जानें हल्लीकर गाय के बारे में सारी जानकारी

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भारत में गायों की बहुत सारी नस्लें हैं, जिनमें से बहुत नस्लों की पहचान आज भी उनके राज्यों और क्षेत्रों के आधार पर की जाती है। इन्हीं में से एक नस्ल है हल्लीकर गाय की। जो कि दक्षिण भारत में बेहद मशहूर है।

हल्लीकर गाय को एक बेहद ही मजबूत शरीर वाली नस्ल माना जाता है। ये गाय कर्नाटक के मैसूर, मंडाया, बैंगलौर, कोलार, तुमकुर, हासन और चित्रदुर्ग जिलों में पाई जाती है। इस गाय को दक्षिणी भारत की गायों की नस्ल में सर्वोत्तम नस्ल मानी जाती है। इस नस्ल के बैल भी काफी ज्यादा उपयोगी माने जाते हैं। हल्लीकर गाय का नाम कर्नाटक की जनजाति हल्लीकर से पड़ा है। इस जनजाति का मुख्य पेशा पशुपालन ही होता है।

गाय की इस नस्ल के सम्मान में भारतीय डाक विभाग ने साल 2000 में एक विशेष डाक टिकट भी चालू की थी। इस नस्ल की खासियत ये है कि काफी दूर तक ये घूम सकती है। हल्लीकर गाय की नस्ल से ही दक्षिण भारत की कई अन्य नस्लों का विकास किया गया है। और पढ़ें

हल्लीकर गाय की पहचान

हल्लीकर नस्ल की गाय का रंग भूरा या गहरा भूरा होता है। ये नस्ल बनावट में मध्यम आकार की होती हैं और मांसल सी प्रतीत होती है। इसका माथे वाला भाग थोड़ा उठा हुआ होता है। तो वहीं चेहरा लंबा और नाक की ओर झुका हुआ होता है। इसका नाक काले या भूरे रंग का होता है। वहीं इसके सींग लंबे और सिरों पर एक दूसरे की ओर मुड़े हुए रहते हैं। इनका झुकाव पीछे की ओर रहता है।

इनकी आंखे और कान छोटे होने के साथ-साथ काफी झुकावदार भी होते हैं। इनके गले की झालर छोटी और कम लटकाव वाली होती है। इसके अलावा हल्लीकर गाय की पूंछ लंबी और काले सिर वाली होती है और पिछले पैरों के जोड़ से नीचे तक लटकी रहती है। हल्लीकर गाय का वजन 270 किलोग्राम के आसपास होता है।

हल्लीकर गाय के दूध की जानकारी

हल्लीकर गाय की पहली ब्यात का समय लगभग 1350 दिनों का होता है। ये गाय तकरीबन 1000 किलोग्राम तक का दूध दे सकती है। इसके दूध में फैट लगभग 5.7 फीसदी होता है।

हल्लीकर गाय बेहद ही मेहनती और सक्रिय नस्ल है। ये दिनभर बिना आराम किए भी काम कर सकती है। इस नस्ल को सभी प्रकार के कृषि कार्यों के इस्तेमाल में लाया जाता है। ये गाय अपनी शक्ति और सहनशीलता के लिए जानी जाती है। और पढ़ें

हल्लीकर गाय की देखरेख कैसे करें

चारे में क्या दें

इस नस्ल की गाय को चारे में इसकी जरूरत के अनुसार ही खाना दें। जरूरत से ज्यादा चारा देने की वजह से इसे बदहजमी जैसी बीमारी हो सकती है। वहीं अगर इसे फलीदार चारा दें तो उसमें तूड़ी या फिर अन्य चारा जरूर मिलाए। ताकि पशु को अफारा बीमारी ना हो।

खुराक

हल्लीकर के लिए जरूरी तत्व – उर्जा, प्रोटीन, विटामिन

क्या दें खाने में

अनाज – मक्की, जौ, ज्वार, बाजरा, छोले, गेहूं, जई, चावलों की पॉलिश, मूंगफली, तिल, अलसी आदि।

हरा चारा – लोबिया, ज्वार, लूसर्न, सुडान घास, सेंजी, नेपियर बाजरा, हाथी घास आदि

अन्य खुराक – चावल की कणी, चोकर, सोयाबीन की खल, सरसों की खल, शीरा, नमक आदि

शेड – हर पशु को अनुकूल परिस्थितियों की जरूरत होती है। ऐसे में पशु को बारिश, घूप, बर्फबारी, ठंड से बचाने के लिए एक शेड की जरूरत होती है। इतना ही नहीं शेड में साफ-सफाई का भी खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। पशुओं के लिए सही भोजन की जगह भी होनी चाहिये।

गाभिन गाय की देखभाल – एक गाभिन गाय का अच्छे से रखा गया ध्यान, उसके बछड़े पर तो पड़ेगा साथ ही उसकी दूध देने की गुणवत्ता भी उससे सुधरेगी। इस वक्त में गाय को 1 किलो ज्यादा फीड करें।

टीके – 6 महीने के बछड़े को सबसे पहला टीका ब्रूसीलोसिस का लगवाने की जरूरत होती है। इसके एक महीने के बाद गलघोटू का टीका लगवाएं। इसके एक महीने के बाद लंगड़े बुखार का टीका लगवाएं। बड़ी गायों को हर 3 महीने के बाद डीवॉर्मिंग का टीका लगवाएं। और पढ़ें

हल्लीकर गाय को होने वाली बीमारियां

बदहजमी: गाय को बदहजमी होने पर ऐसी खुराक दें जो वो जल्दी से पचा सके।

कब्ज: अगर पशु को बार-बार कब्ज हो रहा है तो उसे 800 ग्राम मैगनीशियम सल्फेट पानी में घोलकर और 30 ग्राम अदरक का चूरा मुंह के जरिये दें।

मरोड़/ खूनी दस्त: मरोड़ या फिर खूनी दस्त की स्थिति में गाय को मुंह के द्वारा या फिर टीके के जरिये सलफा दवाइयां दें। इसके अलावा 5 प्रतिशत गुलूकोज और नमक का पानी ज्यादा दें

अफारे: गाय को अफारे होने की स्थिति में तारपीन का तेल 30-60 मिलीलीटर, हींग का अर्क 60 मिलीलीटर या सरसों अलसी का 500 मिलीलीटर तेल दें। लेकिन ध्यान रहें की तारपीन का तेल ज्यादा मात्रा में ना दें, नहीं तो पशु का पेट खराब हो सकता है।

मैगनीश्यिम की कमी: मैगनीश्यिम की कमी को पूरा करने के लिए खाने में 5 ग्राम मैगनीश्यिम ऑक्साइड डाल दें।

रिंडरपैस्ट (शीतला माता): ये गाय में होने वाली गंभीर बीमारी है। इस बीमारी को होने में 6 से 9 दिनों का वक्त लगता हैं। इसमें तेज बुखार, मुंह से पानी बहना और खूनी दस्त लगने की शिकायत होती है। इसका इलाज पेंसीलिन के द्वारा किया जाता है।

निमोनिया: गाय को निमोनिया की बीमारी गीले फर्श की वजह से होती है। इसलिए ध्यान रखें की जगह सूखी रहे।

थनैला: ये बीमारी हर गाय को हो सकती है। थनैला रोग में पशु के थन काफी गर्म हो जाते हैं और उसमें दर्द और सूजन की शिकायत होने लगती है। इसके अलावा गाय के दूध में खून और पस की मात्रा बढ़ने लग जाती है। इसका इलाज अगर शुरुआत में ही हो जाए तभी संभव है, बीमारी ज्यादा बढ़ने के बाद थन बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। और पढ़ें

 

Animall ऐप से कैसे खरीदें हल्लीकर गाय?

अगर आप हल्लीकर गाय खरीदना चाहते हैं, तो अपने फोन में Animall ऐप को डाउनलोड करें। ऐप में अपना मोबाइल नंबर डाल कर खुद को रजिस्टर करें। जिसके बाद आपको गाय का बटन दबाना है। बटन दबाते ही आप ढेर सारी गायों की नस्लों को देख पाएंगे। जिसमें आप हल्लीकर चुन कर अपने पसंद की ब्यात और दूध की क्षमता वाली गाय खरीद सकते हैं। 

इन तीन आसान तरीकों से घर लायें देवनी गाय
     

  1. अपने गांव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।
     
  2. पिनकोड डालने के बाद, गाय पर दबायें। यहां पर नस्ल हल्लीकर को चुनें और अपने मन के अनुसार दूध की क्षमता और ब्यात का चुनाव करें।
  3. अब आपको अपने आसपास की सारी हल्लीकर गाय दिखने लगेंगी। इनमे से अपने पसंद की गाय चुन सकते हैं। 

Animall ऐप पर बेचें अपनी हल्लीकर गाय

आप हल्लीकर गाय बेचना चाहते हैं तो Animall ऐप पर कर सकते हैं। सबसे पहले आपको रजिस्टर करना होगा और उसके बाद पशु बेचें पर जाएं। वहां जाकर आप हल्लीकर गाय की दूध क्षमता, ब्यात और कीमत डालें। सारी जानकारियां डालने के बाद आपकी गाय Animall ऐप पर रजिस्टर हो जाएगी। जो भी खरीदार आपकी गाय लेने में इच्छुक होगा वो सीधा आपको फोन कर सकता है।

Animall ऐप पर जहां एक तरफ पशु खरीद और बेच सकते हैं। तो वहीं आपको वहां पर पशु से जुड़ी सारी जानकारी भी मिल जाएगी। तो पशु के बीमार होने पर आप ऐप पर ही डॉक्टर से भी बात कर सकते हैं। आपको बेहतरीन गुणवत्ता की और वेरिफाइड गाय बेहद ही अच्छे दाम में और वो भी बिना कुछ भी कमीशन दिए मिल जाएगी। और पढ़ें