जानिए Goat Farming या बकरी पालन में निवेश, संसाधन और आय के बारे में।

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देश में पशुपालन करने वाले बहुत से लोग अक्सर पशुपालन में किस – किस तरह के पशु का पालन करें ये समझ ही नहीं पाते। ऐसे में आज हम आपके लिए लेकर आ गए हैं ये लेख और वीडियो। इसमें हम अपने पशुपालक भाइयों को बताएंगे कि बकरी पालन कैसे किया जाता है, इसमें कितना खर्च आता है और इसके जरिए कितनी आय अर्जित की जा सकती है।

इसके अलावा कितनी जगह पर आप बकरी पालन का काम शुरू कर सकते हैं। अगर आप भी बकरी पालन करना चाहते हैं और इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख और वीडियो पर अंत तक बने रहें। 

बकरी पालन के लिए फार्म का निर्माण कैसे कराएं

पशुपालक भाई अगर बकरी पालन का काम शुरू कर रहे हैं तो सबसे पहले उन्हें एक फार्म की जरूरत होगी। इस फार्म को कैसे बनाना चाहिए या कितनी जमीन होने पर बकरी पालन कर सकते हैं। आइए जानते हैं। 

  • अगर आप फार्म शुरू करना चाहते हैं तो आपके पास कम से कम 120 गज जमीन या इतनी ही बड़ी छत होनी चाहिए
  • बकरी पालन के लिए फार्म जमीन से दो या तीन फुट ऊपर होना चाहिए। इससे बारिश के दिनों में फार्म के अंदर पानी नहीं जाएगा। 
  • बकरी पालन के लिए जब शेड बनाए तो उसका निर्माण A शेप में या झोपड़ी की तरह होनी चाहिए। इसके अलावा एक बकरी पर 12 वर्ग फुट की जगह होनी अनिवार्य है। 
  • फार्म में क्रॉस वेंटिलेशन होना चाहिए। फार्म छायादार होना चाहिए। फार्म की साफ सफाई रखें और तापमान अधिक नहीं हो इसके इंतजाम रखें। 
  • फार्म के अंदर बकरियों के खाने पीने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। आप चाहें तो इसे ऑटोमेटिक बना सकते हैं। 

बकरी पालन में कहां और कितना निवेश करना चाहिए

बकरी पालन में निवेश कहां अधिक करना चाहिए। इस बात की जानकारी लोगों को लगातार होनी चाहिए। आपको बता दें कि अमूमन लोग बकरी पालते समय फार्म को आधुनिक बनाने में लग जाते हैं। ये एक सबसे बड़ी गलती है। आपका फार्म भले ही आधुनिक न हो लेकिन वहां  अच्छी नस्ल की बकरियां होनी चाहिए। क्योंकि आपको फार्म बेचकर नहीं बल्कि बकरियां बेचकर आय कमानी है। 

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बकरी पालन से आय 

आपको बता दें कि एक बकरी के जरिए पशुपालन करने वालों को करीब 45 हजार रुपए तक का मुनाफा हो जाता है। यानी अगर आप 10 बकरियों से भी ये काम शुरू करते हैं तो आपको कम से कम 450000 का मुनाफा हो सकता है। इसके अतिरिक्त आपकी बकरियां ब्याएंगे और उसके बाद बकरो की संख्या बढ़ेगी उससे अधिक आय होने लगेगी। 

बकरी पालन से जुड़ी कुछ सावधानियां 

  • बकरी पालन में समय – समय पर आपको उनका वैक्सीनेशन कराना भी जरूरी है। इसके अलावा जब आप ये फार्म खोले तो बाजार में किस नस्ल के बकरों की मांग है। ये जरूर देख लें। इसके आधार पर ही बकरे खरीदें, तभी आप अधिक मुनाफा कमा पाएंगे। 
  • बकरियों के खानपान में आप हरा चारा, गेहूं, चना, मसूर की दाल का भूसा  और संतुलित आहार दे सकते हैं। इसमें नीम के पत्ते आदि भी दे सकते हैं।
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जानिए लाल मक्के की खेती की लागत, लाभ और अन्य जरूरी जानकारी

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मक्का उन अनाजों में से है जिसका सेवन इंसान ही नहीं बल्कि पशु –  पक्षी भी करते हैं। ये भी एक सबसे बड़ा कारण है, जिसकी वजह से मक्के की खेती भारत में अधिक की जाती है। पर हाल ही के दिनों में एक नए मक्के ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खीचा है। दरअसल हम बात कर रहे हैं लाल मक्के के बारे में। लाल मक्के की खेती हाल ही के दिनों में बड़े स्तर पर की जा रही है।

लेकिन बावजूद इसके लाल मक्के की मांग को पूरा कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अगर किसान भाई अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं या फिर लाल मक्के की खेती करना चाहते हैं तो वे हमारे इस लेख और वीडियो को अंत तक देख सकते हैं। हम इस वीडियो के अंदर हम इन सभी विषयों पर बात करेंगे जो लाल मक्के की खेती से संबंधित है। अगर आप इसकी जानकारी हासिल करना चाहते है तो आप हमारे इस लेख पर अंत तक बने रहें। 

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कैसे तैयार हुआ लाल मक्का और क्यों करें इसकी खेती

लाल मक्के को तैयार करने में करीब 5 साल का समय लगा है और इसे हाइब्रिड तकनीक के जरिए पैदा किया गया है। आपको बता दें कि लाल मक्का न केवल बाजार में अधिक महंगा है, बल्कि इसके अंदर पाए जाने वाले पोषक तत्वों की सूची भी काफी लंबी है। ये सभी कारण काफी है समझने के लिए कि लाल मक्के की खेती किस तरह फायदेमंद हो सकती है। 

कहां और किस मौसम में लगाएं लाल मक्का

लाल मक्के की फसल को देश के पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर  हर जगह लगाया जा सकता है। आपको बता दें कि इस मक्के की पैदावार करने के लिए 25 से 40 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। जून से जुलाई के बीच का समय इसे लगाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त माना जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि इस लाल मक्के की फसल की ऊंचाई करीब 7 से 9 फीट तक हो सकती है। 

लाल मक्के का उत्पादन कब ले सकते हैं

किसान भाइयों को अक्सर फसल का उत्पादन लेने के लिए एक लंबे समय का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन इस फसल का उत्पादन लेने के लिए लंबा इंतजार करने की जरूरत नहीं है। आपको बता दें कि ये फसल महज 100 से 110 दिन के अंदर पूरी तरह तैयार हो जाती है। यानी की 4 महीने से भी कम में आपकी फसल बाजार में बेचने के लिए तैयार हो जाती है। 

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लाल मक्के से जुड़ी जरूरी बातें 

  • अगर आप एक हेक्टेयर भूमि पर इसकी खेती करते हैं तो आप इससे 40 से 50 क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं। 
  • इस लाल मक्के की कीमत सामान्य मक्के से काफी अधिक होती है. वहीं इसमें प्रोटीन की मात्रा भी अधिक होती है इसके साथ ही लाल मक्के में एंटी एजिंग गुण और एंटी कैंसर गुण भी मौजूद होते हैं। इसके इन्हीं गुणों की वजह से लगातार इसकी मांग बढ़ती जा रही है। 
  • अगर आप भी इसकी खेती करना चाहते हैं तो कर सकते हैं लाल मक्के के बीज आपको आसानी से ऑनलाइन मिल जाएंगे। इसमें किसान की लाग उसकी भूमि के ऊपर निर्भर करेगी। 
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जानिए कैसे गाय भैंस के गोबर से बनता है वर्मी कंपोस्ट।

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किसान और पशुपालक भाई अगर अपने आस पास के संसाधनों का उपयोग सही प्रकार करें तो वो आसानी से एक अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। आज हम पशुपालक भाइयों को ऐसी ही एक चीज का बेहतरीन उपयोग बताने वाले हैं। हम सभी जानते हैं कि गाय भैंस का दूध भले ही साल के कुछ माह न मिले। 

लेकिन गोबर हर रोज कई बार मिलता है। ऐसे में पशुपालक भाई इसी गोबर से वर्मी कंपोस्ट कैसे बना सकते हैं। इसी की जानकारी हम अपने इस लेख और वीडियो में देने वाले हैं। अगर आप भी गाय भैंस के गोबर से एक अच्छी आय कम लागत पर कमाना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख और वीडियो पर बने रहें। 

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गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने की विधि

गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर न केवल किसान भाई मोटी आय अर्जित कर सकते है। बल्कि इसी के जरिए भूमि के पोषक तत्वों को भी जीवित किया जा सकता है। आइए जानते हैं इसकी प्रक्रिया के बारे में। 

  1. इसके लिए सबसे पहले आपको एक ऐसा गोबर लेना होगा। जो कम से कम 10 से 15 दिन पुराना हो। 
  2. इस गोबर को आपको दो से तीन दिन तक पानी देना है। ताकि इसकी सारी गर्मी बाहर निकल जाए। 
  3. इसके बाद आपको वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए जमीन के ऊपर एक प्लास्टिक की शीट बिछानी है। 
  4. इस पर 4 फुट चौड़ा, 1.5 फुट ऊंचा और 24 फुट लंबा बैड बनाना है। इस पर आपको गोबर डालना है। 
  5. ध्यान रहे कि बेड के ऊपर शेड हो या फिर हरी रंग की जालीदार चादर हो। ताकि ये धूप से बचें रहे। 
  6. इसके बाद आपको कुछ अच्छी नस्ल के केचुंए लेने हैं और इस  बैड पर डाल देने हैं। 
  7. इसके बाद एक गिली बोरी इस बैड पर अच्छे से ढकनी है और बैड के ऊपर ड्रिप सिस्टम का पाइप लगाना है। ताकि इस बैड पर नमी बनी रहे। इसके लिए आप गर्मियों में रोजाना 15 मिनट पानी चलाए और सर्दियों में एक दिन छोड़कर एक दिन पानी दें। 
  8. इसके 60 दिन बाद आपको आपका वर्मी कम्पोस्ट मिल जाएगा। 

वर्मी कम्पोस्ट की जांच कैसे करें 

अब बात आती है कि आप कैसे देखेंगे कि वर्मी कम्पोस्ट तैयार हुआ या नहीं। इसे देखने के लिए आपको बैड के ऊपर से बोरी हटानी है अगर बैड पर बिछा गोबर पूरी तरह काल हो गया है तो वर्मी कम्पोस्ट तैयार हो गई है। इसे पूरी तरह देखने के लिए आप नीचे तक हाथ मारकर देखें। ऐसा करने से आपको सही अनुमान हो जाएगा। 

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वर्मी कम्पोस्ट से केंचुए अलग करने की विधि

अब केंचुए और वर्मी कम्पोस्ट को अलग करने के लिए आप बेड के साइड में 15 से 20 दिन पुराने गोबर को रख सकते हैं। इससे केंचुए इस बैड से निकलकर गोबर में आ जाएंगे और वर्मी कम्पोस्ट खुद ही अलग हो जाएगा।

वर्मी कम्पोस्ट से होने वाली आय 

अब बात करें कि एक ट्राली गोबर से आपकी कितनी कमाई हो सकती है। अगर आप एक ट्राली गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाते हैं तो इससे आपको 9 हजार रुपए का वर्मी कम्पोस्ट मिल जाता है। वहीं इसके अलावा इसमें केंचुए की संख्या भी बढ़ जाती है और केंचुए बेचकर भी आप 20 हजार रुपए तक कमा सकते हैं। आपको इसमें लागत 2 से 5 हजार रुपए के बीच में आ सकती 

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जानिए क्या है काली जीरी और कैसे ये पशु का दूध बढ़ाने में आती है काम।

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किसान और पशुपालक भाइयों के सामने पशु को स्वस्थ रखने और  उनकी उत्पादकता को बढ़ाने जैसी कई चुनौतियां आती हैं। ऐसे में इन चुनौतियों से पार पाने के लिए किसान भाई अक्सर कई तरह के उपाय अपनाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे खास उपायों को नहीं जानते जो उनकी समस्याओं को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। ऐसे ही एक उपाय या औषधि हम लेकर आ गए हैं आपके सामने। दरअसल हम बात कर रहे हैं काली जीरी के बारे में। 

काली जीरी कहने को एक मसाला है लेकिन इसका इस्तेमाल खाने पीने की सामान में नहीं किया जाता। बल्कि इसका उपयोग पशुओं को कई तरह की समस्याओं से बचाने के लिए और रोगों से ठीक करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा काली जीरी के जरिए पशु की उत्पादकता को भी बढ़ाया जा सकता है। आज हम पशुपालक भाइयों को यही बताने वाले हैं कि काली जीरी का उपयोग कब – कब किया जा सकता है। अगर आप काली जीरी के इस्तेमाल से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख और वीडियो पर अंत तक बने रहे।  

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क्या है काली जीरी

काली जीरी कहने को एक मसाला है। लेकिन इसका उपयोग खाने में बिल्कुल भी नहीं किया जाता। आपको बता दें कि पशुओं को काली जीरी कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। 

काली जीरी किन समस्याओं में आती है काम

अगर पशु को कब्ज, पेशाब न आने, दस्त , स्किन समस्या , या फिर मुहं और नाक से पानी गिरने की समस्या हो जाए तो इस समस्या से पशु को ठीक करने के लिए आप काली जीरी का उपयोग कर सकते हैं। 

इन सभी समस्याओं में पशु को काली जीरी खिलाने पर पशु की स्थिति बेहतर हो जाती है। लेकिन ज्यादातर पशु इसे नहीं खाते क्योंकि ये खाने में बेहद कड़वी होती है। ऐसे में पशु को गुड़ या अन्य किसी आहार या दाने के साथ काली जीरी दी जा सकती है। 

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क्या काली जीरी से दूध बढ़ता है

अब अगर बात करें कि काली जीरी से दूध कैसे बढ़ता है तो बता दें कि इसका सीधा असर दूध की उत्पादकता पर नहीं पड़ता। लेकिन ये दूध बढ़ाने का काम कर सकता है।

दरअसल ये पशु की डीवॉर्मिंग करने के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। अब अगर देखा जाए तो पशु के पेट में कीड़े होने पर दिया जाता है। यही कीड़े पशु को कमजोर कर देते हैं और पशु की दूध उत्पादन क्षमता को कम करने का काम करते हैं। 

लेकिन जब पशु को काली जीरी दी जाती है तो इससे उसके ये पेट के कीड़े मर जाते हैं और पेट पूरी तरह साफ हो जाता है। जिससे पशु स्वस्थ होता है और उसकी दूध उत्पादकता भी बढ़ जाती है 

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जानिए ड्रैगन फ्रूट की खेती की लागत, आय और होने वाला निवेश।

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ड्रैगन का नाम सुनते ही हमारे जहन में एक दैत्य नुमा बड़ा सा जीव बन जाता है। लेकिन हर ड्रैगन ऐसा हो, ये जरूरी तो नहीं। आज  हम ऐसे ही एक फल के बारे में बात करने वाले हैं, जिसे ड्रैगन फ्रूट के नाम से जाना जाता है। ये अमेरिकी फल दुनियाभर में काफी पसंद किया जा रहा है। वहीं भारत में भी इसकी मांग काफी अधिक है। लेकिन इसकी पूर्ति का 80 प्रतिशत भाग बाहरी देशों के द्वारा ही पूरा किया जा रहा है।

ऐसे में अगर किसान भाई ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू कर दें तो आसानी से अपनी आय को बढ़ा सकते हैं। चलिए आज विस्तार से जानते हैं आखिर ड्रैगन फ्रूट क्या है, इसकी खेती में कितनी लागत आती है और कितनी आय अर्जित की जा सकती है। अगर आप ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का मन बना रहे हैं तो ये लेख और वीडियो आपके काफी काम आ सकती है।  

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ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़ी जरूरी बातें 

  • इसकी खेती करने के लिए जमीन पर पोल्स लगाए जाते हैं जो 2.50 से 3 फीट गहरे गड्ढे में लगाए जाते हैं। हर पोल के बीच में 6 फुट का गैप होता है। वहीं एक लाइन से दूसरी लाइन के बीच में 8 फुट का गैप रखा जाता है। 
  • एक पोल के चारों तरफ एक – एक पौधा लगाया जाता है। 
  • पौधों को सपोर्ट देने के लिए किसी धागे से सीधा पोल से चिपका कर रखा जाता है। ताकि पौधे सही से पनप सके और फल अधिक लग सकें। 
  • खेत का निर्माण ऐसा होना चाहिए जिससे पानी एकत्रित न हो और साथ की साथ निकलता रहे। 
  • फसल में  एक पोल पर हर तीन महीने में 1.5 किलो खाद डालनी होती है। वहीं एक सप्ताह में हर पोल पर केवल 700 एमएल से लेकर 1 लीटर तक पानी दिया जाता है। 
  • ये फ्रूट सर्दियों में कम बढ़ता है। इसलिए कोशिश करें कि थोड़ी गर्मी के दौरान ही ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू करें।

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ड्रैगन फ्रूट की खेती में लागत 

अब बात करें ड्रैगन फ्रूट की लागत और आय की तो बता दें कि एक बार में इसकी फसल पर और पोल्स लगाने का खर्च आपकी जमीन के क्षेत्रफल पर निर्भर करेगा। अमूमन 1 से 1.5 लाख रुपए का खर्च एक किसान को करना पड़ सकता है। 

ड्रैगन फ्रूट के खेती से होने वाली कमाई

अब बात करें इससे होने वाली आय की तो आपको बता दें कि इस फसल का व्यापार करने के लिए आपको 2 से 3 साल का समय लग सकता है। लेकिन अगर सब सही रहा तो आप एक पोल से करीब 15 से 20 किलो फल हासिल कर सकते हैं।  ज्ञात हो कि ड्रैगन फ्रूट के एक किलो की कीमत करीब 200 से 250 रुपए किलो है। 

ऐसे में अगर आपने 4 बीघा जमीन पर इसके 800 पोल लगाते हैं और एक पोल पर 15 किलो फल हासिल करते हैं तो आप इससे 3000 रुपए हासिल कर लेंगे। यानी की 800 पोल पर आप 24 लाख रुपए एक बार की फसल पर प्राप्त कर पाएंगे। 

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