जानें गाय भैंस को ठंड में होने वाले रोग के बारे में और उनसे बचाव के तरीके!

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सर्दियों के मौसम का लुत्फ इंसान तो लेते हैं। लेकिन यह मौसम पशुओं के लिए बहुत खतरनाक होता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इस दौरान गाय भैंस को कई खतरनाक बीमारियां लग जाती हैं। यह बीमारियां इतनी खतरनाक होती है कि जिसकी वजह से पशुओं की जान तक चली जाती है। जिसके चलते पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी होता है। 

इसलिए पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वह सर्दियों के मौसम में होने वाली बीमारियों से पशुओं को बचाकर रखें। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे कि ऐसे कौन से रोग हैं जो  गाय भैंस को सर्दियों के दौरान लग सकते हैं। इसके अलावा किस तरह इन रोगों से पशुओं को बचाया जा सकता है। 

दुधारू पशुओं के 10 प्रमुख रोग और उनके उपचार

अफारा रोग 

पशुओं को होने वाला यह रोग पशुपालकों की लापरवाही का नतीजा है। आमतौर पर पशुपालक गाय या भैंस को सर्दियों के दौरान अधिक हरा चारा या बचा हुआ और खराब खाना दे देते हैं। जिसके चलते उन्हें अफारा रोग हो जाता है। आपको बता दें कि इस रोग की स्थिति में पशु के पेट में गैस बन जाती है। जिसकी वजह से पशु खासा परेशान रहता है और चिड़चिड़ा हो जाता है। यही नहीं इसकी वजह से पशु की दूध उत्पादन क्षमता भी कम हो जाती है।  

पशुपालक भाई अपने पशु को इस रोग से बचाए रखने के लिए घर का बचा हुआ खाना कम मात्रा में या कभी – कभी ही दें। इसके अलावा हरे चारे के साथ सर्दियों के दौरान गाय भैंस को गुड़ भी खिलाएं। अगर पशुपालक इन छोटी बातों को ध्यान में रखते हैं तो वह पशु को अफारा रोग से बचा पाएंगे।  

निमोनिया रोग

किसान अक्सर कई बार शेड का निर्माण कुछ इस तरह करा देते हैं, जिसमें हवा की आवा जाही सही प्रकार नहीं हो पाती। इसके अलावा शेड में मौजूद गंदगी या धूल मिट्टी के चलते पशु इस रोग से पीड़ित हो जाता है। इस रोग के दौरान पशु की आंख और नाक से पानी गिरने लगता है।

किसान भाई पशु को निमोनिया के रोग से बचाए रखने के लिए उन्हें एक साफ वातावरण में रखे। इसके अलावा पशु के शेड का निर्माण ही तरह से कराएं। ताकि शेड को साफ भी आसानी से किया जा सके और हवा की आवा जाही भी बाधित न हो। 

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ठंड लगना 

सर्दियों के दौरान अगर पशु को बाहर रखा जाए या उसके ऊपर शेड मौजूद न हो तो ऐसे में उसके शरीर पर ओस गिरती रहती है। जिसकी वजह से पशु बीमार पड़ जाता है और उसका नाक बंद हो जाता है। जिसकी वजह से पशु को सांस लेने में भी खासी दिक्कत होने लगती है। 

पशु को ठंड से बचाए रखने के लिए उन्हें एक अच्छे शेड में रखें। जहां वह सूखे रह सकते हैं। इसके अलावा पशु को ठंड लग जाने की स्थिति में उन्हें भांप दिलाएं। भाप दिलाने के लिए सबसे पहले एक बाल्टी में खौलता हुआ पानी लें और उसके ऊपर घास रख लें। अब पशु के नाक पर एक भारी कपड़ा रखें ताकि पानी से उठता हुई भांप उसके नाक को खोल सके। ऐसा करके आप अपने पशु को सर्दियों में होने वाली बीमारियों से बचा सकते हैं। 

किसान भाइयों को अगर हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी पसंद आई हो, तो इसे अपने साथियों के साथ जरूर शेयर करें। आपको बता दें कि हमारे द्वारा Animall App भी बनाई गई है। आप इस ऐप से पशु खरीद और बेच तो सकते ही हैं। इसके अलावा आप पशुओं के डॉक्टर से भी बात कर सकते हैं। हमारी ऐप डाउनलोड करने के लिए या तो प्ले स्टोर पर जा सकते हैं या फिर इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। 

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जानिए गाय के बछड़े की देखभाल किस तरह से करें

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कहा जाता है कि एक पौधे का जितना अच्छी तरह ध्यान रखा जाएगा, वह उतना ही मजबूत पेड़ बनेगा। इसी तरह पशुपालक जितनी अच्छी तरह बछड़े का ध्यान रखेंगे वह उतना ही तंदुरुस्त बैल या गाय बनेगी। पशुपालक अक्सर गाय के ब्याने के बाद बछड़े के ऊपर ध्यान ही नहीं देते।
जिसकी वजह से न केवल बछड़ा कमजोर रह जाता है। बल्कि कई बार बछड़े की मौत तक हो जाती है। जिसका असर गाय के ऊपर भी पड़ता है और कई बार तो गाय दूध तक देना बंद कर देती है।
इसलिए जरूरी है कि बछड़े के जन्म के साथ ही उनकी देखरेख अच्छी तरह की जाए।
अगर आप भी एक पशुपालक हैं और आपकी गाय ब्याने वाली है, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि बछड़े की देखभाल किस तरह की जाती है। आज हम आपको अपने इस लेख में बछड़े की देखरेख से जुड़ी संपूर्ण जानकारियां मुहैया कराएंगे। अगर आप यह जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो लेख पर अंत तक बने रहें।
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बछड़े की शुरुआती देखरेख का तरीका

  1. बछड़े के पैदा होने के साथ ही उसके नाक और मुंह में श्लेष्मा होता है। जिसे कुछ लोग कफ भी कहते हैं। इसे बछड़े के पैदा होने के तुरंत बाद ही साफ कर देना चाहिए। अगर ऐसा ना किया जाए तो बछड़े को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। 
  2. पशुपालकों ने अक्सर यह देखा होगा की गाय ब्याने के बाद अपने बछड़े को चाटने लगती है। गाय ऐसा इसलिए करती है ताकि बछड़े की त्वचा आसानी से सूख जाए। लेकिन अगर गाय बछड़े को चाटे ही ना, तो आप बिना वक्त गवाएं, बछड़े के शरीर को टाट से या फिर सूखे कपड़े से साप कर दें। इसके अलावा बछड़े को छाती दबाकर सांस दिलाने की कोशिश करें। 
  3. जिस स्थान पर बछड़े को रखें वह पूरी तरह सूखा रहना चाहिए। गीले स्थान पर रहने से बछड़े को कई गंभीर रोग हो सकते हैं। 
  4. एक स्वस्थ शिशु की पहचान के लिए हम अक्सर उनके वजन पर नजर बनाकर रखते हैं। ठीक उसी तरह आपको बछडे़ के वजन को भी देखना होगा। अगर बछड़े का वजन कम हो तो आप उसके स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टर से बात करें। 
  5. एक शिशु के लिए जिस तरह मां का पहला दूध बेहद महत्वपूर्ण होता है। उसी तरह बछड़े के लिए गाय का पहला दूध जिसे खीस भी कहते हैं। वह पीलानी चाहिए। इस पहले आहार के जरिए बछड़ा कई तरह के रोग से बचा रह सकता है। 
  6. गाय के ब्याने के बाद उसके थनों को क्लोरीन के घोल से धोना चाहिए।
  7. अमूमन गाय के ब्यान के एक घंटे बाद ही बछड़ा दूध पीने का प्रयास करने लगता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाता तो आप इसमें बछड़े की सहायता करें। 

बछड़े का आहार कैसा होना चाहिए 

पशुपालकों को सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बछड़े को पहला आहार खीस ही मिले। आपको बता दें कि गाय के ब्याने के 3 से 7 दिन बात तक भी खीस का निर्माण होता रहता है। यह खीस बछड़े के शारीरिक और मानसिक विकास में तो एक अहम भूमिका निभाता ही है। इसके साथ ही बछड़े की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। इसलिए बछड़े के जन्म तीन दिन बाद तक कोशिश करें कि बछड़े को यह खीस ही दें। 

एक शिशु के लिए जिस तरह शुरुआती समय में मां का दूध महत्वपूर्ण होता है। उसी तरह बछड़े को भी कम से कम 3 से 4 सप्ताह मांक का दूध पीने दें। इसके बाद आप आगे चाहें तो बछड़े को कुछ हल्का चारा देना शुरू कर सकते हैं। वैसे ज्यादातर समय तक बछड़े के लिए गाय का दूध ही फायदेमंद रहता है। लेकिन यह अनाज और चारे के मुकाबले काफी महंगा पड़ता है। इसलिए कुछ ही समय बाद पशुपालक बछड़े को अन्य आहार देने लगते हैं। 

बछड़े की देखभाल में किसी तरह की कोई लापरवाही ना हो इस बात का खास ध्यान रखें। इसके अलावा जिस भी बरतन में बछड़े को खाना या पानी दें और उस कुछ – कुछ समय में धोते रहें। 

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बछड़े के पीने का पानी 

अमूमन पशुपालक बछड़े के खाने पर तो थोड़ा बहुत ध्यान दे देते है। लेकिन उनके पीने के पानी का ध्यान नहीं रखते। इसलिए ध्यान रहे कि किसी भी स्थिति में बछड़े को पीने का पानी साफ दें। इसके अलावा बछड़ा अधिक मात्रा में पानी न पिए इस बात का भी खास ख्याल रखें। 

बछड़े को खिलाने की व्यवस्था रखें कुछ ऐसे 

  1. अगर गाय का हाल ही में प्रसव हुआ है तो ऐसे में बछड़े के खाने पीने का अधिक ध्यान रखना चाहिए। आप बछड़े को ऐसे में कुछ पेय पदार्थ दे सकते हैं। 
  2. बछड़े को आप मक्खन निकाला हुआ दूध दे सकते हैं। 
  3. आप बछड़े को कुछ अन्य द्रव पदार्थ भी दे सकते हैं जैसे छाछ, दही, मीठा पानी, दलिया आदि। 
  4. बछड़े को पूरी तरह दूध पर भी पाला जा सकता है।
  5. बछड़े को पोषक गाय को दूध पिलाना।
  6. एक नए बछड़े को जिसकी आयु 15 दिन है, उसे सूखे पदार्थ की आवश्यकता अधिक होती है। ऐसे में उसे रोजाना तीन महीने तक डीएम 1.43 किग्राम ही दें।
  7. कोशिश करें की बछड़े को हरे चारे की जगह सूखा चारा दें। 
  8. बछड़े की उम्र तीन महीने से अधिक होने के बाद अगर गाय का दूध अधिक नहीं है तो बछड़े को मक्खन निकाला हुआ दूध, छाछ और अन्य तरल पदार्थ दे सकते हैं। 

बछड़े की विकास से जुड़ी कुछ अहम बातें 

  1. बछड़े का शारीरिक विकास सही तरह से हो रहा है या नहीं, यह कुछ बातों पर निर्भर करता है जो कुछ इस प्रकार हैं। 
  2. बछड़े के वजन की समय – समय पर जांच करते रहें। अगर बछड़े का वजन कम है तो किसी चिकित्सक से बात करें और उसके आहार में कुछ बदलाव करें। 
  3. बछड़े के जन्म के शुरुआती तीन महीनों में उसके आहार का खास ध्यान रखें। 
  4. गर्भावस्था के दौरान गाय को अच्छी मात्रा में और पोषक तत्वों से भरा आहार दें। 
  5. जन्म के समय बछड़े का वजन कम से कम 20 से 25 किलो होना चाहिए। 
  6. जन्म के कुछ घंटे बाद अगर बछड़ा दूध न पी पाए तो उसे उठाकर दूध पीलाने में मदद करें। 
  7. बछड़े को समय – समय पर टीके लगवाते रहें। 

बछड़े को रखने का स्थान 

बछड़े को एक अलग बाड़े में तब तक बांधना चाहिए, जब तक वह दूध पूरी तरह न छोड़ दें। बछड़े को अलग इसलिए भी बांधना जरूरी है क्योंकि अगर बछड़े एक ही जगह पर रहते हैं तो एक दूसरे को चाटने लगते हैं। जिसकी वजह से कई रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा बछड़े को जिस बाड़े में बांधे वहां साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें। इसके साथ ही बछड़े के बाड़े में वैंटिलेशन का पूरा इंतजाम करके रखें।  नन्हे बछड़े के बाड़े में एक बिस्तर रखें और कोशिश करें कि वह सूखा ही रहे। 

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जानिए SBI से पशुपालन के लिए लोन कैसे ले सकते हैं

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हमारे देश का एक बड़ा हिस्सा आज भी पशुपालन के जरिए ही गुजारा करता है। यही कारण भी है कि सरकार और बैंकिंग संस्थान इनके कामकाज को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाते रहती हैं। आज हम ऐसी ही एक स्कीम के बारे में आपको बताने वाले हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं SBI से मिलने वाले डेयरी लोन के बारे में।
किसान और पशुपालकों के व्यापार को बढ़ाने के लिए यह सेवा सरकारी बैंक द्वारा शुरू की गई है। इस सेवा के अंतर्गत डेयरी कारोबारी एसबीआई से लोन ले सकते हैं। किसान लोन डेयरी लगाने, शेड के लिए, पशु खरीदने और दूसरी जरूरतों के लिए ले सकते हैं। हालांकि SBI के जरिए दिए जाने वाले इस लोन की कुछ पात्रता भी हैं और इससे संबंधित दस्तावेज का होना भी जरूरी है। लेकिन आप घबराइए मत हम आपको SBI डेयरी लोन से जुड़ी सभी जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया के बारे में बताएंगे। अगर आप एसबीआई से डेयरी लोन लेना चाहते हैं या इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख पर अंत तक बने रहें।

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क्या है SBI डेयरी लोन और इसका उद्देश्य 

भारत देश में किसान और पशुपालक अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकें और अधिक आय अर्जित कर पाएं। इसलिए ही यह स्कीम शुरू की गई है। इस स्कीम के जरिए पशुपालक और किसान भाई डेयरी लगाने, शेड बनाने, पशु खरीदने, डेयरी मशीन खरीदने आदि के लिए कम ब्याज दर पर लोन ले सकते हैं। डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने और भारत में दूध उत्पादन की स्थिति को अधिक बेहतर बनाने के लिए यह स्कीम शुरू की गई है।

एसबीआई पशुपालन लोन की पात्रता क्या है

यूं तो देश का बड़ा हिस्सा पशुपालन के जरिए गुजारा करता है। लेकिन इस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक को अपनी पात्रता सिद्ध करनी होगी। एसबीआई पशुपालन लोन लेने के लिए जो पात्रता चाहिए वह कुछ इस प्रकार हैं।

SBI डेयरी लोन की योग्यता

किसान या पशुपालक भाइयों के लिए शुरू की गई इस स्कीम के जरिए बहुत से कार्यों के लिए लोन लिया जा सकता है। लेकिन लोन लेकिन उसकी कुछ योग्यता होनी चाहिए।

लोन की सामान्य योग्यता

  • लोन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की आयु कम से कम 18 साल और अधिकतम 70 साल होनी चाहिए।
  • यह लोन उन लोगों को दिया जा सकता है, जो लोग पहले से डेयरी उद्योग या अन्य किसी व्यापार में कार्यरत होना चाहिए। 
  • किसान और पशुपालन का सीबील स्कोर कम नहीं होना चाहिए और वह किसी भी बैंक की सूची में डिफाल्टर नहीं होना चाहिए। 
  • आवेदन करने वाले व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। 

SBI डेयरी लोन के दस्तावेज 

अगर कोई पशुपालक या किसान इस स्कीम के तहत लोन लेना चाहता है, तो उसे कुछ दस्तावेज बैंक को दिखाने होंगे। 

  • व्यक्ति के पास अपना पहचान पत्र होना चाहिए, जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस आदि। 
  • आवेदनकर्ता को अपनी पासपोर्ट साइज फोटो भी देनी होगी। 
  • आवेदनकर्ता को अपने निवास स्थान से जुड़ा कोई सबूत देना होगा जैसे बिजली बिल, पानी का बिल या घर के रजिस्ट्री के कागजात आदि। 
  • अपना बिजनेस रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी देना होगा। 
  • अगर कारोबार में कोई पार्टनर है तो उसके दस्तावेज और पार्टनरशिप डीड भी पेश करनी होगी। 
  • बीते 6 महीनों में कितनी आय अर्जित हुई है इसका सबूत भी देना होगा।  

एसबीआई डेयरी लोन आवेदन प्रक्रिया

अगर आप डेयरी लोन के आवेदन हेतु किसी भी नजदीक के एसबीआई बैंक जाना होगा। यहां आपको डेयरी लोन के लिए फॉर्म मिल जाएगा। आप फॉर्म भरकर जरूरी दस्तावेज के साथ अटैच कर दें। अगर आपकी पात्रता सिद्ध हुई और दस्तावेज सही हुए तो आपको कुछ ही समय में लोन मिल जाएगा।
किसान और पशुपालक भाई इसी तरह की जानकारी हमारे ब्लॉग से लगातार हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो हमारी Animall App को भी डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप के जरिए आप पशु खरीद और बेच भी सकते हैं। इसके अलावा ऐप पर पशु चिकित्सक से भी सहायता ले सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
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हम अपने जानवरों को संक्रामक रोगों से कैसे बचा सकते है?

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निम्नलिखित उपाए मंदगार है:-
(क) पशुचिकित्सक की सलाह से समय पर टीका करण करवाना|
(ख) बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना|
(ग) गोबर पेशाब ओर जेरा आदि (बिमार पशुओं) को एक गड्डे में जला देना चाहिए व ऊपर से चूना डालना|
(घ) मरे हुए फू को शव को गड्डे में डालकर ऊपर चूना डालकर दबाना चाहिए|
(ङ) गौशाला के प्रवेश द्वारा पर फुट बाद बनाना चाहिए|
(च) पोटाशियम परमेगनेट व फिनाईल से हमेशा गौशाला की सफाई करनी चाहिए|

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कैसे बनाएं गाय के पानी पीने का आटोमेटिक सिस्टम?

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गर्मियों के दौरान पशुओं को अधिक पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में अगर पशु को पर्याप्त मात्रा में पानी मिले तो इसकी वजह से पशु  डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है। इस समस्या से गाय और भैंस को बचाने के लिए और उन्हें उचित मात्रा में पानी मुहैया कराने के लिए कुछ जरूरी इंतजाम करने चाहिए। घबराइए मत इसमें आपको अधिक पैसा खर्च नहीं होगा।

हम आज आपको घर में ही ऑटोमेटिक पानी का सिस्टम बनाने का तरीका बताने वाले हैं। अगर आप भी एक पशुपालक हैं और पशुओं की पीने के पानी से जुड़ी समस्या को खत्म करना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए है। आइए विस्तार से जानते हैं इसी ऑटोमेटिक वॉटर सिस्टम के बारे में। 

ऑटोमेटिक वाटर सिस्टम बनाने का तरीका 

अगर आप भी अपने पशु को बार – बार पानी देना भूल जाते हैं या फिर आलस के चलते ऐसा नहीं कर पाते तो आपके लिए ऑटोमेटिक वाटर सिस्टम बहुत फायदेमंद हो सकता है। आइए जानते हैं गाय के लिए वाटर सिस्टम बनाने के लिए किन सामग्रियों की जरूरत है और आप इसे कैसे बना सकते हैं। 

ऑटोमेटिक वाटर सिस्टम बनाने के लिए सामग्री 

  • एक चौकोर टब या कंटेनर
  • पानी के लिए पाइप 
  • नलकी को जोड़ने वाली एक यूनिट 
  • फ्लोट बॉल वाल्व 
  • एक बाल्टी 
  • एक टैब या ठूठी

ऑटोमेटिक वाटर सिस्टम की विधि 

  • अब सबसे पहले जो आपने पानी के लिए कंटेनर लिया था। इसमें दो होल या छेद करने है। जिसमें एक छेद ऊपर की ओर होगा और उसकी दूसरी तरफ दूसरा होल होगा जो आपको नीचे की ओर करना है। 
  • इसके ऊपरी भाग की ओर से पानी कंटेनर के अंदर आएगा। इसके इसी भाग पर हमें फ्लोट बॉल वाल्व लगाना होगा। वहीं दूसरी तरफ पानी बाहर निकालने वाले छेद में पाइप अटैच करना है। 
  • इसके बाद एक बाल्टी लेनी है जिसके बिल्कुल नीचे एक छेद करना है और इसमें टैब या ठूठी को फिट कर देना है और बाल्टी के अंदर की ओर एक ज्वाइंट पाइप को अटैच कर देना है। 
  • इसके बाद आपको पानी के कंटेनर और इस बाल्टी को पाइप से अटैच करना है। लेकिन ध्यान रहे कि बाल्टी थोड़ी निचाई की जगह पर ही रखें। 
  • अब जैसे ही आप कंटेनर को पानी के पाइप से जोड़ेंगे तो इसका सीधा पानी बाल्टी तक जाने लगेगा। वहीं जब पानी कंटेनर में भरना शुरू होगा तो इसके पूरा भरने से पहले ही फ्लोट बॉल वाल्व के जरिए। पानी रुक जाएगा।
  • इस सिस्टम के जरिए आपका पशु जब चाहेगा पानी पी पाएगा और पानी की बर्बादी भी नहीं होगी। 

यह ऑटोमेटिक वाटर सिस्टम आप महज 200 रुपए में तैयार कर लेंगे और इससे आपकी मेहनत भी कम हो जाएगी। 

हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपके काम आएगी। ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों को हासिल करने के लिए आप हमारी Animall App को डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप के माध्यम से पशु को खरीदा और बेचा भी  जा सकता है। इसके अलावा अगर पशुपालक चाहे तो पशु चिकित्सक से भी सहायता ले सकता है। हमारी एनिमॉल ऐप को डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। 

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