अमेरिकन गाय- दूध ही दूध के लिए इस नस्ल को खरीदें

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पहले श्वेत क्रांति के समय अमेरिका से आई ये नस्लें  हिंदुस्थान में धूम मचा रही हैं।  गायों में सबसे दूधारू नस्ल में इसकी गिनती की जाती है। जर्सी, एच एफ, ब्राउन स्विस, आयर शायर जैसी नस्लें अमेरिका से भारत आई। इन अमेरिकन गायों ने किसानों के दूध उत्पादन को दोगुना कर दिया। जहां देसी नस्ल की गायें प्रतिदिन 10 से 15 लीटर दूध निकाल पाती थीं। अमेरिकन गायों ने प्रतिदिन 20 से 25 लीटर दूध देना शुरु कर दिया

अमेरिकन गाय की पहचान क्या है?

इन गायों की सबसे बड़ी पहचान दूध क्षमता है। ठंडी, गर्मी या हो बरसात हर मौसम में अमेरिकन गायें 20 से 25 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। 10 से 15 सालों तक अमेरिकन गाय दूध देती हैं। 

अमेरिकन गाय के दूध की जानकारी

इन गायों की सबसे बड़ी पहचान दूध क्षमता है। ठंडी, गर्मी या हो बरसात हर मौसम में अमेरिकन गायें 20 से 25 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। 10 से 15 सालों तक अमेरिकन गाय दूध देती हैं।  Animall ऐप पर पहले, दुसरे और तीसरे ब्यात की बेहतरीन अमेरिकन  गायें खरीद बिक्री के लिए उपलब्ध रहती है। अमेरिकन गाय के दूध में 4 से 5 प्रतिशत फैट पाया जाता है। मात्र एक फ़ोन कॉल पर गाय-भैंस वाला Animall ऐप से शानदार अमेरिकन गायें खरीद सकते है ।

अमेरिकन गाय की देखरेख कैसे करें

दुधारू अमेरिकन गाय को ये पशु आहार दें

अमेरिकन गाय की क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए 40 से 50 किलोग्राम हरा चारा और 3 किलो दाना प्रति किलोग्राम दूध देने के लिए दें। जब पशु आहार में प्रोटीन, वसा और खनिज लवन मिलता है तो दूध में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

गाभिन अमेरिकन गाय को ये पशु आहार दें

एक 250 किलोग्राम वजन के गाय को एक दिन में कितना पशु आहार दें। 

भूसा – 4 किलो
दाना मिश्रण – ढाई किलो 

चारा बाँट कर दिन में 3-4 बार खिलाएं। साथ में दाना मिश्रण भी 2 बार बराबर मात्रा में खिलाएं। हरा और सूखा चारा दोनों मिलाकर खिलाएं। चारा के दाना मिश्रण के अलावा प्रतिदिन 35- 40 लीटर पानी गाय को जरुर पिलायें।

अमेरिकन गाय को होने वाली बीमारियां

स्वस्थ अमेरिकन गायों के ये जरुरी लक्षण

स्वस्थ पशुओं की आंखें चमकीली होती हैं। इसमें किसी भी तरह के तरल पदार्थ जैसे पानी या खून के धब्बे नजर नहीं आते। स्वस्थ अमेरिकन  गायें  बहुत ज्यादा खांसती  नहीं हैं, घर्राने की आवाजें भी नही आती है। इसमें सांस लेने की प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य होती है। आपको स्वस्थ्य अमेरिकन गाय का चमड़ा भी चमकदार दिखाई देगा, शरीर पर कही से भी जूं-चीचड़ नहीं दिखाई देगा। स्वस्थ पशु के चलने-फिरने या उठने-बैठने में परेशानी नहीं होती है।

ब्रुसेला बीमारी से अपनी अमेरिकन नस्ल की गायों को ऐसे दूर रखें.

अमेरिकन गायों में ब्रुसेला बीमारी के क्या लक्षण हैं?

पशुपालक साथी अभी हम आपको अमेरिकन नस्ल के गायों में होने वाले ब्रुसेला बीमारी के लक्षण के बारे में बताने जा रहे हैं। अगर आपकी अमेरिकन  गाय इस बीमारी से ग्रसित है तो उसे बुखार की शिकायत रहेगी। उस गाय का वजन भी लगातार कम होता जायेगा। रात में गाय को पसीना भी आएगा। अगर आपकी गाय को ये सारे लक्षण दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से बात करें।

कैसे बचायें ब्रुसेला से

घर की सभी अमेरिकन नस्ल की गायों को ब्रुसेला का टीका लगायें। अगर अमेरिकन नस्ल की गाय ने बछड़ी को जन्म दिया है तो पैदा होने के 6 महीने बाद ब्रुसेला बीमारी का टीका लगायें। ब्रुसेला एक जानलेवा बीमारी है, जो मनुष्यों से गायों में फैलता है। इसकी चपेट में आने पर गायें तुरंत बीमार हो जाती हैं। भारत में ही बने टीका  ब्रुसेला S-19  पशुओं को  लगाया जाता है।

अमेरिकन गायों में होने वाले सर्रा बीमारी की सारी जानकारी जान  लीजिये

यह एक परजीवी से होने वाला रोग है। ट्रिपैनोसोमा ईवांसी नामक सूक्ष्म परजीवी से ये बीमारी फैलता है। इस बीमारी के फैलने से पशुओं की उत्पादन क्षमता में भारी कमी आती है। तुरंत ही पशुओं की मृत्यु हो जाती है जिससे पशुपालकों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। सबसे पहले साल 1885 में सर्रा बीमारी को देखा गया था।

मान लीजिए अगर कोई पशु सर्रा बीमारी से ग्रसित है अगर मक्खी उसका खून चूसकर स्वस्थ पशु को काट लेगा तो उसे ये बीमारी फ़ैल जाएगी। पशु विज्ञान में सर्रा रोग के लिए जिम्मेदार मक्खी को टेबनेस मक्खी कहते हैं। भारत में पशुओं को काटने वाले मक्खी को लोग डांस मक्खी के नाम से जानते हैं।

अमेरिकन गाय में सर्रा रोग के क्या लक्षण हैं ?

आपके अमेरिकन गाय को रुक रुक कर बुखार आएगा। वो बार बार पेशाब करेगी। इतना ही नहीं आपकी अमेरिकन गाय गोल गोल चक्कर भी काटने लगेगी। सर्रा बीमारी से ग्रसित आपकी अमेरिकन गाय को भूख भी कम लगेगा। गाय के मुंह से लार गिरने लगेगा । उसके आंख और नाक से पानी गिरने लगेगी।

सर्रा बीमारी से ग्रसित आपके दुधारू अमेरिकन गाय का दूध कम हो जायेगा। वो धीरे-धीरे कमजोर होते चली जाएगी। कई बार गायों का पिछला भाग लकवाग्रस्त हो जाता है। अगर कोई अमेरिकन गाय इस बीमारी से ग्रसित है तो आँखों में सफेदी आने लगता है। उस पशु के निचले भाग में भी सूजन आने लगता है।

अमेरिकन गाय को थनैला रोग से बचाने के लिए ये कदम उठायें

पशुओं के बांधे जाने वाले स्थान और दूध दुहने के स्थान की सफाई का विशेष ध्यान रखें। दूध दुहने की तकनीक सही होनी चाहिए जिससे थन को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे। थन में किसी प्रकार की चोट (मामूली खरोंच भी) का तुरंत इलाज कराएं। थन का उपचार दुहने से पहले व बाद में दवा के घोल में (पोटेशियम परमैगनेट 1:1000 या क्लोरहेक्सिडीन 0.5 प्रतिशत) डुबो कर करें। दूध की धार कभी भी फर्श पर न मारें। रोगी पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें तथा उन्हें दुहने वाले भी अलग हों। अगर ऐसा संभव न हो तो बीमार  पशु का दूध सबसे बाद में निकालें। समय-समय पर दूध की जाँच करवाते रहें। अगर थनों में सुधार न दिखें तो पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।

कुछ ही मिनटों में अमेरिकन गाय को Animall ऐप से कैसे खरीदें?

Animall ऐप पर अपने आसपास की ढेर सारी अमेरिकन गाय खरीद सकते हैं। अमेरिकन   गायों की खरीदारी करने के लिए अपने मोबाइल फ़ोन में गाय-भैंस वाला Animall ऐप डालें। ऐप में अपन मोबाइल नंबर दर्ज करा कर गाय पर दबाएँ। दबाते  ही आप ढेर सारी गायों के नस्ल के नाम देख पाएंगे । यहाँ अमेरिकन  नस्ल  चुने और अपने घर मनचाहे ब्यात और दूध क्षमता वाली गाय ले जायें। 

इन तीन आसान तरीकों से खरीदे नयी अमेरिकन गाय ।

  1. अपने गाँव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।
  2. पिनकोड डालने के बाद  गाय  पर दबाएँ । यहाँ अमेरिकन का चयन करें । क्लिक करने  के बाद  यहाँ आप नस्ल के साथ साथ अपने मन के अनुसार दूध क्षमता और ब्यात का का चुनाव भी कर सकते है।
  3. अब आपको अपने आसपास की सारी  दुधारू अमेरिकन  नस्ल गाय दिखने लगेंगी । इनमे से अपने पसंद का पशु चुनकर ख़रीदार से बात करें और  घर ले जायें नया पशुधन।

आपको अपनी अमेरिकन गाय बेचनी है ?  Animall ऐप पर  ऐसे अपना पशु बेचें।

इन सरल तरीकों को अपनाकर अमेरिकन गाय Animall ऐप पर बेचें। ऐसे Animall ऐप से तुरंत अमेरिकन गाय बेचें। ऊपर लिखे गये तरीके से Animall ऐप में खुद को रजिस्टर कर लें। इसके बाद पशु बेचें पर दबाएँ। इस बटन पर दबाते ही आप अमेरिकन गाय की दूध क्षमता, ब्यात और कीमत लिख सकते हैं। अपने अमेरिकन   गाय की  सभी जानकारियाँ डालने के बाद आपका पशु ऐप पर दर्ज हो जायेगा।  मुबारक हो, आपकी अमेरिकन गाय ऐप पर दर्ज हो गया है। अब ख़रीदार आपको गाय  के लिए कॉल करेंगे। और पढ़ें

 

 

 

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वेचुर गाय से जुड़ी सारी जानकारी यहां पढ़ें!

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क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसी नस्ल की गाय है, जो गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सबसे छोटी नस्ल के रूप में दर्ज है। इस नस्ल का नाम वेचुर गाय है। दरअसल भारत में केरल राज्य के कोट्टायम जिले में वेचुर गाय की नस्ल को विश्व की सबसे छोटी नस्ल कहा गया है। इस नस्ल की गाय का नाम केरल के कोट्टायम जिले में पड़ने वाले गांव वेचुर पर रखा गया। ये एक दुर्लभ नस्ल है।

इस पशु की औसत लंबाई 124 सेमी (लगभग 4 फीट और 1 इंच) होती है और वहीं इसकी ऊंचाई भी 87 सेमी (लगभग 2 फीट और 10 इंच) होती है। वेचुर गाय दूध उत्पादन में भी काफी बेहतर मानी जाती है। और पढ़ें


वेचुर गाय की पहचान कैसे करें

वेचुर गायों की शारीरिक बनावट आमतौर पर काफी अलग होती है। ये बाकी गायों की तुलना में काफी अलग होती है। इस नस्ल की गाय की लंबाई लगभग 124 सेमी और ऊंचाई 85 सेमी होती है। जबकि इसका वजन लगभग 130 किलो होता है।

ये हल्के लाल, काले और सफेद रंगों की मिलावट होने की वजह से बेहद ही आकर्षित लगती हैं। इन गायों का सिर लंबा और संकरा होता है और वहीं इनकी पूंछ लंबी और कान सामान्य पर खूबसूरत होते हैं। इन गायों के सींग पतले, छोटे और नीचे की ओर मुड़े हुए होते हैं।

इन्हीं विशेषताओं के कारण वेचुर गाय को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्डस में सबसे छोटे कद की गाय के रूप में शामिल किया गया है। इस नस्ल के प्रजनन क्षेत्र केरल के अलप्पुझा, कन्नूर, कोट्टायम और कासरगोड जिले हैं। और पढ़ें

 

वेचुर गाय के दूध से जुड़ी जानकारी

वेचुर गाय का दूध काफी बेहतर गुणवत्ता का होता है। इसका उपयोग केरल में परंपरागत रूप से दवाईयां बनाने में किया जाता है। क्योंकि इस नस्ल के दूध में काफी ज्यादा औषधीय गुण पाए जाते हैं। वहीं अगर बात करें कि वेचुर गाय दूध कितना देती है, तो ये गाय बहुत ज्यादा दूध नहीं देती है। ये गाय रोजाना का आमतौर पर लगभग 2 से 3 लीटर तक ही दूध प्रदान करती हैं।

लेकिन वेचुर गाय को बाकी गाय की नस्लों की तुलना में बहुत ही कम खर्च में पाला जाता है। क्योंकि ये काफी कम चारे में ही पल जाती है। इन गायों के दूध में 4.5 से 6 फीसदी तक फैट होता है। पहले ब्यात के समय इन गायों की आयु तीन साल होती है। क्योंकि ये दूध कम देती हैं इसलिए दूध का व्यवस्या करने वाले लोग इसे कम ही पालते हैं।

वेचुर गाय की खासियत

इस नस्ल की गायों पर जहां रोग बहुत कम ही असर करते हैं इन गायों के दूध में सबसे अधिक औषधीय गुण भी होते हैं। इतनी विशेषताओं की वजह से इन्हें पालना मुश्किल नहीं होता है। क्योंकि ये बेहद ही कम खर्चीली होती है। आप इस तरह से मान सकते हैं कि ये सिर्फ इतना ही खर्च करवाती है जितना एक बकरी करवाती है। और पढ़ें

 

वेचुर गाय की देखरेख कैसे करें

वेचुर गाय की देखभाल करने के लिए आपको एक साफ शेड की जरूरत होती है। शेड होने के कारण पशु को गर्मी, ठंड, बारिश के कारण किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। इसके अलावा शेड में आपको पशु के लिए साफ पानी और साफ हवा की जरूरत होगी।

इसके अलावा वेचुर कम चारा खाती है, इसलिए उसे ठीक से संतुलित आहार ही दें। आप अपने पशु को फलीदार चारा देने से पहले उसमें तूड़ी और अन्य चारा जरूर मिला लें।

वेचुर गाय को लगने वाले टीके 

किसान और पशुपालकों के लिए ये बेहद जरूरी है कि वो वेचुर गाय को ब्रुसेला जैसे टीके ठीक समय पर लगवा दें। ब्रुसेला का टीका गाय को जन्म के 6 महीनों के बाद ही लगाया जाता है। इसके अलावा वेचुर गाय को मुंह खुर और अन्य टीके भी जरूर लगवाएं। और पढ़ें

 

वेचुर गाय को होने वाली बीमारियां और उनके रोकथाम

हालांकि वेचुर गाय की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी होती है। उसे बहुत ज्यादा बीमारियां नहीं होती है। लेकिन फिर भी उसका सही तरीके से ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में वेचुर गाय को होने वाली कुछ आम बीमारियों के बारे में जानते हैं।

  1. बदहजमी- गाय को बदहजमी की तकलीफ तब होती है जब उसे खाने में ऐसी चीज दी जाए, जिसे पचने में ज्यादा वक्त लगता हो। इस परेशानी से बचाने के लिए वेचुर गाय को हल्का चारा ही दें।
  2. कब्ज – कब्ज की समस्या होने में वेचुर गाय को मल त्यागने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर आपके पशु को भी ये परेशानी हो रही है तो उसे अलसी के 500 एमएल तेल को चारे में मिलाकर दें। इसके अलावा ध्यान रखें की पशन को पीने के लिए पानी की मात्रा सही मिले।
  3. थनैला – थनैला एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी दुधारू पशु को हो सकती है। इससे बचने के लिए आपको साफ-सफाई का खास ध्यान रखना होता है। साथी ही ये ध्यान देना होता है कि पशु के थनों में किसी तरह का इंफैक्शन न हो। ऐसा होने की स्थिति में पशु को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआती समय में तो इसका इलाज मुमकिन है, लेकिन अगर सही वक्त पर इलाज नहीं करवाया तो थन बचाना मुश्किल हो जाता है। और पढ़ें

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

अगर आप भी घर बैठे एक वेचुर गाय खरीदना चाहते हैं या फिर आप अपना पशु बेचना चाहते हैं, तो उसके लिए अब आपको इधर-उधर धक्के नहीं काटने पड़ेंगे। आपको सिर्फ अपने स्मार्ट फोन में Animall ऐप को डाउनलोड करना है। ऐप डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। Click Here

  1. ऐप डाउनलोड करने के बाद आप इसमें मोबाइल नंबर डालें  और जगह का चुनाव करें।
     
  2. अब आप जिस भाषा में ऐप इस्तेमाल करना चाहते हैं, वो भाषा चुनें
     
  3. आपकी ऐप इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। अब बिना किसी देरी के पशु खरीद या बेच सकते हैं। दोनों ही विकल्प आपको ऐप में नीचे की तरफ देखने को मिल जाएंगे।
     
  4. आप अगर गाय खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए गाय के विकल्प को चुनें।
     
  5. जैसे ही आप गाय के विकल्प को चुनेंगे, आपको एक सूची दिखने लगेगी। ये उन पशुओं की सूची जो बिकाऊ है। 
  6. आप इस सूची में अपनी जरूरत के मुताबिक दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प को चुन सकते हैं। और अपनी पसंद की गाय चुन सकेंगे।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी गाय चुनते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं। यहां तक की आप बात करने के साथ-साथ उस व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं।

कैसे बेचें Animall ऐप पर पशु

  1. अगर आप गाय बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप में ठीक नीचे देखेंगे। तो वहां पर बीचों बीच आपको पशु बेचने का विकल्प दिखाई देगा।
     
  2. इसके बाद आपको पशु से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी। इसमें आपको अपनी गाय की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो अपलोड करनी होती है।
     
  3. आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो गया है, जो भी खरीदार आपका पशु लेने में रुचि लेगा, वो आपसे सीधा संपर्क कर सकता है और आप उसे अपना पशु आसानी से बेच सकते हैं। 

Animall ऐप पर आप पशु खरीदने और बेचने के साथ-साथ, उनसे जुड़ी हर तरह की जानकारी भी ले सकते हैं। इतना ही नहीं पशु के बीमार होने की स्थिति में आप डॉक्टर से भी आसानी से बात कर सकते हैं। और पढ़ें

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मेहसाणाा भैंस से जुड़ी सारी जानकारी यहां पढ़ें!

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भारत में भैंस पालना किसानों के लिए एक मुख्य आय का स्त्रोत है। भारत विश्व में दूध उत्पादन के लिए सबसे बड़ा देश है और ये बनना भैंस के बिना मुमकिन नहीं है। भारत में कई नस्ल की भैंस अलग अलग राज्यों में मिलती है। भैंस की नस्लों में ही एक बहुत ही मशहूर है मेहसाणा। 

मेहसाणा नस्ल की भैंस आमतौर पर गुजरात के साबरकांठा, बनासकांठा, अहमदाबाद और गांधीनगर जिलों में पाई जाती हैं। इसका नाम मेहसाणा इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी उतपत्ति गुजरात राज्य के मेहसाणा जिले में हुई है। इसे मेहसानी नाम से भी जाना जाता है। मेहसाणा को उसकी बेहतरी प्रजनन क्षमता के लिए जाना जाता है। और पढ़ें

 

मेहसाणा नस्ल की पहचान

मेहसाणा नस्ल की भैंस काले, भूरे और सलेटी रंग की होती है। ये दिखने में मुर्रा की तरह ही होती है। हालांकि इसका शरीर मुर्रा भैंस की तुलना में बड़ा होता है, लेकिन वजन में ये उससे हल्की होती है। दिखने में ये भैंस बहुत धाकड़ दिखती है। मेहसाणा भैंस का वजन 480 किलो के आसपास होता है। वहीं मेहसाणा के सींग आम तौर पर दरांती से आकार के होते हैं और वो मुर्रा भैंस से कम घूमी हुई रहती है।

मेहसाणा के लिए कहते हैं कि ये मुर्रा और मेहसाणा नस्ल के क्रॉस ब्रीड से बनी है। इसी वजह से दिखने में काफी मुर्रा से मिलती होती है।

 

मेहसाणा भैंस के दूध की विशेषताएं

मेहसाणा भैंस का दूध गुणवत्ता में काफी अच्छा होता है। मेहसाणा भैंस की पहली ब्यात का समय 42 से 48 महीने होता है। ये भैंस रोजाना का 10 लीटर दूध दे सकती है। डेयरी फार्मिंग के नजरिये से ये नस्ल बेहद ही खास मानी जाती है। एक ब्यात में मेहसाणा भैंस 1200 से 1500 लीटर तक दूध दे सकती है। मेहसाणा के दूध में लगभग 7 फीसदी तक फैट होता है। और पढ़ें

 

मेहसाणा भैंस को चारे में क्या दें

मेहसाणा नस्ल की भैंस को खुराक बेहद ही संभाल कर देने की जरूरत होती है। उसे जरूरत से ज्यादा खुराक बिलकुल भी ना दें। अगर आप भैंस को फलीदार चारा दे रहें हैं तो उसमें तूड़ी या फिर कोई अन्य चारा जरूर मिला लें। ऐसा करने से पशु को अफारा या बदहजमी की शिकायत नहीं होगी।

एक मेहसाणा भैंस को खुराक में प्रोटीन, कैलशियम, फासफोरस, विटामिन ए की जरूरत होती है। उसे दाने के रूप में मक्की, गेहूं, जौं, जई, बाजरा जरूर दें। इसके अलावा उसे गेहूं का चोकर, चावलों की पॉलिश, बिना तेल के चावलों की पॉलिश भी दे सकते हैं।

 

भैंस की देखरेख कैसे करें

मेहसाणा भैंस को पालने के लिए आपको एक शेड की जरूरत होगी क्योंकि पसु को भारी बारिश, तेज धूप, ज्यदा ठंड, बर्फबारी जैसे वातावरण से बचाने की जरूरत होती है। इतना ही नहीं इस बात का भी ध्यान रकें की शेड में साफ हवा और पानी भी साफ ही रहे। इसके अलावा पशुओं की संख्या के हिसाब से उनके आसानी से चारा खाने के लिए खुली जगह का प्रबंध रखें। और पढ़ें

गर्भवती जानवरों की देखभाल:

अगर आप एक गर्भवती मेहसाणा का खास ध्यान रखते हैं, तो उसके कई पायदे हैं, जैसे की अच्छे प्रबंधन की वदह से जो बछड़ा होगा वो स्वस्थ और अच्छा होगा। साथ ही भैंस जो दूध देगी वो भी ज्यादा मात्रा में हो सकता है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होगी। गर्भवती भैंस को खाने में चारे की ज्यादा जरूरत पड़ती है।

पाड़ी/ पाड़ा की देखभाल और प्रबंधन:

भैंस जब बच्चा दे देती है तो उसके जन्म के बाद नाक या मुंह से कफ को तुरंत हटा दें। अगर पाड़ा या पाड़ी सांस नहीं ले पा रहा है, तो उसे बनावटी सांस दें।

 

मेहसाणा भैंस को होने वाली आम बीमारियां और उनका इलाज

भैंसों का गल-घोटू रोग

भैंसों में गल-घोटू रोग एक जानलेवा बीमारी है, ये बीमारी ज्यादातर 6 महीने से लेकर 2 साल के पशु को होती है। गल घोटू रोग का कारण पासचुरेला मलटूसिडा नामक जीवाणु होता है, ये जीवाणु पशु के टांसिल में होता है। इसके अलावा ज्यादा काम के बोझ की वजह से या फिर खराब पोषण, गर्मी और अन्य बीमारियां के कारण गल घोटू रोग होते हैं। ज्यादातर ये बीमारी बारिश के मौसम में होती है। और पढ़ें

गल-घोटू रोग के लक्षण

  •   बुखार होना
  •   मुंह से लार टपकना
  •   आंख और नाक से पानी निकलना
  •   भूख न लगना
  •   पेट दर्द होना और दस्त होना आदि

रोकथाम

  •   गर्मियों के मौसम में पशुओं को इक्ट्ठे और तंग जगह पर ना बांधे।
  •   बीमार पशुओं को बाकी पशुओं से अलग रखें।
  •   मॉनसून आने से पहले ही टीकाकरण करवाएं। पशुओं के पहले टीका 6 महीने की उम्र में और फिर हर साल जरूरी करवाएं।
  •   लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

तिल्ली का रोग (एंथ्रैक्स)

मेहसाणा भैंस को इस बीमारी काफी तेज बुखार होता है। ये बीमारी आमतौर पर कीटाणु या फिर गंदे पानी की वजह से होती है, लेकिन खराब खुराक भी इसका एक कारण हो सकता है। ये बीमारी अचानक होती है या कुछ समय भी ले सकती है।

लक्षण:

  • इसमें जानवर का शरीर अकड़ जाता है
  • चारों टांगे बाहर को खींची जाती हैं।

रोकथाम: इसका कोई असरदायक इलाज नहीं है। हर साल इसके बचाव के लिए टीके लगवाये जाने चाहिए।

 

Animall पर कैसे खरीदें भैंस

अगर आप भी एक मेहसाणा भैंस खरीदना चाहते हैं या फिर अपनी मेहसाणा भैंस को बेचना चाहते हैं तो तुरंत ही अपने फोन में Animall ऐप को डाउनलोड कर लो। इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको पशु खरीदने या बेचने की सारी सिरदर्दी से छुटकारा मिल जाएगा।

Animall ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको मार्केट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ऐप डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले आप प्ले स्टोर पर जाएं और वहां से Animall ऐप को डाउनलोड करें। आप इस लिंक से भी डाउनलोड कर सकते हैं Click Here

          

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आप अपने मोबाइल नंबर से रजिस्टर करें। साथ ही अपनी जगह को चुनें।
  2. इसके बाद आपको ऐप की भाषा चुनने का विकल्प मिलेगा।
  3. इसके बाद आप ऐप को पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं। यहां पर आपके सामने पशु खरीदने और बेचने दोनों के विकल्प नजर आएंगे।
  4. अगर आप मेहसाणा भैंस खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए आपको भैंस के विकल्प चुनने की जरूरत है।
  5. जो भी भैंस बिकाऊ होगी, उसकी पूरी सूची आपको यहां पर मिल जाएगी।
  6. इसके बाद आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प दिखाई देंगे। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पशुओं की सूची हासिल कर सकेंगे।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी भैंस को चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले इंसान से बात कर सकते हैं।
  8. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं और भैंस से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।

 

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. वहीं अगर आप अपनी भैंस बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप में नीचें देखेंगे तो पशु बेचें विकल्प मिलेगा। इसे दबाने के बाद आप पशु बेच सकेंगे।
  2. यहां पर क्लिक करने के बाद आपको अपनी भैंस से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी। जैसे की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध की क्षमता, फोटो आदि।
  3. जैसे ही आप ये सारी जानकारी देंगे उसके कुछ ही मिनटों के अंदर आपका पशु ऐप पर लिस्ट हो जाएगा। जो भी खरीदार होगा वो सीधा आपसे संपर्क कर सकेगा।

 

जहां एक तरफ आप बेहद आसानी से Animall ऐप पर अपना पशु बेच सकते हैं। तो वहीं दूसरी तरफ आपको पशु से जुड़ी जानकारियां और डॉक्टरों से सहायता भी ऐप पर मिल जाती है। और पढ़ें

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भदावरी भैंस की जानकारी यहाँ पढ़ें

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Source -Pashugyan.org

देश के वह पशुपालक जो एक अच्छी नस्ल की भैंस ढूंढ रहे हैं। उनके लिए भदावरी भैंस एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह भारत में उत्तर प्रदेश के इटावा और आगरा में पाई जाती है। इस नस्ल की भैंस से प्राप्त दूध में न केवल अधिक मात्रा में फैट पाया जाता है। बल्कि इसके जरिए दिए गए दूध से सबसे ज्यादा घी निकलता है। जिसकी कीमत 1000 रुपए से 1500 रुपए किलो तक भी होती है। आज के समय में भी शहरों के अंदर भैंस के घी और दूध की मांग बहुत अधिक है। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि भदावरी भैंस को पालना पशुपालकों के लिए एक फायदे का सौदा है। 

आज हम अपने इस लेख में आपको भदावरी भैंस के दूध के गुण से लेकर इस भैंस से जुड़ी हुई तमाम जानकारियां देंगे। अगर आप भदावरी भैंस की जानकारी हासिल करना चाहते हैं, या फिर बिना किसी सिरदर्दी के भदावरी भैंस खरीदना और बेचना चाहते हैं तो आप इस लेख पर बने रह सकते हैं। इस भैंस को आप हमारी Animall App के जरिए खरीद सकते हैं। आइए जानते हैं आखिर कैसे भदावरी भैंस को खरीदा या बेचा जा सकता है और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में।  

 

भदावरी भैंस की पहचान कैसे करें 


Source – Alchetron.com

भदावरी एक कम कद वाली भैंस है। भदावरी भैंस का शरीर बेहद नुकीला और सिर छोटा होता है। भदावरी नस्ल की भैंस की टांगे काफी मजबूत और छोटी होती हैं। वहीं अगर भैंस के रंग की बात करें तो इनका तांबिया होता है और इनके शरीर पर बाल बेहद कम ही होते हैं। इसके अलावा इनके घुटने के नीचे का हिस्सा हल्के पीले रंग का होता है। साथ ही गर्दन के नीचे सफेद रंग की धारियां होती हैं।  इस भैंस के सींग काले होते हैं और इनकी पलके भूरे रंग की होती हैं। ज्ञात हो भदावरी नस्ल के पशु का औसतन वजन 300 से 400 किलो तक ही होता है। 

 

भदावरी भैंस का दूध और इसकी विशेषताएं

भदावरी भैंस के दूध में 6 से 12.5 प्रतिशत तक फैट होता है, जो अन्य भैंस की नस्ल के मुकाबले काफी अधिक है। आपको बता दें कि यह पशु ज्यादातर हर तरह के तापमान को बर्दाश्त कर सकता है। साथ ही इनमें दूध देने की क्षमता भी बेहद अधिक होती है। भदावरी भैंस एक ब्यात में करीब 800 से लेकर 1000 लीटर तक दूध देती है। यही नहीं भदावरी भैंस की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी मजबूत होती है। वहीं अन्य भैंस के कटड़ों के मुकाबले इस नस्ल के कटड़ों की मृत्यु 5 प्रतिशत तक कम ही होती है। 

 

भदावरी भैंस की देखरेख कैसे करें 

भदावरी नस्ल की भैंस यूं तो हर तरह के मौसम को झेलने की क्षमता रखती हैं। लेकिन भैंस की दूध उत्पादकता बढ़ाने और इन्हें स्वस्थ रखने के लिए कई कदम उठाना बेहद जरूरी होता है। भैंस को रखने के लिए एक शेड की जरूरत है। इस शेड का निर्माण कुछ इस तरीके से होना चाहिए कि यहां से हवा की आवाजाही बाधित न हो और भैंस का बारिश और धूप से भी बचाव हो सके। 

भदावरी भैंस का चारा 

भदावरी भैंस यूं तो एक बेहतर सहनशक्ति वाला पशु है। लेकिन इन्हें चारा देते समय यह देखना चाहिए कि वह हल्का और आसानी से पचाया जा सके। इसके लिए भैंस को फालीदार चारा तूड़ी में मिलाकर देना चाहिए। अगर आप इस तरह का चारा भैंस को देते हैं तो भैंस को बदहजमी और अफारा की समस्या नहीं होगी। इसके अलावा भी भदावरी भैंस को कुछ अन्य चीजें दी जा सकती हैं जो कुछ इस प्रकार हैं। 

भैंस को आप कई अनाज दे सकते हैं जैसे गेहूं, बाजरा, जौ, जई और मक्की आदि। 

भदावरी नस्ल की भैंस को आप मूंगफली, सोयाबीन, अलसी, बड़ेवे, सरसों और सूरजमुखी के बीज खाने को दे सकते हैं। 

इन सभी चीजों के अलावा शराब के कारखानों से बचे हुए दाने, खराब आलू, सब्जी, फल और आटा आदि दे सकते हैं। 

भदावरी भैंस को लगाए जाने वाले टीके 

भदावरी भैंस के जन्म के बाद इन पर थोड़ा अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ऐसे में जन्म के 7 से दिन बाद इलेक्ट्रिकल ढंग से कटड़े के सींग दागने की जरूरत होती है। इसके अलावा जन्म के दो से तीन सप्ताह के बाद विषाणु श्वसन टीका लगवाना चाहिए। साथ ही भदावरी भैंस के कटड़े को जब वह 1 से तीन महीने का हुआ हो, तो उसे क्लोस्ट्रीडायल टीका दें। 

 

भदावरी भैंस को होने वाले रोग और उनके उपचार 


Source – dairyknowledge.in

भदावरी नस्ल की भैंस भले ही एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली वाला जीव हो। लेकिन इन्हें कई बार कुछ रोग परेशान कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस नस्ल की भैंस को होने वाले रोग और उसके उपचार। 

तेजाबी बदहजमी और उसका इलाज 

अगर भैंस को तेजाबी बदहजमी की समस्या हो गई है तो उन्हें अधिक निशाचन वाली खुराक बिल्कुल न दें। इसके अलावा मठ्ठी बीमारी की हालत में पशु को मीठा सोडा मुंह के जरिए दें। 

कब्ज और इसका इलाज 

आपको बता दें कि कब्ज एक ऐसी समस्या है जिसके दौरान पशु को मल त्यागने में दिक्कत होती है। वहीं कई बार कब्ज लंबे समय तक रहने की वजह भयंकर बीमारियां भी हो जाती हैं। 

अगर हाल ही में भैंस को कब्ज का रोग हुआ है तो आप उन्हें 500 एमएल अलसी के तेल चारे के साथ दे और अधिक पानी पिलाएं। इसके अलावा बड़े जानवरों के लिए 800 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट पानी में डाले और 30 अदरक का चूरा बना दें। 

अफारा रोग और उसका उपचार 

भदावरी नस्ल की भैंस को अफारे की समस्या अक्सर हो जाती है। आपको बता दें कि इस रोग में पशु के पेट में दर्द और पेट फूल जाता है। इसके अलावा अफारा होने पर सांस लेने में भी दिक्कत होती है। 

पशु को अफारा होने पर उसे 30 से 60 एम एल तक तारपीन का तेल दें। साथ ही ध्यान रखें कि तेल की मात्रा अधिक न हो। वरना इसकी वजह से पेट भी खराब हो सकता है। इसके अलावा अगर पशु को बार – बार अफारा हो तो उसे एक्टिवेटेड चारकोल, 40 प्रतिशत फार्मलीन और 15 से 30 एम एल डेटॉल का पानी भी दे। अगर पशु को इन उपाय से कोई लाभ न हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

सिक्के का जहर और इसका इलाज 

भदावरी भैंस को जब यह समस्या होती है तो इस दौरान वह लड़खड़ाने लगती है और उसकी आंखें घूमने लगती है। साथ ही मुंह से झाग भी निकलने लगता है। आमतौर पर यह समस्या पशु को तब होती है जब वह किसी ऐसी चीज को चाट लेती हैं, जहां पेंट हुआ हो। 

अगर पशु को सिक्का जहर से बचाकर रखना है तो उन्हें सही स्थान पर बांध के रखे। इसके अलावा उन्हें ऐसी जगह से दूर रखें जहां सिक्का पिघलाया जाता है। साथ ही स्थिति काबू में करने के लिए आप डॉक्टर की राय पर पशु को 25 प्रतिशत कैल्शियम वरसीनेट दिन में दो बार दें। 

ब्लैक क्वार्टर बीमारी एवं इसका इलाज 

भदावरी भैंस को अगर बारिश के मौसमें गिली मिट्टी पर ही लंबे समय तक छोड़ दिया जाए तो उन्हें ब्लैक क्वार्टर रोग हो सकता है। आपको बता दें कि यह जीवाणु ज्यादातर बारिश के दिनों में मिट्टी से ही पैदा होता है। इस रोग का असर पशुधन पर बुरा होता है।  इस रोग के दौरान पशु को तेज बुखार हो जाता है और वह सही तरह से सांस भी नहीं ले पाता। हालांकि आमतौर पर यह 2 साल से कम उम्र के पशु को ही प्रभावित करता है। 

भदावरी भैंस को यह रोग होने पर प्रभावित स्थान पर पैनसीलिन का टीका दिया जाता है। इसके अलावा 4 महीने से 3 वर्ष के पशु को सूजन वाली जगह पर  हाइड्रोजन पेरोक्साइड और पोटेशियम परमैंगनेट  के से ड्रेसिंग करनी होती है। 

 

भैंस बेचने और खरीदने का ऑनलाइन तरीका 

भैंस खरीदने और बेचने के लिए आप Animall App अपने एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में  डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें Click Here

 

  1. लिंक पर क्लिक करने पर एक ऐसा पेज खुल जाएगा। यहां आपको इंस्टॉल के बटन पर क्लिक करना है।
  2. इसके बाद जब ऐप डाउनलोड हो जाए तो आप यहां रजिस्ट्रेशन हेतु अपना मोबाइल नंबर डालें।
  3. अब अपने स्थान का चुनाव करें या ऐप को खुद आपकी लोकेशन का पता लगाने दें।
  4. इसके बाद आपको अपनी भाषा का चुनाव करना होगा।
  5. आपके पिछले चुनाव के बाद ऐप इस्तेमाल के लिए तैयार हो गई होगी। यहां से आप गाय खरीद या बेच सकते हैं।

 

भैंस खरीदने का तरीका 

  1. उदाहरण के लिए अगर आपको भैंस खरीदनी है तो आप भैंस के विकल्प का चुनाव करें।
  2. यहां आपको जो भैंस खरीदी जा सकती हैं। उनकी सूची दिखाई देगी।
  3. इसके बाद एक नया पेज खुलेगा यहां आपको दूध, ब्यात, नस्ल का जानकारी देनी होगी। जैसे ही आप इन जानकारियों को ऐप पर डालेंगे आपके सामने सूची आ जाएगी। 
  4. इस सूची के आधार पर आप अपनी भैंस चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  5. यंहा भैंस की कीमत को कम कराने का काम भी आप कर सकते हैं। 

 

भैंस बेचना

  1. अगर आप भैंस बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। सहायता के लिए नीचे दी गई तस्वीर का इस्तेमाल कर सकते हैं। जहां आपको निशान दिखाई देगा वहीं आपको क्लिक करना है
  2. अब भैंस की ब्यात, दूध देने की क्षमता, नस्ल आदि जानकारी देनी है। सहायता के लिए नीचे चित्र को देखें।
  3. यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारी अपलोड हो गई है। अब भैंस को खरीदने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति आपसे स्वयं बात कर लेगा। 
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जानें नागौर पशुमेला के बारे में सारी जानकारी!

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भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान – अपने किलों, महलों, आकर्षक वन्य जीवन और सुनहरे रेतीले रेगिस्तान के लिए मशहूर है। ये सारी चीजें इस खूबसूरत भारतीय राज्य की पहचान है। लेकिन राजस्थान सिर्फ अपने किलों, प्रेम और साहस की कहानियों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है बल्कि ये राज्य मेलों और त्योहारों के लिए भी उतना ही मशहूर है।

राजस्थान के मेले और त्योहार असंख्य हैं और न सिर्फ लोकल लोगों के लिए खास होते हैं बल्कि इस सुंदर पर्यटन स्थलों पर आने वाले यात्रियों पर भी एक अनूठा महत्व और प्रभाव छोड़ते हैं। ऐसा ही एक त्योहार जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है वो है नागौर पशुमला। ये पशुमेला लोगों के बीच में बहुत जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है और इस त्योहार के करिश्मे को देखने के लिए बहुत सारे पर्यटक दूर-दूर से इस जगह पर आते हैं।

नागौर पशुमेला हर साल जनवरी और फरवरी के महीने में आयोजित होता है। दूर-दूर से हर साल लोग यहां पर आते हैं और पशुओं को खरीदने और बेचने में हिस्सा लेते हैं। इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा पशुमेला कहते हैं।

नागौर पशुमेला का इतिहास

नागौर राजस्थान का एक प्राचीन शहर है जो इसके आसपास के मैदानी इलाकों के पुराने व्यापारिक मार्गों में से एक पर स्थित है। ये शहर पशुपालन में काफी धनी माना जाता है। थार मरुस्थल की जलवायु खेती के अनुकूल नहीं होती है। इसलिए यहां के लोग ऊंटों को पाल कर ही अपना जीवन यापन करते हैं। जोधपुर के आसपास के क्षेत्र जैसे हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अन्य हिस्से अपनी खेती के लिए मवेशियों को जोधपुर से ही लेकर जाते थे। और काफी ज्यादा नागौर पर भी निर्भर करते हैं।

पहले के जमाने में राजा यहां के लोगों से पशु बेचने पर या खरीदने पर टैक्स भी वसूला करते थे। यहां के स्थानीय लोगों ने व्यापारिक मार्ग से गुजरने वाले व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए असाधारण समारोह आयोजित करने शुरु कर दिए थे। ऐसा कहा जाता है कि दूर-दूर से आने वाले व्यापारी मेले के मैदान में कैंप लगाकर रात भर रुका करते हैं। शाम को अपना समय बिताने के लिए व्यापारियों ने अपने मनोरंजन के लिए गीत-संगीत के कार्यक्रम रखने शुरु कर दिए थे।

हालांकि नागौर पशुमेला की शुरुआत 56 साल पहले राजा उमेद सिंह के द्वारा की गई थी। इस मेले में उन्होंने मशहूर सूफी संत रामदेवजी को अपनी ताकत दिखाने के लिए बुलाया था। संत की ताकत का नमूना देखने के लिए शहर और शहर के आस पास के लोग आए थे और ताकत से संतुष्ट भी हो गए थे। लोगों ने उनसे नागौर में रहने के लिए आग्रह किया और वो साल में एक बार उनके सम्मान में उनसे मिलने जाते थे।

कैसे मनाया जाता है नागौर पशुमेला

इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा पशुमेला कहा जाता है। जो साल में एक बार जनवरी या फरवरी महीने में मनाया जाता है। ये मेला 4 दिनों तक चलता है।

हर दिन यहां पर लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। दिन की शुरुआत से ही मालिक अपने पशुओं की गतिविधियां और आकर्षण दिखाने लगते हैं, ताकि वो खरीददार को आकर्षित कर सकें। हर विक्रेता को एक शेड मिलता है, जिसमें वो अपने पशुओं को रख सकता है। खरीददार इन शेड्स में जाता है और अपने पसंद के पशु को खरीदता है।

शाम होने तक ज्यादातर खरीददार वापिस चले जाते हैं और सिर्फ पशुओं के मालिक ही वहां पर रह जाते हैं। जिसके बाद हर शाम वहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और लोग उत्सव मनाते हैं। जबकि बाजार सिर्फ दिन के वक्त में ही लगता है। वहां हर दिन यहां पर मनोरंजक खेल भी होते हैं, जो भी शाम होने से पहले तक ही होते हैं। राजस्थान का नागौर पशुमेल पर्यटन विभाग के सहयोग से पशुपालन विभाग द्वारा 4 दिनों तक चलता है।

नागौर पशुमेला में होने वाली मनोरंजक गतिविधियां

–    इस उत्सव में मजे का तड़का लगाने के लिए रस्साकशी यानी की टग ऑफ वॉर का खेल, ऊंट और बैल की दौड़, मुर्गों की लड़ाई जैसे खेल भी करवाते हैं। जिसका लोग जमकर आनंद लेते हैं।

–    पूरे पशुमेले के दौरान राजस्थान का लोक संगीत बजता रहता है। जिसे वहां के लोकल कलाकार बजाते हैं।

–    नागौर मेले की सबसे अद्भुत विशेषताओं में से एक लाल मिर्च का बाजार भी है जो मेले में लगाया जाता है। नागौर का लाल-मिर्च बाजार या “मिर्ची बाजार” हर तरह से लोकप्रिय रूप से जाना जाता है जो एशिया का सबसे बड़ा बाजार है।

–    वहां पर पशुओं को संवारने का भी मुकाबला होता है, जिसमें काफी सारे पशु मालिक हिस्सा लेते हैं।

–    मेले में हर वक्त हस्तकला की प्रदर्शनी लगी रहती है, जहां से पर्यटक सुंदर-सुंदर चीजें खरीद कर ले जा सकते हैं। यहां पर सबसे ज्यादा ऊंट से जुड़ी चीजें, लकड़ी का सामान, लोहे से बनी चीजें बिकती है।

–    यहां पर मनोरंजन के लिए पगड़ी बांधने का मुकाबला, मूंछों का मुकाबला, स्टंट, बाजीगर और कठपुतली के कार्यक्रम के साथ-साथ डांस का कार्यक्रम भी होता है।

नागौर पशु मेला में क्या करें

–    शाम होने के बाद भी मेले में ही रुकें, क्योंकि उस दौरान वहां पर नागौर के लोकल लोग लोक गीत और डांस के कार्यक्रम करते हैं। इसके अलावा मेले के दौरान और बाद में भी कई तरह की मनोरंजक गतिविधिया वहां पर की जाती है।

–    वहां पर होने वाले खेलों और मनोरंजक गतिविधियों में भी हिस्सा ले सकते हैं।

–    लोकल प्रदर्शनी से सामान खरीद सकते हैं।

–    आप देख सकते हैं कि किस तरह खरीददारों के लिए जानवरों को तैयार किया जाता है।

–    मेले में मिलने वाले लोकल खाने का भी मजा ले सकते हैं। ऊंट के दूध से बनी खाने की चीजें यहां पर काफी पसंद की जाती है।

–    कई बार रात को मेले में पटाखें भी जलाएं जाते हैं, तो आप देर रात तक रुक कर उसका भी मजा उठा सकते हैं।

नागौर कैसे पहुंचे

प्लेन के जरिये नागौर कैसे पहुंच सकते हैं?

नागौर तक पहुंचने के लिए आप फ्लाईट भी ले सकते हैं। नागौर शहर के सबसे नजदीकी हवाईअड्डा जोधपुर में है। जहां से शहर की दूरी 140 किलोमीटर है। जोधपुर तक आप सभी मुख्य शहरों से पहुंच सकते हैं। जोधपुर पहुंच कर आप टैक्सी लेकर नागौर जा सकते हैं।

ट्रेन के जरिये नागौर कैसे पहुंचे?

नागौर शहर का अपना खुद का रेलवे स्टेशन है। जहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं। नागौर तक जयपुर से, बंगाल से ट्रेन आती है, जबकि बाकी शहरों से जयपुर तक की ट्रेन लेकर आप पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे?

नागौर सड़क मार्ग से आने के लिए आप जयपुर से 2 रास्ते ले सकते हैं। एक सीकर से होकर और दूसरा जोधपुर से होकर। इसके अलावा राजस्थान स्टेट ट्रांसपोर्ट भी लगातार बसें चलाता है, जिसके जरिये आप नागौर पहुंच सकते हैं।

एंट्री फीस और मेले का समय

मेले में जाने के लिए कोई एंट्री फीस नहीं होती है। ये एक निशुल्क मेला है और यहां पर आप 9 से 6 बजे के बीच में आ सकते हैं।

नागौर पशुमेले के 4 दिनों में आप पशुओं के बारे में बहुत कुछ जान ता पाएंगे ही, साथ में आपको बहुत ही अलग अनुभव होगा। तो अगर आप किसान है तो आपको जरूर वहां पर जाना चाहिये, लेकिन अगर आप किसान नहीं है तो भी आप इसे अनुभव करने के लिए जरूर जाए। आपको ये काफी पसंद आएगा और बेहद ही अलग अनुभव होगा।

पशुओं से जुड़ी सारी परेशानियों के लिए आप Animall.in पर जा सकते हैं या फिर आप प्ले स्टोर से हमारी ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं। यहां पर आप पशु खरीदने/ बेचने के अलावा, डॉक्टर से सहायता, और पशु से संबंधित हर तरह का ज्ञान भी पा सकते हैं।

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