थारपारकर गाय के बारे में जानें सारी बातें

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भारत में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों में से एक थारपारकर गाय है। गाय की ये नस्ल राजस्थान में जोधपुर और जैसलमेर जिलों में पाई जाती है। हालांकि इस नस्ल की उत्पत्ति “मालाणी” (बाड़मेर) में हुई थी। इसी वजह से स्थानीय लोग इसे “मालाणी” के नाम से भी जानते हैं। इसे ग्रे सिंधी, वाइट सिंधी और थारी के नाम से भी जाना जाता है।

थारपारकर गौवंश के साथ प्राचीन भारतीय परम्परा की भी एक कहानी है। इस गाय के स्वरूप को देखकर कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पास यही गाय थी, जो अब पश्चिमी राजस्थान की ‘कामधेनु’ कहा जाता है। 

थारपारकर गाय की पहचान

थारपारकर नस्ल की गाय को दूर से ही पहचाना जा सकता है। इस गाय का रंग राख जैसा होता है। इसका सिर मध्यम आकार का होता है और माथा काफी चौड़ा होता है। इसके सींग कानों की तरफ मुड़े हुए मध्यम लंबाई के होते हैं। इसके कान लंबे चौड़े होते हैं और कान के अंदर की त्वचा हल्की पीली होती है। इसकी पूंछ लंबी, पतली होती है। इसकी ऊंचाई साढ़े तीन से पौने चार फीट के करीब होती है। थारपारकर का वजन लगभग 400 किलोग्राम का होता है।

थारपारकर गाय के दूध की जानकारी

शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम होने के साथ ही सबसे कम खर्च में काफी अच्छी मात्रा में दूध दे देती है। थारपारकर गाय एक ब्यात में 1600 से 2500 लीटर तक दूध दे सकती है। इस गाय के दूध में फैट 4.88 फीसदी होता है।

थारपारकर गाय दूध देने की क्षमता में तो बेहतर है ही साथ ही इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी अच्छी होती है। थारपारकर गाय का विकास कांकरेज, सिन्धी और नागोरी नस्लों से किया गया है। इस नस्ल के बैल भी काफी मेहनती होते हैं। ये जानवर सूखे और चारे की कमी की स्थिति के दौरान छोटे जंगली वनस्पतियों पर भी फल-फूल सकते हैं।

थारपारकर गाय की विशेषताएं

इस नस्ल की गाय 45 डिग्री से ज्यादा के तापमान में भी रह सकती है। इस गर्मी में भी थारपारकर अच्छी मात्रा में दूध दे सकती है। जहां तापमान बढ़ने की वजह से अन्य गायों में दूध देने की क्षमता कम होने लगती है तो वहीं थारपारकर इन विपरीत परिस्थितियों में भी ज्यादा दूध देने में सक्षम है। इस नस्ल की उम्र आमतौर पर 25-30 साल होती है। और इनकी बच्चा देने की क्षमता भी बाकी नस्लों से बेहतर होती है।

ऐसा नहीं है कि थारपारकर सिर्फ गर्मी में ही बेहतर दूध देती है, ये 0 डिग्री के तापमान में भी अच्छे से रहती है। क्योंकि ये नस्ल इतनी विपरीत परिस्थितियों में रह सकती है, जिस कारण ये अलग अलग इलाकों में आराम से पाली जा सकती है।

थारपारकर गाय की देखरेख कैसे करें

गाय को सर्दी, गर्मी, बारिश से बचाने के लिए एक शेड की जरूरत होती है। इस बात का खास ध्यान रकें की शेड में साफ सफाई बनी रहे और पानी की भी उचित सुविधा हो। इसके साथ ही पशुओं के खाने के लिए भी वहां पर उचित व्यवस्था होनी चाहिए। 

एक बछड़े के पैदा होने पर उसका खास ध्यान रखें। उसके जन्म के वक्त मुंह, नाक और शरीर को अच्छे से साफ करें। जन्म के बाद अगर बछड़े को सांस लेने में परेशानी हो रही है तो दबाव द्वारा बनावटी सांस दें। इसके अलावा, बछड़े की छाती को अच्छी तरह से दबाएं।

कौन सा टीका लगाना चाहिए

बछड़े को जन्म के 6 महीने बाद ब्रूसीलोसिस का पहला टीका लगवाएं। इसके एक महीने बाद गलघोटू, मुंह और खुर पका का टीका लगवाएं। इन टीकों को लगवाने के एक महीने बाद लंगड़े बुखार का टीका लगवाएं। बड़े पशुओं को हर तीन महीने के अंतराल पर डीवॉर्मिंग करना चाहिए।

चारा में क्या दें

ये गाय सूखे और चारे की कमी की स्थिति के दौरान छोटे जंगली वनस्पतियों पर भी फल-फूल सकते हैं। अगर इसको आहार के रूप में कम और सूखा चारा मिले तो ये उसमें भी दूध उत्पादन कर सकती है लेकिन अच्छे चारे से इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। 

इसे  मक्का, गेहूं, जौं, बाजरा, ज्वार, जई की चोकर, तिल, मूंगफली, सरसों दे सकते हैं। वहीं हरे चारे के रूप में बरसीम रिजका, लोबिया, जई, मक्की, ज्वार, बाजरा, नेपियर घास दे सकते हैं। जबकि सूखे चारे के रूप में बरसीम की सूखी घास, रिजका की सूखी घास, जई की सूखी घास दिया जा सकता है। हालांकि गाय को चारा उसकी जरूरत के हिसाब से ही देना होगा। और पढ़ें

  थारपारकर को होने वाली बीमारियां

बदहजमी: गाय को जल्द पचने वाला खाना दें, ताकि उसे बदहजमी ना हो।

कब्ज: अगर पशु को बार-बार कब्ज हो रही है तो उसे 800 ग्राम मैगनीशियम सल्फेट पानी में घोलकर और 30 ग्राम अदरक का चूरा मुंह के जरिये दें।

अनीमिया: अनीमिया की बीमारी होने पर गाय की मासपेशियों में कमजोरी होने लगती है, तनाव होने लगता है। इसके इलाज के लिए खाने में विटामिन ए, बी, ई की मात्रा बढ़ाएं।

रिंडरपैस्ट (शीतला माता): ये गाय में होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है। इस बीमारी को होने में 6 से 9 दिनों का वक्त लगते हैं। इसमें तेज बुखार, मुंह से पानी बहना और खूनी दस्त लग जाते हैं। इसका पेंसीलिन से इलाज किया जा सकता है।

निमोनिया: गाय को ये बीमारी गीले फर्श से होती है। इसमें ध्यान रखना होता है कि जिस जगह पर गाय को रखा जाए वो सूखी होनी चाहिये।

थनैला: थनैला रोग में थारपारकर के थन गर्म होने लगते हैं और उसमें दर्द, सूजन होने लगती है। इसके अलावा दूध में खून और पस होने लगती है। इसका इलाज शुरुआत में ही संभव है, जब बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है तो थन बचाना काफी मुश्किल हो जाता है। और पढ़ें

 

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

अगर आप घर बैठे – बैठे कोई भी गाय खरीदना चाहते हैं तो आप Animall ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। अपने एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में यह ऐप डाउनलोड करने के लिए आप प्ले स्टोर पर जाएं, या नीचे दिए गए विकल्प  पर क्लिक करें। Click Here

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आपको इसमें मोबाइल नंबर डालें और अपनी जगह का चुनाव करें।
  2. अब आप ऐप की भाषा का चुनाव करें।
  3. इसके बाद आप ऐप को पूरी तरह इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं और यहां पर आपके सामने पशु खरीदने या बेचने का विकल्प आएगा।
  4. अगर आपको गाय खरीदनी है तो आप गाय के विकल्प का चुनाव करें।
  5. यहां आपको जो भी गाय बिकाऊ है, उनकी सूची दिख जाएगी।
  6. इसके बाद आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प दिखाई देंगे। इसमें आप अपनी जरूरत के हिसाब से पशु की सूची हासिल कर सकेंगे।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी गाय चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  8. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं और गाय से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. अगर आप गाय बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। वहां बीचों बीच आपको पशु बेचने का विकल्प दिखाई देगा।
  2. यहां क्लिक करने के बाद आपको पशु से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसमें गाय की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो अपलोड कर दें।
  3. आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो गया है, जो भी खरीदार आपका पशु लेने में रुचि लेगा, वो आपसे सीधा संपर्क कर सकेगा।

आप Animall ऐप पर सिर्फ पशु खरीद या बेच ही नहीं बल्कि उनके अच्छे स्वास्थ्य के बारे में जानकारी भी ले सकते हैं। पशु बीमार होने पर आप डॉक्टर की मदद भी ऐप के जरिये ले सकते हैं।