दूध उत्पादन के लिए केंद्र सरकार की क्या क्या योजनाएं है ?

दूध उत्पादन के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी कई योजनाओं को संचालित किया जा रहा है। इसके लिए दुग्ध उत्पादकों को कई तरह के अनुदान दिए जाते हैं। डेयरी एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट स्कीम के तहत दुग्ध उत्पादन करने वालों को वित्तीय सहयोग किया जाता है। यह वित्तीय सहयोग छोटे किसानों तथा भूमिहीन मजदूरों को प्रमुख रूप से दिया जाता है। डेयरी इंटरप्रेन्योर शिप डवलपमेन्ट स्क्रीम भारत सरकार की योजना है, इसके तहत डेयरी और इससे जुड़े दूसरे व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

इसके तहत छोटे डेयरी फार्म खोलने, उन्नत नस्ल गाय अथवा भैस की खरीद के लिए 5 लाख रूपये की सहायता की जाती है। यह राशि दूध खरीद दुधारू मवेशी के लिए दी जाती है। दूध उत्पादन में रोजगार इसके अलावा जानवरों के मल में जैविक खाद बनाने के लिए एक यूनिट की व्यवस्था करने के लिए 20,000 की मदद मिलती है।

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पशुओं में दूध की मात्रा को कैसे बढाएं ?

कई लोग अपने गाय और भैंसों से अधिक दूध प्राप्त करने के लिए टीके आदि का सहारा लेतें हैं, यह पहले कारगर तो साबित होता है लेकिन कई बार इसका प्रभाव विपरीत भी पड़ जाता है.
किसान भाइयों आज हम इस लेख के माध्यम से आपको एक ऐसे रामबाण घरेलू उपाय के बारे में बताएंगे जो गाय और भैंस का दूध बढाने में कारगर साबित होता है. उपाय बहुत सरल है और आपको बहुत ही जल्द इसके नतीजे भी मिलने लगेंगे.
सामग्री :- इसको बनाने के लिए निम्न चीजों की आवश्यकता पड़ती है…
250 ग्राम गेहू दलिया,
100 ग्राम गुड सर्बत (आवटी),
50ग्राम मैथी,
1 कच्चा नारियल,
25-25 ग्राम जीरा व अजवाईन आदि.
उपयोग:-
1- सबसे पहले दलिये, मैथी व गुड़ को पका ले, बाद मे उसमे नारियल को पीसकर डाल दे. ठण्डा होने पर खिलाये.
2- ये सामग्री 2 महीने तक केवल सुबह खाली पेट ही खिलाये.
3- इसे गाय को बच्चा देने से एक महीने पहले शूरू करना और बच्चा देने के एक महीने बाद तक देना.
4- 25-25 ग्राम अजवाईन व जीरा गाय के ब्याने के बाद केवल 3 दिन ही देना. बहुत अच्छा परिणाम ले सकते हैं.
5- ब्याने के 21 दिन तक गाय को सामान्य खाना ही दे.
6- गाय का बच्चा जब 3 महीने का हो जाय या जब गाय का दूध कम हो जाये तो उसे 30 gm/दिन जवस औषधि खिलाये दूध कम नही होगा।
रोग – दूधारू गाय व भैंस का दूध बढ़ाने के उपाय ।
औषधि – 200 से ३०० ग्राम सरसों का तेल , 250 ग्राम गेहूँ का आटा लेकर दोनों को आपस में मिलाकर सायं के समय पशु को चारा व पानी खाने के बाद खिलायें इसके बाद पानी नहीं देना है ओर यह दवाई भी पानी के साथ नहीं देनी है। अन्यथा पशु को खाँसी हो सकती है । पशु को हरा चारा व बिनौला आदि जो खुराक देते है वह देते रहना चाहिए । 7-8 दिनों तक खिलाए फिर दवा बन्द कर देनी चाहिए।

दूध में फैट और SNF कैसे बढाएं ?

 

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दुधारू पशुओं मे बांझपन का कारण और उपचार क्या है ?

पशुओं में बांझपन – कारण और उपचार

भारत में डेयरी फार्मिंग और डेयरी उद्योग में बड़े नुकसान के लिए पशुओं का बांझपन ज़िम्मेदार है. बांझ पशु को पालना एक आर्थिक बोझ होता है और ज्यादातर देशों में ऐसे जानवरों को बूचड़खानों में भेज दिया जाता है.

पशुओं में, दूध देने के 10-30 प्रतिशत मामले बांझपन और प्रजनन विकारों से प्रभावित हो सकते हैं. अच्छा प्रजनन या बछड़े प्राप्त होने की उच्च दर हासिल करने के लिए नर और मादा दोनों पशुओं को अच्छी तरह से खिलाया-पिलाया जाना चाहिए और रोगों से मुक्त रखा जाना चाहिए.

बांझपन के कारण

बांझपन के कारण कई हैं और वे जटिल हो सकते हैं. बांझपन या गर्भ धारण कर एक बच्चे को जन्म देने में विफलता, मादा में कुपोषण, संक्रमण, जन्मजात दोषों, प्रबंधन त्रुटियों और अंडाणुओं या हार्मोनों के असंतुलन के कारण हो सकती है.

यौन चक्र

गायों और भैंसों दोनों का  यौन (कामोत्तेजना) 18-21 दिन में एक बार 18-24 घंटे के लिए होता है. लेकिन भैंस में, चक्र गुपचुप तरीके से होता है और  किसानों के लिए एक बड़ी समस्या प्रस्तुत करता है. किसानों के अल-सुबह से देर रात तक 4-5 बार जानवरों  की सघन निगरानी करनी चाहिए. उत्तेजना का गलत अनुमान बांझपन के स्तर में वृद्धि कर सकता है. उत्तेजित पशुओं में दृश्य लक्षणों का अनुमान लगाना  काफी कौशलपूर्ण  बात है. जो किसान अच्छा रिकॉर्ड बनाए रखते हैं और जानवरों के हरकतें देखने में अधिक समय बिताते हैं, बेहतर परिणाम प्राप्त करते हैं.

बांझपन से बचने के लिए युक्तियाँ

  • ब्रीडिंग कामोत्तेजना अवधि के दौरान की जानी चाहिए.
  • जो पशु कामोत्तेजना नहीं दिखाते हैं या जिन्हें चक्र नहीं आ रहा हो, उनकी जाँच कर इलाज किया जाना चाहिए.
  • कीड़ों से प्रभावित होने पर छः महीने में एक बार पशुओं का डीवर्मिंग के उनका स्वास्थ्य ठीक रखा जाना चाहिए. सर्वाधिक डीवर्मिंग में एक छोटा सा निवेश, डेरी उत्पाद प्राप्त करने में अधिक लाभ ला सकता है.
  • पशुओं को  ऊर्जा के साथ प्रोटीन, खनिज और विटामिन की आपूर्ति करने वाला एक अच्छी तरह से संतुलित आहार दिया जाना चाहिए. यह  गर्भाधान की दर में  वृद्धि  करता है, स्वस्थ गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करता है, संक्रमण की घटनाओं को कम और एक स्वस्थ बछड़ा होने में मदद करता है.
  • अच्छे पोषण के साथ युवा मादा बछड़ों की देखभाल उन्हें 230-250 किलोग्राम इष्टतम शरीर के वजन के साथ सही समय में यौवन प्राप्त करने में मदद करता है, जो प्रजनन और इस तरह बेहतर गर्भाधान के लिए उपयुक्त होता है.
  • गर्भावस्था के दौरान हरे चारे की पर्याप्त मात्रा  देने से नवजात बछड़ों को अंधेपन से बचाया जा सकता है और (जन्म के बाद)  नाल को बरकरार रखा जा सकता है.
  • बछड़े के जन्मजात दोष और संक्रमण से बचने के लिए सामान्य रूप से सेवा लेते समय सांड के प्रजनन इतिहास की जानकारी  बहुत महत्वपूर्ण है.
  • स्वास्थ्यकर परिस्थितियों में गायों की सेवा करने और बछड़े पैदा करने से गर्भाशय के संक्रमण से बड़े पैमाने पर  बचा जा सकता है.
  • गर्भाधान के 60-90 दिनों के बाद गर्भावस्था की पुष्टि के लिए जानवरों की जाँच योग्य पशु चिकित्सकों द्वारा  कराई जानी चाहिए.
  • जब गर्भाधान होता है, तो गर्भावस्था के दौरान मादा यौन उदासीनता की अवधि में प्रवेश करती है (नियमित कामोत्तेजना का प्रदर्शन नहीं करती). गाय के लिए गर्भावस्था  अवधि लगभग 285 दिनों की होती है और भैंसों के लिए, 300 दिनों की.
  • गर्भावस्था के अंतिम चरण के दौरान अनुचित तनाव और परिवहन से परहेज किया जाना चाहिए.
  • गर्भवती पशु को  बेहतर खिलाई-पिलाई प्रबंधन और प्रसव देखभाल के लिए सामान्य झुंड से दूर रखना चाहिए.
  • गर्भवती जानवरों का प्रसव से दो महीने पहले पूरी तरह से दूध निकाल लेना चाहिए और उन्हें पर्याप्त पोषण और व्यायाम दिया जाना चाहिए. इससे माँ के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है,  औसत वजन के साथ एक स्वस्थ बछड़े का प्रजनन होता है, रोगों में कमी होती है और यौन चक्र की शीघ्र वापसी होती है.
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दुधारू मवेशी योजना क्या है ?

ग्रामीण क्षेत्र के गरीब रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले लोगों के लिए दुधारू मवेशी योजना के तहत लाभ देने का काम किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत दुग्ध उत्पादन करने वालों को 50% अनुदान एवं 50% ऋण पर दो दुधारू मवेशी दिए जाते हैं। दुधारू मवेशी गाय अथवा भैंस हो सकते है। प्रत्येक मवेशी 6 माह के अंतराल पर दिया जाता है।
योजना लागत में पशु की खरीद के लिए 70,000 दिए जाते हैं। इसके अलावा मवेशियों को रखने के लिए गौ शाला के निर्माण के लिए 15,000 रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा 3 वर्षों के लिए पशु के लिए बीमा प्रीमियम करवाए कराया जाता है। इसके लिए 8000 का लाभ दिया जाता है।

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क्या दूध में पाउडर मिला कर फैट और SNF बढ़ा सकते है ?

कुछ लोग गलत तरीके से दूध में मिलावट करके फैट और SNF बढ़ाते है।

फैट बढ़ाने के लिए कुछ लोग दूध में वनस्पति तेल मिलते है और उससे homogenize करते हैं या lecithin जैसे किसी प्रकार के emulsifier मिला देते हैं।

SNF बढ़ाने के लिए दूध में यूरिया मिला देते हैं, जिस से दूध में नाइट्रोजन भी बढ़ जाता है।

कुछ लोग स्किम मिल्क पाउडर मिला देते हैं जो SNF बढ़ाता है लेकिन फैट नहीं बढ़ाता।

दूध में फैट और SNF मात्रा होती है वो आहार के साथ साथ पशु के जीन और नस्ल पर निर्भर करता है। अगर आपको दूध फैट के आधार में बेचना है तोह पशु खरीदते समय उसका फैट की मात्रा जाँच करवा लें।अगर आपको सही तरीके से फैट और SNF बढ़ाना है तो हमने इसका जवाब कुछ दिन पहले लिखा था। –

दूध में फैट और SNF कैसे बढाएं ?

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