राजस्थान की सबसे बड़ी पशु मेला की जानकारी

featured-image

भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है, और राजस्थान अपने किलों, अपने महलों, सुंदर वन्य जीवन और बेहद ही सुंदर सुनहरे रेतीले रेगिस्तान के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं सब से बनता है खूबसूरत राजस्थान। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजस्थान सिर्फ अपने किलों, महान कहानियों के लिए ही मशहूर नहीं है। बल्कि ये राज्य अपने मेलों और त्योहारों के लिए भी काफी ज्यादा मशहूर है।

राजस्थान के मेले और त्योहार असंख्य हैं और न सिर्फ राजस्थान के लोगों के लिए खास होते हैं, बल्कि इन मेले और त्योहारों में आने वाले यात्रियों पर भी एक खास महत्व और प्रभाव छोड़ देते हैं। राजस्थान में करीब 250 से भी ज्यादा पशुमेले हर साल होते हैं। ये मेले कला, संस्कृति, पशुपालन, पर्यटन के लिहाज से काफी खास होते हैं। सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग इन पशु मेलों का आनंद लेने आते हैं। तो चलिये इस लेख में जानते हैं राजस्थान के मशहूर पशु मेलों के बारे में – 

इन पशु मेलों में सरकारों की तरफ से भी पूरी भागीदारी निभाई जाती है। जैसे इन पशु मेलों के आयोजनों में नगरपालिका और ग्राम पंचायतों की तरफ से पशुपालकों को पानी, बिजली पशु चिकित्सा और टीकाकरण की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है। सरकार की ओर से इन मेलों में समय-समय पर प्रदर्शनी और बाकी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राजस्थान में काफी पशु मेले लोक देवी देवताओं और महा पुरुषों के नाम से जुड़े हुए हैं। 

ये भी पढ़ें: स्वच्छ दूध का उत्पादन कैसे करें ?

राजस्थान में होने वाले प्रमुख पशु मेले

श्री रामदेव पशु मेला-नागौर

नागौर पशुमेला हर साल जनवरी और फरवरी महीनों में नागौर के अनूठे राजपूत शहर में आयोजित किया जाता है। नागौर जोधपुर और बीकानेर के बीच पड़ने वाला एक छोटा सा शहर है। नागौर पशुमेला राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध आकर्षणों में से एक है और दुनियाभर से हजारों पर्यटक यहां पर आते है। यहां पर 75 हजार से ज्यादा पशु लाए जाते हैं, जिन्हें खरीदने और बेचने का काम होता है।

श्री मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा-बाड़मेर

ये पशु मेला वीर योद्धा रावल मल्लिनाथ की याद में मनाया जाता है। इस मेले की शुरुआत मलीनाथ के गद्दी पर बैठने से हुई थी। दरअसल मलीनाथ के गद्दी पर बैठने के मौके पर एक विशाल समारोह आयोजित हुआ था। इस मौके पर दूर-दूर से लोग शामिल हुए थे। आयोजन खत्म होने पर लोगों मे आपस में ऊंट, घोड़े, गाय, भैंस बैल आदि का आदान प्रदान किया था। इस मेले का संचालन पशुपालन विभाग ने साल 1958 में संभाला था। ये मेला हर साल चैत्र बुदी ग्यारस से चैत्र सुदी ग्यारस तक बाड़मेर जिले के तिलवाड़ा गांव में लूनी नदी पर लगाय जाता है।

ये भी पढ़ें: जानिए कैसे करें दुधारू भैंस की पहचान

श्री बलदेव पशु मेला, मेड़ता सिटी-नागौर

ये पशु मेला मेड़ता सिटी में आयोजित किया जाता है। इस मेले में ज्यादा नागौरी नस्ल की बिक्री होती है। ये पशु मेला प्रसिद्ध किसान नेता श्री बलदेव राम मिर्धा की याद में अप्रैल 1947 से राज्य के पशुपालन विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है।

श्री वीर तेजाजी पशु मेला परबतसर नागौर

राजस्थान में ये पशु मेला लोक देवता वीर तेजाजी की याद में मनाया जाता है। पशुपालन विभाग ने इस मेले की बागडोर साल 1947 में अपने हाथ में ली थी। ये पशु मेला आमदनी के लिए प्रदेश का सबसे बड़ा मेला है। जोधपुर के महाराजा अजीत सिंह ने यहां तेजाजी का देवल बनाकर और उनकी मूर्ति स्थापित कर इस पशु मेले की शुरुआत की थी। ये मेला भी नागौरी नस्ल के लिए मशहूर है।

महाशिवरात्रि पशु मेला करौली

करौली जिले में आयोजित होने वाला ये पशु मेला काफी मशहूर है। इस पशु मेले का आयोजन हर साल फाल्गुन कृष्णा में किया जाता है। महाशिवरात्रि के पर्व पर आयोजित होने से इस पशु मेले का नाम शिवरात्रि पशु मेला पड़ गया है। इस मेले के आयोजन की शुरुआत रियासत काल में हुआ था। इस मेले में हरियाणवी नस्ल के पशुओं की बिक्री काफी ज्यादा होती है। राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के व्यापारी भी इस मेले में हिस्सा लेने आते हैं।

ये भी पढ़ें: घरेलू तरीके से भैंस का दूध कैसे बढाये ?

गोमती सागर पशु मेला-झालावाड़

झालावाड़ जिले के झालरापाटन कस्बे में ये पशु मेला हर साल आयोजित होता है। पशुपालन विभाग मई 1959 से इस पशु मेले को आयोजित कर रहा है।

श्री गोगामेड़ी पशु मेला-हनुमानगढ़

श्री गोगामेड़ी राजस्थान के पांच पीरों में से एक वीर और लोक देवता गोगा का समाधि स्थल है। ये आज हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में आता है यहां हर साल श्रावण के महीने में आयोजित होता है। इस मेले के संचालन का काम पशुपालन विभाग के द्वारा अगस्त 1959 से हो रहा है।

ये भी पढ़ें: क्या अजोला से पशुओं में दूध बढ़ा सकते है ?

श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला-भरतपुर

भरतपुर रियासत के महाराजा जसवंत सिंह की याद में इस मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में हरियाणा नस्ल के पशुओं का लेन-देन होता है। अक्टूबर 1958 से पशुपालन विभाग द्वारा इस पशु मेले को आयोजित किया जाता है। सरकार की आय के नजरिये से ये सबसे बड़ा पशु मेला है।

श्री चंद्रभागा पशु मेला-झालावाड़

झालावाड़ जिले के झालरापाटन कस्बे में ये पशु मेला हर साल कार्तिक सुदी महीने में आयोजित होता है। इस पशु मेले में मालवी नस्ल के पशुओं की भारी तादाद में खरीद होती है। पशुपालन विभाग द्वारा इस मेले का संचालन नवंबर 1958 से हो रहा है।

ये भी पढ़ें: जानिए कैसे बढ़ाएं मानसून में पशु की दूध देने की मात्रा

पुष्कर पशु मेला-अजमेर

अजमेर से 11 किलोमीटर दूर हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पुष्कर है। यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक भी आते हैं। हजारों लोग इस मेले में आते हैं।

राज्य प्रशासन भी इस मेले को विशेष महत्त्व देता है। स्थानीय प्रशासन इस मेले की व्यवस्था करता है और कला संस्कृति और पर्यटन विभाग इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयाजन करते हैं।

इस समय यहां पर पशु मेला भी आयोजित किया जाता है, जिसमें पशुओं से संबंधित अलग अलग कार्यक्रम भी किए जाते हैं, जिसमें श्रेष्ठ नस्ल के पशुओं को पुरस्कृत किया जाता है। इस पशु मेले का मुख्य आकर्षण होता है।

बहरोड़ पशु मेला

ये मेला राजस्थान के बहरोड़ (अलवर) में आयोजित किया जाता है। और इस मेले में सबसे ज्यादा खरीद मुर्रा भैंस की होती है।

सेवडिया पशु मेला

सेवडिया पशु मेला रानीवाड़ा, जालौर में आयोजित किया जाता है। ये क्षेत्र राज्य के सबसे बड़ी दुग्ध डेयरी के रूप में मशहूर है। ये मेला बडगांव रियासत के जागीरदार ठाकुर मालमसिंह की कोशिशों के बाद साल 1955 में शुरु हुआ था।  

ये भी पढ़ें: जानें क्या है भैंस और गाय का दूध बढ़ाने का मंत्र?