जानिए मानसून में पशु को क्या खिलाना चाहिए और क्या नहीं

पशुपालन करने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां बारिश के दिनों में ही उभर कर आती है। इस दौरान न केवल पशुओं को रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। बल्कि पशुओ की देखरेख से लेकर उनके आहार तक में कई बदलाव करने पड़ते हैं। आज हम आपको अपने इस लेख में पशुपालक भाइयों की ऐसी ही समस्या को सुलझाने के लिए आए हैं। 

हमारे इस लेख में आप जानेंगे कि बारिश या मानसून के दिनों में पशुआहार को सुरक्षित कैसे रखें और पशु को खाने में क्या दें। अगर आप एक पशुपालक हैं और इसी तरह की चुनैतियों से जूझते रहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। इसके अलावा लेख के साथ – साथ आपको यही जानकारी वीडियो में भी मुहैया कराई जा रही है। वीडियो का लिंक हम आपको नीचे दे रहे हैं। 

मानसून में पशुआहार के रखरखाव की चुनौती

किसान और पशुपालक भाइयों की आर्थिक स्थिति उतनी बेहतर न होने की वजह से उन्हें पशुआहार के रखरखाव में खासी दिक्कतें आती है, जो कुछ इस प्रकार है। 

  • मानसून में जगह की कमी के चलते पशुआहार को संग्रह नही हो पाता। 
  • पशुशाल में बने खोर के अंदर बारिश का पानी चला जाता है। 
  • दीवारों में आई सीलन की वजह से पशुआहार सील जाता है और खराब हो जाता है। 
  • पशुआहार में बारिश के दौरान कीड़े लगने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। 
  • बारिश के दौरान दाने खराब हो जाते हैं। जिसकी वजह से पशुपालक भाइयों को खासा नुकसान उठना पड़ता है। 

मानसून में पशु आहार कैसा होना चाहिए

ऐसे कई पशुपालक हैं जो बारिश के दिनों में पशुओं को हरा चारा कम मात्रा में देते हैं। लेकिन यह गलती बिल्कुल भी न करें। आप हरे चारे की मात्रा कुछ कम कर सकते हैं। लेकिन इसे अधिक कम न करें। 

  • पशु को 50 से 60 प्रतिशत तक सूखा चारा और 40 से 50 प्रतिशत तक ही हरा चारा खिलाया जा सकता है।
  • पशु को इस दौरान एक  ऐसा आहार जरूर देना चाहिए जो पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकें। इसमें आप पशु को मिनरल मिक्सचर दे सकते हैं। इसके अलावा पशु को डी वार्मिंग की दवा और मीठा सोडा देना चाहिए।  
  • पशु को बारिश के समय ऐसा चारा नहीं देना चाहिए जिसमें अधिक पानी जा चुका हो। अगर पशु गीला चारा खाता है तो उसे गोबर करने में दिक्कत आ सकती है। जिसे आम भाषा में बंद पड़ना कहते हैं। 

मानसून के दौरान पशु को क्या खिलाना जरूरी है

पशु को मानसून के दौरान मिनरल मिक्सचर, सूखा चारा, नमक, सरसो का तेल आदि जरूर देना चाहिए। इन सबके अलावा विटामिन और प्रोटीन से जुड़े पदार्थ पशु को जरूर देने चाहिए। 

पशु अगर खाने पीने में रूचि न दिखा रहा हो तो ऐसे में पशुपालक को बिना वक्त गवाएं पशु की जांच पशु चिकित्सक से करा लेनी चाहिए।

पशु को मानसून के दौरान क्या नहीं खिलाना चाहिए

पशु को मानसून के दौरान दलिया आदि बिल्कुल भी नहीं खिलाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि दलिया में पानी अधिक होता है और इन दिनों यह आहार पशु के पेट में जम सकता है। 

पशु को मानसून के दौरान घर का बचा हुआ आटा खिलाने से परहेज करना चाहिए। यह आटा पशु के पेट में जाकर जम जाता है और इससे पशु के पेट में कीड़े हो जाते हैं। 

हमें उम्मीद है कि आपको हमारा ये लेख पसंद आया होगा। अगर आप इसी तरह की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारी एनिमॉल ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप के जरिए पशु बेचने, खरीदने का काम भी किया जा सकता है। इसके अलावा पशु चिकित्सक से भी संपर्क किया जा सकता है। 

… और पढ़ें arrow

एचएफ गाय पर होने वाला खर्च और कमाई की संपूर्ण जानकारी

देश में गाय का दूध बेचकर आय अर्जित करने का काम बहुत से पशुपालक करते हैं। यही कारण भी है कि पशुपालक गाय खरीदने से पहले कई सवालों के जवाब जानना चाहते हैं, जैसे गाय की कीमत, गाय के रखरखाव में होने वाला खर्च, गाय के दूध देने की क्षमता और गाय से होने वाली आय आदि। इसलिए आज हम अपने पशुपालक भाइयों के लिए एचएफ गाय से जुड़ी जानकारी लेकर आए हैं।

अपने इस लेख के जरिए हम पशुपालक भाईयों को बताएंगे कि एचएफ गाय को रखने का खर्च कितना हो सकता है। इसके अलावा गाय के दूध को बेचकर कितनी आय अर्जित की जा सकती है। अगर आप एक पशुपालक हैं और एचएफ गाय को खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आप हमारे इस लेख पर अंत तक बने रह सकते हैं।

एचएफ गाय की जानकारी 

यह गाय दुनियाभर में अधिक दूध देने वाली गायों की श्रेणी में गिनी जाती है। आपको बता दें कि यह गाय रोजाना 25 से 30 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। इसका शरीर अन्य गाय के मुकाबले काफी भरा हुआ होता है। एचएफ गाय का वजन करीब 580 किलो तक हो सकता है। हालांकि यह गाय अधिक गर्म क्षेत्रों में नहीं रह पाती। यह गाय खरीदना उन पशुपालकों के लिए फायदे का सौदा है जो एक ठंडे इलाके में रहते हैं और अधिक पैसा कमाना चाहते हैं। 

एचएफ गाय के रखरखाव का खर्च 

एचएफ गाय एक विदेशी गाय है वहीं यह दूध भी अधिक मात्रा में देती है। इसलिए इसे रखने का खर्च अन्य गाय से थोड़ा अधिक हो सकता है। लेकिन यह उतना ही मुनाफा भी दे सकती है। आपको बता दें कि एचएफ गाय के एक दिन का कुल खर्च 239 रुपए तक हो सकता है। 

  1. आपको बता दें कि एचएफ गाय को रोजाना 21 किलो हरे चारे का सेवन कराया जाना चाहिए। जिसकी कुल कीमत 40 रुपए है
  2. वहीं एचएफ गाय को रोजाना 2 किलो सूखा चारा भी दिया जाना चाहिए। जिसकी लागत करीब 10 रुपए या उससे कुछ हद तक हो सकती है
  3. एचएफ गाय को रोजाना 9 किलो तक फीड दी जानी चाहिए, जिसकी कुल कीमत 180 रुपए तक हो सकती है
  4. रोजाना एचएफ गाय को 10 रुपए का मिनरल मिक्सचर दिया जाना चाहिए
  5. आपको बता दें कि गाय की रोजाना के रखरखाव का कुल खर्च अधिकतम 230 से लेकर 250 रूपए तक हो सकता है

एचएफ गाय से कमाई  

किसान भाईयों को जैसा की हमने बताया कि एचएफ गाय रोजाना करीब 25 से 30 लीटर तक दूध दे सकती है। ऐसे में अगर पशुपालक भाई इस दूध को बेचते हैं तो वह इसके जरिए रोजाना 65 रुपए किलो के हिसाब से रोजाना 1625 से लेकर 1950 रूपए तक कमा सकते हैं। ध्यान रहे कि ग्रामीण इलाकों में और शहरी इलाकों में दूध अलग – अलग कीमतों पर बेचा जाता है। हमने आपको एक अंदाजा दिया है, जिसके जरिए आप समझ सकें कि आप गाय से कितनी आय अर्जित कर सकते हैं।

किसान और पशुपालक ऐसी ही जरूरी जानकारियां हमारी साइट और ऐप के जरिए हासिल कर सकते हैं। अगर पशुपालक चाहें तो हमारी ऐप का इस्तेमाल गाय खरीदने और बेचने के लिए भी कर सकते हैं। हमारी Animall App को डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।

… और पढ़ें arrow

जानिए गाय और भैंस को मोटा तगड़ा करने के जबरदस्त उपाय

एक स्वस्थ और तंदुरुस्त पशु न केवल लंबे समय तक जीवित रहता है। बल्कि उसकी दूध उत्पादन क्षमता भी अधिक होती है। यही नहीं एक दुबला पतली गाय या भैंस  को बीमारी लगने का खतरा भी अधिक रहता है। यही कारण भी है जिसकी वजह से अक्सर पशुपालक ऐसे आहार या चारे के बारे में जानना चाहते हैं।

जिसके जरिए गाय और भैंस मोटी तगड़ी हो जाएं। क्या आप भी ऐसे ही आहार और उपाय के बारे में जानना चाहते हैं। अगर हां तो बता दें कि आज आपकी यह खोज पूरी होने वाली है। आज हमारे इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आप अपनी गाय भैंस को मोटा तगड़ा कैसे बना सकते हैं। गाय को मोटा तगड़ा करने के इन उपाय को जानने के लिए लेख को अंत तक पढ़ें। 

गाय और भैंस को मोटा तगड़ा बनाने के उपाय 

शारीरिक रूप से मजबूत इंसान हो या गाय दोनों ही अधिक मेहनत कर सकते हैं। यही नहीं शारीरिक रूप से मजबूत पशुओं के जरिए प्राप्त खाद्य सामग्री की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इसलिए पशुपालक भाइयों के लिए जरूरी है कि वह अपनी गाय और भैंस को मोटा तगड़ा बनाएं। अब हम आपको नीचे पशु को मोटा तगड़ा बनाने के कुछ घरेलू उपाय और नुस्खे बता रहे हैं। जिन्हें आप आजमा सकते हैं। 

पशु के लिए बाई फैट 

गाय भैंस को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए और उनकी क्षमता को बेहतर करने के लिए बाई फैट देना फायदेमंद हो सकता है। यह पशु का आहार है जो आपको आपके आस पास की कई दुकानों पर मिल जाएगा। इस बाई फैट को आप अच्छी तरह रोस्ट करके अपनी गाय और भैंस को नियमित रूप से दे सकते हैं।

आप शुरुआत में बाई फैट केवल रोजाना 100 ग्राम ही दें। बाद में इसकी मात्रा को 600 ग्राम तक कर दें। ऐसा कहा जाता है कि बाई फैट देने के कुछ ही समय बाद गाय और भैंस का शारीरिक रूप से मजबूत और मोटी तगड़ी होने लगती है। इसके अलावा पशु को रोजाना इसे देने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर हो जाती है। 

गाय भैंस को दें बिनौले 

अक्सर पशुपालक और किसान कहते नजर आ जाते हैं कि हरियाणा की गाय भैंस बहुत मोटी और तगड़ी होती हैं। इसके साथ ही यहां के पशु की त्वचा भी बेहद चमकदार होती है। आपको बता दें ऐसा इसलिए है, क्योंकि हरियाणा के लोग अपनी गाय और भैंस को बिनौला खिलाते हैं। आप भी भैंस या गाय को मोटा और तगड़ा करने के लिए बिनौला खिला सकते हैं।

लेकिन ध्यान रहे कि किसी भी सूरत में पशु को कच्चा बिनौला न खिलाएं। ऐसा करने से पशु की तबीयत बिगड़ सकती है। वहीं बिनौला भी रोस्ट या अच्छी तरह पका कर ही पशु को खिलाएं। अगर आप रोजाना ऐसा करते हैं तो इससे कुछ ही समय में आपकी गाय और भैंस मोटी तगड़ी हो जाएंगी। 

सोयाबीन से होगी भैंस मोटी तगड़ी 

किसान और पशुपालक भाई अगर अपनी गाय भैंस को बाईपास फैट और बिनौले नहीं दे पा रहे, तो वह उन्हें सोयाबीन खाने को दे सकते हैं। आपको बता दें कि सोयाबीन किसी भी साधारण दुकान से मिल जाएगी। सोयाबीन को रोजाना पशु को अच्छी तरह रोस्ट करके खिलाएं। आप शुरुआत में गाय या भैंस को केवल 100 ग्राम ही सोयाबीन खिलाएं। इसके बाद धीरे – धीरे उन्हें इसकी अधिक मात्रा देना शुरू करें। ऐसा करने से गाय भैंस मोटी तगड़ी हो जाएंगी। 

सरसों का तेल और दाना

गाय और भैंस को तगड़ा करने का सबसे बेहतर और आसान तरीका है कि आप उसे सरसों के तेल के साथ दाना और खल देना शुरू करें। अगर आप रोजाना सुबह शाम पशु को सरसों का तेल और दाना देते हैं तो इससे पशु में शारीरिक बदलाव देखने को मिलेंगे। इसके सेवन से पशु जल्दी ही मोटा तगड़ा हो जाएगा। 

किसान और पशुपालक भाई इस ब्लॉग पर पढ़ी गई जानकारी को ऐप के माध्यम से भी पड़ सकते हैं। हमारे द्वारा तैयार की गई Animall App न केवल आपको पशु स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करेगी। बल्कि आप पशु खरीदने और बेचने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यही नहीं पशु चिकित्सक से राय लेने के लिए भी आप इस ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप Animall App डाउनलोड करने की सोच रहे हैं तो आप इस लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं। 

… और पढ़ें arrow

पशु के लिए संतुलित दाना मिश्रण कैसे बनायें, जानें इसका तरीका

पशु की देखभाल अगर ठीक तरह से की जाए तो न केवल वह अधिक मात्रा में दूध देता है। बल्कि इससे उनके बीमार होने की संभावना भी कम हो जाती है। ऐसे में ज्यादातर पशुपालक आहार और दाने के नाम पर कुछ चीजों के नाम तो जानते हैं। लेकिन पशु को किस मात्रा में क्या देना है यह नहीं जानते। इसलिए आज हम यह लेख लेकर आए हैं।

इस लेख के जरिए पशुपालन के क्षेत्र से जुड़े लोगों को हम बताएंगे कि आखिर संतुलित दाना मिश्रण तैयार कैसे किया जाता है। अगर आप भी अपने पशु को स्वस्थ बनाना चाहते हैं या फिर उनकी उत्पादकता बेहतर करना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए ही है। इस लेख के जरिए आपकी यह दोनों ही चिंताए पूरी तरह दूर हो जाएंगी। चलिए जानते हैं आखिर किस तरह संतुलित दाना मिश्रण बनाया जाता है।

सही दाना मिश्रण तैयार करने की सामग्री

1.

मक्का/जौ/जई 40 किलो मात्रा
बिनौले की खल 16 किलो
मूंगफली की खल 15 किलो
गेहूं की चोकर 25 किलो
मिनरल मिक्सर 02 किलो
साधारण नमक 01 किलो
कुल 100 किलो

2.

जौ 30 किलो
सरसों की खल 25 किलो
बिनौले की खल 22 किलो
गेहूं की चोकर 20 किलो
मिनरल मिक्स 02 किलो
साधारण नमक 01 किलो
कुल 100 किलो

3.

मक्का या जौ 40 किलो मात्रा
मूंगफली की खल 20 किलो
दालों की चूरी 17 किलो
चावल की पालिश 20 किलो
मिनरल मिक्स 02 किलो
साधारण नमक 01 किलो
कुल 100 किलो

4.

गेहूं जौ या बाजरा 20 किलो मात्रा
बिनौले की खल 27 किलो
दाने या चने की चूरी 15 किलो
बिनौला 15 किलो
आटे की चोकर 20 किलो
मिनरल मिक्स 02 किलो
नमक 01 किलो
कुल 100 किलो

ऊपर बताई गई इन सभी सामग्रियों को इसी मात्रा में मिलाकर आप अपने पशु को दे सकते हैं। ध्यान रहे कि पशु को रोजाना 4 से 5 किलो हरा चारा और सूखा भूसा जरूर दें। 

पशु को दाना मिश्रण देने के फायदे 

  • यह पशुओं को खाने में स्वाद लगता है और इसमें ढेरों पोषक तत्व पाए जाते हैं
  • यह पशुपालक की जेब पर अधिक असर नहीं डालता। यह खल बिनौला से काफी सस्ता पड़ता है
  • पशुओं को पूरी तरह स्वस्थ रखने में दाना मिश्रण एक अहम भूमिका निभाता है
  • दाना मिश्रण के जरिए पशु की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो जाती है
  • गाय या भैंस की दूध देने की क्षमता में वृद्धि होती है
  • दाना मिश्रण के जरिए भैंस का बच्चा जल्दी युवा अवस्था में आ जाता है
  • भैंस की ब्यात नही मरती
  • दाना मिश्रण देने से भैंस लंबे समय तक दूध दे पाती है

पशुपालन करने वाले लोग दाना मिश्रण देने से पहले इस बात को जेहन में रखें कि यह किसी रोग या समस्या का उपचार नहीं है। बल्कि यह पशु को बीमारियों से बचाए रखने और उनकी उत्पादकता बढ़ाने का एक देसी तरीका है। अगर आपके पशु को किसी तरह की समस्या है तो पहले पशु चिकित्सक से संपर्क करें। आप हमारी Animall App के जरिए ऐसा कर सकते हैं। हमारी ऐप पर आपको अनुभवी चिकित्सक मिलेंगे, जो आपके पशु की समस्या का सही उपचार करने में, आपकी सहायता कर सकते हैं।

उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे लेख से अपने कुछ सवालों के जवाब मिल गए होंगे। अगर आप इसी तरह की जानकारी हासिल करना चाहते है या पशु खरीदना और बेचना चाहते हैं तो आप हमारी एनिमॉल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने हेतु या तो आप प्ले स्टोर पर जा सकते हैं। या फिर इस विकल्प पर क्लिक कर सकते हैं। 

… और पढ़ें arrow

गाय के दस्त बंद करने की देसी और अंग्रेजी दवा के बारे में जानिए

एक पशु का स्वस्थ रहना पशुपालक की आय के लिए बहुत जरूरी है। पशु की जरा भी हालत बिगड़ती है तो इसका सीधा असर पशुपालक की आय पर भी पड़ने लगता है। ऐसी ही एक समस्या है जो अक्सर भैंस और गाय आदि को परेशान करती रहती है। हम बात कर रहे हैं गाय को लगने वाली बीमारी दस्त के बारे में। सुनने में बेहद समान लगने वाला यह रोग, गाय को शारीरिक रूप से कमजोर बना देता है। इसके अलावा दस्त लगने की वजह से गाय की दूध देने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इसलिए आज हम अपने इस लेख में आपको गाय के दस्त की देसी और अंग्रेजी दवा के बारे में बताएंगे। अगर आपकी गाय को अक्सर दस्त की समस्या रहती है, तो आप भी अपनी गाय को दस्त की दवा दे सकते हैं। 

गाय को दस्त लगने का कारण 

यूं तो दस्त लगना एक आम समस्या है जो पशुओं और इंसानों को हो जाती है। कई बार तो दस्त लगने की वजह का पता भी नहीं चल पाता। हालांकि दस्त लगने के कुछ सामान्य कारण भी हैं, जिन्हें जानकर दस्त की समस्या का उपचार किया जा सकता है। इसलिए चलिए जानते हैं दस्त लगने के क्या कारण हो सकते हैं।  

  1. अगर गाय को अधिक हराई खिलाई जाए तो इसकी वजह से भी दस्त की समस्या हो सकती है। 
  2. गाय को अगर जरूरत से ज्यादा आहार या चारा खिला दिया जाए तो इसकी वजह से भी उसे दस्त लग सकते हैं।
  3. कई बार पशुपालक घर का सड़ा गला भोजन गाय को दे देते हैं। जिसकी वजह से पशु को दस्त लग सकते हैं। 
  4. गाय को अगर गंदा पानी पिलाया जाए या वह किसी दूषित तालाब का पानी पी ले तो इसकी वजह से भी दस्त हो सकते हैं। 
  5. घास में अगर अधिक मात्रा में कीटनाशक या दवाएं डाली गई हों और यह घास पशु खा ले तो उसे दस्त हो सकते हैं। 
  6. अगर गाय चारे के साथ किसी कीड़े आदि को खा ले तो इसकी वजह से भी उसे दस्त लग सकते हैं। 
  7. गाय को अधिक मात्रा में खल या बिनौला खिलाने की वजह से भी दस्त की समस्या हो सकती है। 

गाय के दस्त के लक्षण

गाय या किसी भी पशु को दस्त लगे हैं या नहीं इसका बहुत आसानी से पता लगाया जा सकता है। गाय ने कितनी बार गोबर किया है और वह गोबर कैसा है उसे देखकर गाय के दस्त का पता लगाया जा सकता है। गाय को दस्त लगने की सूरत में आपको जो लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वह कुछ इस प्रकार हैं। 

  • गाय जब गोबर करती है तो किसी पिचकारी की तरह निकलता है। 
  • गाय को दस्त होने की सूरत में आपको उसके मल में झाग दिखाई देने लगेंगे। 
  • गाय के गोबर से बहुत गंदी बदबू आती है। 
  • गाय बार – बार गोबर करने लगती है। 
  • गोबर करते समय गाय के गोबर में खून आने लगता है। 
  • गाय शारीरिक रूप से कमजोर हो जाती है। 
  • गाय को दस्त लंबे समय तक रहे तो उसे बुखार होने लगता है। 
  • लंबे समय तक गाय को दस्त होने पर उसके शरीर की हड्डियां दिखने लग जाती है। 

गाय के दस्त बंद करने की दवा 

किसान और पशुपालक आमतौर पर पशु को लगे दस्त की समस्या पर ध्यान नहीं देते। लेकिन ऐसा करना पशु की जान भी ले सकता है। ऐसे में अगर गाय को दस्त लगे हो उसे दवा देना बेहद जरूरी है। गाय के दस्त की अंग्रेजी और देसी दवा दोनो ही दी जा सकती है। लेकिन यह गाय की स्थिति पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं किस स्थिति में गाय को देसी और अंग्रेजी दवा दी जाती है।  

गाय के दस्त बंद करने की देसी दवा 

गाय को दस्त की देसी दवा तब दी जाती है, जब उसकी स्थिति सामान्य हो। यानी दस्त में खून आदि न आ रहा हो। इस स्थिति में गाय को देसी दवा के तौर पर ठंडी चीजें और आसानी से पचने वाली चीजें दी जानी चाहिए जैसे दही, छाछ, सरसों का खल, सरसों का तेल आदि। इसके अलावा ध्यान रहे कि गाय को जब दस्त लगे हो तो उन्हें किसी भी सूरत में  उन्हें बिनौला और अन्य अनाज नहीं देने चाहिए। 

गाय के दस्त की अंग्रेजी दवा 

गाय को दस्त की अंग्रेजी दवा आप तभी दें जब गाय की स्थिति अधिक गंभीर हो। वह भी डॉक्टर के परामर्श पर ही गाय को अंग्रेजी दवा दे। अगर गाय के दस्त से खून गिर रहा है या गाय अधिक गोबर कर रही है तो इस सूरत में उन्हें आप रिहाइड्रेशन फ्लूइड और अन्य खनिज पदार्थ दे सकते हैं। ध्यान रहे कि गाय को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। इसके अलावा गाय की समय – समय पर जांच कराते रहें। 

हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारी दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होंगे। आप यही और पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हमारी Animall App के जरिए भी डाउनलोड कर सकते हैं। एनिमॉल ऐप के जरिए न केवल आप जानकारियां पढ़ सकते हैं। बल्कि पशु बेच और खरीद भी सकते हैं। इसके अलावा ऐप पर चल रहे अलग ऑफर की जानकारी भी आपको ऐप के जरिए मिल सकती है। इसके साथ ही पशु चिकित्सक से भी ऐप के जरिए संपर्क किया जा सकता है। हमारी एनिमॉल ऐप को डाउनलोड करने के लिए दिए गए हुए विकल्प का चुनाव करें।

… और पढ़ें arrow