जानिए गाय को गर्भावस्था में ड्राई करना क्यों है जरूरी?

देश में पशुपालन करने वाले लोग अक्सर अपने पशुओं को लेकर कुछ लापरवाही बरतने लगते हैं। जिसकी वजह से न केवल पशुपालकों को नुकसान होता है। बल्कि पशुओं की सेहत और उत्पादकता भी इसकी वजह से खराब होने लगती है। आज हम अपने पशुपालक भाइयों को गाय से जुड़ी एक ऐसी ही जानकारी देने वाले हैं। जिसके जरिए वो अपने पशु को स्वस्थ भी रख पाएंगे और उनकी उत्पादकता को भी बढ़ा पाएंगे। दरअसल हम बात कर रहे हैं गाय को ड्राई करने की। 

आपको बता दें कि जब गाय गर्भावस्था में दूध देती है तो इसमें 7 से 8 महीने के बाद गाय का दूध सुखा देना बेहद जरूरी होता है। जब ऐसा नहीं किया जाता, तो पशु की सेहत भी खराब होती है और उसकी उत्पादकता भी खराब होने लगती है। अगर आपकी गाय भी प्रसव के करीब पहुंच गई है, तो ये लेख और वीडियो आपके लिए बेहद कारगर हो सकता है। अगर आप भी गाय को ड्राई करने के महत्व को जानना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख और वीडियो पर अंत तक बने रहें। 

गाय को ड्राई करना क्यों जरूरी 

ऐसे बहुत से पशुपालक भाई हैं। जो अक्सर गाय की गर्भावस्था में तब तक उसका दूध निकालते रहते हैं, जब तक गाय दोबारा से बछड़े को जन्म न दे दे। इस तरह गाय की न केवल उत्पादकता खराब हो सकती है। बल्कि गाय की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है। इससे गाय बार – बार बीमार पड़ने लगती है और कई बार तो गाय का गर्भपात तक हो जाता है। ये कुछ जरूरी वजह है, जिसके चलते पशुपालकों को गाय को ड्राई होने का समय देना चाहिए। ताकि उनकी उत्पादकता बेहतर हो। 

गाय का दूध निकालना कब बंद करें 

जब गाय गर्भावस्था के अपने आखिरी समय में हो तो इस दौरान उसका दूध निकालना बंद कर देना चाहिए और उसके थनों को ड्राई होने का समय देना चाहिए । इससे गाय के वो सेल पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, जो शरीर में दूध बनाते हैं। ऐसे में जब आप गाय के 7वें 8वें महीने तक भी दूध निकालना बंद नहीं करते तो इससे इन सेल्स को रिपेयर होने का समय नहीं मिलता जिससे गाय दूध कम देती है। 

वहीं जब आप गाय का दूध निकालना इस समय पर बंद कर देते हैं तो इससे उसके दूध बनाने वाले सेल रिपेयर हो जाते हैं। गाय की इम्यूनिटी बेहतर होती है। गाय के लंगड़े होने का खतरा नहीं रहता। 

गाय को ड्राई करने के लिए क्या करना चाहिए

अब जब आपको गाय को ड्राई करना हो तो इसके लिए आप उन्हें 12 से 18 घंटे तक पानी न दें। इसके अलावा CEPRAVIN, IVERMEC नामक दवा डॉक्टर की सलाह पर दें। इससे गाय के पेट में कीड़े नहीं होंगे और बछड़ा भी पूरी तरह से स्वस्थ पैदा होगा। अगर ये दवाएं समय रहते न दी जाए तो बछड़ा गाय के गर्भ में ही कीड़ों की वजह से  मर भी सकता है।

इसके अलावा गाय को रोजाना प्रसव के कुछ समय पहले तक डॉक्टर की सलाह पर ही नौसादर खिलाएं और मैक्सवेल खिलाएं। ऐसा करने से पशु के शरीर को कैल्शियम मिलता रहेगा और बछड़े की कूल्हे की हड्डियां मजबूत होंगी। जिसके बाद प्रसव के समय बछड़ा आसानी से गर्भ से निकल सकेगा वहीं गाय की हड्डियां फ्लेक्सीबल भी हो जाएंगी। 

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जानिए काले टमाटर की खेती का तरीका और फायदे। Black Tomato Farming।

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है, ये तो हम सभी जानते हैं। लेकिन इसके बावजूद किसान आज दो वक्त की रोटी के मोहताज हो कर रह गए हैं। पर इस स्थिति को सुधारा जा सकता है। अगर किसान उन फसलों की खेती करें जिनकी मांग अधिक हो। आज हम लेकर आए हैं ऐसी ही एक चीज जो किसानों की आय को बढ़ा सकती है। दरअसल हम बात कर रहे हैं काले टमाटर के बारे में। काले टमाटर के बारे में भारत के बहुत ही कम लोग जानते हैं।

एक ये भी कारण है कि इसकी खेती उतने बड़े स्तर पर नहीं की जाती। आज हम आपको अपने इस लेख और वीडियो में बताएंगे कि काले टमाटर की खेती के लिए आपको क्या चाहिए और ये लाल या बैंगनी टमाटर से ये किस तरह अलग है। अगर आप भी काले टमाटर से जुड़े गुण और इसकी खेती से जुड़ी जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप इस लेख और वीडियो पर अंत तक बने रह सकते हैं। 

कैसे बने हैं काले टमाटर 

किसान भाइयों के अलावा आम लोग भी ये नहीं जानते कि काले टमाटर किस तरह बने हैं। आपको बता दें कि काले टमाटर का निर्माण लाल और बैंगनी टमाटर के जरिए ही हुआ है। ज्ञात हो कि ऐसा करने के लिए हाइब्रिड तकनीक का सहारा लिया जाता है। इस तरह के फसल के बीजों को हाइब्रिड बीज भी कहा जाता है। 

काले टमाटर की खेती का तरीका 

एक साधारण किसान भी काले टमाटर के बीज के जरिए इसकी खेती शुरू कर सकता है। इसके लिए किसी तरह के प्रशिक्षण या ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं है। ना  ही काले टमाटर की खेती के लिए किसी खास तरह के मौसम या जलवायु की जरूरत है। जिस तरह लाल या बैंगनी टमाटर की खेती की जाती है उसी तरह काले टमाटर की खेती भी की जा सकती है। आपको बता दें कि लाल टमाटर को पकने में जहां 3 महीने का समय लगता है। वहीं काले टमाटर को पकने में करीब 4 महीने लग जाते हैं। इसके अलावा शुरुआती समय में ये टमाटर पीले और हरे ही होते हैं और आगे चलकर काले हो जाते हैं। 

काले टमाटर से किसानों का फायदा 

इन दिनों काले टमाटर के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते। ऐसे में बहुत ही कम किसान हैं जो इसकी खेती करते हैं। वहीं दूसरी तरफ इसके अलग होने की वजह से लोगों में काले टमाटर की मांग काफी अधिक है। ऐसे में अगर किसान इसकी खेती करते हैं तो इससे वो काले टमाटर की मांग की पूर्ति कर पाएंगे और आसानी से अपनी फसल को बेच पाएंगे। 

काले टमाटर की कीमत 

काले टमाटर को लाल टमाटर के मुकाबले अधिक गुणकारी माना जाता है। इसके अंदर पाए जाने वाले गुण शरीर में कैंसर जैसे वायरस को पनपने नहीं देते। इसके अलावा काले टमाटर में ऐसे कई पोषक तत्व होते हैं जो इंसान को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। अब अगर काले टमाटर की कीमत की बात करें तो इसकी कीमत करीब 120 रुपए किलो तक है। यानी इसके जरिए किसान और व्यापारी दोनों ही अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। 

काले टमाटर का स्वाद 

लाल या बैंगनी टमाटर से काले टमाटर का स्वाद बिल्कुल अलग होता है। एक तरफ जहां लाल टमाटर खट्टे और मीठे होते हैं। वहीं काले टमाटर का स्वाद काफी तीखा होता है। जिसके चलते इनका सेवन अधिक मात्रा में सलाद के तौर पर किया जाता है।

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जानिए क्या है Multi Layer Farming Techniques ? जिससे 4 गुना होगी कमाई।

देश में किसानों की हालत को सुधारने के लिए सबसे जरूरी है कि हम आधुनिकता और नए तरीकों का सहारा ले। इसके जरिए न केवल किसानों को लाभ होगा। बल्कि फसल की उत्पादकता भी बेहतर होगी। आज हम खेती के अंदर इस्तेमाल होने वाला ऐसा ही तरीका आपको बताने वाले हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं मल्टी लेयर फार्मिंग के बारे में।

खेती के इस तरीके से भूमि के छोटे से हिस्से पर भी आसानी से 4 फसल लगाई जा सकती है। आज इसी मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी साझा करेंगे। अगर आप भी मल्टीलेयर फार्मिंग से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारे लेख और वीडियो पर अंत तक बने रहें। 

क्या है मल्टी लेयर फार्मिंग 

मल्टी लेयर फार्मिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें भूमि के नीचे से लेकर ऊपर तक चार स्तर पर फसल लगाई जाती है। इससे किसानों को रोजाना की आय तो मिलती ही है। इसके अलावा कई फसलें एकमुश्त भी होती हैं। ये फसलें एक बार में किसान को मोटा मुनाफा भी दे देती हैं। 

मल्टी लेयर फार्मिंग में क्या – क्या लगाएं 

  • मल्टी लेयर फार्मिंग के लिए सबसे पहले आपको बांस के डंडों और घास से एक तरह का शेड बनाना होता है। इस शेड के जरिए फसल को धूप और छांव बराबर मिलती रहती है। इसके अलावा पानी की खपत भी इसमें काफी कम होती है। क्योंकि पानी एवोपरेट नहीं होता। 
  • इसके बाद आपको भूमि के अंदर अदरक या ऐसी फसल लगानी होती है जो भूमि के अंदर ही रहे और बाहर उसका कोई प्रभाव न हो। 
  • भूमि के ठीक ऊपर आप पालक, साग और अन्य पत्तेदार सब्जियों को लगा सकते हैं। ऐसा करने से जमीन पर घास नहीं आती और इसे हटाने का खर्चा भी कम हो जाता है। इसके साथ ही इस फसल को रोजाना की आय अर्जित करने के लिए थोड़ी – थोड़ी मात्रा में जड़ से उखाड़ा जाता है। ऐसा उसी फसल के साथ किया जाता है जिसकी लंबाई अधिक हो रही हो। ऐसा करने पर जमीन की निराई और गुड़ाई भी हो जाती है और मिट्टी को नमी भी मिल जाती है। 
  • इसके ठीक ऊपर खीरे या छोटे पत्ते की फसल लगाई जाती है।
  • वहीं सबसे ऊपर रहती है पपीते की फसल। 

कब – कब होगी मल्टी लेयर फार्मिंग से आय

  • इसमें पालक और पत्तेदार सब्जियों से रोजाना आय होती रहती है। ये आय अप्रैल से जुलाई के बीच तक चलती है। 
  • वहीं अप्रैल के बाद नवंबर तक खीरे की फसल होती रहती है। 
  • अगस्त में खीरा और दिसंबर से जनवरी में पपीते की फसल होती रहती है

इस तरह लगभग पूरे साल ही किसान की कमाई होती रहती है और वो आर्थिक रूप से कमजोर नहीं होता। 

मल्टी लेयर फार्मिंग में लागत और कमाई 

किसान भाई अगर महज एक एकड़ जमीन पर भी मल्टी लेयर फार्मिंग करते हैं तो इसके लिए उन्हें 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे। वहीं इस लागत के जरिए होने वाली सालाना कमाई करीब 6 लाख से लेकर 6 लाख 50 हजार रुपए तक पहुंच सकती है। 

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गाय भैंस को लंपी से बचाने में काम आएगा Flytrap। मक्खियों से छुटकारा।

देश के लगभग हर राज्य में लंपी वायरस ने कोहराम मचा रखा है। अब तक ये जानलेवा वायरस 67 हजार से ज्यादा पशुओं की जान ले चुका है। इस वायरस से बचाने के लिए सरकार और किसान हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बावजूद इसके लंपी के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे। ऐसे में हम एक उपाय लेकर आए हैं, जिससे आप अपनी गाय या भैंस को लंपी रोग से बचा सकते हैं। 

बताया जा रहा है कि लंपी के संक्रमण की मुख्य वजह मक्खियां हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बाजार में एक नया उत्पाद आया है। इसी उत्पाद के जरिए आप अपने पशु को लंपी वायरस से पूरी तरह बचा सकते हैं। अगर आप इस उत्पाद से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं, तो आप इस लेख और वीडियो पर अंत तक बने रहें। 

लंपी कैसे फैलता है 

लंपी वायरस ही नहीं बल्कि बहुत से रोगों के पीछे की वजह भी मक्खियां ही होती हैं। मक्खियां एक संक्रमित पशु के बाद एक स्वस्थ पशु को लंपी और अन्य बीमारियों से संक्रमित कर देती हैं। ऐसे में अगर मक्खियों से पशु को दूर रखा जाए तो इससे उन्हें लंपी वायरस से बचाया जा सकता है। इन्हीं मक्खियों से पशु को दूर करने का काम फ्लाई ट्रैप कर सकता है। 

क्या है फ्लाई ट्रैप 

मक्खियों को किसी जगह से दूर करना हो तो इसके लिए ही फ्लाई ट्रैप का इस्तेमाल किया जाता है। ये एक ऐसी तरकीब है, जिसमें मक्खियां फंसकर मर जाती हैं। आपके पास जितने पशु हों उससे दोगुनी मात्रा में फ्लाई ट्रैप लगाए जाएं तो इससे मक्खियां पशु के आस पास नहीं आएगी और पशु लंपी वायरस से बचा रहेगा। 

कैसे काम करता है फ्लाई ट्रैप 

फ्लाई ट्रैप एक प्लास्टिक के पैकेट के अंदर आता है। इसके अंदर पाउडर के रूप में एक दवा होती है। इसे उपयोग में लेने के लिए जब इस पैकेट में पानी डाला जाता है। पानी डालने के बाद ये पाउडर इसमें घुल जाता है और 24 से 48 घंटे बाद ये अपना काम शुरू कर देता है। इसके बाद मक्खियां खुद ही उड़कर इसमें आकर गिरने लगती हैं। इससे पशु संक्रमित नहीं होता। 

फ्लाई ट्रैप से जुड़ी जानकारी 

इसे आप आसानी से 250 से लेकर 300 रुपए तक में खरीद सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि ये तकनीक केवल खुली जगह पर ही काम करती है। अगर आप इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आप इसे ऐसी जगह पर टांगे जहां धूप पड़ती है। पशु के हिसाब से आपको इस पैकेट की मात्रा रखनी होगी। तभी ये सही तरह से काम करेगा। 

फ्लाई ट्रैप की लाइफ 

मक्खियों से छुटकारा दिलाने वाली ये तकनीक एक बार लगाने के बाद 30 दिन तक आसानी से चल जाती है। एक बार इस्तेमाल होने के बाद आप इसे रिफिल भी करा सकते हैं। 

आपको बता दें कि लंपी से पशु को बचाने के लिए इसके साथ – साथ पशु का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। इसके अलावा पशु को लंपी का टीका जरूर लगवाएं। ताकि पशु इस खतरनाक रोग से बच जाए। 

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ऐसा Chaff Cutter जो आटे से लेकर मसाले तक पीसने में आएगा काम

देश में पशुपालन करने वाले ज्यादातर लोग अक्सर पशु के हरे चारे की कटाई और अनाज की पिसाई को लेकर चिंतित रहते हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इसमें पशुपालकों का समय, मेहनत और पैसा काफी खर्च हो जाता है। वहीं छोटे किसान तो ऐसी कोई मशीन खरीद भी नहीं पाते। जिससे चारा आसानी से और जल्दी काटा जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि चारा काटने की मशीन बहुत ज्यादा महंगी होती है। लेकिन अब इस समस्या का समाधान गुजरात की एक कंपनी ने निकाल लिया है। 

दरअसल इस कंपनी ने एक ऐसी चाफ कटर मशीन बनाई है जिसके जरिए चारा काटने का और अनाज या मसाले पीसने का काम आसानी से किया जा सकता है। आज हम आपको इसी मशीन से जुड़ी जानकारी देने वाले हैं। अगर आप इस मशीन से  जुड़ी किसी तरह की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख पर अंत तक बने रहें। 

क्यों जरूरी है चाफ कटर


किसान और पशुपालक अक्सर पशुओं का चारा कटवाने के लिए बड़े किसानों की मशीन का सहारा लेना पड़ता है। कई बार तो पशुपालक हरा चारा पशु को काटकर दे भी नहीं पाते। जिसके चलते पशु को चारा खाने में दिक्कत होती है और चारे के साथ खराब चीजे भी पशु खा लेते हैं।

ऐसे में इससे वे बीमार पड़ जाते हैं और उनकी उत्पादकता भी घट जाती है। वहीं अगर पशु को बारीक कटा हुआ चारा मिलता है तो वो आसानी से इसे पचा लेते हैं। इससे पशु की उत्पादकता तो बढ़ती ही है। इसके साथ ही पशुपालक की आय भी बढ़ने लगती है। 

क्या है भवानी चाफ कटर के फायदे 

ये महज एक चाफ कटर नहीं है। बल्कि एक ऐसी मशीन है जिसके जरिए किसान अपने कई काम कर पाएंगे। ग्रामीण इलाकों में गेहूं से लेकर मसाले पीसने तक के काम बहुत अधिक होते हैं। इसी काम को किसान न केवल अपने घर पर कर पाएगा। बल्कि इसके जरिए वो आस पड़ोस के लोगों का भी सामान पीस सकता है और इसके जरिए कमाई कर सकते हैं। 

चाफ कटर की कीमत 

गुजरात की कंपनी ने इस चाफ कटर के कई वैरिएंट बाजार में उतारे हैं। इनकी क्षमता और उत्पादकता के आधार पर इन चाफ कटर की कीमत रखी गई है। अगर आप अधिक पैसा खर्च नहीं करना चाहते तो आप 7 से 9 हजार के बीच में आने वाला चाफ कटर खरीद सकते हैं। 

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