जानें नागौर पशुमेला के बारे में सारी जानकारी!

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भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान – अपने किलों, महलों, आकर्षक वन्य जीवन और सुनहरे रेतीले रेगिस्तान के लिए मशहूर है। ये सारी चीजें इस खूबसूरत भारतीय राज्य की पहचान है। लेकिन राजस्थान सिर्फ अपने किलों, प्रेम और साहस की कहानियों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है बल्कि ये राज्य मेलों और त्योहारों के लिए भी उतना ही मशहूर है।

राजस्थान के मेले और त्योहार असंख्य हैं और न सिर्फ लोकल लोगों के लिए खास होते हैं बल्कि इस सुंदर पर्यटन स्थलों पर आने वाले यात्रियों पर भी एक अनूठा महत्व और प्रभाव छोड़ते हैं। ऐसा ही एक त्योहार जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है वो है नागौर पशुमला। ये पशुमेला लोगों के बीच में बहुत जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है और इस त्योहार के करिश्मे को देखने के लिए बहुत सारे पर्यटक दूर-दूर से इस जगह पर आते हैं।

नागौर पशुमेला हर साल जनवरी और फरवरी के महीने में आयोजित होता है। दूर-दूर से हर साल लोग यहां पर आते हैं और पशुओं को खरीदने और बेचने में हिस्सा लेते हैं। इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा पशुमेला कहते हैं।

नागौर पशुमेला का इतिहास

नागौर राजस्थान का एक प्राचीन शहर है जो इसके आसपास के मैदानी इलाकों के पुराने व्यापारिक मार्गों में से एक पर स्थित है। ये शहर पशुपालन में काफी धनी माना जाता है। थार मरुस्थल की जलवायु खेती के अनुकूल नहीं होती है। इसलिए यहां के लोग ऊंटों को पाल कर ही अपना जीवन यापन करते हैं। जोधपुर के आसपास के क्षेत्र जैसे हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अन्य हिस्से अपनी खेती के लिए मवेशियों को जोधपुर से ही लेकर जाते थे। और काफी ज्यादा नागौर पर भी निर्भर करते हैं।

पहले के जमाने में राजा यहां के लोगों से पशु बेचने पर या खरीदने पर टैक्स भी वसूला करते थे। यहां के स्थानीय लोगों ने व्यापारिक मार्ग से गुजरने वाले व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए असाधारण समारोह आयोजित करने शुरु कर दिए थे। ऐसा कहा जाता है कि दूर-दूर से आने वाले व्यापारी मेले के मैदान में कैंप लगाकर रात भर रुका करते हैं। शाम को अपना समय बिताने के लिए व्यापारियों ने अपने मनोरंजन के लिए गीत-संगीत के कार्यक्रम रखने शुरु कर दिए थे।

हालांकि नागौर पशुमेला की शुरुआत 56 साल पहले राजा उमेद सिंह के द्वारा की गई थी। इस मेले में उन्होंने मशहूर सूफी संत रामदेवजी को अपनी ताकत दिखाने के लिए बुलाया था। संत की ताकत का नमूना देखने के लिए शहर और शहर के आस पास के लोग आए थे और ताकत से संतुष्ट भी हो गए थे। लोगों ने उनसे नागौर में रहने के लिए आग्रह किया और वो साल में एक बार उनके सम्मान में उनसे मिलने जाते थे।

कैसे मनाया जाता है नागौर पशुमेला

इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा पशुमेला कहा जाता है। जो साल में एक बार जनवरी या फरवरी महीने में मनाया जाता है। ये मेला 4 दिनों तक चलता है।

हर दिन यहां पर लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। दिन की शुरुआत से ही मालिक अपने पशुओं की गतिविधियां और आकर्षण दिखाने लगते हैं, ताकि वो खरीददार को आकर्षित कर सकें। हर विक्रेता को एक शेड मिलता है, जिसमें वो अपने पशुओं को रख सकता है। खरीददार इन शेड्स में जाता है और अपने पसंद के पशु को खरीदता है।

शाम होने तक ज्यादातर खरीददार वापिस चले जाते हैं और सिर्फ पशुओं के मालिक ही वहां पर रह जाते हैं। जिसके बाद हर शाम वहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और लोग उत्सव मनाते हैं। जबकि बाजार सिर्फ दिन के वक्त में ही लगता है। वहां हर दिन यहां पर मनोरंजक खेल भी होते हैं, जो भी शाम होने से पहले तक ही होते हैं। राजस्थान का नागौर पशुमेल पर्यटन विभाग के सहयोग से पशुपालन विभाग द्वारा 4 दिनों तक चलता है।

नागौर पशुमेला में होने वाली मनोरंजक गतिविधियां

–    इस उत्सव में मजे का तड़का लगाने के लिए रस्साकशी यानी की टग ऑफ वॉर का खेल, ऊंट और बैल की दौड़, मुर्गों की लड़ाई जैसे खेल भी करवाते हैं। जिसका लोग जमकर आनंद लेते हैं।

–    पूरे पशुमेले के दौरान राजस्थान का लोक संगीत बजता रहता है। जिसे वहां के लोकल कलाकार बजाते हैं।

–    नागौर मेले की सबसे अद्भुत विशेषताओं में से एक लाल मिर्च का बाजार भी है जो मेले में लगाया जाता है। नागौर का लाल-मिर्च बाजार या “मिर्ची बाजार” हर तरह से लोकप्रिय रूप से जाना जाता है जो एशिया का सबसे बड़ा बाजार है।

–    वहां पर पशुओं को संवारने का भी मुकाबला होता है, जिसमें काफी सारे पशु मालिक हिस्सा लेते हैं।

–    मेले में हर वक्त हस्तकला की प्रदर्शनी लगी रहती है, जहां से पर्यटक सुंदर-सुंदर चीजें खरीद कर ले जा सकते हैं। यहां पर सबसे ज्यादा ऊंट से जुड़ी चीजें, लकड़ी का सामान, लोहे से बनी चीजें बिकती है।

–    यहां पर मनोरंजन के लिए पगड़ी बांधने का मुकाबला, मूंछों का मुकाबला, स्टंट, बाजीगर और कठपुतली के कार्यक्रम के साथ-साथ डांस का कार्यक्रम भी होता है।

नागौर पशु मेला में क्या करें

–    शाम होने के बाद भी मेले में ही रुकें, क्योंकि उस दौरान वहां पर नागौर के लोकल लोग लोक गीत और डांस के कार्यक्रम करते हैं। इसके अलावा मेले के दौरान और बाद में भी कई तरह की मनोरंजक गतिविधिया वहां पर की जाती है।

–    वहां पर होने वाले खेलों और मनोरंजक गतिविधियों में भी हिस्सा ले सकते हैं।

–    लोकल प्रदर्शनी से सामान खरीद सकते हैं।

–    आप देख सकते हैं कि किस तरह खरीददारों के लिए जानवरों को तैयार किया जाता है।

–    मेले में मिलने वाले लोकल खाने का भी मजा ले सकते हैं। ऊंट के दूध से बनी खाने की चीजें यहां पर काफी पसंद की जाती है।

–    कई बार रात को मेले में पटाखें भी जलाएं जाते हैं, तो आप देर रात तक रुक कर उसका भी मजा उठा सकते हैं।

नागौर कैसे पहुंचे

प्लेन के जरिये नागौर कैसे पहुंच सकते हैं?

नागौर तक पहुंचने के लिए आप फ्लाईट भी ले सकते हैं। नागौर शहर के सबसे नजदीकी हवाईअड्डा जोधपुर में है। जहां से शहर की दूरी 140 किलोमीटर है। जोधपुर तक आप सभी मुख्य शहरों से पहुंच सकते हैं। जोधपुर पहुंच कर आप टैक्सी लेकर नागौर जा सकते हैं।

ट्रेन के जरिये नागौर कैसे पहुंचे?

नागौर शहर का अपना खुद का रेलवे स्टेशन है। जहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं। नागौर तक जयपुर से, बंगाल से ट्रेन आती है, जबकि बाकी शहरों से जयपुर तक की ट्रेन लेकर आप पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे?

नागौर सड़क मार्ग से आने के लिए आप जयपुर से 2 रास्ते ले सकते हैं। एक सीकर से होकर और दूसरा जोधपुर से होकर। इसके अलावा राजस्थान स्टेट ट्रांसपोर्ट भी लगातार बसें चलाता है, जिसके जरिये आप नागौर पहुंच सकते हैं।

एंट्री फीस और मेले का समय

मेले में जाने के लिए कोई एंट्री फीस नहीं होती है। ये एक निशुल्क मेला है और यहां पर आप 9 से 6 बजे के बीच में आ सकते हैं।

नागौर पशुमेले के 4 दिनों में आप पशुओं के बारे में बहुत कुछ जान ता पाएंगे ही, साथ में आपको बहुत ही अलग अनुभव होगा। तो अगर आप किसान है तो आपको जरूर वहां पर जाना चाहिये, लेकिन अगर आप किसान नहीं है तो भी आप इसे अनुभव करने के लिए जरूर जाए। आपको ये काफी पसंद आएगा और बेहद ही अलग अनुभव होगा।

पशुओं से जुड़ी सारी परेशानियों के लिए आप Animall.in पर जा सकते हैं या फिर आप प्ले स्टोर से हमारी ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं। यहां पर आप पशु खरीदने/ बेचने के अलावा, डॉक्टर से सहायता, और पशु से संबंधित हर तरह का ज्ञान भी पा सकते हैं।

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