अन्य गाय के मुकाबले काफी भरा हुआ होता है। एचएफ गाय का वजन करीब 580 किलो तक हो सकता है। हालांकि यह गाय अधिक गर्म क्षेत्रों में नहीं रह पाती। यह गाय खरीदना उन पशुपालकों के लिए फायदे का सौदा है जो एक ठंडे इलाके में रहते हैं और अधिक पैसा कमाना चाहते हैं। 

एचएफ गाय के रखरखाव का खर्च 

एचएफ गाय एक विदेशी गाय है वहीं यह दूध भी अधिक मात्रा में देती है। इसलिए इसे रखने का खर्च अन्य गाय से थोड़ा अधिक हो सकता है। लेकिन यह उतना ही मुनाफा भी दे सकती है। आपको बता दें कि एचएफ गाय के एक दिन का कुल खर्च 239 रुपए तक हो सकता है। 

  1. आपको बता दें कि एचएफ गाय को रोजाना 21 किलो हरे चारे का सेवन कराया जाना चाहिए। जिसकी कुल कीमत 40 रुपए है
  2. वहीं एचएफ गाय को रोजाना 2 किलो सूखा चारा भी दिया जाना चाहिए। जिसकी लागत करीब 10 रुपए या उससे कुछ हद तक हो सकती है
  3. एचएफ गाय को रोजाना 9 किलो तक फीड दी जानी चाहिए, जिसकी कुल कीमत 180 रुपए तक हो सकती है
  4. रोजाना एचएफ गाय को 10 रुपए का मिनरल मिक्सचर दिया जाना चाहिए
  5. आपको बता दें कि गाय की रोजाना के रखरखाव का कुल खर्च अधिकतम 230 से लेकर 250 रूपए तक हो सकता है

एचएफ गाय से कमाई  

किसान भाईयों को जैसा की हमने बताया कि एचएफ गाय रोजाना करीब 25 से 30 लीटर तक दूध दे सकती है। ऐसे में अगर पशुपालक भाई इस दूध को बेचते हैं तो वह इसके जरिए रोजाना 65 रुपए किलो के हिसाब से रोजाना 1625 से लेकर 1950 रूपए तक कमा सकते हैं। ध्यान रहे कि ग्रामीण इलाकों में और शहरी इलाकों में दूध अलग – अलग कीमतों पर बेचा जाता है। हमने आपको एक अंदाजा दिया है, जिसके जरिए आप समझ सकें कि आप गाय से कितनी आय अर्जित कर सकते हैं।

किसान और पशुपालक ऐसी ही जरूरी जानकारियां हमारी साइट और ऐप के जरिए हासिल कर सकते हैं। अगर पशुपालक चाहें तो हमारी ऐप का इस्तेमाल गाय खरीदने और बेचने के लिए भी कर सकते हैं। हमारी Animall App को डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।

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जानिए गाय और भैंस को मोटा तगड़ा करने के जबरदस्त उपाय

एक स्वस्थ और तंदुरुस्त पशु न केवल लंबे समय तक जीवित रहता है। बल्कि उसकी दूध उत्पादन क्षमता भी अधिक होती है। यही नहीं एक दुबला पतली गाय या भैंस  को बीमारी लगने का खतरा भी अधिक रहता है। यही कारण भी है जिसकी वजह से अक्सर पशुपालक ऐसे आहार या चारे के बारे में जानना चाहते हैं।

जिसके जरिए गाय और भैंस मोटी तगड़ी हो जाएं। क्या आप भी ऐसे ही आहार और उपाय के बारे में जानना चाहते हैं। अगर हां तो बता दें कि आज आपकी यह खोज पूरी होने वाली है। आज हमारे इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आप अपनी गाय भैंस को मोटा तगड़ा कैसे बना सकते हैं। गाय को मोटा तगड़ा करने के इन उपाय को जानने के लिए लेख को अंत तक पढ़ें। 

गाय और भैंस को मोटा तगड़ा बनाने के उपाय 

शारीरिक रूप से मजबूत इंसान हो या गाय दोनों ही अधिक मेहनत कर सकते हैं। यही नहीं शारीरिक रूप से मजबूत पशुओं के जरिए प्राप्त खाद्य सामग्री की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इसलिए पशुपालक भाइयों के लिए जरूरी है कि वह अपनी गाय और भैंस को मोटा तगड़ा बनाएं। अब हम आपको नीचे पशु को मोटा तगड़ा बनाने के कुछ घरेलू उपाय और नुस्खे बता रहे हैं। जिन्हें आप आजमा सकते हैं। 

पशु के लिए बाई फैट 

गाय भैंस को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए और उनकी क्षमता को बेहतर करने के लिए बाई फैट देना फायदेमंद हो सकता है। यह पशु का आहार है जो आपको आपके आस पास की कई दुकानों पर मिल जाएगा। इस बाई फैट को आप अच्छी तरह रोस्ट करके अपनी गाय और भैंस को नियमित रूप से दे सकते हैं।

आप शुरुआत में बाई फैट केवल रोजाना 100 ग्राम ही दें। बाद में इसकी मात्रा को 600 ग्राम तक कर दें। ऐसा कहा जाता है कि बाई फैट देने के कुछ ही समय बाद गाय और भैंस का शारीरिक रूप से मजबूत और मोटी तगड़ी होने लगती है। इसके अलावा पशु को रोजाना इसे देने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर हो जाती है। 

गाय भैंस को दें बिनौले 

अक्सर पशुपालक और किसान कहते नजर आ जाते हैं कि हरियाणा की गाय भैंस बहुत मोटी और तगड़ी होती हैं। इसके साथ ही यहां के पशु की त्वचा भी बेहद चमकदार होती है। आपको बता दें ऐसा इसलिए है, क्योंकि हरियाणा के लोग अपनी गाय और भैंस को बिनौला खिलाते हैं। आप भी भैंस या गाय को मोटा और तगड़ा करने के लिए बिनौला खिला सकते हैं।

लेकिन ध्यान रहे कि किसी भी सूरत में पशु को कच्चा बिनौला न खिलाएं। ऐसा करने से पशु की तबीयत बिगड़ सकती है। वहीं बिनौला भी रोस्ट या अच्छी तरह पका कर ही पशु को खिलाएं। अगर आप रोजाना ऐसा करते हैं तो इससे कुछ ही समय में आपकी गाय और भैंस मोटी तगड़ी हो जाएंगी। 

सोयाबीन से होगी भैंस मोटी तगड़ी 

किसान और पशुपालक भाई अगर अपनी गाय भैंस को बाईपास फैट और बिनौले नहीं दे पा रहे, तो वह उन्हें सोयाबीन खाने को दे सकते हैं। आपको बता दें कि सोयाबीन किसी भी साधारण दुकान से मिल जाएगी। सोयाबीन को रोजाना पशु को अच्छी तरह रोस्ट करके खिलाएं। आप शुरुआत में गाय या भैंस को केवल 100 ग्राम ही सोयाबीन खिलाएं। इसके बाद धीरे – धीरे उन्हें इसकी अधिक मात्रा देना शुरू करें। ऐसा करने से गाय भैंस मोटी तगड़ी हो जाएंगी। 

सरसों का तेल और दाना

गाय और भैंस को तगड़ा करने का सबसे बेहतर और आसान तरीका है कि आप उसे सरसों के तेल के साथ दाना और खल देना शुरू करें। अगर आप रोजाना सुबह शाम पशु को सरसों का तेल और दाना देते हैं तो इससे पशु में शारीरिक बदलाव देखने को मिलेंगे। इसके सेवन से पशु जल्दी ही मोटा तगड़ा हो जाएगा। 

किसान और पशुपालक भाई इस ब्लॉग पर पढ़ी गई जानकारी को ऐप के माध्यम से भी पड़ सकते हैं। हमारे द्वारा तैयार की गई Animall App न केवल आपको पशु स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करेगी। बल्कि आप पशु खरीदने और बेचने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यही नहीं पशु चिकित्सक से राय लेने के लिए भी आप इस ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप Animall App डाउनलोड करने की सोच रहे हैं तो आप इस लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं। 

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क्या दूध में पाउडर मिला कर फैट और SNF बढ़ा सकते है ?

दूध की गुणवत्ता अच्छी हो तो उसकी कीमत और मांग दोनों ही बढ़ जाती है। इस बात को डेयरी उद्योग के लोग भली भांति जानते हैं। यही कारण भी है जिसकी वजह से डेयरी उद्योग के लोग दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने के लिए कई तरह के उपाय अपनाते हैं। आज के समय में दूध के अंदर फैट और एसएनएफ बढ़ाने के लिए पाउडर, वनस्पति तेल, इंजेक्शन और घी आदि का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या यह तरीका सही है और क्या सच में इन पदार्थों के जरिए दूध में मौजूद फैट और एसएनएफ को बढ़ाया जा सकता है।

आइए आज विस्तार से जानते हैं, आखिर दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने के लिए मिलाया जाने वाला पाउडर कितना कारगर है और इसके क्या, नुकसान हो सकते हैं। इसके अलावा एक नजर इस बात पर भी डालेंगे कि आखिर क्यों दूध में यह मिलावट की जा रही है।

दूध में फैट और एसएनएफ क्यों है जरूरी

दूध का उपभोग करने वाले और उसे बेचकर आय अर्जित करने वाले लोग दूध में मौजूद फैट को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। यह फैट और एसएनएफ ही है जो दूध के जरिए शरीर को लाभ पहुंचाते हैं। आपको बता दें कि दूध के अंदर फैट और एसएनएफ जितना अधिक होता है उतनी ही दूध की कीमत भी बढ़ जाती है। ज्ञात हो की दूध के अंदर फैट के अलावा पाए जाने वाले यौगिक पदार्थ और विटामिन को ही एसएनएफ कहा जाता है। 

फैट और एसएनएफ की मात्रा के लिए जिम्मेदार कारण 

गाय या भैंस के जरिए प्राप्त दूध में फैट और एसएनएफ कितना होगा यह कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें दूध की गुणवत्ता अच्छी न होने का सबसे पहला कारण पशु को दिया जाने वाला आहार होता है। अगर पशु को सही मात्रा में सही आहार न दिया जाए तो इसका असर दूध की गुणवत्ता पर पड़ता है। इसके अलावा अगर पशु किसी रोग से पीड़ित हो तो इसका असर भी दूध की गुणवत्ता पर देखा जा सकता है। इसके साथ ही गाय या भैंस की नस्ल भी दूध के फैट और एसएनएफ की मात्रा के लिए जिम्मेदार होती है। अगर पशुपालक पशु को सही आहार दे और उसे रोग से बचाकर रखें तो पशु के दूध की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, या फिर एक अच्छी नस्ल की गाय या भैंस Animall App के जरिए खरीदें।  

दूध में पाउडर मिलाना या मिलावट करना कितना फायदेमंद

एक पशुपालक या डेयरी उद्योग का व्यक्ति जब दूध में पाउडर, वनस्पति तेल, घी आदि की मिलावट करता है, तो इससे दूध गाढ़ा तो हो जाता है। लेकिन इसका स्वाद और इसके गुण अवगुणों में भी बदल जाते हैं। जिसका पता ग्राहक आसानी से दूध के स्वाद के जरिए भी लगा लेता है। यही नहीं दूध में पाउडर मिलाने की वजह से एसएनएफ तो बढ़ जाता है। लेकिन इससे दूध के फैट में कोई बढ़ोतरी नहीं होती। इसलिए दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने के लिए सही तरीकों को अपनाया जाना चाहिए। 

दूध में मिलावट की वजह 

आमतौर पर पशुपालक या डेयरी उद्योग के लोग दूध के अंदर मिलावट इसलिए करते हैं, ताकि वह अधिक मुनाफा कमा सकें। दरअसल डेयरी उद्योग के अंदर जिस गाय या भैंस के दूध में फैट और एसएनएफ अधिक होता है। उस गाय और भैंस का दूध अधिक दामों पर बेचा जा सकता है। ऐसे में पशुपालकों और छोटे किसानों के पास आय का जरिया एक पशु के जरिए प्राप्त दूध ही है। यह कारण भी है जिसकी वजह से दूध में मिलावट की जाती है।

दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने का सही तरीका 

दूध में फैट और एसएनएफ को बढ़ाने के लिए पशुपालक भाई उन्हें ब्याने से पहले और ब्याने के बाद सही मात्रा में हरा चारा और सूखा चारा दें। इसके अलावा पशुओं की साफ सफाई का भी ध्यान रखें और इन्हें रोग से बचाकर रखें। वह पशुपालक भाई जो दूध की गुणवत्ता बेहतर चाहते हैं, वे एक अच्छी नस्ल का पशु खरीदें।  पशुपालक भाई इस बात का खास ध्यान रखें कि एक अच्छी नस्ल ही बेहतर दूध उत्पादन क्षमता रखती है। इसलिए अगर आप डेयरी उद्योग के लिए एक गाय या भैंस खरीद रहे हैं तो उसकी नस्ल का चुनाव सोच समझकर करें।  

इन सभी बातों के अलावा एक पशुपालक को यह ध्यान रखना चाहिए कि पशु को अधिक इंजेक्शन या खराब खाद्य सामग्री कभी न दें। ऐसा करने पर न केवल पशु की दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। बल्कि कई बार पशु के द्वारा दिया गया दूध भी दूषित हो जाता है। इसके साथ ही पशु के व्यवहार पर भी नजर बनाकर रखें।

Animall ऐप करें डाउनलोड

किसान और पशुपालक भाई इस लेख के माध्यम से समझ गए होंगे कि एसएनएफ बढ़ाने का सही और गलत तरीका क्या है। अगर आपको अब भी एसएनएफ से संबंधित किसी तरह की जानकारी हासिल करनी है तो आप हमारी ऐप पर जुड़ सकते हैं। ऐप पर आप न केवल एसएनएफ से जुड़ी जानकारी हासिल कर पाएंगे। बल्कि ऐप के माध्यम से गाय और भैंस खरीद और बेच भी पाएंगे। यानी आप इस ऐप का इस्तेमाल हर तरह से कर सकते हैं। चाहे आपको गाय या भैंस बेचनी हो या खरीदनी हो। इसके अलावा अगर आपका पशु बीमार है तो आप  Animall App पर डॉक्टर से मदद भी मांग सकते हैं। अगर आप एक पशुपालक हैं तो आप इसे आसानी से प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं या फिर आप ऐप डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए विकल्प पर क्लिक करें

जानिए क्या है, दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने का सही तरीका

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अगर बार-बार आपकी गाय लात मारती है तो क्या करना चाहिए!

गाय और भैंस का पालन करने वाले पशुपालकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इनमें से सबसे मुख्य एक समस्या है कि गाय और भैंस का दूध दोहते समय उनका लात मारना। पशु के इस व्यवहार के चलते कई बार दूध की पूरी बाल्टी ही गिर जाती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान होता है। यही नहीं कई बार पशु के लात मारने पर पशुपालक भी उन्हें मारने पीटने लगते हैं। तो अब जानिए कि अगर आपकी गाय लात मारती है तो क्या करना चाहिए।

जिसकी वजह से पशु अधिक चिड़चिड़ा हो जाता है और दूध भी कम देने लगता है। गाय भैंस की इसी समस्या का कारण और समाधान हम अपने इस लेख में लेकर आए हैं। अगर आपकी गाय या भैंस दूध निकालते समय लात मारती है तो आप उसे कई तरह से काबू में कर सकते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं आखिर क्यों गाय या भैंस दूध दुहते समय लात मारती है और कैसे उन्हें काबू में करें। 

गाय या भैंस के लात मारने की वजह 

एक पशुपालक को यह समझना बहुत जरूरी है कि गाय या भैंस दूध दुहते समय कुछ कारणों की वजह से लात मार सकती है। इनमें से कुछ हम आपको नीचे बता रहे हैं। 

  1. गाय अगर लंबे समय बाद हीट में आई हो या गर्भाधान किया गया हो तो गाय चिड़चिड़ी हो जाती है और लात मारने लगती। 
  2. गाय को अगर किसी तरह का रोग हो जाए या उसके थनों में दर्द हो तो भी वह लात मारने लगती है। 
  3. ऐसा कई बार देखने को मिलता है कि पशु किसी विशेष व्यक्ति से चिड़ता है। जिसकी वजह से वह उसे दूध दुहने नहीं देता और बार – बार लात मारने लगता है। 
  4. गर्भधारण करने के दौरान पशु के शरीर में कई बदलाव आते हैं। जिसकी  वजह से पशु दूध दुहते समय लात मारने लगता है। 
  5. अगर पशु को सही तरह से चारा न दिया जा रहा हो और वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाए तो भी वह दूध दुहते समय लात मार सकता है। 
  6. अगर गाय या भैंस की तबीयत खराब हो या वह किसी पीड़ा में हों तो भी वह बार – बार लात मार सकते हैं। 

गाय लात मारती है तो क्या करना चाहिए

गाय या भैंस दूध देते समय कई कारणों के चलते लात मार सकते हैं। पशुपालकों को ऐसे में सब्र और समझदारी से काम लेना चाहिए। अगर पशुपालक ऐसे में किसी तरह की जोर जबरदस्ती करें या पशु के खिलाफ सख्त रुख अपनाएं तो इससे पशु अधिक गुस्से में या तनाव में आ जाता है और उसके दूध देने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। इसलिए पशु को बहुत प्यार से और तरीके से काबू में करना चाहिए। ऐसे ही कुछ तरीके हम आपको बताते हैं जो दूध दुहते समय आप आजमा सकते हैं। लेकिन इन उपाय को आजमाते हुए पशुपालक को यह समझना होगा कि पशु लात मार क्यों रहा है। 

गाय न मारे लात इसके उपाय

  • अगर पशु किसी विशेष व्यक्ति से चिड़ा हुआ है तो बेहतर है कि पशु का दूध कोई दूसरा व्यक्ति निकाले। लेकिन अगर कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं है तो ऐसे में पशुपालक उसके आगे के एक पैर को मोड़ कर बांध दे और फिर दूध निकाले। ऐसा करने से पशु लात नहीं मार पाएगा। लेकिन ध्यान रहे कि इससे पशु अधिक चिड़चिड़ा हो सकता है। इसलिए किसी भी सूरत में यह आखिरी उपाय है जो आपको करना है। 
  • अगर पशु दूध दुहते समय लात मारता है तो बेहतर है कि आप उसे खाने में दाना डालना शुरू करें। जब भी दूध निकालना हो तो पशु को दाना खाने को दें। ऐसा करने से पशु का पूरा ध्यान दाना खाने में लगा रहेगा और वह खुशी – खुशी दूध दे देगा। 
  • गाय या भैंस को दूध निकालते समय अगर उनकी मनपसंद चीज या चारा खाने में दिया जाए, तो इससे वह दूध निकालते समय लात नहीं मारते। 
  • गाय या भैंस शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसे अधिक मात्रा में चारा दें। ताकि वह कमजोरी का शिकार न रहे। 
  • अगर पशु को गर्मी में रखा गया है तो इसकी वजह से भी वह लात मार सकती है। इसलिए पशु के आस पास कूलर या पंखे का इंतजाम करें।  
  • पशु अपनी चोट या दर्द बता नहीं सकता। ऐसे में अगर कोई उपाय काम नहीं कर रहा है तो आप इस सूरत में चिकित्सक की मदद लें, हो सकता है किसी दर्द या रोग के चलते वह ऐसा कर रहा हो। 

आप इसी तरह की जानकारी हमारी Animall App के जरिए भी पढ़ सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो पशु खरीदने और बेचने के लिए भी Animall App का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐप को डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें और अपनी पसंद का पशु खरीदें।

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जानिए गाय के बछड़े की देखभाल किस तरह से करें

कहा जाता है कि एक पौधे का जितना अच्छी तरह ध्यान रखा जाएगा, वह उतना ही मजबूत पेड़ बनेगा। इसी तरह पशुपालक जितनी अच्छी तरह बछड़े का ध्यान रखेंगे वह उतना ही तंदुरुस्त बैल या गाय बनेगी। पशुपालक अक्सर गाय के ब्याने के बाद बछड़े के ऊपर ध्यान ही नहीं देते। जिसकी वजह से न केवल बछड़ा कमजोर रह जाता है। बल्कि कई बार बछड़े की मौत तक हो जाती है। जिसका असर गाय के ऊपर भी पड़ता है और कई बार तो गाय दूध तक देना बंद कर देती है। इसलिए जरूरी है कि बछड़े के जन्म के साथ ही उनकी देखरेख अच्छी तरह की जाए। अगर आप भी एक पशुपालक हैं और आपकी गाय ब्याने वाली है, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि बछड़े की देखभाल किस तरह की जाती है। आज हम आपको अपने इस लेख में बछड़े की देखरेख से जुड़ी संपूर्ण जानकारियां मुहैया कराएंगे। अगर आप यह जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो लेख पर अंत तक बने रहें।

बछड़े की शुरुआती देखरेख का तरीका

  1. बछड़े के पैदा होने के साथ ही उसके नाक और मुंह में श्लेष्मा होता है। जिसे कुछ लोग कफ भी कहते हैं। इसे बछड़े के पैदा होने के तुरंत बाद ही साफ कर देना चाहिए। अगर ऐसा ना किया जाए तो बछड़े को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। 
  2. पशुपालकों ने अक्सर यह देखा होगा की गाय ब्याने के बाद अपने बछड़े को चाटने लगती है। गाय ऐसा इसलिए करती है ताकि बछड़े की त्वचा आसानी से सूख जाए। लेकिन अगर गाय बछड़े को चाटे ही ना, तो आप बिना वक्त गवाएं, बछड़े के शरीर को टाट से या फिर सूखे कपड़े से साप कर दें। इसके अलावा बछड़े को छाती दबाकर सांस दिलाने की कोशिश करें। 
  3. जिस स्थान पर बछड़े को रखें वह पूरी तरह सूखा रहना चाहिए। गीले स्थान पर रहने से बछड़े को कई गंभीर रोग हो सकते हैं। 
  4. एक स्वस्थ शिशु की पहचान के लिए हम अक्सर उनके वजन पर नजर बनाकर रखते हैं। ठीक उसी तरह आपको बछडे़ के वजन को भी देखना होगा। अगर बछड़े का वजन कम हो तो आप उसके स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टर से बात करें। 
  5. एक शिशु के लिए जिस तरह मां का पहला दूध बेहद महत्वपूर्ण होता है। उसी तरह बछड़े के लिए गाय का पहला दूध जिसे खीस भी कहते हैं। वह पीलानी चाहिए। इस पहले आहार के जरिए बछड़ा कई तरह के रोग से बचा रह सकता है। 
  6. गाय के ब्याने के बाद उसके थनों को क्लोरीन के घोल से धोना चाहिए।
  7. अमूमन गाय के ब्यान के एक घंटे बाद ही बछड़ा दूध पीने का प्रयास करने लगता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाता तो आप इसमें बछड़े की सहायता करें। 

बछड़े का आहार कैसा होना चाहिए 

पशुपालकों को सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बछड़े को पहला आहार खीस ही मिले। आपको बता दें कि गाय के ब्याने के 3 से 7 दिन बात तक भी खीस का निर्माण होता रहता है। यह खीस बछड़े के शारीरिक और मानसिक विकास में तो एक अहम भूमिका निभाता ही है। इसके साथ ही बछड़े की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। इसलिए बछड़े के जन्म तीन दिन बाद तक कोशिश करें कि बछड़े को यह खीस ही दें। 

एक शिशु के लिए जिस तरह शुरुआती समय में मां का दूध महत्वपूर्ण होता है। उसी तरह बछड़े को भी कम से कम 3 से 4 सप्ताह मांक का दूध पीने दें। इसके बाद आप आगे चाहें तो बछड़े को कुछ हल्का चारा देना शुरू कर सकते हैं। वैसे ज्यादातर समय तक बछड़े के लिए गाय का दूध ही फायदेमंद रहता है। लेकिन यह अनाज और चारे के मुकाबले काफी महंगा पड़ता है। इसलिए कुछ ही समय बाद पशुपालक बछड़े को अन्य आहार देने लगते हैं। 

बछड़े की देखभाल में किसी तरह की कोई लापरवाही ना हो इस बात का खास ध्यान रखें। इसके अलावा जिस भी बरतन में बछड़े को खाना या पानी दें और उस कुछ – कुछ समय में धोते रहें। 

बछड़े के पीने का पानी 

अमूमन पशुपालक बछड़े के खाने पर तो थोड़ा बहुत ध्यान दे देते है। लेकिन उनके पीने के पानी का ध्यान नहीं रखते। इसलिए ध्यान रहे कि किसी भी स्थिति में बछड़े को पीने का पानी साफ दें। इसके अलावा बछड़ा अधिक मात्रा में पानी न पिए इस बात का भी खास ख्याल रखें। 

बछड़े को खिलाने की व्यवस्था रखें कुछ ऐसे 

  1. अगर गाय का हाल ही में प्रसव हुआ है तो ऐसे में बछड़े के खाने पीने का अधिक ध्यान रखना चाहिए। आप बछड़े को ऐसे में कुछ पेय पदार्थ दे सकते हैं। 
  2. बछड़े को आप मक्खन निकाला हुआ दूध दे सकते हैं। 
  3. आप बछड़े को कुछ अन्य द्रव पदार्थ भी दे सकते हैं जैसे छाछ, दही, मीठा पानी, दलिया आदि। 
  4. बछड़े को पूरी तरह दूध पर भी पाला जा सकता है।
  5. बछड़े को पोषक गाय को दूध पिलाना।
  6. एक नए बछड़े को जिसकी आयु 15 दिन है, उसे सूखे पदार्थ की आवश्यकता अधिक होती है। ऐसे में उसे रोजाना तीन महीने तक डीएम 1.43 किग्राम ही दें।
  7. कोशिश करें की बछड़े को हरे चारे की जगह सूखा चारा दें। 
  8. बछड़े की उम्र तीन महीने से अधिक होने के बाद अगर गाय का दूध अधिक नहीं है तो बछड़े को मक्खन निकाला हुआ दूध, छाछ और अन्य तरल पदार्थ दे सकते हैं। 

बछड़े की विकास से जुड़ी कुछ अहम बातें 

  1. बछड़े का शारीरिक विकास सही तरह से हो रहा है या नहीं, यह कुछ बातों पर निर्भर करता है जो कुछ इस प्रकार हैं। 
  2. बछड़े के वजन की समय – समय पर जांच करते रहें। अगर बछड़े का वजन कम है तो किसी चिकित्सक से बात करें और उसके आहार में कुछ बदलाव करें। 
  3. बछड़े के जन्म के शुरुआती तीन महीनों में उसके आहार का खास ध्यान रखें। 
  4. गर्भावस्था के दौरान गाय को अच्छी मात्रा में और पोषक तत्वों से भरा आहार दें। 
  5. जन्म के समय बछड़े का वजन कम से कम 20 से 25 किलो होना चाहिए। 
  6. जन्म के कुछ घंटे बाद अगर बछड़ा दूध न पी पाए तो उसे उठाकर दूध पीलाने में मदद करें। 
  7. बछड़े को समय – समय पर टीके लगवाते रहें। 

बछड़े को रखने का स्थान 

बछड़े को एक अलग बाड़े में तब तक बांधना चाहिए, जब तक वह दूध पूरी तरह न छोड़ दें। बछड़े को अलग इसलिए भी बांधना जरूरी है क्योंकि अगर बछड़े एक ही जगह पर रहते हैं तो एक दूसरे को चाटने लगते हैं। जिसकी वजह से कई रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा बछड़े को जिस बाड़े में बांधे वहां साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें। इसके साथ ही बछड़े के बाड़े में वैंटिलेशन का पूरा इंतजाम करके रखें।  नन्हे बछड़े के बाड़े में एक बिस्तर रखें और कोशिश करें कि वह सूखा ही रहे। 

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