गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी, कलनी का देसी उपचार कैसे करें ?

  • खाद्य तेल (जैसे अलसी का तेल) का एक पतला लेप लगाना चाहिए। 
  • साबुन के गाढ़े-घोल का इस्तेमाल एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार करना चाहिए। 
  • आयोडीन को शरीर के ऊपर एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार रगड़ना चाहिये। 
  • लहसुन के पाउडर का शरीर की सतह पर इस्तेमाल करें। 
  • एक हिस्सा एसेन्सियल आयल और दो-तीन हिस्सा खाद्य तेल को मिलाकर रगड़ना चाहिए। 
  • किलनी के लिए होम्योपैथिक ईलाज भी काफी उपयोगी है, इसलिए इसका प्रयोग करना चाहिए। 
  • पाइरिथ्रम नामक वानस्पतिक कीटनाशक भी काफी उपयोगी होता है। 
  • पशुओं की रीढ़ पर दो-तीन मुट्ठी सल्फर का प्रयोग करना चाहिए। 
  • चूना-सल्फर के घोल का इस्तेमाल 7-10 दिन के अंतराल पर लगभग 6 बार करना चाहिये ।
  • किलनी नियंत्रण में प्रयोग होने वाले आइवरमेक्टिन इंजेक्शन के प्रयोग के बाद दूध को कम से कम दो से तीन हफ्तों तक प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। 

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी क्यों होता है और कैसे रोकें ?

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी के लिए कौन सी इंजेक्शन या दवाई देनी चाहिए ?

 

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