यहां पढ़ें विदेशी नस्ल चियानिना गाय की सारी खूबियां

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चियाननिना नस्ल की गाय दुनिया की सबसे भारी गायों की नस्ल में से एक है। इसका उपयोग मुख्य रूप से परिवहन के लिए और साजो सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है। आपको बता दें कि यह एक विदेशी गाय है, जिसका इतिहास इटली से जुड़ा है।

अब यह गाय दुनियाभर के देशों में फैल चुकी है। इसके साथ ही विदेशों से भी इसे निर्यात किया जाता है। चियानिना गाय का न केवल वजन बहुत अधिक होता है। बल्कि इनकी ऊंचाई भी आम लोगों को हैरान कर देती है। यह एक दुधारू गाय तो नहीं है। लेकिन छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

वह इसके दूध से अपनी निजी मांग की पूर्ति कर सकते हैं। इसके साथ ही चियनिना गाय खेत जोतने में भी काम आ सकती है। आज अपने इस लेख में हम आपको चियानिना गाय से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां देंगे। इसके अलावा अगर आप चियानिना गाय को बिना कहीं आए जाए खरीदना या बेचना चाहते हैं, तो आप यह भी हमारी गाय भैंस वाली ऐप यानी Animall App के जरिए कर सकते हैं। आइए आज हम चियानिना गाय के बारे में विस्तार से जानते हैं।

चियानिना गाय की पहचान कैसे करें

चियानिना गाय की पहचान मुख्य तौर पर इनकी ऊंचाई और इनके शरीर को देखकर की जा सकती हैं। आपको बता दें कि चियानिना गाय की ऊंचाई 5 फुट से भी अधिक हो सकती है। चियानिना गाय के पैर लंबे होते हैं और शरीर कम फैट के साथ मजबूत होता है। इस गाय के सींग आकार में छोटे होते हैं और आगे की तरफ बिल्कुल सीधे होते हैं। यह अधिकतर सफेद और स्लेटी रंग की होती है।

इनकी पूंछ घुटनों से ऊपर तक ही रहती है। इसके साथ ही बता दें कि इस गाय के कान बाहर की तरफ सीधे होते हैं और आंखों का रंग काला होता है। चियानिना गाय को लेकर सबसे ज्यादा हैरानी वाली बात यह है कि इनका वजन 800 से 1000 किलो तक होता है। वहीं चियानिना बैल का वजन 1200 से 1500 किलोग्राम होता है। हालांकि चियानिना गाय की ऊंचाई और बनावट देश के हिसाब से कुछ हद तक बदल भी सकती है।

चियानिना गाय का दूध और विशेषताएं

चियानिना गाय बहुत ज्यादा मात्रा में दूध नहीं देती है लेकिन बताया जाता है कि यह गाय कुछ दूध देने की क्षमता रखती है। यह एक बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली गाय है जो लगभग सभी मौसम की मार झेल सकती है। इसके अलावा आपको बता दें कि चियानिना गाय सामान ढोने और खेत जोतने की बेहतरीन क्षमता रखती है। यही कारण भी है जिसकी वजह से इस गाय को छोटे किसानों के लिए फायदेमंद बताया जाता है।

चियानिना गाय की देखरेख कैसे करें

चियानिना गाय की देखभाल करने के लिए कुछ चीजों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले तो गाय को समय – समय पर चारा देते रहें। ज्ञात हो कि इस गाय का वजन और ऊंचाई अधिक है। इसलिए इन्हें अन्य गाय से अधिक आहार की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही गाय के रहने के लिए एक शेड का निर्माण करें। इस शेड में हवा सही तरह से आए – जाए इसका निर्माण कुछ इस तरह से करें। वहीं गाय धूप और बारिश से बची रहे। इस बात का भी खास ध्यान रखें।

चियानिना गाय के लिए टीके

किसान और पशुपालकों के लिए यह जरूरी है कि वह चियानिना गाय को ब्रुसेला जैसे टीके लगवा कर रखें। ज्ञात हो कि ब्रुसेला का टीका गाय को जन्म के 6 महीने बाद ही लगाया जाता है। इसके अलावा चियानिना गाय मुंह खुर और अन्य टीके भी जरूर लगवाएं। अगर आपको यह समझ नहीं आ रहा कि चियानिना गाय को किस तरह के टीके कब – कब लगेंगे, तो इसके बारे में डॉक्टर से बात करें।

चियानिना गाय को होने वाले रोग और उसके उपचार

यूं तो चियानिना एक ऐसी नस्ल है जो एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ जन्मी होती हैं। लेकिन कई बार पशुओं को कुछ रोग लग जाते हैं। ऐसे में इन रोगों से बचे रहने के लिए और इनका उपचार करने के लिए रोग के लक्षणों का पता होना बहुत जरूरी है। इसलिए चलिए अब हम चियानिना गाय को होने वाली बीमारियों पर एक बार नजर डाल लेते हैं।

थनैला बीमारी और इसके उपचार

थनैला रोग यूं तो एक दुधारू गाय को ही होता है। लेकिन कई बार यह उन गायों को भी हो सकता है जो अधिक दूध नहीं देती। आपको बता दें कि इस बीमारी के दौरान गाय के थनों का आकार काफी बड़ा हो जाता है। इसके अलावा दूध निकालने के दौरान थनों से खून तक निकलने लगता है। यही नहीं इस रोग से पीड़ित गाय को एक भयंकर दर्द का भी सामना करना पड़ता है। इसके चलते कई बार पशु खाना पीना भी छोड़ देता है।

थनैला के उपचार का तरीका – यह रोग न केवल पशु को बहुत पीड़ा पहुंचाता है। बल्कि इस रोग की वजह से कई बार पशु के थन तक काटने की नौबत आ जाती है। इस रोग का इलाज केवल तभी हो सकता है। जब थनैला रोग का जल्दी पता चल जाए। थनैला से गाय को बचाने के लिए समय – समय पर दूध की जांच करवाते रहें। वहीं अगर गाय के थनों के आकार में किसी तरह का बदलाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। और पढ़ें

 

तिल्ली बीमारी और इसके उपचार का तरीका

तिल्ली रोग एक ऐसा रोग है जो अमूमन गाय को खराब आहार और पानी की वजह से होता है। यह अचानक होता है और इसके लक्षण भी डरा देने वाले होते हैं। इस रोग के दौरान पशु के शरीर से लुक जैसा खून निकलने लगता है। इसके साथ ही गाय के शरीर का तापमान भी अधिक हो जाता है। इसके अलावा कई बार गाय का शरीर अकड़ने लगता है और उन्हें सांस लेने में भी तकलीफ होने लगती है।

तिल्ली के उपचार – इस बीमारी का कोई ऐसा इलाज नहीं है, जिससे पशु जल्दी ठीक हो जाए। लेकिन अगर पशु को शुद्ध आहार और पानी दिया जाए तो इस बीमारी को पैदा होने से रोका जा सकता है। इसके अलावा यह रोग पशु को होने पर उसे दूसरे पशुओं से दूर बांध देना चाहिए। वहीं पशु की रोग से मौत होने पर उसे दूर कहीं गहरे गड्ढे में दबा देना चाहिए।

 

एनाप्लाजमोसिस और इसके उपचार की प्रक्रिया

यह एक काफी संक्रामक बीमारी है जो आमतौर पर एनाप्लजमा मार्जिलन के कारण फैलती है। इस रोग के दौरान पशु की स्थिति वक्त के साथ बेहद गंभीर होती जाती है। इस रोग में पशु के नाक से एक गाढ़ा तरल बहने लगता है। इसके साथ ही गाय को बुखार भी हो जाता है। वहीं शरीर में कमजोरी और खून की कमी भी होने लगती है।

एनाप्लाजमोसिस के उपचार की प्रक्रिया – इस रोग के दौरान लक्षणों को समझना बेहद जरूरी होता है। स्थिति बिगड़ने पर गाय की मौत भी हो सकती है। अगर गाय में इस तरह के कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं डॉक्टर की राय के बाद ही इस रोग में इस्तेमाल की जाने वाली अकार्डिकल दवा देनी चाहिए।

 

ब्लैक क्वार्टर और इसका उपचार

ब्लैक क्वार्टर एक ऐसा जीवाणु है जो सीधा पशुधन पर असर डालता है। इसका खतरा अधिक उन पशुओं को होता है। जिनकी उम्र 6 महीने से लेकर 24 महीने तक होती है। ज्ञात हो कि रोग का यह जीवाणु बारिश के मौसम में मिट्टी में पैदा होता है। इस जीवाणु के चलते पशु को तेज बुखार हो जाता है और सांस लेने में भी दिक्कत होती है।

ब्लैक क्वार्टर का उपचार – यह उन रोगों में से एक है। जिसका उपचार समय रहते ही संभव है। अगर बीमारी का पता समय पर चल जाए तो उसे पैनसीलिन का टीका दिया जा सकता है। वहीं अगर पशु को घाव गहरा होने पर ड्रेसिंग कराना भी जरूरी हो जाता है। और पढ़ें

 

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

अगर आप घर से कोई भी गाय खरीदना चाहते हैं, तो आप Animall ऐप को डाउनलोड करके ऐसा कर सकते हैं। अपने एंड्रॉयड फोन में यह ऐप डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए विकल्प पर क्लिक करें। Click Here

  1. ऐप डाउनलोड करने के बाद आप इसमें मोबाइल नंबर डालें ।
  2. अब भाषा का चुनाव करें।
  3. अब आप ऐप को इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद पशु खरीदने या बेचने का विकल्प सामने आएगा।
  4. अगर आपको गाय खरीदनी है तो आप गाय के विकल्प को चुनें।
  5. यहां जो भी गाय बिकने के लिए तैयार हैं। आपको इनकी सूची नजर आएगी।
  6. इसके बाद आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प चुनना होगा। अब आपको जो भी गाय ठीक लगे, उसे चुन लें।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी गाय चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  8. अगर आप गाय का दाम कम कराना चाहते हैं तो ऐसा करा सकते हैं। जिन गाय पर मोल भाव संभव है। वहां आपको यह विकल्प मिल जाएगा।

 

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. अगर आप गाय बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। वहां बीचों बीच आपको पशु बेचने का विकल्प दिखाई देगा।
  2. इसके बाद आपको पशु से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसमें गाय की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो अपलोड कर दें।
  3. आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो गया है, जो भी खरीदार आपका पशु लेने में रुचि लेगा, वो आपसे सीधा संपर्क कर पाएगा।

 

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दूध उत्पादन में उस्ताद है जाफराबादी भैंस, जानें इस नस्ल की सारी जानकारी!

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भारत पूरी दुनिया में सबसे बड़ा दूध उत्पादन वाला देश है। जब भारत में दूध देने की बात होती है, तो उसमें भैंस को काफी महत्व दिया जाता है। आज हम आपको भैंस की एक ऐसी ही नस्ल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो काफी ज्यादा मात्रा में दूध देती है। ये खास नस्ल और कोई नहीं बल्कि जाफराबादी भैंस ही है।

जाफराबादी भैंस आमतौर पर गुजरात के भावनगर इलाके में पाई जाती है। हालांकि इसका मूल स्थान गुजरात का जाफराबाद इलाका है, जिसकी वजह से इसका नाम जाफराबादी भैंस पड़ा है। ये भैंस गुजरात के भावनगर, जूनागढ़, अमरेली, पोरबंदर में बहुत बड़ी संख्या में पाली जाती है। 

जाफराबादी भैंस की पहचान

जाफराबादी भैंस का शारी काफी भारी भरकम और लंबा होता है। ये भैंस की सबसे भारी नस्ल है। इसका रंग काला होता है और जाफराबादी का माथा भारी और उठा होता है। इसका मुंह छोटा होता है। अगर बात इसके सींग की करें तो वो चौड़े और गर्दन की तरफ झुके हुए होते हैं। इसके सींग के आगे का हिस्सा गोल छल्लेदार होता है। वहीं इसकी पूंछ के निचले हिस्से में सफेद धब्बे होते हैं। जाफराबादी भैंस लगभग 450 से 500 किलो की होती है।

जाफराबादी भैंस के दूध की जानकारी

आमतौर पर जाफराबादी भैंस एक दिन में 30 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। इसके दूध में फैट की मात्रा भी 7 फीसदी से ज्यादा होता है। इसका दूध काफी अच्छी गुणवत्ता का होता है। दूध का व्यवसाय करने वालों के लिए जाफराबादी भैंस काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

जाफराबादी भैंस को चारे में क्या दें

इस नसल की भैंसों को आहार और आराम दोनों की बहुत ज्यादा जरूरत होती है और इन दोनों चीजों का खास ध्यान रखना होता है। भैंस को आराम देना इसलिए जरूरी है ताकि दूध उत्पादन पर किसी भी तरह का कोई असर ना पड़े। 

वहीं जाफराबादी को देने वाले आहार का भी खास ध्यान रखना होता है। आहार में संतुलन बनाना काफी जरूरी होता है। आहार में दाने और चारे का मिश्रण करना होता है। इस नस्ल की भैंस को उतना ही हरा चारा देना होता है जितना उसकी खुराक के लिए जरूरी है। 

जाफराबादी भैंस का वजन काफी ज्यादा होता है। इसलिए उसकी खुराक भी ज्यादा होती है। आमतौर पर चारे में दाने का हिस्सा 35 फीसदी होता है। इसके अलावा चना, अलसी, मुंगफली खिला सकते हैं। संतुलित आहार के लिए भैंस को कई चीजें दी जाती है। बड़ी दुधारू भैंस को हर रोज 3 से 4 किलो दाना जरूर देना होता है। 

दाने में जाफराबादी को गेहूं, जौ, बाजरा, मक्का दिया जा सकता है। वहीं दाना मौसम के हिसाब से देना चाहिये। इसका सीधा असर दूध पर होता है। 

 

जाफराबादी की देखरेख कैसे करें

शेड की आवश्यकता:

जाफराबादी भैंस को एक शेड में रखने की जरूरत होती है। ताकि भैंस को भारी बारिश, तेज धूप, ठंड, बर्फबारी से बचाया जा सके। इतना ही नहीं शेड में साफ हवा और पानी रहना चाहिये। पशुओं की संख्या के हिसाब से उनके खाने के लिए जगह होनी चाहिये।

गर्भवती जानवरों की देखभाल:

अच्छा प्रबंधन करने से जाफराबादी भैंस के बछड़े अच्छे पैदा होते हैं। साथ ही उनका दूध उत्पादन भी बेहतर होता है। इसके अलावा गर्भवती भैंस को 1 किलो चारा भी ज्यादा देना चाहिए।

कटड़ों की देखभाल और प्रबंधन:

जन्म के बाद नाक या मुंह से कफ को तुरंत हटाना होता है और अगर बछड़ा सांस नहीं ले पा रहा है, तो उसे बनावटी सांस देनी जरूरी होती है। 

 

जाफराबादी भैंस को होने वाली आम बीमारियां और उनका इलाज

भैंसों का गल-घोटू रोग

गल-घोटू रोग भैंसों में होने वाली एक जानलेवा बीमारी है, जो ज्यादातर 6 महीने से लेकर 2 साल के पशु को होती है। गल घोटू रोग का कारण पासचुरेला मलटूसिडा नामक जीवाणु होता है, जो पशु के टांसिल में होता है। इसके अलावा ज्यादा काम का बोझ, खराब पोषण, गर्मी और अन्य बीमारियां जैसे कि खुरपका-मुंहपका रोग होते हैं। ज्यादातर ये बीमारी बारिश के मौसम में होती है। 

गल-घोटू के लक्षण

  •   बुखार होना
  •   मुंह से लार टपकना
  •   आंख और नाक से पानी निकलना
  •   भूख न लगना
  •   पेट दर्द होना और दस्त होना आदि

रोकथाम

  •   गर्मियों के मौसम में पशुओं को इक्ट्ठे और तंग जगह पर ना बांधे।
  •   बीमार पशुओं को बाकी पशुओं से अलग रखें।
  •   मॉनसून आने से पहले ही टीकाकरण करवाएं। पशुओं के पहले टीका 6 महीने की उम्र में और फिर हर साल जरूरी करवाएं।
  •   लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

तिल्ली का रोग (एंथ्रैक्स)

इस बीमारी में सुरती भैंस को काफी तेज बुखार होता है। ये बीमारी आमतौर पर कीटाणु और दूषित पानी या फिर खराब खुराक की वजह से होती है। ये बीमारी अचानक होती है या कुछ समय भी ले सकती है।

लक्षण:

  • इसमें जानवर का शरीर अकड़ जाता है
  • चारों टांगे बाहर को खींची जाती हैं।

रोकथाम: इसका कोई असरदायक इलाज नहीं है। हर साल इसके बचाव के लिए टीके लगवाये जाने चाहिए।

Animall पर कैसे खरीदें भैंस

अगर आप भैंस खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए अब आपको बाजारों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। आप सिर्फ Animall ऐप को डाउनलोड कर ही पसंद की जाफराबादी भैंस घर ले जा सकते हैं। ऐसा करने के लिए सबसे पहले आपको प्ले स्टोर से Animall ऐप को डाउनलोड करना होगा। अपने एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में ये ऐप डाउनलोड करने के लिए आप प्ले स्टोर पर जाएं, या नीचे दिए गए विकल्प पर क्लिक करें। Click Here

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आप अपना मोबाइल नंबर डालें और फिर अपनी जगह को चुनें।
  2. अब आप अपनी मर्जी के मुताबिक ऐप की भाषा चुनें।
  3. अब आप Animall ऐप को इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां पर आपके सामने पशु खरीदने या बेचने का विकल्प आ जाएगा।
  4. अगर आप भैंस खरीदना चाहते हैं तो आपको ऐप पर भैंस के विकल्प का चुनाव करना होगा।
  5. जो भी भैंस बिकाऊ होगी, यहां पर आपको उनकी पूरी लिस्ट मिल जाएगी।
  6. इसके बाद आप पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प देख सकेंगे। आप अपनी जरूरत के मुताबिक पशु की सूची हासिल कर सकेंगे।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी जाफराबादी भैंस का चुनाव कर सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  8. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं और भैंस से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. वहीं अगर आप जाफराबादी भैंस बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। वहां बीचों बीच में आपको पशु बेचने का विकल्प भी दिखाई देगा।
  2. यहां पर क्लिक करने के बाद आपको पशु से जुड़ी सारी जानकारी डालनी होगी। जैसे की भैंस कौनसी नस्ल की है, ब्यात, भैंस की कीमत, दूध देने की क्षमता और फोटो भी अपलोड करनी होगी।
  3. इसके बाद आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो जाएगा। जिसके बाद जो भी खरीदार होगा वो आपसे सीधा संपर्क कर सकता है और आप अपना पशु बेच सकते हैं।

Animall ऐप जहां आपको बिना किसी कमीशन के पशु बेचने और खरीदने का विकल्प देता है। साथ ही आपको पशु से जुड़ी सारी जानकारी भी ऐप पर ही मिल जाएगी। वहीं अगर आपका पशु बीमार हो जाता है तो उसके लिए ऐप पर डॉक्टर से बात भी कर सकते हैं। और पढ़ें

 

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थारपारकर गाय के बारे में जानें सारी बातें

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भारत में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों में से एक थारपारकर गाय है। गाय की ये नस्ल राजस्थान में जोधपुर और जैसलमेर जिलों में पाई जाती है। हालांकि इस नस्ल की उत्पत्ति “मालाणी” (बाड़मेर) में हुई थी। इसी वजह से स्थानीय लोग इसे “मालाणी” के नाम से भी जानते हैं। इसे ग्रे सिंधी, वाइट सिंधी और थारी के नाम से भी जाना जाता है।

थारपारकर गौवंश के साथ प्राचीन भारतीय परम्परा की भी एक कहानी है। इस गाय के स्वरूप को देखकर कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पास यही गाय थी, जो अब पश्चिमी राजस्थान की ‘कामधेनु’ कहा जाता है। 

थारपारकर गाय की पहचान

थारपारकर नस्ल की गाय को दूर से ही पहचाना जा सकता है। इस गाय का रंग राख जैसा होता है। इसका सिर मध्यम आकार का होता है और माथा काफी चौड़ा होता है। इसके सींग कानों की तरफ मुड़े हुए मध्यम लंबाई के होते हैं। इसके कान लंबे चौड़े होते हैं और कान के अंदर की त्वचा हल्की पीली होती है। इसकी पूंछ लंबी, पतली होती है। इसकी ऊंचाई साढ़े तीन से पौने चार फीट के करीब होती है। थारपारकर का वजन लगभग 400 किलोग्राम का होता है।

थारपारकर गाय के दूध की जानकारी

शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम होने के साथ ही सबसे कम खर्च में काफी अच्छी मात्रा में दूध दे देती है। थारपारकर गाय एक ब्यात में 1600 से 2500 लीटर तक दूध दे सकती है। इस गाय के दूध में फैट 4.88 फीसदी होता है।

थारपारकर गाय दूध देने की क्षमता में तो बेहतर है ही साथ ही इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी अच्छी होती है। थारपारकर गाय का विकास कांकरेज, सिन्धी और नागोरी नस्लों से किया गया है। इस नस्ल के बैल भी काफी मेहनती होते हैं। ये जानवर सूखे और चारे की कमी की स्थिति के दौरान छोटे जंगली वनस्पतियों पर भी फल-फूल सकते हैं।

थारपारकर गाय की विशेषताएं

इस नस्ल की गाय 45 डिग्री से ज्यादा के तापमान में भी रह सकती है। इस गर्मी में भी थारपारकर अच्छी मात्रा में दूध दे सकती है। जहां तापमान बढ़ने की वजह से अन्य गायों में दूध देने की क्षमता कम होने लगती है तो वहीं थारपारकर इन विपरीत परिस्थितियों में भी ज्यादा दूध देने में सक्षम है। इस नस्ल की उम्र आमतौर पर 25-30 साल होती है। और इनकी बच्चा देने की क्षमता भी बाकी नस्लों से बेहतर होती है।

ऐसा नहीं है कि थारपारकर सिर्फ गर्मी में ही बेहतर दूध देती है, ये 0 डिग्री के तापमान में भी अच्छे से रहती है। क्योंकि ये नस्ल इतनी विपरीत परिस्थितियों में रह सकती है, जिस कारण ये अलग अलग इलाकों में आराम से पाली जा सकती है।

थारपारकर गाय की देखरेख कैसे करें

गाय को सर्दी, गर्मी, बारिश से बचाने के लिए एक शेड की जरूरत होती है। इस बात का खास ध्यान रकें की शेड में साफ सफाई बनी रहे और पानी की भी उचित सुविधा हो। इसके साथ ही पशुओं के खाने के लिए भी वहां पर उचित व्यवस्था होनी चाहिए। 

एक बछड़े के पैदा होने पर उसका खास ध्यान रखें। उसके जन्म के वक्त मुंह, नाक और शरीर को अच्छे से साफ करें। जन्म के बाद अगर बछड़े को सांस लेने में परेशानी हो रही है तो दबाव द्वारा बनावटी सांस दें। इसके अलावा, बछड़े की छाती को अच्छी तरह से दबाएं।

कौन सा टीका लगाना चाहिए

बछड़े को जन्म के 6 महीने बाद ब्रूसीलोसिस का पहला टीका लगवाएं। इसके एक महीने बाद गलघोटू, मुंह और खुर पका का टीका लगवाएं। इन टीकों को लगवाने के एक महीने बाद लंगड़े बुखार का टीका लगवाएं। बड़े पशुओं को हर तीन महीने के अंतराल पर डीवॉर्मिंग करना चाहिए।

चारा में क्या दें

ये गाय सूखे और चारे की कमी की स्थिति के दौरान छोटे जंगली वनस्पतियों पर भी फल-फूल सकते हैं। अगर इसको आहार के रूप में कम और सूखा चारा मिले तो ये उसमें भी दूध उत्पादन कर सकती है लेकिन अच्छे चारे से इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। 

इसे  मक्का, गेहूं, जौं, बाजरा, ज्वार, जई की चोकर, तिल, मूंगफली, सरसों दे सकते हैं। वहीं हरे चारे के रूप में बरसीम रिजका, लोबिया, जई, मक्की, ज्वार, बाजरा, नेपियर घास दे सकते हैं। जबकि सूखे चारे के रूप में बरसीम की सूखी घास, रिजका की सूखी घास, जई की सूखी घास दिया जा सकता है। हालांकि गाय को चारा उसकी जरूरत के हिसाब से ही देना होगा। और पढ़ें

  थारपारकर को होने वाली बीमारियां

बदहजमी: गाय को जल्द पचने वाला खाना दें, ताकि उसे बदहजमी ना हो।

कब्ज: अगर पशु को बार-बार कब्ज हो रही है तो उसे 800 ग्राम मैगनीशियम सल्फेट पानी में घोलकर और 30 ग्राम अदरक का चूरा मुंह के जरिये दें।

अनीमिया: अनीमिया की बीमारी होने पर गाय की मासपेशियों में कमजोरी होने लगती है, तनाव होने लगता है। इसके इलाज के लिए खाने में विटामिन ए, बी, ई की मात्रा बढ़ाएं।

रिंडरपैस्ट (शीतला माता): ये गाय में होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है। इस बीमारी को होने में 6 से 9 दिनों का वक्त लगते हैं। इसमें तेज बुखार, मुंह से पानी बहना और खूनी दस्त लग जाते हैं। इसका पेंसीलिन से इलाज किया जा सकता है।

निमोनिया: गाय को ये बीमारी गीले फर्श से होती है। इसमें ध्यान रखना होता है कि जिस जगह पर गाय को रखा जाए वो सूखी होनी चाहिये।

थनैला: थनैला रोग में थारपारकर के थन गर्म होने लगते हैं और उसमें दर्द, सूजन होने लगती है। इसके अलावा दूध में खून और पस होने लगती है। इसका इलाज शुरुआत में ही संभव है, जब बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है तो थन बचाना काफी मुश्किल हो जाता है। और पढ़ें

 

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

अगर आप घर बैठे – बैठे कोई भी गाय खरीदना चाहते हैं तो आप Animall ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। अपने एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में यह ऐप डाउनलोड करने के लिए आप प्ले स्टोर पर जाएं, या नीचे दिए गए विकल्प  पर क्लिक करें। Click Here

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आपको इसमें मोबाइल नंबर डालें और अपनी जगह का चुनाव करें।
  2. अब आप ऐप की भाषा का चुनाव करें।
  3. इसके बाद आप ऐप को पूरी तरह इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं और यहां पर आपके सामने पशु खरीदने या बेचने का विकल्प आएगा।
  4. अगर आपको गाय खरीदनी है तो आप गाय के विकल्प का चुनाव करें।
  5. यहां आपको जो भी गाय बिकाऊ है, उनकी सूची दिख जाएगी।
  6. इसके बाद आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प दिखाई देंगे। इसमें आप अपनी जरूरत के हिसाब से पशु की सूची हासिल कर सकेंगे।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी गाय चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  8. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं और गाय से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. अगर आप गाय बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। वहां बीचों बीच आपको पशु बेचने का विकल्प दिखाई देगा।
  2. यहां क्लिक करने के बाद आपको पशु से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसमें गाय की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो अपलोड कर दें।
  3. आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो गया है, जो भी खरीदार आपका पशु लेने में रुचि लेगा, वो आपसे सीधा संपर्क कर सकेगा।

आप Animall ऐप पर सिर्फ पशु खरीद या बेच ही नहीं बल्कि उनके अच्छे स्वास्थ्य के बारे में जानकारी भी ले सकते हैं। पशु बीमार होने पर आप डॉक्टर की मदद भी ऐप के जरिये ले सकते हैं।

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अमेरिकन गाय- दूध ही दूध के लिए इस नस्ल को खरीदें

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पहले श्वेत क्रांति के समय अमेरिका से आई ये नस्लें  हिंदुस्थान में धूम मचा रही हैं।  गायों में सबसे दूधारू नस्ल में इसकी गिनती की जाती है। जर्सी, एच एफ, ब्राउन स्विस, आयर शायर जैसी नस्लें अमेरिका से भारत आई। इन अमेरिकन गायों ने किसानों के दूध उत्पादन को दोगुना कर दिया। जहां देसी नस्ल की गायें प्रतिदिन 10 से 15 लीटर दूध निकाल पाती थीं। अमेरिकन गायों ने प्रतिदिन 20 से 25 लीटर दूध देना शुरु कर दिया

अमेरिकन गाय की पहचान क्या है?

इन गायों की सबसे बड़ी पहचान दूध क्षमता है। ठंडी, गर्मी या हो बरसात हर मौसम में अमेरिकन गायें 20 से 25 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। 10 से 15 सालों तक अमेरिकन गाय दूध देती हैं। 

अमेरिकन गाय के दूध की जानकारी

इन गायों की सबसे बड़ी पहचान दूध क्षमता है। ठंडी, गर्मी या हो बरसात हर मौसम में अमेरिकन गायें 20 से 25 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। 10 से 15 सालों तक अमेरिकन गाय दूध देती हैं।  Animall ऐप पर पहले, दुसरे और तीसरे ब्यात की बेहतरीन अमेरिकन  गायें खरीद बिक्री के लिए उपलब्ध रहती है। अमेरिकन गाय के दूध में 4 से 5 प्रतिशत फैट पाया जाता है। मात्र एक फ़ोन कॉल पर गाय-भैंस वाला Animall ऐप से शानदार अमेरिकन गायें खरीद सकते है ।

अमेरिकन गाय की देखरेख कैसे करें

दुधारू अमेरिकन गाय को ये पशु आहार दें

अमेरिकन गाय की क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए 40 से 50 किलोग्राम हरा चारा और 3 किलो दाना प्रति किलोग्राम दूध देने के लिए दें। जब पशु आहार में प्रोटीन, वसा और खनिज लवन मिलता है तो दूध में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

गाभिन अमेरिकन गाय को ये पशु आहार दें

एक 250 किलोग्राम वजन के गाय को एक दिन में कितना पशु आहार दें। 

भूसा – 4 किलो
दाना मिश्रण – ढाई किलो 

चारा बाँट कर दिन में 3-4 बार खिलाएं। साथ में दाना मिश्रण भी 2 बार बराबर मात्रा में खिलाएं। हरा और सूखा चारा दोनों मिलाकर खिलाएं। चारा के दाना मिश्रण के अलावा प्रतिदिन 35- 40 लीटर पानी गाय को जरुर पिलायें।

अमेरिकन गाय को होने वाली बीमारियां

स्वस्थ अमेरिकन गायों के ये जरुरी लक्षण

स्वस्थ पशुओं की आंखें चमकीली होती हैं। इसमें किसी भी तरह के तरल पदार्थ जैसे पानी या खून के धब्बे नजर नहीं आते। स्वस्थ अमेरिकन  गायें  बहुत ज्यादा खांसती  नहीं हैं, घर्राने की आवाजें भी नही आती है। इसमें सांस लेने की प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य होती है। आपको स्वस्थ्य अमेरिकन गाय का चमड़ा भी चमकदार दिखाई देगा, शरीर पर कही से भी जूं-चीचड़ नहीं दिखाई देगा। स्वस्थ पशु के चलने-फिरने या उठने-बैठने में परेशानी नहीं होती है।

ब्रुसेला बीमारी से अपनी अमेरिकन नस्ल की गायों को ऐसे दूर रखें.

अमेरिकन गायों में ब्रुसेला बीमारी के क्या लक्षण हैं?

पशुपालक साथी अभी हम आपको अमेरिकन नस्ल के गायों में होने वाले ब्रुसेला बीमारी के लक्षण के बारे में बताने जा रहे हैं। अगर आपकी अमेरिकन  गाय इस बीमारी से ग्रसित है तो उसे बुखार की शिकायत रहेगी। उस गाय का वजन भी लगातार कम होता जायेगा। रात में गाय को पसीना भी आएगा। अगर आपकी गाय को ये सारे लक्षण दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से बात करें।

कैसे बचायें ब्रुसेला से

घर की सभी अमेरिकन नस्ल की गायों को ब्रुसेला का टीका लगायें। अगर अमेरिकन नस्ल की गाय ने बछड़ी को जन्म दिया है तो पैदा होने के 6 महीने बाद ब्रुसेला बीमारी का टीका लगायें। ब्रुसेला एक जानलेवा बीमारी है, जो मनुष्यों से गायों में फैलता है। इसकी चपेट में आने पर गायें तुरंत बीमार हो जाती हैं। भारत में ही बने टीका  ब्रुसेला S-19  पशुओं को  लगाया जाता है।

अमेरिकन गायों में होने वाले सर्रा बीमारी की सारी जानकारी जान  लीजिये

यह एक परजीवी से होने वाला रोग है। ट्रिपैनोसोमा ईवांसी नामक सूक्ष्म परजीवी से ये बीमारी फैलता है। इस बीमारी के फैलने से पशुओं की उत्पादन क्षमता में भारी कमी आती है। तुरंत ही पशुओं की मृत्यु हो जाती है जिससे पशुपालकों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। सबसे पहले साल 1885 में सर्रा बीमारी को देखा गया था।

मान लीजिए अगर कोई पशु सर्रा बीमारी से ग्रसित है अगर मक्खी उसका खून चूसकर स्वस्थ पशु को काट लेगा तो उसे ये बीमारी फ़ैल जाएगी। पशु विज्ञान में सर्रा रोग के लिए जिम्मेदार मक्खी को टेबनेस मक्खी कहते हैं। भारत में पशुओं को काटने वाले मक्खी को लोग डांस मक्खी के नाम से जानते हैं।

अमेरिकन गाय में सर्रा रोग के क्या लक्षण हैं ?

आपके अमेरिकन गाय को रुक रुक कर बुखार आएगा। वो बार बार पेशाब करेगी। इतना ही नहीं आपकी अमेरिकन गाय गोल गोल चक्कर भी काटने लगेगी। सर्रा बीमारी से ग्रसित आपकी अमेरिकन गाय को भूख भी कम लगेगा। गाय के मुंह से लार गिरने लगेगा । उसके आंख और नाक से पानी गिरने लगेगी।

सर्रा बीमारी से ग्रसित आपके दुधारू अमेरिकन गाय का दूध कम हो जायेगा। वो धीरे-धीरे कमजोर होते चली जाएगी। कई बार गायों का पिछला भाग लकवाग्रस्त हो जाता है। अगर कोई अमेरिकन गाय इस बीमारी से ग्रसित है तो आँखों में सफेदी आने लगता है। उस पशु के निचले भाग में भी सूजन आने लगता है।

अमेरिकन गाय को थनैला रोग से बचाने के लिए ये कदम उठायें

पशुओं के बांधे जाने वाले स्थान और दूध दुहने के स्थान की सफाई का विशेष ध्यान रखें। दूध दुहने की तकनीक सही होनी चाहिए जिससे थन को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे। थन में किसी प्रकार की चोट (मामूली खरोंच भी) का तुरंत इलाज कराएं। थन का उपचार दुहने से पहले व बाद में दवा के घोल में (पोटेशियम परमैगनेट 1:1000 या क्लोरहेक्सिडीन 0.5 प्रतिशत) डुबो कर करें। दूध की धार कभी भी फर्श पर न मारें। रोगी पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें तथा उन्हें दुहने वाले भी अलग हों। अगर ऐसा संभव न हो तो बीमार  पशु का दूध सबसे बाद में निकालें। समय-समय पर दूध की जाँच करवाते रहें। अगर थनों में सुधार न दिखें तो पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।

कुछ ही मिनटों में अमेरिकन गाय को Animall ऐप से कैसे खरीदें?

Animall ऐप पर अपने आसपास की ढेर सारी अमेरिकन गाय खरीद सकते हैं। अमेरिकन   गायों की खरीदारी करने के लिए अपने मोबाइल फ़ोन में गाय-भैंस वाला Animall ऐप डालें। ऐप में अपन मोबाइल नंबर दर्ज करा कर गाय पर दबाएँ। दबाते  ही आप ढेर सारी गायों के नस्ल के नाम देख पाएंगे । यहाँ अमेरिकन  नस्ल  चुने और अपने घर मनचाहे ब्यात और दूध क्षमता वाली गाय ले जायें। 

इन तीन आसान तरीकों से खरीदे नयी अमेरिकन गाय ।

  1. अपने गाँव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।
  2. पिनकोड डालने के बाद  गाय  पर दबाएँ । यहाँ अमेरिकन का चयन करें । क्लिक करने  के बाद  यहाँ आप नस्ल के साथ साथ अपने मन के अनुसार दूध क्षमता और ब्यात का का चुनाव भी कर सकते है।
  3. अब आपको अपने आसपास की सारी  दुधारू अमेरिकन  नस्ल गाय दिखने लगेंगी । इनमे से अपने पसंद का पशु चुनकर ख़रीदार से बात करें और  घर ले जायें नया पशुधन।

आपको अपनी अमेरिकन गाय बेचनी है ?  Animall ऐप पर  ऐसे अपना पशु बेचें।

इन सरल तरीकों को अपनाकर अमेरिकन गाय Animall ऐप पर बेचें। ऐसे Animall ऐप से तुरंत अमेरिकन गाय बेचें। ऊपर लिखे गये तरीके से Animall ऐप में खुद को रजिस्टर कर लें। इसके बाद पशु बेचें पर दबाएँ। इस बटन पर दबाते ही आप अमेरिकन गाय की दूध क्षमता, ब्यात और कीमत लिख सकते हैं। अपने अमेरिकन   गाय की  सभी जानकारियाँ डालने के बाद आपका पशु ऐप पर दर्ज हो जायेगा।  मुबारक हो, आपकी अमेरिकन गाय ऐप पर दर्ज हो गया है। अब ख़रीदार आपको गाय  के लिए कॉल करेंगे। और पढ़ें

 

 

 

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वेचुर गाय से जुड़ी सारी जानकारी यहां पढ़ें!

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क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसी नस्ल की गाय है, जो गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सबसे छोटी नस्ल के रूप में दर्ज है। इस नस्ल का नाम वेचुर गाय है। दरअसल भारत में केरल राज्य के कोट्टायम जिले में वेचुर गाय की नस्ल को विश्व की सबसे छोटी नस्ल कहा गया है। इस नस्ल की गाय का नाम केरल के कोट्टायम जिले में पड़ने वाले गांव वेचुर पर रखा गया। ये एक दुर्लभ नस्ल है।

इस पशु की औसत लंबाई 124 सेमी (लगभग 4 फीट और 1 इंच) होती है और वहीं इसकी ऊंचाई भी 87 सेमी (लगभग 2 फीट और 10 इंच) होती है। वेचुर गाय दूध उत्पादन में भी काफी बेहतर मानी जाती है। और पढ़ें


वेचुर गाय की पहचान कैसे करें

वेचुर गायों की शारीरिक बनावट आमतौर पर काफी अलग होती है। ये बाकी गायों की तुलना में काफी अलग होती है। इस नस्ल की गाय की लंबाई लगभग 124 सेमी और ऊंचाई 85 सेमी होती है। जबकि इसका वजन लगभग 130 किलो होता है।

ये हल्के लाल, काले और सफेद रंगों की मिलावट होने की वजह से बेहद ही आकर्षित लगती हैं। इन गायों का सिर लंबा और संकरा होता है और वहीं इनकी पूंछ लंबी और कान सामान्य पर खूबसूरत होते हैं। इन गायों के सींग पतले, छोटे और नीचे की ओर मुड़े हुए होते हैं।

इन्हीं विशेषताओं के कारण वेचुर गाय को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्डस में सबसे छोटे कद की गाय के रूप में शामिल किया गया है। इस नस्ल के प्रजनन क्षेत्र केरल के अलप्पुझा, कन्नूर, कोट्टायम और कासरगोड जिले हैं। और पढ़ें

 

वेचुर गाय के दूध से जुड़ी जानकारी

वेचुर गाय का दूध काफी बेहतर गुणवत्ता का होता है। इसका उपयोग केरल में परंपरागत रूप से दवाईयां बनाने में किया जाता है। क्योंकि इस नस्ल के दूध में काफी ज्यादा औषधीय गुण पाए जाते हैं। वहीं अगर बात करें कि वेचुर गाय दूध कितना देती है, तो ये गाय बहुत ज्यादा दूध नहीं देती है। ये गाय रोजाना का आमतौर पर लगभग 2 से 3 लीटर तक ही दूध प्रदान करती हैं।

लेकिन वेचुर गाय को बाकी गाय की नस्लों की तुलना में बहुत ही कम खर्च में पाला जाता है। क्योंकि ये काफी कम चारे में ही पल जाती है। इन गायों के दूध में 4.5 से 6 फीसदी तक फैट होता है। पहले ब्यात के समय इन गायों की आयु तीन साल होती है। क्योंकि ये दूध कम देती हैं इसलिए दूध का व्यवस्या करने वाले लोग इसे कम ही पालते हैं।

वेचुर गाय की खासियत

इस नस्ल की गायों पर जहां रोग बहुत कम ही असर करते हैं इन गायों के दूध में सबसे अधिक औषधीय गुण भी होते हैं। इतनी विशेषताओं की वजह से इन्हें पालना मुश्किल नहीं होता है। क्योंकि ये बेहद ही कम खर्चीली होती है। आप इस तरह से मान सकते हैं कि ये सिर्फ इतना ही खर्च करवाती है जितना एक बकरी करवाती है। और पढ़ें

 

वेचुर गाय की देखरेख कैसे करें

वेचुर गाय की देखभाल करने के लिए आपको एक साफ शेड की जरूरत होती है। शेड होने के कारण पशु को गर्मी, ठंड, बारिश के कारण किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। इसके अलावा शेड में आपको पशु के लिए साफ पानी और साफ हवा की जरूरत होगी।

इसके अलावा वेचुर कम चारा खाती है, इसलिए उसे ठीक से संतुलित आहार ही दें। आप अपने पशु को फलीदार चारा देने से पहले उसमें तूड़ी और अन्य चारा जरूर मिला लें।

वेचुर गाय को लगने वाले टीके 

किसान और पशुपालकों के लिए ये बेहद जरूरी है कि वो वेचुर गाय को ब्रुसेला जैसे टीके ठीक समय पर लगवा दें। ब्रुसेला का टीका गाय को जन्म के 6 महीनों के बाद ही लगाया जाता है। इसके अलावा वेचुर गाय को मुंह खुर और अन्य टीके भी जरूर लगवाएं। और पढ़ें

 

वेचुर गाय को होने वाली बीमारियां और उनके रोकथाम

हालांकि वेचुर गाय की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी होती है। उसे बहुत ज्यादा बीमारियां नहीं होती है। लेकिन फिर भी उसका सही तरीके से ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में वेचुर गाय को होने वाली कुछ आम बीमारियों के बारे में जानते हैं।

  1. बदहजमी- गाय को बदहजमी की तकलीफ तब होती है जब उसे खाने में ऐसी चीज दी जाए, जिसे पचने में ज्यादा वक्त लगता हो। इस परेशानी से बचाने के लिए वेचुर गाय को हल्का चारा ही दें।
  2. कब्ज – कब्ज की समस्या होने में वेचुर गाय को मल त्यागने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर आपके पशु को भी ये परेशानी हो रही है तो उसे अलसी के 500 एमएल तेल को चारे में मिलाकर दें। इसके अलावा ध्यान रखें की पशन को पीने के लिए पानी की मात्रा सही मिले।
  3. थनैला – थनैला एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी दुधारू पशु को हो सकती है। इससे बचने के लिए आपको साफ-सफाई का खास ध्यान रखना होता है। साथी ही ये ध्यान देना होता है कि पशु के थनों में किसी तरह का इंफैक्शन न हो। ऐसा होने की स्थिति में पशु को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआती समय में तो इसका इलाज मुमकिन है, लेकिन अगर सही वक्त पर इलाज नहीं करवाया तो थन बचाना मुश्किल हो जाता है। और पढ़ें

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

अगर आप भी घर बैठे एक वेचुर गाय खरीदना चाहते हैं या फिर आप अपना पशु बेचना चाहते हैं, तो उसके लिए अब आपको इधर-उधर धक्के नहीं काटने पड़ेंगे। आपको सिर्फ अपने स्मार्ट फोन में Animall ऐप को डाउनलोड करना है। ऐप डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। Click Here

  1. ऐप डाउनलोड करने के बाद आप इसमें मोबाइल नंबर डालें  और जगह का चुनाव करें।
     
  2. अब आप जिस भाषा में ऐप इस्तेमाल करना चाहते हैं, वो भाषा चुनें
     
  3. आपकी ऐप इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। अब बिना किसी देरी के पशु खरीद या बेच सकते हैं। दोनों ही विकल्प आपको ऐप में नीचे की तरफ देखने को मिल जाएंगे।
     
  4. आप अगर गाय खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए गाय के विकल्प को चुनें।
     
  5. जैसे ही आप गाय के विकल्प को चुनेंगे, आपको एक सूची दिखने लगेगी। ये उन पशुओं की सूची जो बिकाऊ है। 
  6. आप इस सूची में अपनी जरूरत के मुताबिक दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प को चुन सकते हैं। और अपनी पसंद की गाय चुन सकेंगे।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी गाय चुनते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं। यहां तक की आप बात करने के साथ-साथ उस व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं।

कैसे बेचें Animall ऐप पर पशु

  1. अगर आप गाय बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप में ठीक नीचे देखेंगे। तो वहां पर बीचों बीच आपको पशु बेचने का विकल्प दिखाई देगा।
     
  2. इसके बाद आपको पशु से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी। इसमें आपको अपनी गाय की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो अपलोड करनी होती है।
     
  3. आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो गया है, जो भी खरीदार आपका पशु लेने में रुचि लेगा, वो आपसे सीधा संपर्क कर सकता है और आप उसे अपना पशु आसानी से बेच सकते हैं। 

Animall ऐप पर आप पशु खरीदने और बेचने के साथ-साथ, उनसे जुड़ी हर तरह की जानकारी भी ले सकते हैं। इतना ही नहीं पशु के बीमार होने की स्थिति में आप डॉक्टर से भी आसानी से बात कर सकते हैं। और पढ़ें

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