संकर पशुओं से कितनी बार दूध निकालना चाहिए?

अधिक दूध देने वाले संकर पशुओं से दिन में तीन बार दूध निकालना चाहिये और दूध निकालने के समय में बराबर का अंतर होना चाहिये। अगर पशु कम दूध देता है तो दो बार (सुबह और शाम को) दूध निकालना उचित है, लेकिन इसके बीच भी बराबर समय होना चाहिये। इस से दूध का उत्पादन बढ़ जाता है और निशचिंत समय पर पशु स्वयं दूध निकलवाने के लिए तैयार हो जाता है।

14 लाइक
… और पढ़ें arrow

पशुओं में दूध की मात्रा को कैसे बढाएं ?

कई लोग अपने गाय और भैंसों से अधिक दूध प्राप्त करने के लिए टीके आदि का सहारा लेतें हैं, यह पहले कारगर तो साबित होता है लेकिन कई बार इसका प्रभाव विपरीत भी पड़ जाता है.
किसान भाइयों आज हम इस लेख के माध्यम से आपको एक ऐसे रामबाण घरेलू उपाय के बारे में बताएंगे जो गाय और भैंस का दूध बढाने में कारगर साबित होता है. उपाय बहुत सरल है और आपको बहुत ही जल्द इसके नतीजे भी मिलने लगेंगे.
सामग्री :- इसको बनाने के लिए निम्न चीजों की आवश्यकता पड़ती है…
250 ग्राम गेहू दलिया,
100 ग्राम गुड सर्बत (आवटी),
50ग्राम मैथी,
1 कच्चा नारियल,
25-25 ग्राम जीरा व अजवाईन आदि.
उपयोग:-
1- सबसे पहले दलिये, मैथी व गुड़ को पका ले, बाद मे उसमे नारियल को पीसकर डाल दे. ठण्डा होने पर खिलाये.
2- ये सामग्री 2 महीने तक केवल सुबह खाली पेट ही खिलाये.
3- इसे गाय को बच्चा देने से एक महीने पहले शूरू करना और बच्चा देने के एक महीने बाद तक देना.
4- 25-25 ग्राम अजवाईन व जीरा गाय के ब्याने के बाद केवल 3 दिन ही देना. बहुत अच्छा परिणाम ले सकते हैं.
5- ब्याने के 21 दिन तक गाय को सामान्य खाना ही दे.
6- गाय का बच्चा जब 3 महीने का हो जाय या जब गाय का दूध कम हो जाये तो उसे 30 gm/दिन जवस औषधि खिलाये दूध कम नही होगा।
रोग – दूधारू गाय व भैंस का दूध बढ़ाने के उपाय ।
औषधि – 200 से ३०० ग्राम सरसों का तेल , 250 ग्राम गेहूँ का आटा लेकर दोनों को आपस में मिलाकर सायं के समय पशु को चारा व पानी खाने के बाद खिलायें इसके बाद पानी नहीं देना है ओर यह दवाई भी पानी के साथ नहीं देनी है। अन्यथा पशु को खाँसी हो सकती है । पशु को हरा चारा व बिनौला आदि जो खुराक देते है वह देते रहना चाहिए । 7-8 दिनों तक खिलाए फिर दवा बन्द कर देनी चाहिए।

दूध में फैट और SNF कैसे बढाएं ?

 

20 लाइक
… और पढ़ें arrow

क्या दूध में पाउडर मिला कर फैट और SNF बढ़ा सकते है ?

कुछ लोग गलत तरीके से दूध में मिलावट करके फैट और SNF बढ़ाते है।

फैट बढ़ाने के लिए कुछ लोग दूध में वनस्पति तेल मिलते है और उससे homogenize करते हैं या lecithin जैसे किसी प्रकार के emulsifier मिला देते हैं।

SNF बढ़ाने के लिए दूध में यूरिया मिला देते हैं, जिस से दूध में नाइट्रोजन भी बढ़ जाता है।

कुछ लोग स्किम मिल्क पाउडर मिला देते हैं जो SNF बढ़ाता है लेकिन फैट नहीं बढ़ाता।

दूध में फैट और SNF मात्रा होती है वो आहार के साथ साथ पशु के जीन और नस्ल पर निर्भर करता है। अगर आपको दूध फैट के आधार में बेचना है तोह पशु खरीदते समय उसका फैट की मात्रा जाँच करवा लें।अगर आपको सही तरीके से फैट और SNF बढ़ाना है तो हमने इसका जवाब कुछ दिन पहले लिखा था। –

दूध में फैट और SNF कैसे बढाएं ?

14 लाइक
… और पढ़ें arrow

दुधारू भैंस की पहचान कैसे करें ?

परिचय

पशुपालन एवं डेयरी व्यवसाय में दुधारू पशुओं के दूध देने की क्षमता का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसलिए गाय/भैंस की खरीदारी करते समय कुछ विशेष जानकारी होना आवश्यक हो जाता है। दुधारू पशु की खरीद में बहुत बड़ी पूंजी खर्च होती है और इनके अच्छे गुणों के ऊपर ही डेयरी व्यवसाय का भविष्य निर्भर करता है। क्योंकि अच्छी नस्ल और गुणवत्ता के दुधारू पशुओं से ही अधिक दुग्ध उत्पादन हासिल कर पाना सम्भव हो पाता है। इसलिए दुधारू पशु का चयन एवं खरीददारी करते समय अच्छी नस्ल, दोष रहित पूर्णत: स्वस्थ्य पशु, लंबे ब्यांत, हर साल बच्चा और अधिक दूध देने वाली गाय/भैंस को ही प्राथमिकता देनी चाहिए, जिससे व्यवसाय में लगाई गई पूंजी से अधिक से अधिक मुनाफ़ा प्राप्त किया जा सके। अत: पशुपालक निम्न बातों को अम्ल में लाकर अच्छी दुधारू गाय/भैंस का चयन कर सकते हैं।

दुधारू पशुओं की पहचान

तिकोने आकार की गाय अधिक दुधारू होती है। ऐसी गाय की पहचान के लिए उसके सामने खड़े हो जाएँ। इससे गाय का अगला हिस्सा पतला और पिछला हिस्सा चौड़ा दिखाई देगा। शरीर की तुलना में गाय के पैर एवं मुंह-माथे के बाल छोटे होने चाहिए। दुधारू पशु की चमड़ी चिकनी, पतली और चमकदार होनी चाहिए। आँखे चमकली, स्पष्ट और दोष रहित होनी चाहिए। अयन पूर्ण विकसित और बड़ा होना चाहिए। थनों और अयन पर पाई जानी वाली दुग्ध शिराएँ जितनी उभरी और टेड़ी-मेडी होंगी पशु उतना ही अधिक दुधारू होगा। दूध दोहन के उपरांतथन को पूरी तरह से सिकुड़ जाना चाहिए। चारों थनों का आकार एवं आपसी दूरी समान होनी चाहिए। गाय/भैंस के पेट पर पाई जाने वाली दुग्ध शिरा जितनी स्पष्ट, मोटी और उभरी हुई होगी पशु उतना ही अधिक दूध देने वाला होगा। दुधारू पशु को खरीदते समय हमेशा दूसरे अथवा तीसरे ब्यांत की गाय/भैंस को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान दुधारू पशु अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप खुलकर दूध देने लगते हैं और यह क्रम लगभग सातवें ब्यांत तक चलता है। इसके पहले अथवा बाद में दुधारू पशु के दूध देने की क्षमता कम रहती है। दूसरे-तीसरे ब्यांत के पशु को खरीदते समय प्रयास यह होना चाहिए कि गाय/भैंस उस दौरान एक माह की ब्याही हुई हो और उसके नीचे मादा बच्चा हो। ऐसा करने से उक्त पशु के दूध देने की क्षमता का पूरा ज्ञान होने के साथ ही मादा पड़िया अथवा बछडी मिलने से भविष्य के लिए एक गाय/भैंस और प्राप्त हो जाती है, जोकि भविष्य की पूंजी है। दुधारू पशु को खरीदते समय लगातार तीन बार दोहन करके देख लें। क्योंकि व्यापारी चतुराई से काम लेते हैं और आपको पशु खरीदते समय मात्र एक बार सुबह अथवा शाम को ही दोहन करके दिखाएँगे। ऐसा करने से आप को प्रतीत होगा कि यह पशु अधिक दूध देने वाला है, लेकिन सच्चाई यह नहीं होती है। व्यापारी एक समय का दोहन नहीं करता अथवा कम दुग्ध दोहन करता है जिससे दूध की मात्रा अयन में रह जाती है। इस कारण लगता है कि गाय/भैंस अधिक दूध देने वाली है। इसलिए दुधारू पशु की खरीददारी करते समय तीन बार लगातार दुग्ध दोहन अपने सामने अवश्य करा लेना चाहिए।

दुधारू पशु का चयन करते समय उसकी सही आयु का पता लगाना आवश्यक होता है। पशु की सही आयु का पता लगाने के ली उसके दांतों को देखा जाता है। मुंह की निचली पंक्ति में स्थाई दांतों के चार जोड़े होते हैं। ये सभी जोड़े एकसाथ नहीं निकलते हैं। दांत का पहला जोड़ा पौने दो साल की उम्र में, दूसरा जोड़ा ढाई साल की उम्र में, तीसरा जोड़ा तीन साल के अंत में और चौथा जोड़ा चौथे साल के अंत की उम्र में निकलता है। इस प्रकार से दांतों को देखकर नई और पुरानी गाय/भैंस की सटीक पहचान की जा सकती है। औसतन एक गाय/भैंस 20-22 वर्षो तक जीवित रहती है।  गाय/भैंस की उत्पादकता उसकी उम्र के साथ-साथ घटती चली जाती है। दुधारू पशु अपने जीवन के यौवन और मध्यकाल में अच्छा दुग्ध उत्पादन करता है। इसलिए दुधारू पशु का चयन करते समय उसकी उम्र की सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।

भैंस के सींग के छल्ले भी आयु का अनुमान लगाने में सहायक होते हैं। प्रथम छल्ला सींग की जड़ पर प्राय: तीन वर्ष की आयु में बनता है। इसके बाद प्रतिवर्ष एक-एक छल्ला और आता रहता है। सींग पर छल्लों की संख्या में दो जोड़कर भैंस की आयु का अनुमान लगाया जा सकता है। परन्तु देखने में आया है कि कुछ लालची लोग अधिक रुपया कमाने के चक्कर में दुधारू पशु खरीददार को धोखा देने के लिए रेती से छल्लों को रगड़ देने हैं। इसलिए यह विधि विश्वसनीय नहीं कही जा सकती है। दूध देने वाले दुधारू गाय/भैंस में सींग पशु की नस्ल की पहचान का मुख्य चिन्ह होते हैं। यद्यपि सींग के होने या नहीं होने का पशु के दुग्ध उत्पादन की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है। भैंस की मुर्रा नस्ल आज भी अपने मुड़े सींगों के कारण ही पहचानी जाती है।

पशु की सेहत से आयु का अनुमान

पशु की सेहत देखकर पशु की आयु का अनुमान लगाया जा सकता है। बूढ़े पशु की अस्थि सन्धियाँ कमजोर हो जाती है और पशु धीमी गति से चलता है। उसकी त्वचा ढीली हो जाती है और मुंह से दांत गिर जाते हैं। बूढ़े पशु की आँख के पीछे तथा कान के बीच के टेम्पोरल क्षेत्रों में गड्ढा बन जाता है। इसके विपरीत युवा अवस्था की भैंसों व गायों का शरीर सुंदर, सुडौल, चुस्त, चमकदार त्वचा तथा चर्बी कम होती है। अच्छी खुराक होने पर भी बूढ़े पशु और स्वस्थ पशु में अंतर कर पाना संभव नहीं हो पाता है। कई बार व्यापारी ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाकर दूध दोहन कराते हैं। इससे बचने के लिए जब भी दुग्ध दोहन कराए तो अपने सामने कम से कम आधा घंटा व्यापारी से बात करने में गुजार दें फिर इसके बाद ही दोहन कराएं।

खुले बाजार, मेलों, हाट पेंठ आदि से पशुओं को खरीदने में कभी-कभी पशु की पहचान करने में धोखा हो जाता है। अत: खरीदते समय उक्त स्थान पर यदि गर्भ इ जांच करने वाला कोई जानकार या पशु चिकित्सक हो तो उससे गर्भ जाँच करा लेना चाहिए। भैंस के सींगों का बारीकी से निरिक्षण करलें कि कहीं दरातींसे घिसे हुए तो नहीं हैं। त्वचा की चमक पर धोखा खाने से पहले देख लेना चाहिए कि भैंस पर चमक पैदा करने के काला तेल तो नहीं चुपड़ दिया गया है। कई बार चालाक किस्म के लोग बकरी, गाय/भैंस के नीचे किसी दूसरी अनुपयोगी गाय/भैंस का नवजात लवारा बाँध देते हैं तथा उसे ताज़ी ब्याही बताकर अधिक कीमत में बेचकर धोखा दे देते है। इससे बचने के लिए बच्चे को उसकी माँ के नीचे लगाकर देखना चाहिए। दूध बढ़ाने के लिए चीनी, गुलकंद, जलेबी की चासनी, ओवर फीडिंग करके भी व्यापारी दूध की मात्रा में वृद्धि करके दिखा देते हैं। अत: इसकी पहचान अनुभवी पशुपालकों के माध्यम से अथवा संभव हो तो तीन-चार दिन नजर रखकर की जा सकती है। भैंस के रंगे खुर तथा काजल लगी आँखों  को सफेद कपड़े से पोछकर पता किया जा सकता है।

दुधारू गाय/भैस की खरीद करते समय अयन और थनों की बारीकी से जांच कर लेनी चाहिए, जिससे थनैला बीमारी के बारे में भली प्रकार से पता चल सके। यदि थन में गाँठ, सूजन आदि के लक्षण हैं तो थनैला हो सकता है। ऐसे पशु को भूलकर भी नही खरीदना चाहिए। फूल देने वाली गाय/भैंस की जांच हेतु उसे ढलान वाले स्थान पर पीछे का हिस्सा करके बिठाकर देखने से पता लगाया जा सकता है। कई बार व्यापारी कमजोर पशु में तथा उसके अयन में हवा भरवा देते हैं, जिससे वह हष्टपुष्ट, गर्भवती अथवा अधिक दूध देने वाली प्रतीत हो सके। ऐसे पशु के पेट, अयन आदि फूले लग रहे अंगों पर दबाव देकर देख लेना चाहिए। हमेशा ऐसे पशुओं को खरीदने का प्रयास करना चाहिए जिनका जन्म, प्रजनन आदि से लेकर उत्पादन आदि का रिकार्ड रखा गया हो। लेकिन ऐसा रिकार्ड केवल सरकारी फार्मों, कामर्शियल डेरी फार्मो एवं प्रजनन संबंधी शोध केन्द्रों पर ही रखा जाता है। अत:अम्ल में लाकर दुधारू पशुओं का चयन करेंगे तो अधिक लाभ कमाने के साथ ही धोखा खाने से बच सकते हैं।

60 लाइक
… और पढ़ें arrow

दूध में फैट और SNF कैसे बढाएं ?

दूध में फैट और SNF मात्रा होती है वो आहार के साथ साथ पशु के जीन और नस्ल पर निर्भर करता है। अगर आप वही आहार दो अलग नस्ल के पशु को देंगे फिर भी उनकी जो फैट की मात्रा है उसमे बहुत ही ज्यादा फरक रहता है। अगर आपको दूध फैट के आधार में बेचना है तोह पशु खरीदते समय उसका फैट की मात्रा जाँच करवा लें।

ऐसे में पशुपालक अपने दुधारू पशु को हरे चारे और सूखे चारे का संतुलित आहार देकर दूध में वसा की मात्रा को बढ़ा सकते हैं।

किसान भाई नीचे दिए फार्मूले से फ़ायदा उठा सकते हैं। यह रोशन पशुओं को देना होता है जो दूध देते हैं।
A) एक सो ग्राम टाटा का नमक
B) दो सो ग्राम सरसों का तेल
C) एक सो ग्राम गुड
D) सो ग्राम कैल्शियम
इन चारों चीजों को मिलाकर दुधारू पशुओं को दें इस से अंदर की कमज़ोरी कम होगी और पशु जितना जियादा हो सके दूध देगा

 

 

84 लाइक
… और पढ़ें arrow

घरेलू तरीके से भैंस का दूध कैसे बढाये ?

कई लोग अपने गाय और भैंसों से अधिक दूध प्राप्त करने के लिए टीके आदि का सहारा लेतें हैं, यह पहले कारगर तो साबित होता है लेकिन कई बार इसका प्रभाव विपरीत भी पड़ जाता है.

किसान भाइयों आज हम इस लेख के माध्यम से आपको एक ऐसे रामबाण घरेलू उपाय के बारे में बताएंगे जो गाय और भैंस का दूध बढाने में कारगर साबित होता है. उपाय बहुत सरल है और आपको बहुत ही जल्द इसके नतीजे भी मिलने लगेंगे

दूध में फैट और SNF कैसे बढाएं ?

 

56 लाइक
… और पढ़ें arrow