नीली रावी से जुड़ी पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें

feature-image

दो नदियों के नाम वाली नीली रावी नस्ल आज किसानों के घर दूध की नदियाँ बहाती हैं।

नीली रावी भैंस की उत्पत्ति पंजाब और उसके आसपास के इलाकों में हुई है। दो नदियों के नाम पर इसका नाम नीली रावी रखा गया। नीली रावी बहुत ही बेहतरीन नस्ल की भैंस है जो पंजाब के फिरोजपुर, अमृतसर और तरणतारण इलाकों में पाई जाती है। भारत के अलावा ये नस्ल पाकिस्तान में भी पाई जाती है।

नीली रावी भैंसों की पहचान कैसे करें?

आमतौर पर नीली रावी भैंसों के माथे पर उजले रंग की आकृति बनी होती है। ये भैंसें दिखने में काफी मजबूत होती है। माथे के अलावा इनके पूंछ, और पैरों पर उजले रंग की निशान होते हैं। नीली रावी भैंसों के सींग छोटे और मुड़े हुए होते हैं। नीली रावी भैंसों का सिर छोटा होता है। इनकी आंखें भी चमकीली होती हैं और दोनों आंखों के बीच में छोटा सा गड्ढा भी होता है।

स्वस्थ नीली रावी भैंस की आंखें चमकीली होती हैं। इसमें किसी भी तरह के तरल पदार्थ जैसे पानी या खून के धब्बे नजर नहीं आते। स्वस्थ नीली रावी भैंसें बहुत ज्यादा खांसती नहीं हैं और न ही घर्राने की आवाजें आती है। स्वस्थ्य नीली रावी भैंसों की चमड़ी भी चमकदार होती है, इसमें जूं-चीचड़ बिलकुल भी नहीं दिखता है। स्वस्थ नीली रावी भैंस में सांस लेने की प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य होती है। इसके अलावा इन भैंसों में अगर चलने -फिरने, उठने -बैठने में कोई परेशानी नहीं है, तो इसका मतलब पशु बिलकुल स्वस्थ है।

नीली रावी भैंस कितना दूध देती हैं?

नीली रावी भैंस मुर्रा भैंस जितना ही दूध देने की क्षमता रखती है। प्रतिदिन ये भैंसें 15 से 25 लीटर दूध देने की क्षमता रखती हैं। डेयरी बिजनेस में अच्छा मुनाफा कमाने के लिए ये भैंसें काफी सही हैं। साल के दस महीने ताबड़तोड़ दूध देना इस भैंस की खासियत है। नीली रावी भैंस का ड्राई पीरियड सिर्फ दो महीने होता है। प्रति ब्यात नीली रावी भैंस 3000 से 5000 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। नीली रावी भैंसों के दूध में 6 प्रतिशत फैट पाया जाता है। दूर दूर तक बिना घूमे और पैसे खर्च किए गाय भैंस वाले Animall ऐप पर नीली रावी भैंसों की खरीदारी बड़ी आसानी से कर सकते हैं।

नीली रावी को होने वाले रोग

1. नीली रावी भैंसों में होने वाला पुछकटवा रोग क्या है?

ये बीमारी फफूंद की वजह से होती है। ये बीमारी भैंसों में अधिक देखने को मिलता है। इसे गांव में लोग पुछकटवा या डेगनाला रोग के नाम से भी जानते हैं। इस बीमारी से ग्रसित नीली रावी भैंसों का कान, पूंछ और खुर खिसक कर गिरने लगते हैं। इतना ही नहीं भैंस चारा खाना बंद कर देती है। धीरे धीरे पशु का शरीर कमजोर होने लगता है।

2. पुछ कटवा बिमारी से ग्रसित अपने नीली रावी भैंस की ऐसे रक्षा करें!!

भूल से भी अपनी भैंसों को सड़ा गला हुआ भूसा खाने को न दें। पशुओं के रखने की जगह को फिनायल एवं चूने के पानी से साफ करें। भैंस के शरीर के जिस भाग में घाव हुआ है उसे गुनगुने पानी से साफ करें। अगर घाव में सुधार ना दिखे तो तुरंत ही नजदीकी पशु चिकित्सक से मिलें।

3. नीली रावी भैंसों में होने वाला थनैला रोग क्या है?

थनैला एक संक्रामक रोग है जो दुधारू भैंसों में देखने को मिलता है। यह रोग एक पशु से दुसरे पशु में फैलता है। इसमें रोगाणु पशु के थन में प्रवेश करते हैं, जिससे संक्रमण फैलना शुरु होता है। संतुलित आहार न देने से भी ये रोग हो सकता है।

अगर आप चाहते हैं कि आपकी नीली रावी भैंस को थनैला रोग न हो। तो उसके लिए आपको ध्यान देना होगा की गंदे हाथों से भैंस का दूध बिल्कुल भी न निकालें। अगर भैंस के थनों में चोट लगती है तो उसे थनैला रोग होने का खतरा लगा रहता है। अगर भैंस को गंदी जगह पर रखा है तो भी उसे ये बीमारी होने की संभावना हो सकती है।

4. नीली रावी भैंस को थनैला रोग से बचाने के लिए क्या करें

नीली रावी भैंस को अगर थनैला रोग से बचाना है तो उसका दूध हमेशा सिर्फ साफ बर्तन में ही निकाले। दूध दुहने से पहले अच्छे तरीके से हाथ साफ करें और दूध दुहने के बाद अच्छे से पशु के थन को भी साफ करें।

अगर आपके नीली रावी भैंस को थनैला रोग है तो उसके थनों में सुजन दिखाई देगी। भैंस के दूध में भी खारापन आने लगता है। आपकी भैंस दूध देने से कतराने लगेगी। भैंस के दूध का रंग भी पीला होने लगता है। भैंस के दूध में खून के छिचड़े भी आने लगता है। थन में गांठ आनी शुरू हो जाती है।

नीली रावी भैंस को Animall ऐप से ऐसे खरीदें?

Animall ऐप पर अपने आसपास की ढेर सारी नीली रावी भैंस खरीद सकते हैं। नीली रावी भैंसों की खरीदारी करने के लिए अपने मोबाइल फोन में गाय-भैंस वाला Animall ऐप डालें। ऐप में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा कर गाय पर दबाएं। दबाते ही आप ढेर सारी गायों की नस्ल के नाम देख पाएंगे। यहां पर नीली रावी नस्ल को चुने और अपने घर मनचाहे ब्यात और दूध क्षमता वाली भैंस ले जायें।

इन तीन आसान तरीकों से खरीदें नई नीली रावी भैंस

  1. अपने गांव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।
  2. पिनकोड डालने के बाद, पशु में भैंस का चयन करें। यहां पर नस्ल में नीली रावी का चयन करें। इतना करने के बाद अपने मन के अनुसार दूध क्षमता और ब्यात का चुनाव भी कर सकते हैं।
  3. अब आपको अपने आसपास की सारी दुधारू नीली रावी नस्ल की भैंस दिखने लगेंगी। इनमे से अपने पसंद का पशु चुनकर खरीदार से बात करें।

बड़े आराम से ऐसे अपनी नीली रावी भैंस Animall ऐप पर बेचें

इन आसान तरीकों को अपनाकर नीली रावी भैंस को Animall ऐप पर बेचें। सबसे पहले तो अपना मोबाइल नंबर डालकर Animall ऐप पर रजिस्टर करें। इसके बाद मोबाइल में दिख रहे पशु बेचें पर दबाएं। इस बटन पर दबाते ही आप अपने नीली रावी भैंस की दूध क्षमता, ब्यात और कीमत लिख सकते हैं। इससे खरीदने वाले आसानी से आपकी भैंस के बारे में जान सकेंगे।

अपने नीली रावी भैंस की सभी जानकारियां डालने के बाद आपका पशु ऐप पर दर्ज हो जायेगा। जिसके बाद खरीदार आपका पशु ऐप पर देख सकेंगे।

अगर आप भी एक किसान है और अपने लिए पशु खरीदना चाहते हैं या फिर पशु से संबंधित कोई जानकारी हासिल करना चाहते हैं। तो बिना देरी किए अपने स्मार्टफोन में Animall ऐप डाउनलोड करें। इस ऐप पर आप पशु खरीदने और बेचने के अलावा बीमारी होने पर डॉक्टर से भी बात कर सकते हैं। साथ ही आपको पशु से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी भी ऐप पर बेहद आसानी से मिल जाएगी।

… और पढ़ें arrow

देवनी गायों से जुड़ी पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें

feature-image

देवनी गाय

देवनी गाय देसी नस्ल की एक महत्त्वपूर्ण गाय है। ये गाय महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पाई जाती है। ये नस्ल गिर गाय, डांगी गाय के वंशज हैं। देवनी गाय की बनावट भी इन्हीं गाय के जैसी है। ऐसा माना जाता है कि देवनी गाय की उत्त्पत्ति आँध्र प्रदेश राज्य में हुई है। धीरे-धीरे नस्ल की लोकप्रियता कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी बढ़ती गई है। दूध उत्पादन के अलावा देवनी नस्ल के बैलों का खेती के कामों में भी काफी ज्यादा उपयोग किया जाता है।

देवनी गाय की पहचान कैसे करें

देवनी गाय औसत बनावट की होती है। ये गाय तीन रंगों में मिलती है। देवनी गाय और गिर गाय में बहुत समानता मिलती है। देवनी गाय का कान चौड़ा होता है। इसकी त्वचा चिकनी और मुलायम होती है।
सिर चौड़ा और मोटा होता है। देवनी गायों के सींग मध्यम आकार के होते हैं। देवनी गाय की छाती गहरी और चौड़ी होती है। देवनी गाय के कान लंबे होते हैं और झुके हुए होते हैं।

ये भी पढ़ें : दुधारू पशु के दूध को सुखाना क्यों जरूरी है?

देवनी गाय के दूध की जानकारी

देवनी गाय हर दिन लगभग 10 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। ये गाय साल के 10 महीने दूध दे सकती है। देवनी गाय की पहली बार ब्याने की उम्र 894 से 1540 दिनों के बीच होती है। अगर एक ब्यात में इस गाय के दूध की बात करें तो देवनी गाय रोजाना का 10 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। वहीं देवनी गाय के दूध में 4.9 फीसदी फैट होता है। हर देवनी गाय 447 दिनों एक अन्तराल पर बच्चा देती है।

ये भी पढ़ें : जानें क्या है भैंस और गाय का दूध बढ़ाने का मंत्र?

स्वस्थ देवनी गाय के लिए ये जरुरी लक्षण जानने हैं जरुरी

एक स्वस्थ देवनी गाय की आंखें चमकीली होती हैं। इसमें किसी भी तरह के तरल पदार्थ जैसे पानी या खून के धब्बे भी नजर नहीं आते है। स्वस्थ गायें बहुत ज्यादा खांसते नहीं हैं, घर्राने की आवाजें भी नही आती है। इनके सांस लेने की प्रक्रिया भी बिल्कुल सामान्य होती है। वहीं स्वस्थ्य देवनी गाय की चमड़ी भी चमकदार होती है, इसके शरीर पर जूं-चीचड़ भी नहीं दिखती है। एक स्वस्थ देवनी गाय को चलने -फिरने, उठने-बैठने में भी कोई परेशानी नहीं होती है।

देवनी गाय को होने वाली बीमारियां और कैसे रखें इन बीमारियों से दूर!

1. ब्रुसेला बीमारी से देवनी नस्ल की गायों को ऐसे दूर रखें.

अपने घर की सभी देवनी नस्ल की गायों को ब्रुसेला का टीका लगायें। अगर आपकी गाय ने बछड़ी को जन्म दिया है तो पैदा होने के 6 महीने बाद ही ब्रुसेला बीमारी का टीका लगायें। ब्रुसेला एक जानलेवा बीमारी है, जो मनुष्यों से गायों में फैलती है। इसकी चपेट में आने पर गायें तुरंत बीमार हो जाती हैं।

2. देवनी नस्ल की गायों में ब्रुसेला बीमारी के क्या लक्षण हैं?

पशुपालक साथी अभी हम आपको देवनी नस्ल के गायों में होने वाले ब्रुसेला बीमारी के लक्षण के बारे में बताने जा रहे हैं। अगर आपकी देवनी गाय इस बीमारी से ग्रसित है तो उसे बुखार की शिकायत रहेगी। उस गाय का वजन भी लगातार कम होता जायेगा। रात में गाय को पसीना भी आएगा। अगर आपकी गाय को ये लक्षण दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से बात करें। भारत में ही बने टीका ब्रुसेला S-19 पशुओं को लगाया जाता है।

3. सर्रा बीमारी से कैसे बचाएं अपनी देवनी गाय

यह एक परजीवी से होने वाला रोग है। ट्रिपैनोसोमा ईवांसी (trypanosoma evansi) नाम के सूक्ष्म परजीवी से ये बीमारी फैलती है। इस बीमारी के फैलने से पशुओं की उत्पादन क्षमता में भारी कमी आती है। तुरंत ही पशुओं की मृत्यु हो जाती है जिससे पशुपालकों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। सबसे पहले साल 1885 में सर्रा बीमारी को देखा गया था।

अगर वहीं हम बात करें की सर्रा बीमारी कैसे फैलती है तो मान लीजिए अगर कोई पशु सर्रा बीमारी से पीड़ित है। अगर मक्खी उसका खून चूसकर स्वस्थ पशु को काट लेगा तो उसे भी ये बीमारी हो सकती है। पशु विज्ञान में सर्रा रोग के लिए जिम्मेदार मक्खी को टेबनेस मक्खी कहते हैं। भारत में पशुओं को काटने वाले मक्खी को लोग डांस मक्खी के नाम से भी जानते हैं।

4. देवनी नस्ल के गाय में सर्रा रोग के क्या लक्षण हैं ?

आपकी देवनी गाय को रुक रुक कर बुखार आएगा। वो बार-बार पेशाब करेगी। इतना ही नहीं आपकी देवनी गाय गोल-गोल चक्कर काटने लगेगी। सर्रा बीमारी से ग्रसित आपकी देवनी गाय को भूख भी कम लगेगी। गाय के मुंह से लार गिरने लगेगी। उसके आंख और नाक से पानी गिरने लगेगा।

सर्रा बीमारी से ग्रसित आपकी दुधारू देवनी गाय का दूध कम हो जायेगा। वो धीरे-धीरे कमज़ोर होते चली जाएगी। कई बार गायों का पिछला भाग लकवाग्रस्त हो जाता है। अगर कोई देवनी गाय इस बीमारी से ग्रसित है तो उसकी आँखों में सफेदी आने लगती है। उस पशु के निचले भाग में भी सूजन आने लगती है।

ये भी पढ़ें : क्या अजोला से पशुओं में दूध बढ़ा सकते है ?

देवनी गायों को Animall ऐप से कैसे खरीदें?

Animall ऐप पर आप अपने आसपास की ढेर सारी देवनी गाय खरीद सकते हैं। देवनी गायों की खरीदारी करने के लिए अपने मोबाइल फ़ोन में गाय-भैंस वाला Animall ऐप डालें। ऐप में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा कर गाय पर दबाएँ। दबाते ही आप ढेर सारी गायों की नस्लों के नाम देख पाएंगे। यहाँ पर देवनी नस्ल को चुने और अपने घर मनचाहे ब्यात और दूध की क्षमता वाली गाय ले जायें।

इन तीन आसान तरीकों से घर लायें देवनी गाय ।

  1. अपने गाँव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।
  2. पिनकोड डालने के बाद, गाय पर दबाएँ। यहाँ पर नस्ल देवनी का चयन करें। क्लिक करने के बाद यहाँ आप नस्ल के साथ-साथ अपने मन के अनुसार दूध की क्षमता और ब्यात का चुनाव भी कर सकते हैं।
  3. अब आपको अपने आसपास की सारी दुधारू देवनी नस्ल की गाय दिखने लगेंगी। इनमे से अपने पसंद का पशु चुनकर ख़रीदार से बात करें और घर ले जायें नया पशुधन।

आपको अपनी देवनी गाय बेचनी है ?

Animall ऐप पर ऐसे अपना पशु बेचें।

अगर आप अपनी देवनी गाय बेचना चाहते हैं तो इन आसान तरीकों को अपनाएं और Animall ऐप पर बेचें। ऐसे Animall ऐप से तुरंत देवनी गाय बेचें। ऊपर लिखे गये तरीके से Animall ऐप में खुद को रजिस्टर कर लें। इसके बाद पशु बेचें पर दबाएँ। इस बटन पर दबाते ही आप देवनी गाय की दूध क्षमता, ब्यात और कीमत लिख सकते हैं। अपने देवनी गाय की सभी जानकारियाँ डालने के बाद आपका पशु ऐप पर दर्ज हो जायेगा। मुबारक हो, आपकी देवनी गाय ऐप पर दर्ज हो गई है।अब ख़रीदार आपको गाय के लिए कॉल करेंगे।

अगर आप डेयरी बिजनेस कर रहे हैं, या फिर पशु खरीदना/ बेचना चाहते हैं। अगर डॉक्टर से बात करनी है या फिर पशु से जुड़ी कोई जानकारी चाहिये। हर सवाल का जवाब, हर परेशानी का समाधान और हर नस्ल का पशु मिलेगा सिर्फ आपके अपने गाय-भैंस वाले ऐप Animall पर। तो बिना देरी किए सभी किसान भाई Animall ऐप को तुरंत डाउनलोड करें।

ये भी पढ़ें : यहां पढ़े कंगायम गाय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।

… और पढ़ें arrow

आयरशायर गाय: ताबड़तोड़ दूध के लिए नाम ही काफी है

feature-image

आयरशायर नस्ल की स्कॉटलैंड में प्रसिद्ध है। पहली बार अमेरिका से इन गायों को स्कॉटलैंड लाया गया था। ये भी एक संकर नस्ल को गाय है। प्रथम श्वेत क्रांति के समय इन गायों को भारत लाया गया था। आयर शायर नस्ल की गायें अधिक दूध देने के लिए जानी जाती है। इस नस्ल के बच्चे भी दूध देने के लिए प्रसिद्द हैं।

इन गायों का शरीर भूरा रंग का होता है। बीच बीच में शरीर पर उजले रंग के बड़े धब्बे भी होते हैं। वहीं कई आयर शायर गाय उजले रंग के होते हैं और शरीर पर भूरा रंग का घब्बा रहता है। एक औसत गाय का वजन तकरीबन 500 किलोग्राम का होता है।

ये एक दूधारू नस्ल की गाय है। प्रतिदिन आयरशायर गाय 20 से 30 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। इस गाय के दूध में 4 प्रतिशत फैट पाया जाता है। डेयरी बिजनेस में के लिए यह गाय उपयुक्त है।

आयरशायर गाय की पहचान

इन गायों की सबसे बड़ी पहचान दूध क्षमता है। ठंडी, गर्मी या हो बरसात हर मौसम में आयरशायर गायें 20 से 25 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। 10 से 15 सालों तक आयरशायर गाय दूध देती हैं।

आयरशायर गाय की दूध क्षमता

इन गायों की सबसे बड़ी पहचान दूध क्षमता है। ठंडी, गर्मी या हो बरसात हर मौसम में आयरशायर गायें 20 से 25 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। 10 से 15 सालों तक आयरशायर गाय दूध देती हैं। Animall ऐप पर पहले, दुसरे और तीसरे ब्यात की बेहतरीन आयरशायर गायें खरीद बिक्री के लिए उपलब्ध रहती है। आयरशायर गाय के दूध में 4 से 5 प्रतिशत फैट पाया जाता है। मात्र एक फ़ोन कॉल पर गाय-भैंस वाला Animall ऐप से शानदार आयरशायर गायें खरीद सकते है ।

क्या दूध में पाउडर मिला कर फैट और SNF बढ़ा सकते है ?

आयरशायर गायों की देख रेख कैसे करें ?

आयरशायर गायों के रखने के स्थान को नियमित रूप से पानी से साफ करते रहें। सफाई रखने से पशुओं को कई गंभीर बिमारियों से बचाया जा सकता है। साफ सफाई रखने से गौशाला में पनपने वाले जीवाणु और परजीवीयों का खतरा नही बना रहता है। साफ सुथरे गौशाला वातावरण में रहने से पशु के दूध के उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। जहाँ आयरशायर नस्ल को बांध कर रखा जाता है वहां पर पानी से साफ करने के बाद रोगाणु नाशक दवाई (5ग्राम पोटाशियम परमेगनेट या 50 एम.एल फिनाईल/बाल्टी पानी) से सफाई करें। इसके अलावा डेटॉल से भी गौशाला की सफाई कर सकते हैं। खुरपका मुंह पका,लंगड़ी रोग,एवं थिलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए गौशाला की साफ़ सफाई का महत्वपूर्ण योगदान है।

गौशाला में साफ़ सफाई में नहीं रखने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। फेफड़ों और आंत सम्बन्धी बीमारियाँ होने का खतरा बढ़ जाता है। गोबर और अन्य ठोस पदार्थ जैसे नीचे गिरा हुआ भूसा आदि को गौशाला में से दिन में कम से कम 2 बार हटाना चाहिए। इन्हें पशु घर से कम से कम 100 मीटर दूरी पर किसी गड्ढे में इकट्ठा करें, जिससे खाद बनाकर खेतों में डाला जा सके।

स्वस्थ पशुओं की आंखें चमकीली होती हैं। इसमें किसी भी तरह के तरल पदार्थ जैसे पानी या खून के धब्बे नजर नहीं आते। स्वस्थ आयरशायर गायें बहुत ज्यादा खांसती नहीं हैं, घर्राने की आवाजें भी नही आती है। इसमें सांस लेने की प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य होती है। आपको स्वस्थ्य आयरशायर गाय का चमड़ा भी चमकदार दिखाई देगा, शरीर पर कही से भी जूं-चीचड़ नहीं दिखाई देगा। स्वस्थ पशु के चलने-फिरने या उठने-बैठने में परेशानी नहीं होती है।

चारा

दुधारू आयरशायर गाय को ये पशु आहार दें

आयरशायर गाय की क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए 40 से 50 किलोग्राम हरा चारा और 3 किलो दाना प्रति किलोग्राम दूध देने के लिए दें। जब पशु आहार में प्रोटीन, वसा और खनिज लवन मिलता है तो दूध में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

गाभिन आयरशायर गाय को ये पशु आहार दें

एक 250 किलोग्राम वजन के गाय को एक दिन में कितना पशु आहार दें।

भूसा – 4 किलो
दाना मिश्रण – ढाई किलो

चारा बाँट कर दिन में 3-4 बार खिलाएं। साथ में दाना मिश्रण भी 2 बार बराबर मात्रा में खिलाएं। हरा और सूखा चारा दोनों मिलाकर खिलाएं। चारा के दाना मिश्रण के अलावा प्रतिदिन 35- 40 लीटर पानी गाय को जरुर पिलायें।

आयर शायर गायों में होने वाली बीमारियां

1. ब्रुसेला बीमारी

घर की सभी आयरशायर नस्ल के गायों को ब्रुसेला का टीका लगायें। यदि आयरशायर नस्ल की गाय ने बछड़ी को जन्म दिया है तो पैदा होने के 6 महीने बाद ब्रुसेला बीमारी का टीका लगायें। ब्रुसेला एक जानलेवा बीमारी है, जो मनुष्यों से गायों में फैलता है। इसकी चपेट में आने पर गायें तुरंत बीमार हो जाती हैं। भारत में ही बने टीका ब्रुसेला S-19 पशुओं को लगाया जाता है।

बीमारियों से बचाए रखने के लिए गाय का टीका कब लगाना चाहिए

आयरशायर गायों में ब्रुसेला बीमारी के क्या लक्षण हैं?

पशुपालक साथी अभी हम आपको आयरशायर नस्ल के गायों में होने वाले ब्रुसेला बीमारी के लक्षण के बारे में बताने जा रहे हैं। अगर आपकी आयरशायर गाय इस बीमारी से ग्रसित है तो उसे बुखार की शिकायत रहेगी। उस गाय का वजन भी लगातार कम होता जायेगा। रात में गाय को पसीना भी आएगा। अगर आपकी गाय को ये सारे लक्षण दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से बात करें।

2. सर्रा बीमारी

यह एक परजीवी से होने वाला रोग है। ट्रिपैनोसोमा ईवांसी नामक सूक्ष्म परजीवी से ये बीमारी फैलता है। इस बीमारी के फैलने से पशुओं की उत्पादन क्षमता में भारी कमी आती है। तुरंत ही पशुओं की मृत्यु हो जाती है जिससे पशुपालकों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। सबसे पहले साल 1885 में सर्रा बीमारी को देखा गया था।

मान लीजिए अगर कोई पशु सर्रा बीमारी से ग्रसित है अगर मक्खी उसका खून चूसकर स्वस्थ पशु को काट लेगा तो उसे ये बीमारी फ़ैल जाएगी। पशु विज्ञान में सर्रा रोग के लिए जिम्मेदार मक्खी को टेबनेस मक्खी कहते हैं। भारत में पशुओं को काटने वाले मक्खी को लोग डांस मक्खी के नाम से जानते हैं।

आयरशायर गाय में सर्रा रोग के क्या लक्षण हैं ?

आपके आयरशायर गाय को रुक रुक कर बुखार आएगा। वो बार बार पेशाब करेगी। इतना ही नहीं आपकी आयरशायर गाय गोल गोल चक्कर भी काटने लगेगी। सर्रा बीमारी से ग्रसित आपकी जर्सी गाय को भूख भी कम लगेगा। गाय के मुंह से लार गिरने लगेगा । उसके आंख और नाक से पानी गिरने लगेगी।

सर्रा बीमारी से ग्रसित आपके दुधारू आयरशायर गाय का दूध कम हो जायेगा।
वो धीरे धीरे कमज़ोर होते चली जाएगी। कई बार गायों का पिछला भाग लकवाग्रस्त हो जाता है। अगर कोई आयरशायर गाय इस बीमारी से ग्रसित है तो आँखों में सफेदी आने लगता है। उस पशु के निचले भाग में भी सूजन आने लगता है।

3. थनैला रोग

पशुओं के बांधे जाने वाले स्थान और दूध दुहने के स्थान की सफाई का विशेष ध्यान रखें। दूध दुहने की तकनीक सही होनी चाहिए जिससे थन को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे। थन में किसी प्रकार की चोट (मामूली खरोंच भी) का तुरंत इलाज कराएं। थन का उपचार दुहने से पहले व बाद में दवा के घोल में (पोटेशियम परमैगनेट 1:1000 या क्लोरहेक्सिडीन 0.5 प्रतिशत) डुबो कर करें। दूध की धार कभी भी फर्श पर न मारें। रोगी पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें तथा उन्हें दुहने वाले भी अलग हों। अगर ऐसा संभव न हो तो बीमार पशु का दूध सबसे बाद में निकालें। समय-समय पर दूध की जाँच करवाते रहें। अगर थनों में सुधार न दिखें तो पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।

जानिए क्या है मानसून में थनैला रोग फैलने की वजह, लक्षण और उपचार (वीडियो)

कुछ ही मिनटों में आयरशायर गाय को Animall ऐप से कैसे खरीदें?

Animall ऐप पर अपने आसपास की ढेर सारी आयरशायर गाय खरीद सकते हैं। आयरशायर गायों की खरीदारी करने के लिए अपने मोबाइल फ़ोन में गाय-भैंस वाला Animall ऐप डालें। ऐप में अपन मोबाइल नंबर दर्ज करा कर गाय पर दबाएँ। दबाते ही आप ढेर सारी गायों के नस्ल के नाम देख पाएंगे । यहाँ आयरशायर नस्ल चुने और अपने घर मनचाहे ब्यात और दूध क्षमता वाली गाय ले जायें।

अपनाएं ये तीन आसान तरीका अपनाएं

  1. अपने गाँव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।
  2. पिनकोड डालने के बाद गाय पर दबाएँ । यहाँ आयरशायर का चयन करें । क्लिक करने के बाद यहाँ आप नस्ल के साथ साथ अपने मन के अनुसार दूध क्षमता और ब्यात का का चुनाव भी कर सकते है।
  3. अब आपको अपने आसपास की सारी दुधारू आयरशायर नस्ल गाय दिखने लगेंगी । इनमे से अपने पसंद का पशु चुनकर ख़रीदार से बात करें और घर ले जायें नया पशुधन।

 

ऐप पर आयरशायर गाय बेचें

आपको अपनी आयरशायर गाय बेचनी है ? Animall ऐप पर ऐसे अपना पशु बेचें

इन सरल तरीकों को अपनाकर आयरशायर गाय Animall ऐप पर बेचें। ऐसे Animall ऐप से तुरंत आयरशायर गाय बेचें। ऊपर लिखे गये तरीके से Animall ऐप में खुद को रजिस्टर कर लें। इसके बाद पशु बेचें पर दबाएँ। इस बटन पर दबाते ही आप आयरशायर गाय की दूध क्षमता, ब्यात और कीमत लिख सकते हैं। अपने आयरशायर गाय की सभी जानकारियाँ डालने के बाद आपका पशु ऐप पर दर्ज हो जायेगा। मुबारक हो, आपकी आयरशायर गाय ऐप पर दर्ज हो गया है। अब ख़रीदार आपको गाय के लिए कॉल करेंगे।

 

… और पढ़ें arrow

यहां पढ़ें राठी गाय से जुड़ी सारी जानकारी!

feature-image

जब बात भारत में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों की हो, तो उसमें देसी गाय राठी का नाम जरूर लिया जाता है। राजस्थान के उत्तर पश्चिमी जिलों (गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर) में राठी गाय पाई जाती है। राजस्थान के अलावा राठी गाय को गुजरात के कुछ इलाकों में भी पाला जाता है। इन इलाकों के किसानों के लिए ये गाय काफी अहम है। इस नस्ल की गाय अत्यधिक दूध देने के लिए मशहूर है।

इसके नाम की उतपत्ति बंजारा चरवाहे राठ से हुई थी। प्रगतिशील किसानों में राठी गाय काफी प्रसिद्ध है। वहीं जब बात हो कि राठी गाय कितना दूध देती है? तो आमतौर पर राठी गाय रोजाना 12 लीटर तक दूध आराम से दे सकती है, यहां तक की कई बार तो इसे 18 लीटर दूध देते भी देखा गया है। ये गाय कम चारे में भी ज्यादा दूध दे सकती है। इसके दूध में फैट की मात्रा 5% से ज्यादा होती है।

राठी गाय की खूबी ये भी है कि भारत के किसी भी इलाके में रह लेती है। इसे ‘राजस्थान की कामधेनु’ के नाम से भी जाना जाता है। 

राठी गाय की पहचान कैसे करें?

राठी गाय दिखने में काफी सुंदर मानी जाती है। राठी गाय की त्वचा बहुत ज्यादा आकर्षित होती है। इसका चेहरा थोड़ा सा चौड़ा होता है। राठी गाय का वजन आमतौर पर 280-300 किलोग्राम होता है।

राठी गाय मध्यम आकार की होती है, इसका रंग भूरा होता है और उस पर सफेद धब्बे बने होते हैं। जबकि इनके शरीर के नीचे की त्वचा का रंग, शरीर के बाकी हिस्सों के रंग से हल्का होता है। इस नस्ल की गाय के सींग मध्यम आकार के होते हैं, जो कि ऊपर और अंदर की तरफ घुमावदार होते हैं।

राठी गाय का मुंह चौड़ा होता है, जबकि इसकी पूंछ लंबी होती है और चमड़ी लटकी हुई, कोमल और ढीली होनी चाहिए।

राठी और गिर में अंतर

राठी और गिर गाय दोनों के शरीर में ही काफी धब्बे होते हैं, यहां तक की इनका रंग भी एक जैसा होता है। जिस कारण लोग अक्सर राठी को गिर समझ लेते हैं। लेकिन राठी के कान और सिंग गिर से काफी अलग होते हैं।


राठी गाय के दूध की जानकारी 

राठी नस्ल भारतीय गायों में एक महत्वपूर्ण गाय है। ये गाय रोजाना 12 लीटर तक दूध दे सकती है। हालांकि ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि गाय को खाने में क्या दिया जाता है। इसके अलावा इलाके का हवा-पानी गाय के लिए कितना सही है। साथ ही आप उसका ध्यान कैसे रख रहे हैं। हालांकि ये गाय ज्यादा इलाकों में और अलग तरह के हवा पानी में भी रह लेती है।

ये एक ब्यात में औसतन 2500 किलो दूध पैदा करती है। पहले ब्यात के समय इसकी उम्र 36 से 52 महीने होती है। तो वहीं इसका एक ब्यात 15-20 महीनों का होता है।

राठी गाय की विशेषताएं

राठी गाय की रोग-प्रतिरोधक क्षमता यानी की इम्युनिटी बहुत ही शानदार होती है। सर्दियों में जहां 0 डिग्री की ठंड सहती है तो वहीं गर्मियों में 50 डिग्री को भी सहन कर लेती है। इसके बावजूद राठी बेहद खुश रहती है और वो दूध देने में कोई कटौती नहीं करती है।

इतना ही नहीं राठी जिस क्षेत्र में सबसे ज्यादा पाई जाती है, वहां पर पानी की कमी होती है। साथ ही वहां पर चारा भी जो मिलता है वो सूखा मिलता है। अक्सर कहा जाता है कि हरे चारे के बिना पशु पालन संभव नहीं है लेकिन राठी गाय के साथ ये संभव है। क्योंकि राठी भूसे तक पर भी रह लेती है और अच्छी मात्रा में दूध देती है।

इसके साथ ही क्योंकि ये इतने विपरीत वातावरण में रह सकती है, तो इसे बीमारियों का खतरा भी काफी कम होता है। राठी गाय सभी की पहली पसंद बनती जा रही है, क्योंकि इसके रख रखाव में बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। 


राठी गाय को चारे में क्या दें?

इस नसल की गायों को जरूरत के जितना ही खाना दें। फलीदार चारे को खिलाने से पहले उनमें तूड़ी या अन्य चारे को भी जरूर मिला लें। ताकि गाय को बदहजमी की परेशानी ना हो।

अनाज और इसके अन्य पदार्थ: मक्की, जौं, ज्वार, बाजरा, छोले, गेहूं, जई, चोकर, चावलों की पॉलिश, मक्की का छिलका, बरीवर शुष्क दाने, मूंगफली, सरसों, तिल, अलसी, मक्की से तैयार खुराक, टरीटीकेल आदि।

हरे चारे: बरसीम (पहली, दूसरी, तीसरी, और चौथी कटाई), लूसर्न (औसतन), लोबिया (लंबी ओर छोटी किस्म), गुआरा, सेंजी, ज्वार (छोटी, पकने वाली, पकी हुई), मक्की (छोटी और पकने वाली), जई, बाजरा, हाथी घास, नेपियर बाजरा, सुडान घास आदि।

सूखे चारे और आचार: बरसीम की सूखी घास, लूसर्न की सूखी घास, जई की सूखी घास, पराली, मक्की के टिंडे, ज्वार और बाजरे की कड़बी, गन्ने की आग, दूर्वा की सूखी घास, मक्की का आचार, जई का आचार आदि।

अन्य रोजाना खुराक: मक्की/ गेहूं/ चावलों की कणी, चावलों की पॉलिश, छाणबुरा/ चोकर, सोयाबीन/ मूंगफली की खल, छिल्का रहित बड़ेवे की ख्ल/सरसों की खल, तेल रहित चावलों की पॉलिश, शीरा, धातुओं का मिश्रण, नमक, नाइसीन आदि।


राठी गाय की देखरेख कैसे करें?

शेड की आवश्यकता

राठी गाय या फिर किसी भी पशु के रख रखाव में बहुत जरूरी है कि उनके अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए। पशुओं को भारी बारिश, तेज धूप, बर्फबारी, ठंड से बचाने के लिए एक शेड की आवश्यकता होती है। इस बात का खास ध्यान रखें कि चुने हुए शेड में साफ हवा और पानी की सुविधा भी होनी चाहिए। पशुओं की संख्या के अनुसार भोजन के लिए जगह बड़ी और खुली होनी चाहिए, ताकि वो आसानी से खाना खा सकें। पशुओं के व्यर्थ पदार्थ की निकास पाइप 30-40 सैंटीमीटर चौड़ी और 5-7 सैंटीमीटर गहरी होनी चाहिए।

गाभिन पशुओं की देखभाल

गाभिन गाय की अच्छी देखभाल का परिणाम अच्छे बछड़े के रूप में होगा। इतना ही नहीं दूध की मात्रा भी अधिक मिलती है। गाभिन गाय को 1 किलो अधिक फीड दें, क्योंकि वो शारीरिक रूप से भी बढ़ती है। 

जानिए कैसी होनी चाहिए एक गाभिन गाय की खुराक!

बछड़ों की देखभाल कैसे करें

बछड़ों के जन्म के तुरंत बाद नाक या मुंह के आस पास चिपचिपे पदार्थ को साफ करना चाहिए। अगर बछड़ा सांस नहीं ले रहा है तो उसे दबाव द्वारा बनावटी सांस दें और हाथों से उसकी छाती को दबाकर आराम दें। शरीर से 2-5 सैंटीमीटर की दूरी पर से नाभि को बांधकर नाडू को काट दें। 1-2 प्रतिशत आयोडीन की मदद से नाभि को आस पास से साफ करना चाहिए।

जानिए गाय के बछड़े की देखभाल किस तरह से करें

टीकाकरण

जन्म के बाद बछड़े को 6 महीने के हो जाने पर पहला टीका ब्रूसीलोसिस का लगवाएं। फिर एक महीने बाद आप मुंह खुर का टीका लगवाएं और गलघोटू का भी टीका लगवाएं। एक महीने के बाद लंगड़े बुखार का टीका लगवाएं। बड़ी उम्र के पशुओं की हर तीन महीने बाद डीवॉर्मिंग करें। बछड़े के एक महीने से पहले सींग ना दागें। एक बात का और ध्यान रखें कि पशु को बेहोश करके सींग ना दागें आजकल आने वाले इलैक्ट्रोनिक हीटर से ही सींग दागें।

बीमारियों से बचाए रखने के लिए गाय का टीका कब लगाना चाहिए 

 

राठी गाय को होने वाली बीमारियां

बदहजमी: इस बीमारी से बचाने के लिए गाय को जल्दी पचने वाली खुराक दें

कब्ज: बार-बार कब्ज होने पर गाय को 800 ग्राम मैगनीशियम सल्फेट पानी में घोलकर और 30 ग्राम अदरक का चूरा मुंह द्वारा दें।

मरोड़/ खूनी दस्त: मुंह द्वारा या टीके से सलफा दवाइयां दें और साथ ही 5 प्रतिशत गुलूकोज़ और नमक का पानी ज्यादा दें।

अनीमिया: मासपेशियों में कमजोरी आना, तनाव होना गाय में अनीमिया की बीमारी को दर्शाता है। इसके इलाज के लिए खाने में विटामिन ए, बी, ई की मात्रा बढ़ाएं।

मैगनीश्यिम की कमी: खाने में 5 ग्राम मैगनीश्यिम ऑक्साइड डाल कर कमी को पूरा किया जा सकता है।

रिंडरपैस्ट (शीतला माता): ये गाय में होने वाली गंभीर बीमारी है। इस बीमारी को होने में 6-9 दिन लगते हैं। इसमें तेज बुखार, मुंह से पानी बहना और खूनी दस्त लग जाते हैं। इसका पेंसीलिन से इलाज किया जा सकता है।

निमोनिया: गीले फर्श के कारण गाय को ये बीमारी होती है। इसमें ध्यान रखना होता है कि जगह को सूखा रखा जाए।

थनैला: ये सिर्फ राठी में नहीं बल्कि हर दुधारू पशुओं को लगने वाला एक रोग है। थनैला रोग में पशु के थन गर्म हो जाते हैं और उसमें दर्द, सूजन होने लगती है। इसके अलावा दूध में खून और पस आने लगता है। इसका इलाज शुरुआत में ही संभव है, बीमारी बढ़ने के बाद थन बचाना मुश्किल होता है। 

 

राठी गाय को कैसे खरीदें

अगर आप राठी गाय खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए Animall ऐप को तुरंत डाउनलोड कर लें। इस तरह से आप अपने आसपास की ढेर सारी राठी गाय खरीद सकते हैं राठी गायों की खरीदारी करने के लिए अपने मोबाइल फोन में गाय-भैंस वाला Animall ऐप डाउनलोड करें। ऐप में अपना मोबाइल नंबर डालें और फिर गाय पर क्लिक करें। जैसे ही आप गाय दबाते हैं, वैसे ही आप ढेर सारी गायों की नस्लें देखना शुरु कर देंगे। आप राठी नस्ल चुनें और फिर पसंद की ब्यात और दूध देने की क्षमता वाली गाय खरीद सकते हैं।

इन तीन आसान तरीकों से घर लायें देवनी गाय ।

   

  1. अपने गांव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।
  2. पिनकोड डालने के बाद, गाय पर दबाएँ। यहाँ पर नस्ल राठी का चयन करें। क्लिक करने के बाद यहाँ आप नस्ल के साथ-साथ अपने मन के अनुसार दूध की क्षमता और ब्यात का चुनाव भी कर सकते हैं।
  3. अब आपको अपने आसपास की सारी  दुधारू राठी नस्ल की गाय दिखने लगेंगी। इनमे से अपने पसंद का पशु चुनकर खरीदार से बात करें और चुटकी में खरीद लें अपनी पसंद की राठी गाय।

इस तरह से बेच सकते हैं अपनी राठी गाय?

अगर आप अपनी राठी गाय बेचना चाहते हैं तो इन आसान तरीकों को अपनाएं और Animall ऐप पर बेचें। ऐसे Animall ऐप से तुरंत राठी गाय बेचें। एक बार खुद को Animall ऐप पर रजिस्टर करने के बाद, पशु बेचें पर जाएं। आप फिर वहां पर अपनी राठी गाय की सारी जानकारी दे सकते हैं। जैसे ही आप अपनी गाय की सारी जानकारी देंगे तुरंत ही आपका पशु ऐप पर दर्ज हो जाएगा। जिसके बाद खरीदार आपको गाय बेचने के लिए कॉल करेंगे।

राठी गाय एक बेहद ही उच्च गुणवत्ता की गाय है। जो आपको काफी कम रेट में भी मिल जाती है और साथ ही उसकी देखभाल में भी बहुत ज्यादा खर्चा नहीं होता है। राठी बेहद ही कम देखभाल के साथ भी आपको अच्छी मात्रा में दूध दे सकती है। हालांकि अगर आप इसका ज्यादा ध्यान रखेंगे तो दिन का 20 लीटर तक दूध आसानी से हासिल कर सकते हैं।

अगर आप भी एक पशुपालक है और पशु खरीदना या बेचना चाहते हैं, तो परेशान नहीं होना पड़ेगा। Animall ऐप पर आप एकदम उचित दाम और बिना कमीशन दिए पशु खरीद या बेच सकते हैं। साथ ही अगर आपको पशु के लिए डॉक्टर से बात करनी है तो वो भी ऐप पर आसानी से कर सकते हैं। 

… और पढ़ें arrow

पुंगनूर गाय से जुड़ी सारी जानकारी यहां पढ़ें!

feature-image


Source – ZeeNews

भारत जैसे देश में गाय की कई नस्लें पाई जाती हैं। इन्हीं में से एक पुंगनूर गाय है। यह अपने छोटे कद और अपने दूध के गुणों के चलते बेहद प्रसिद्ध है। पुंगनूर गाय उन चुनिंदा गाय में से एक है जिसका मूत्र और गोबर बेचकर भी पैसे कमाए जा सकते हैं। पूंगनूर गाय एक दुर्लभ प्रजाति है जो लगभग विलुप्त होने की कगार पर खड़ी है। साथ ही पुंगनूर गाय को लेकर कई तरह के भ्रम और बातें भी लोगों के बीच फैली हुई है।

आज हम आपको अपने इस लेख में पूंगनूर गाय की कीमत से लेकर इसके दूध देने की क्षमता के बारे में बताएंगे। इसके अलावा पुंगनूर गाय से जुड़े भ्रम को भी दूर करेंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि आप कैसे पुंगनूर गाय को आसानी से खरीद या बेच सकते हैं। 

पुंगनूर गाय की पहचान कैसे करें


Source – Bollywoodtopic.com 

पुंगनूर एक दुर्लभ प्रजाति की गाय है, जिसका इतिहास भारत के दक्षिणी भाग आंध्र प्रदेश से जुड़ा हुआ है। इस गाय का नाम आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के शहर पुंगनूर पर ही रखा गया है। पुंगनूर गाय सफेद और हल्के भूरे रंग की होती है। जिनका माथा काफी चौड़ा और सींग छोटे होते हैं। पुंगनूर गाय की औसत ऊंचाई महज 70 से 90 सेमी ही होती है। वहीं पुंगनूर गाय का अधिकतम वजन 150 से 200 किलोग्राम तक हो सकता है। पुंगनूर की पूंछ लंबी होती है और जमीन तक जाती है। वहीं पुंगनूर के कान बाहर और पीछे की तरफ खड़े रहते हैं। इनकी कमर के हिस्से में एक छोटा सा कर्व भी देखने को मिलता है।

पुंगनुर की दूध देने की क्षमता और गुण

सोशल मीडिया के जरिए कई भ्रम फैलाए गए हैं, कि पुंगनूर एक दिन में 100 लीटर दूध देती है। वहीं कई लोगों ने तो यह तक भ्रम फैलाया है कि पुंगनूर गाय की कीमत 12 करोड़ रुपए है। यही नहीं एक बात यह भी प्रचलित है कि केवल पुंगनूर गाय का दूध ही तिरुपति बालाजी पर चढ़ाया जाता है। लेकिन आपको बता दें कि यह केवल सुनी सुनाई हुई ही बातें हैं।

पुंगनूर गाय एक साल में करीब 1200 से लेकर 1500 लीटर तक ही दूध देती है। पुंगनूर गाय के दूध की खास बात यह है कि इसमें 8 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है। जबकि अन्य गाय के दूध में फैट केवल 3 से 5 प्रतिशत ही फैट होता है।

बात पुंगनूर गाय से मुनाफे की करें, तो इसमें मौजूद अधिक फैट और दूसरे औषधीय गुण, इसे दूसरी गाय के दूध से अलग बनाते हैं। इस आधार पर पुंगनूर गाय के दूध को अधिक कीमत पर बेचा जा सकता है। इसके अलावा पुंगनूर गाय के मूत्र के अंदर एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, एवं इसका इस्तेमाल आंध्र प्रदेश के किसान फसलों पर छिड़काव के लिए करते हैं। जिसकी वजह से पुंगनूर का मूत्र 10 रुपए किलो तक बेचा भी जाता है। यही नहीं पुंगनूर का गोबर भी 5 रूपए किलो में बेचा जाता है। 

पुंगनूर गाय की कीमत 

एक भ्रम यह भी है कि पुंगनूर गाय की कीमत 12 करोड़ रुपए तक है, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। पुंगनूर गाय आपको एक लाख रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक की कीमत पर आसानी से मिल जाती है। इसके अलावा बताया जाता है कि पुंगनूर गाय की आयु जितनी कम होगी उसकी कीमत उतनी ही अधिक होगी।  ऐसा इसलिए क्योंकि आंध्र प्रदेश के लोगों के लिए एक स्टेटस सिंबल बन गई है। वहीं इसकी कीमत अधिक होने का कारण इनकी कम संख्या भी है। 

पुंगनूर गाय की देखरेख कैसे करें 

जैसे की हमने आपको बताया कि पुंगनूर गाय का आकार बेहद छोटा होता है। इसकी वजह से यह चारा भी बेहद कम मात्रा में ही खाती है और इसके रखरखाव का खर्च कम हो जाता है। एक रिपोर्ट की मानें तो पुंगनूर गाय एक दिन में 5 किलो तक ही चारा खाती है। 

पुंगनूर गाय को होने वाली बीमारियां


Source – sbs.com

पुंगनुर गाय एक बहुत छोटे कद वाली गाय है। जिसे बीमारियों से बचाने के लिए सावधान रहना आवश्यक है। वहीं कई बार इस गाय को कुछ गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। जिसकी सूची हम आपको नीचे दे रहे हैं। 

पुंगनूर को होने वाला सर्रा रोग

सर्रा रोग पहली बार पशुओं में 1885 में देखा गया था। यह रोग ट्रिपैनोसोमा इवांसी (Trypanosoma evansi) नाम के सूक्ष्म परजीवी (parasite) से होता है। इसके कारण पशु की दूध देने की क्षमता बेहद कमजोर पड़ जाती है। साथ ही कई बार गाय की मौत तक हो जाती है। जिसकी वजह से पशु पालन करने वालों को बहुत नुकसान होता है। ऐसे में अगर गाय को सर्रा रोग है तो तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सर्रा रोग कैसे फैलता है 

सर्रा रोग से पीड़ित गाय को जब कोई मक्खी काट ले या उसका खून पीकर, किसी स्वस्थ गाय को काट ले तो उसे भी सर्रा रोग हो सकता है। पशुओं के विज्ञान के मुताबिक सर्रा रोग के लिए जिम्मेदार मक्खी को टेबनेस कहते हैं। वहीं भारतीय लोग इस मक्खी को डांस मक्खी के नाम से भी जानते हैं। 

सर्रा रोग के पुंगनूर पर दिखने वाले लक्षण

सर्रा रोग से पीड़ित गाय की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है और इसके कई लक्षण गाय पर देखने को मिल सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं। 

  • गाय को बार – बार बुखार आने लगता है। 
  • मुंह से लार और आंख नाक से पानी गिरता रहता है। 
  • सर्रा रोग होने पर गाय गोल – गोल चक्कर लगाने लगती है 
  • यह रोग होने पर गाय के पिछले हिस्से में लकवा भी पड़ सकता है। 
  • गाय के दूध देने की क्षमता काफी कमजोर पड़ जाती है। 
  • गाय के निचले हिस्से में सूजन आने लगती है। 
  • सर्रा रोग होने की वजह से आंखों पर सफेद अधिक दिखाई देने लगती है। 

सर्रा रोग का इलाज 

अगर पशु को सर्रा रोग हो गया है तो डॉक्टर की राय पर उनके आस पास चूने का छिड़काव कर देना चाहिए। साथ ही पशु को गुड़ आदि खिलाना भी इस रोग से राहत दे सकता है।  इसके अलावा गाय पर सर्रा रोग के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से बात करें। 

पुंगनूर गाय को होने वाले ब्रुसेला रोग

ब्रुसेला रोग एक संक्रामक रोग है जो एबोरटस नामक जीवाणु के जरिए फैलता है। यह पशुओं से इंसानों में और इंसानों से पशुओं में भी फैल सकता है। आपको बता दें कि यह जीवाणु गर्भावस्था में स्तनधारी जीव के बच्चेदानी में रहता है और अंतिम तिमाही में गर्भपात की वजह बनता है। आपको बता दें कि एक बार संक्रमित होने पर गाय के गर्भाशय और दूध के जरिए यह पूरे जीवनकाल में निकलता ही रहता है। 

ब्रुसेला के दिखाई देने वाले लक्षण

अगर आपकी गाय या स्तनधारी जीव ब्रुसेला रोग से पीड़ित है तो इसके कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं जैसे बुखार का बार – बार आना, वजन घटना, रात के समय अधिक पसीना आना। गाय पर इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

गाय को ब्रुसेला से बचाने का तरीका 

ब्रुसेला आपकी गाय या भैंस के लिए एक बेहद खतरनाक बीमारी है। ऐसे में ब्रुसेला रोग से पशु को बचाए रखने के लिए समय पर ब्रुसेला S -19 टीका लगवाएं। बता दें कि यह टीका भारत में ही बना है और यह पशु को इस रोग से बचाकर रखता है। अगर आपकी गाय ने बछड़ी को जन्म दिया है तो उसे भी 6 महीने के बाद ब्रुसेला का टीका जरूर लगवाएं। 

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

क्या आप घर बैठे – बैठे कोई भी गाय खरीदना चाहते हैं, अगर हां तो आप  Animall ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। आप अपने  स्मार्ट फोन में यह ऐप डाउनलोड करने के लिए आप प्ले स्टोर पर जाएं, या नीचे दिए गए विकल्प  पर क्लिक करें। Click Here

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आप इसमें मोबाइल नंबर डालें और अपने स्थान को चुनें।
  2. अब आप ऐप की भाषा का चुनाव करें।
  3. अब इस ऐप को आप उपयोग कर सकते हैं। यंहा से आप गाय, भैंस या अन्य पशु खरीद और बेच सकते हैं।
  4. अगर आप गाय खरीदनी है तो आप गाय का चुनाव करें।
  5. यहां आपको जो भी गाय बिकाऊ है, उनकी सूची दिख जाएगी।
  6. अब आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प के हिसाब से अपने लिए सही सूची बना सकते हैं। 
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी गाय चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  8. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं और गाय से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. पशु को बेचने के लिए आप ऐप के नीचे दिए गए पशु बेचे के विकल्प पर जाएं। विकल्प अगर दिखाई न दे तो आप इस तस्वीर का सहारा ले सकते हैं, जो हमने आपको नीचे दी है।
  2. यहां क्लिक करने के बाद आपको पशु से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसमें गाय की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो अपलोड कर दें।
  3. इस तरह आपकी गाय या अन्य पशु ऐप पर लिस्ट हो जाएगा। अब गाय खरीदने के इच्छुक व्यक्ति आप से स्वयं संपर्क करेगा।
… और पढ़ें arrow