बीमारियों से बचाए रखने के लिए गाय का टीका कब लगाना चाहिए

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भारत देश में गाय को महज एक पशु नहीं, बल्कि माता के तौर पर भी देखा जाता है। गाय का उपयोग न केवल दूध निकालने और खेती के लिए किया जाता है। बल्कि हिंदू धर्म के वाचक इस पशु की पूजा भी करते हैं। यही कारण भी है कि गाय की सेहत का ध्यान रखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई गाय का टीका का अभियान भी चलया जाता है। 

आपको बता दें कि जिस तरह से किसी शिशु का समय – समय पर टीकाकरण कराना जरूरी होता है। उसी तरह गाय का टीकाकरण भी बहुत जरूरी होता है। आज हम आपको अपने इस लेख में गाय के टीकाकरण से जुड़ी तमाम जानकारियां साझा करेंगे। इसके साथ ही आप पशुपालकों को यह भी समझाएंगे कि आखिर क्यों गाय का टीकाकरण आवश्यक है। अगर आप भी एक पशुपालक हैं और गाय के टीकाकरण से जुड़ी किसी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख पर अंत तक बने रहें। 

गाय का टीकाकरण क्यों है महत्वपूर्ण

हम सभी जानते हैं कि पशुपालकों के लिए गाय केवल खेती बाड़ी का ही जरिया नहीं है। बल्कि गाय के द्वारा प्राप्त दूध, घी आदि बेचकर भी पशुपालक पैसा कमाते हैं। ऐसे में अगर गाय अस्वस्थ हो जाए तो इससे उनकी दूध देने की क्षमता पर असर पड़ता है। इसके अलावा कई बार गाय कुछ ऐसे रोगों से संक्रमित हो जाती है। 

जिसमें उनके थनों तक को काटना पड़ता है। यही नहीं कई बार कुछ रोगों के चलते गाय की मौत तक हो जाती है। गाय की मृत्यु होने पर या उनके बीमार होने पर गाय के जरिए कमाई जाने वाली आय कम हो जाती है। इसके अलावा पशुपालकों की खेती बाड़ी का काम भी सही तरह से नहीं हो पाता। ऐसे में गाय को खतरनाक रोगों से बचाने के लिए और उन्हें  स्वस्थ बनाए रखने के लिए उन्हें टीके लगवाना जरूरी हो जाता है। 

गाय को लगाए जाने वाले टीके 

गाय एक दुधारू पशु है जिसे समय – समय पर कई टीके देने की आवश्यकता होती है। अब हम ऐसे ही कुछ सामान्य टीकों के बारे में जानेंगे, जो गाय को समय समय पर दिलवाने चाहिए।

गाय को दिया जाने वाला गलघोटू टीका 

गलघोटू रोग एक संक्रामक और खतरनाक रोग है। जिसके दौरान गाय के मुंह से लार गिरती है और सांस लेने में भी दिक्कत होती है। ऐसे में गाय को गलघोटू रोग से बचाने के लिए इन्हें साल में दो बार टीके लगवाए जाते हैं। इस टीके में 5 एमएल एलम दवा होती है, जो चमड़ी के ठीक नीचे इंजेक्ट की जाती है। यूं तो आमतौर पर गलघोटू का टीका जून और दिसंबर के दौरान घर – घर जाकर मुफ्त में  लगाया जाता है। लेकिन अगर कोई पशुपालक अपनी सुविधा के अनुसार गाय का  टीकाकरण कराना चाहते  हैं, तो ऐसा वह कर सकते हैं। लेकिन इसमें डॉक्टर की राय लेना बहुत जरूरी है। 

मुंह खुर (एफ.एम.डी) 

मुंह खुर एक बहुत संक्रामक और खतरनाक रोग है। इस रोग के दौरान पशु के मसूड़ों के पास छोटे – छोटे दाने हो जाते हैं। यह दाने कुछ समय में बड़े छाले और घाव का रूप ले लेते हैं। इसके अलावा कई बार पशु के मुंह में भयंकर दर्द रहने लगता है। जिसकी वजह से वह कुछ खा पी भी नहीं पाता। इस संक्रामक रोग से गाय को बचाए रखने के लिए मुंह खुर का टीका लगाया जाता है। यह टीका पशु को साल में दो बार मई एवं नवंबर में दिया जाता है। आपको बता दें कि पशुओं को मुंह खुर से बचाए रखने के लिए सरकार टीकाकरण का मुफ्त अभियान बड़े स्तर पर चलाती है। इस अभियान में गाय को टेट्रावेलेंट नामक दवा के टीके का 5 एमएल डोज दिया जाता है। यह गाय की चमड़ी के नीचे दिया जाता है।

संक्रामक गर्भपात का टीकाकरण 

गाय और भैंस के गर्भापात की स्थिति ब्रूसेलोसिस नामक जीवाणु के चलते होती है। इस स्थिति में पशु के गर्भधारण करने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है और अधिकतर 6 से 8 वे महीने के दौरान गाय का गर्भपात भी हो जाता है। गाय को इस खतरनाक रोग से बचाए रखने के लिए उसके जन्म के 6 महीने से लेकर 8 महीने की आयु के बीच गाय को यह टीका दिया जाता है। गाय को दिए जाने वाले इस टीके का नाम कोटन -19 स्ट्रेन है। गाय को यह टीका चमड़ी के नीचे दिया जाता है। इसकी मात्रा केवल 5 एमएल ही होती है। 

लंगड़ा बुखार 

लंगड़ा बुखार जिसे लोग काला बुखार के नाम से भी जानते हैं। आपको बता दें कि यह रोग अमूमन गाय भैंस जैसे अधिक वजन वाले जीवों को ही होता है। ऐसे में पशु को लंगड़े बुखार की समस्या से बचाने के लिए समय पर एलम नामक दवा का टीका दिया जाता है। यह टीका पशु को केवल 5 एमएल ही होता है। इसके अलावा लंगड़े बुखार का ह टीका पशु को हर 6 महीने में एक बार दिया जाता है।

गाय के लिए चलाए जाने वाले टीकाकरण अभियान 

हमने जैसा कि आपको बताया था कि देश का एक बड़ा हिस्सा आज भी पशुपालन के जरिए ही अपना गुजारा करता है। ऐसे में इन पशुओं की देखरेख ठीक से हो और पशु लंबे समय तक स्वस्थ रहें। इसके लिए कई टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे ही कुछ टीकाकरण अभियान हैं जो सरकार द्वारा चलाए जा रहे हैं। इस टीकाकरण अभियान में गाय को गलघोटू, लंगड़ा बुखार, और मुंह खुर जैसे रोगों से बचाने के लिए मुफ्त टीकाकरण देश भरे में हो रहे हैं। 

 

गाय को लगाए जाने वाले सामान्य टीके 

रोग  टीका  डोज टीकाकरण का समय 
गलघोटू एलम  5 एम एल  हर 6 महीने में 
मुंह खुर टेट्रावेलेंट  5 एम एल 6 महीने या इससे कम आयु में
लंगड़ा बुखार  एलम 5 एम एल हर 6 महीने में
संक्रामक गर्भपात कोटन -19 स्ट्रेन 5 एम एल 6 से 8 माह की आयु में

 

गाय को होने वाले अन्य रोग और टीके 

ब्लैक क्वार्टर और इलाज 

यह रोग गाय को बारिश के दिनों में मिट्टी की वजह से होता है। इस रोग के दौरान पशु को तेज बुखार हो जाता है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। यह रोग होने पर इसकी शुरुआत में ही पशु को पेनिसिलिन का टीका दिया जाता है। 

एनाप्लाजमोसिस और इलाज 

यह रोग गाय को एनाप्लाजमा मार्जिनल जीवाणु के कारण होता है। इस रोग के दौरान पशु के शरीर से खून निकलने लगता है। जिसकी वजह से खून की कमी भी होने लगती है। इस रोग से राहत दिलाने के लिए पशु को अकार्डीकल दवा दी चाहती है। 

थनैला रोग और इलाज

थनैला रोग गाय के थनों से जुड़ा हुआ है। इस दौरान पशु के थन का आकार बड़ा हो जाता है और गाय के दूध निकालने का रास्ता छोटा हो जाता है। इसके अलावा दूध के साथ पस और खून भी निकलने लगता है। थनैला रोग का उपचार केवल समय रहते ही किया जा सकता है। पशु को इस रोग से बचाने के लिए समय – समय पर डॉक्टर से दूध की जांच कराएं। 

तिल्ली रोग और इलाज

तिल्ली रोग पशु को खराब खाना पीना देने से होता है। इस रोग के दौरान पशु शरीर से लुक जैसा रक्त बहने लगता है। इसके अलावा पशु को बुखार भी होता है और शरीर भी अकड़ने लगता है। इस रोग का इलाज केवल यही है कि पशु को खाना पीना साफ सुथरा दिया जाए।