आप किसान क्रेडिट कार्ड से कितनी राशि लोन ले सकते हैं?

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पहले वर्ष के लिए अल्‍पावधि ऋण सीमा प्रदान की गई है जो कि प्रस्‍तावित फसल पद्धति एवं वित्‍त के मान के अनुसार उगाई गई फसलों पर आधारित होगी।
फसलोत्‍तर / घरेलू / उपभोग की आवश्‍यकताओं एवं कृषि आस्‍तियों,फसल बीमा, वैयक्‍तिक दुर्घटना बीमा योजना (पीएआईएस) एवं आस्‍ति बीमा के रखरखाव संबंधी खर्चों। और पढ़ें

प्रत्‍येक अगले वर्षों (दूसरे, तीसरे, चौथे वर्ष) में यह सीमा10%की दर से बढा दी जाएगी (पॉंचवे वर्ष के लिए किसानों को अल्‍पावधि ऋण की सीमा पहले वर्ष से लगभग 150%अधिक की स्‍वीकृति दी जाएगी)
केसीसी की सीमा का निर्धारण करते समय कृषि यंत्रों /उपकरणों आदि के रूप में छोटी राशियों की निवेश की आवश्‍यकताएं (जैसे स्‍प्रेयर, हल आदि) जो कि एक वर्ष की अवधि में देय होगी को शामिल किया जाएगा। ( ऋण के इस हिससे को दूसरे से पॉंचवे वर्ष के दौरान स्‍वत: आधार पर शामिल नहीं किया जाएगा परन्‍तु संबंधित वर्ष के लिए अधिकतम आहरण सीमा की गणना करते समय प्रत्‍येक वर्ष में इस अंश के लिए ऋण की आवश्‍यकता को शामिल किया जाएगा।

चौथे बिंदु में बताए अनुसार पॉंचवे वर्ष के लिए अल्‍पावधि ऋण सीमा की गणना साथ्‍ा ही ऊपर पांचवे बिंदु में बताए अनुसार दी गई निवेश ऋण अपेक्षाएं (पाँच वर्षों में सर्वाधिक) को अधिकतमअनुमत्‍त सीमा (एमपीएल) होगी एवं उसे किसान क्रेडिट कार्ड सीमा के रूप में संस्‍वीकृत किया जाएगा।
पहले वर्ष के लिए आंकी गई अल्‍पावधि ऋण सीमा के साथ अपेक्षित अनुमानित निवेश ऋण सीमा जैसा कि ऊपर बताया गया है। और पढ़ें

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जानिए क्या हैं दूध निकालने वाली मशीन के फायदे

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तकनीक के इस युग ने न केवल इंसान के काम को आसान बना दिया है। बल्कि यही तकनीक लोगों का बहुत सा कीमती समय भी बचा रही  है। इसके अलावा उत्पादकता बढ़ाने में भी तकनीक का एक अहम योगदान है। आज तकनीक का उपयोग देश के हर हिस्से अलग – अलग स्तर पर किया जा रहा है। आज ऐसी ही तकनीक के कुछ फायदे हम आपको बताने वाले हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं दूध निकालने वाली मशीन के बारे में।

आज देश के बड़े – बड़े हिस्सों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक दूध दुहने की मशीन पहुंच चुकी है। लेकिन फिर भी कुछ लोग दूध दुहने की इस मशीन का उपयोग करने से कतराते हैं। आज हम ऐसे ही लोगों के लिए यह लेख लेकर आए हैं। हमारे इस लेख में हम आपको दूध दुहने की मशीन के फायदे क्या हो सकते हैं। यह बताने वाले हैं। दूध दुहने की मशीन के फायदे जानने के लिए हमारे लेख पर अंत तक बने रहें। 

मिल्किंग मशीन के बारे में संपूर्ण जानकारी पढ़ें

मशीन के जरिए दूध निकालने के फायदे 

पशुपालन के जरिए आय अर्जित करने वाले ज्यादातर लोग कई तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं। पशुपालकों की इन्हीं चुनौतियों को कम करने और उनकी उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कई तरह की मशीन या तकनीक आती रहती है। ऐसी ही एक मशीन दूध दुहने के लिए भी आई है। इस मशीन का उपयोग करने वाले बहुत ही कम लोग है। इसलिए इस मशीन के जरिए क्या फायदे हो सकते हैं, यह भी लोग नहीं जानते। इसलिए हम आपको बताते हैं कि दूध दुहने की मशीन के फायदे क्या हैं।

  • दूध निकालने की इस मशीन का उपयोग कई पशुओं पर किया जा सकता है। यानी कि अगर आप एक बड़ी डेयरी के मालिक हैं तो आपको इसके लिए अधिक लोग रखने की जरूरत नहीं होगी। यह मशीन आसानी से कुछ ही देर में कई पशुओं का दूध निकाल पाएगी। 
  • यह मशीन एक वैक्यूम तकनीक के जरिए ही काम करती है। इसके लिए किसी तरह की बिजली या ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता नहीं होती। 
  • मशीन चलाने में जितनी सरल है उससे कहीं ज्यादा आसान है इस मशीन को साफ करना। यानी आपको मशीन की साफ सफाई में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। 
  • इस मशीन के जरिए निकाला गया दूध अधिक शुद्ध और साफ रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मशीन का एक सिरा जहाँ थनों पर लगा होता है। वहीं इसका दूसरा सिरा एक मुंह बंद कंटेनर में होता है। जिससे दूध में कुछ भी गिरने की संभावना कम हो जाती है। 
  • इस मशीन के जरिए दूध दुहने से दूध की मात्रा 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि दूध निकालने के लिए वैक्यूम तकनीक का उपयोग किया जाता है। जिसकी वजह से थनों से पूरा दूध आसानी से निकल जाता है। 
  • मशीन के जरिए दूध निकालना इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इस तकनीक के जरिए एक मिनट में 1.5 से 2.0 लीटर तक दूध निकाला जा सकता है। 
  • दूध में बाहरी कण नहीं गिरते जिसकी वजह से दूध अधिक साफ और शुद्ध होता है। 

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आशा करते हैं हमारे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होंगे। अगर आप इसी तरह की महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करना चाहते हैं, तो आप हमारी एनिमॉल ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप के माध्यम से पशुओं को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है। इसके अलावा पशु चिकित्सक से भी सहायता ली जा सकती है। हमारी Animall App को डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

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अच्छी नस्ल के लिए कृत्रिम गर्भाधान क्यों जरूरी है ?

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पशु की गुणवत्ता उसकी नस्ल पर निर्भर करती है। पशु का उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छी नस्ल बहुत जरुरी है। अच्छे साड़ों की कमी को देखते हुए और कृत्रिम गर्भाधान के लाभ को समझने के लिए कृत्रिम गर्भाधान का अपनाना बहुत जरुरी होता है। कृत्रिम गर्भाधान की विधि से अधिक साड़ों की कमी पूरी हो जाती है। एक बार इकट्ठा किया गया वीर्य लगभग 50 गायों को गाभिन करने के काम आता है।

लिक्विड नाइट्रोजन

कम तापमान पर शरीर की कोशिकाएं लंबे समय तक जीवित रह सकती हैं। इसी तरह शुक्राणओं को लंबे समय तक जीवित और सुरक्षित रखने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन का प्रयोग किया जाता है। लिक्विड नाइट्रोजन का ताप -196 डिग्री से. होता है। लिक्विड नाइट्रोजन को क्रायोजनिक जार में भरा जाता है, जिसमें सीमेन स्टोरेज किया जाता है।

क्रायो यानी बहुत ठंडा, जब भी कोई गैस, गैस से लिक्विड में बदलती है तो उसे क्रायोजनिक लिक्विड कहते हैं। इसके संपर्क में आते समय सावधानी रखना जरुरी है। जब बहुत ही कम ताप वाले पदार्थ हमारी त्वचा के संपर्क में आते हैं, तो त्वचा जल जाती है। इसी कारण शरीर में मस्से या छोटे ट्यूमर हटाने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन की मदद से क्रायो सर्जरी की जाती है। इसके संपर्क में काम करते समय त्वचा आंखों को सुरक्षित रखना चाहिए।

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क्रायो जार

लिक्विड नाइट्रोजन एक ऐसी अवस्था होती है, जिसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना आसान नहीं होता है। क्योंकि इसका नॉर्मल रूप में लगातार वाष्पीकरण होता रहता है। इसे रोकने के लिए विशेष टेक्निकल व मेटेरियल से बनाए गए कंटेनर में भरा जाता हैं, जिन्हें क्रायो जार या क्रायो कंटेनर कहते हैं।

क्रायो जार के प्रकार

आजकल बाज़ार में कुछ कंपनियां क्रायो जार उपलब्ध कराती है। मुख्य रूप से आईबीपी और इनबॉक्स कंपनियां क्रायो जार निर्माण करती है। बनावट व उपयोग के आधार पर क्रायो जार दो तरह के होते हैं। 1-बायोलॉजिकल उपयोग और 2- ट्रांसपोर्ट के लिए।

सीमन स्ट्रा

आजकल सीमन को फ्रिज करने और भरने के लिए पॉली विनाइल स्ट्रा का प्रयोग किया जाता है। इनमें फ्रेंच सिस्टम से तैयार की गई स्ट्रोक का प्रयोग अधिक होता है। इससे ऑटोमेटिक रूप से मशीनों में सीमेन से भर जाती है तथा लेवलिंग भी हो जाती है। इसमें भी फ्रेंच मिनी स्ट्रा का उपयोग ज्यादा प्रचलित है।

एआई गन

एआई गन के लिए गन एक महत्वपूर्ण उपकरण होता है, जो सीमन को स्ट्रा से यूटेरस तक पहुंचाता है। सीमेन स्ट्रा की साइज के अनुसार ही इसकी बनावट होती है। ताकि अंदर स्ट्रा के ऊपर शीथ अच्छी तरह फीट हो सकें।

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एआई शीथ

एआई शीथ एक लंबी सीधी कवर नली होती है,जो पीवीसी की बनी होती है। इसके एक खुले सिरे पर चीरा लगा होता है तथा दूसरे सिरे पर छेद होता है। चीरे लगे हुए भाग के ऊपर डाला जाता है और दूसरा टेपर सिरा स्ट्रा के कटे हुए भाग पर फिट हो जाता है इसे इंसेमिनेशन सिरा भी कहते हैं। स्ट्रा में सीमेन ठंडा फ्रोजन होता है उसमें स्पर्म भी शांत अवस्था में रहते हैं। एआई में उपयोग में लेने के लिए सीमन का द्रवीकरण या पिघलना जरुरी है ताकि स्पर्म गतिशील हो सकें। एआई के दौरान फ्रोजन सीमन को तरल बनाने तथा स्पर्म को पुनः एक्टिव करने के लिए तापमान -196 डिग्री सेल्सियस से +37 डिग्री सेल्सियस करना पड़ता है।

यह काम फुर्ती से होना बहुत जरुरी है। इसके लिए ताप में समानता होनी चाहिए ताकि पूरी लंबाई में भरे हुए सीमन की थॅाइंग एकसार हो सके तथा पूरा सीमन तरल हो जाए। ऐसा नहीं होने पर स्पर्म गर्मी के उतार-चढ़ाव के प्रभाव को सहन नहीं कर पाते हैं और मर जाते हैं। डेयरी पशुओं में गाय भैंस के स्पर्म की सहनशक्ति में थोड़ा फर्क होता है। भैंस के स्पर्म अपेक्षाकृत अधिक नाजुक होते हैं यानी तापमान में उतार-चढ़ाव के झेल नहीं पाते और मर जाते हैं। इसलिए भैंस में कृत्रिम गर्भाधान करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

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