मिल्क फीवर को कैसे पहचान सकते है?

इस रोग के लक्षण ब्याने के 1-3 दिन तक प्रकट होते है। पशु को बेचैनी रहती है। मांसपेशियों में कमजोरी आ जाने के कारण पशु चल फिर नही सकता पिछले पैरों में अकड़न और आंशिक लकवा की स्थिती में पशु गिर जाता है।
उस के बाद गर्दन को एक तरफ पीछे की ओर मोड़ कर बैठा रहता है। शरीर का तापमान कम हो जाता है।

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क्या आपको गाय-भैंस से कोरोना-वायरस (Covid 19) हो सकता है?

आज तक की रिसर्च के मुताबिक, आपको गाय-भैंस से कोरोना-वायरस (Covid 19) से होने का चांस नहीं है। पर अगर आप सावधानी रखना चाहते हैं तो –

1 – यदि आपको अपने पालतू पशुओं की देखभाल करनी है, तो एक फेसमास्क पहनें।
2 – भोजन साझा न करें या उन्हें गले न लगाएं।
3 – उनसे संपर्क करने से पहले और बाद में अपने हाथ धो लें।

कोरोना-वायरस को लेकर बहुत गलत और अधूरी जानकारी फ़ैल रही है । अभी भी रिसर्च चल रही है, तो आगे जानकारी बदल सकती है।
खुद को और अपने पशुओं को और लोगों से अलग रखें। ज़्यादा से ज़्यादा घर पर रहें। हम आपके और आपके पशु के स्वस्थ्य की कामना करते हैं ।

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पशु का दस्त, मोक का इलाज कैसे करें ?

आपकी गाय और भैंस को दस्त लग जाने पर उनका गोबर बहुत यादा पतला हो जाता है और उससे ज्यादा बदबू आने लगता है।

निम्न कारण से दस्त लग सकता हैं –

1. दूषित पानी या दूषित हरा चारा से हो सकता है

2. गाय भैंस को जो ज्यादा फीड खिलाने से या ज्यादा गिला करके खिलाने से पशु के पेट में इंफेक्शन हो सकता है और उससे पशु का हाजमा खराब हो जाता है

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पशुओं में अफारा होने के क्या लक्षण है?

आम लक्षण निम्नलिखित है:-
(क) ज्यादा मात्रा में गीला हरा चारा, मूली, गाजर आदि यदि सड़ी हुई है|
(ख) आधा पका ल्पूसरन बरसीम व जौ का चारा|
(ग) दाने में अचानक बदलाव|
(घ) पेट के कीड़ों में संक्रमण|
(ङ) जब पशु अधिक चारा खाने के बाद पानी पीए|

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पशुओं की संक्रामक बीमारियों से रक्षा किस प्रकार की जा सकती है?

(क) पशुओं को समय-समय पर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बचाव के टीके लगवा लेने चहिये।
(ख) रोगी पशु को स्वस्थ पशु से तुरन्त अलग कर दें व उस पर निगरानी रखें।
(ग) रोगी पशु का गोबर , मूत्र व जेर को किसी गढ़ढ़े में दबा कर उस पर चूना डाल दें।
(घ) मरे पशु को जला दें या कहीं दूर 6-8 फुट गढ़ढ़े में दबा कर उस पर चूना डाल दें।
(ड़) पशुशाला के मुख्य द्वार पर ‘फुट बाथ’ बनवाएं ताकि खुरों द्वारा लाए गए कीटाणु उसमें नष्ट हो जाएँ।
(च) पशुशाला की सफाई नियमित तौर पर लाल दवाई या फिनाईल से करें।

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