भदावरी भैंस की जानकारी यहाँ पढ़ें

Source -Pashugyan.org
देश के वह पशुपालक जो एक अच्छी नस्ल की भैंस ढूंढ रहे हैं। उनके लिए भदावरी भैंस एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह भारत में उत्तर प्रदेश के इटावा और आगरा में पाई जाती है। इस नस्ल की भैंस से प्राप्त दूध में न केवल अधिक मात्रा में फैट पाया जाता है। बल्कि इसके जरिए दिए गए दूध से सबसे ज्यादा घी निकलता है। जिसकी कीमत 1000 रुपए से 1500 रुपए किलो तक भी होती है। आज के समय में भी शहरों के अंदर भैंस के घी और दूध की मांग बहुत अधिक है। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि भदावरी भैंस को पालना पशुपालकों के लिए एक फायदे का सौदा है।
आज हम अपने इस लेख में आपको भदावरी भैंस के दूध के गुण से लेकर इस भैंस से जुड़ी हुई तमाम जानकारियां देंगे। अगर आप भदावरी भैंस की जानकारी हासिल करना चाहते हैं, या फिर बिना किसी सिरदर्दी के भदावरी भैंस खरीदना और बेचना चाहते हैं तो आप इस लेख पर बने रह सकते हैं। इस भैंस को आप हमारी Animall App के जरिए खरीद सकते हैं। आइए जानते हैं आखिर कैसे भदावरी भैंस को खरीदा या बेचा जा सकता है और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में।
भदावरी भैंस की पहचान कैसे करें

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भदावरी एक कम कद वाली भैंस है। भदावरी भैंस का शरीर बेहद नुकीला और सिर छोटा होता है। भदावरी नस्ल की भैंस की टांगे काफी मजबूत और छोटी होती हैं। वहीं अगर भैंस के रंग की बात करें तो इनका तांबिया होता है और इनके शरीर पर बाल बेहद कम ही होते हैं। इसके अलावा इनके घुटने के नीचे का हिस्सा हल्के पीले रंग का होता है। साथ ही गर्दन के नीचे सफेद रंग की धारियां होती हैं। इस भैंस के सींग काले होते हैं और इनकी पलके भूरे रंग की होती हैं। ज्ञात हो भदावरी नस्ल के पशु का औसतन वजन 300 से 400 किलो तक ही होता है।
भदावरी भैंस का दूध और इसकी विशेषताएं
भदावरी भैंस के दूध में 6 से 12.5 प्रतिशत तक फैट होता है, जो अन्य भैंस की नस्ल के मुकाबले काफी अधिक है। आपको बता दें कि यह पशु ज्यादातर हर तरह के तापमान को बर्दाश्त कर सकता है। साथ ही इनमें दूध देने की क्षमता भी बेहद अधिक होती है। भदावरी भैंस एक ब्यात में करीब 800 से लेकर 1000 लीटर तक दूध देती है। यही नहीं भदावरी भैंस की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी मजबूत होती है। वहीं अन्य भैंस के कटड़ों के मुकाबले इस नस्ल के कटड़ों की मृत्यु 5 प्रतिशत तक कम ही होती है।
भदावरी भैंस की देखरेख कैसे करें
भदावरी नस्ल की भैंस यूं तो हर तरह के मौसम को झेलने की क्षमता रखती हैं। लेकिन भैंस की दूध उत्पादकता बढ़ाने और इन्हें स्वस्थ रखने के लिए कई कदम उठाना बेहद जरूरी होता है। भैंस को रखने के लिए एक शेड की जरूरत है। इस शेड का निर्माण कुछ इस तरीके से होना चाहिए कि यहां से हवा की आवाजाही बाधित न हो और भैंस का बारिश और धूप से भी बचाव हो सके।
भदावरी भैंस का चारा
भदावरी भैंस यूं तो एक बेहतर सहनशक्ति वाला पशु है। लेकिन इन्हें चारा देते समय यह देखना चाहिए कि वह हल्का और आसानी से पचाया जा सके। इसके लिए भैंस को फालीदार चारा तूड़ी में मिलाकर देना चाहिए। अगर आप इस तरह का चारा भैंस को देते हैं तो भैंस को बदहजमी और अफारा की समस्या नहीं होगी। इसके अलावा भी भदावरी भैंस को कुछ अन्य चीजें दी जा सकती हैं जो कुछ इस प्रकार हैं।
भैंस को आप कई अनाज दे सकते हैं जैसे गेहूं, बाजरा, जौ, जई और मक्की आदि।
भदावरी नस्ल की भैंस को आप मूंगफली, सोयाबीन, अलसी, बड़ेवे, सरसों और सूरजमुखी के बीज खाने को दे सकते हैं।
इन सभी चीजों के अलावा शराब के कारखानों से बचे हुए दाने, खराब आलू, सब्जी, फल और आटा आदि दे सकते हैं।
भदावरी भैंस को लगाए जाने वाले टीके
भदावरी भैंस के जन्म के बाद इन पर थोड़ा अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ऐसे में जन्म के 7 से दिन बाद इलेक्ट्रिकल ढंग से कटड़े के सींग दागने की जरूरत होती है। इसके अलावा जन्म के दो से तीन सप्ताह के बाद विषाणु श्वसन टीका लगवाना चाहिए। साथ ही भदावरी भैंस के कटड़े को जब वह 1 से तीन महीने का हुआ हो, तो उसे क्लोस्ट्रीडायल टीका दें।
भदावरी भैंस को होने वाले रोग और उनके उपचार

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भदावरी नस्ल की भैंस भले ही एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली वाला जीव हो। लेकिन इन्हें कई बार कुछ रोग परेशान कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस नस्ल की भैंस को होने वाले रोग और उसके उपचार।
तेजाबी बदहजमी और उसका इलाज
अगर भैंस को तेजाबी बदहजमी की समस्या हो गई है तो उन्हें अधिक निशाचन वाली खुराक बिल्कुल न दें। इसके अलावा मठ्ठी बीमारी की हालत में पशु को मीठा सोडा मुंह के जरिए दें।
कब्ज और इसका इलाज
आपको बता दें कि कब्ज एक ऐसी समस्या है जिसके दौरान पशु को मल त्यागने में दिक्कत होती है। वहीं कई बार कब्ज लंबे समय तक रहने की वजह भयंकर बीमारियां भी हो जाती हैं।
अगर हाल ही में भैंस को कब्ज का रोग हुआ है तो आप उन्हें 500 एमएल अलसी के तेल चारे के साथ दे और अधिक पानी पिलाएं। इसके अलावा बड़े जानवरों के लिए 800 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट पानी में डाले और 30 अदरक का चूरा बना दें।
अफारा रोग और उसका उपचार
भदावरी नस्ल की भैंस को अफारे की समस्या अक्सर हो जाती है। आपको बता दें कि इस रोग में पशु के पेट में दर्द और पेट फूल जाता है। इसके अलावा अफारा होने पर सांस लेने में भी दिक्कत होती है।
पशु को अफारा होने पर उसे 30 से 60 एम एल तक तारपीन का तेल दें। साथ ही ध्यान रखें कि तेल की मात्रा अधिक न हो। वरना इसकी वजह से पेट भी खराब हो सकता है। इसके अलावा अगर पशु को बार – बार अफारा हो तो उसे एक्टिवेटेड चारकोल, 40 प्रतिशत फार्मलीन और 15 से 30 एम एल डेटॉल का पानी भी दे। अगर पशु को इन उपाय से कोई लाभ न हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
सिक्के का जहर और इसका इलाज
भदावरी भैंस को जब यह समस्या होती है तो इस दौरान वह लड़खड़ाने लगती है और उसकी आंखें घूमने लगती है। साथ ही मुंह से झाग भी निकलने लगता है। आमतौर पर यह समस्या पशु को तब होती है जब वह किसी ऐसी चीज को चाट लेती हैं, जहां पेंट हुआ हो।
अगर पशु को सिक्का जहर से बचाकर रखना है तो उन्हें सही स्थान पर बांध के रखे। इसके अलावा उन्हें ऐसी जगह से दूर रखें जहां सिक्का पिघलाया जाता है। साथ ही स्थिति काबू में करने के लिए आप डॉक्टर की राय पर पशु को 25 प्रतिशत कैल्शियम वरसीनेट दिन में दो बार दें।
ब्लैक क्वार्टर बीमारी एवं इसका इलाज
भदावरी भैंस को अगर बारिश के मौसमें गिली मिट्टी पर ही लंबे समय तक छोड़ दिया जाए तो उन्हें ब्लैक क्वार्टर रोग हो सकता है। आपको बता दें कि यह जीवाणु ज्यादातर बारिश के दिनों में मिट्टी से ही पैदा होता है। इस रोग का असर पशुधन पर बुरा होता है। इस रोग के दौरान पशु को तेज बुखार हो जाता है और वह सही तरह से सांस भी नहीं ले पाता। हालांकि आमतौर पर यह 2 साल से कम उम्र के पशु को ही प्रभावित करता है।
भदावरी भैंस को यह रोग होने पर प्रभावित स्थान पर पैनसीलिन का टीका दिया जाता है। इसके अलावा 4 महीने से 3 वर्ष के पशु को सूजन वाली जगह पर हाइड्रोजन पेरोक्साइड और पोटेशियम परमैंगनेट के से ड्रेसिंग करनी होती है।
भैंस बेचने और खरीदने का ऑनलाइन तरीका
भैंस खरीदने और बेचने के लिए आप Animall App अपने एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें Click Here
- लिंक पर क्लिक करने पर एक ऐसा पेज खुल जाएगा। यहां आपको इंस्टॉल के बटन पर क्लिक करना है।

- इसके बाद जब ऐप डाउनलोड हो जाए तो आप यहां रजिस्ट्रेशन हेतु अपना मोबाइल नंबर डालें।

- अब अपने स्थान का चुनाव करें या ऐप को खुद आपकी लोकेशन का पता लगाने दें।

- इसके बाद आपको अपनी भाषा का चुनाव करना होगा।

- आपके पिछले चुनाव के बाद ऐप इस्तेमाल के लिए तैयार हो गई होगी। यहां से आप गाय खरीद या बेच सकते हैं।
भैंस खरीदने का तरीका
- उदाहरण के लिए अगर आपको भैंस खरीदनी है तो आप भैंस के विकल्प का चुनाव करें।

- यहां आपको जो भैंस खरीदी जा सकती हैं। उनकी सूची दिखाई देगी।
- इसके बाद एक नया पेज खुलेगा यहां आपको दूध, ब्यात, नस्ल का जानकारी देनी होगी। जैसे ही आप इन जानकारियों को ऐप पर डालेंगे आपके सामने सूची आ जाएगी।
- इस सूची के आधार पर आप अपनी भैंस चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।

- यंहा भैंस की कीमत को कम कराने का काम भी आप कर सकते हैं।
भैंस बेचना
- अगर आप भैंस बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। सहायता के लिए नीचे दी गई तस्वीर का इस्तेमाल कर सकते हैं। जहां आपको निशान दिखाई देगा वहीं आपको क्लिक करना है

- अब भैंस की ब्यात, दूध देने की क्षमता, नस्ल आदि जानकारी देनी है। सहायता के लिए नीचे चित्र को देखें।

- यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारी अपलोड हो गई है। अब भैंस को खरीदने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति आपसे स्वयं बात कर लेगा।








