मानसून में रोगी पशु की देखभाल का तरीका और जरूरी सावधानियां।

ऐसा अक्सर कहा जाता है कि इलाज से बेहतर बचाव है। ये बात इंसानों पर ही नहीं  बल्कि अन्य जीवों  पर भी लागू होती है। इंसान तो अपनी समझ के मुताबिक रोग से बचाव और इलाज दोनों ही करा लेते हैं। लेकिन  पशु ऐसा करने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में इस बात की पूरी जिम्मेदारी पशुपालकों के सिर पर होती है। वहीं जब मौसम बदलता है तो पशु के रोग की चपेट में आने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

ऐसे में अगर पशु रोग की चपेट में आ गया है, तो पशु  की देखभाल करने के लिए कुछ जरूरी इंतजाम करने अनिवार्य हो जाते हैं। आज हम अपने इस लेख और वीडियो के जरिए पशुपालक भाइयों को इसी दुविधा का अंत करने वाले हैं। हमारे इस लेख में हम बताएंगे कि एक रोगी पशु की देखभाल में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अगर आप इस तरह की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख पर अंत तक बने रहें। 

मानसून में पशु को होने वाले रोग

मानसून के दौरान पशु खुरपका मुहंपका, लंगड़ा बुखार थनैला, दाद खाज खुजली जैसे कई रोगों से संक्रमित हो जाते हैं। ऐसे में रोगी पशु की देखभाल कैसे करनी चाहिए और इस दौरान किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए। ये आपको पता होना चाहिए।

मानसून में रोगी पशु की देखभाल का तरीका

  • मानसून  में अगर पशु किसी भी रोग की चपेट में आ जाए तो ऐसे में सबसे पहले पशुपालकों को पशु के स्वस्थ पशुओं से दूर बांधना चाहिए और रोगी पशु के खानपान की व्यवस्था अलग से करनी चाहिए। 
  • इसके अलावा पशु को कौन सा रोग हुआ है या वो किस तरह की जीवाणुओं से संक्रमित है। इसके बारे में पता करना चाहिए।
  • इसके लिए पशुपालक भाई किसी डॉक्टर या जानकार की सलाह ले सकते हैं। 
  • एक बार पता चल जाए कि पशु को कौन सा रोग हुआ है तो पशुपालक भाई को इससे संबंधित उपचार प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। 
  • इसके अलावा पशुपालक भाई चाहे तो उपचार प्रक्रिया के साथ घरेलू उपाय भी आजमा सकते हैं। 
  • मानसून के दौरान अगर पशु रोग की गिरफ्त में आ गया है तो पशुपालक भाइयों को कुछ अन्य काम भी करने होंगे। 
  • इसमें सबसे पहला है कि पशु को बारिश से बचाए रखने के लिए एक सही शेड में रखें। 
  • पशु के आस पास गीला या गंदगी बिल्कुल भी न रहने दें. 
  • पशु को सही समय और सही मात्रा में हरा चारा और सूखा चारा दें। 
  • पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हो जाए इसके लिए प्रोटीन, विटामिन सी, जिंक युक्त आहार खिलाएं। 
  • पशु को समय – समय पर डॉक्टर को दिखाते रहें।  
  • पशु को पीने का पानी समय – समय पर देते रहें। 
  • मानसून के दौरान पशु को नीम के पानी से नहलाना चाहिए। 
  • पशु को थनैला जैसा रोग होने पर उसके दूध का उपयोग न करें। 

मानसून के दौरान कुछ अन्य बातों का ध्यान जरूर रखें। 

  • स्वस्थ पशु को रोगी पशु के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए। 
  • रोगी पशु का झूठा आहार या पानी स्वस्थ पशु को नहीं देना चाहिए। 
  • पशुओं को इस दौरान खुले में चरने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। 
  • पशुओं का मानसून से पहले टीकाकरण करवा लेना चाहिए। 
  • मानसून से पहले पशुशाला की मरम्मत करा लेनी चाहिए। 
  • बारिश का पानी और अन्य कचरा पशुओं के आस पास एकत्रित न हो इसका ख्याल रखना चाहिए। 
  • अगर पशु को रोग किसी चोट की वजह से हुआ है तो पशु के घाव का इलाज कराएं।

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