अगर बार-बार आपकी गाय लात मारती है तो क्या करना चाहिए!

गाय और भैंस का पालन करने वाले पशुपालकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इनमें से सबसे मुख्य एक समस्या है कि गाय और भैंस का दूध दोहते समय उनका लात मारना। पशु के इस व्यवहार के चलते कई बार दूध की पूरी बाल्टी ही गिर जाती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान होता है। यही नहीं कई बार पशु के लात मारने पर पशुपालक भी उन्हें मारने पीटने लगते हैं। तो अब जानिए कि अगर आपकी गाय लात मारती है तो क्या करना चाहिए।

जिसकी वजह से पशु अधिक चिड़चिड़ा हो जाता है और दूध भी कम देने लगता है। गाय भैंस की इसी समस्या का कारण और समाधान हम अपने इस लेख में लेकर आए हैं। अगर आपकी गाय या भैंस दूध निकालते समय लात मारती है तो आप उसे कई तरह से काबू में कर सकते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं आखिर क्यों गाय या भैंस दूध दुहते समय लात मारती है और कैसे उन्हें काबू में करें। 

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गाय या भैंस के लात मारने की वजह 

एक पशुपालक को यह समझना बहुत जरूरी है कि गाय या भैंस दूध दुहते समय कुछ कारणों की वजह से लात मार सकती है। इनमें से कुछ हम आपको नीचे बता रहे हैं। 

  1. गाय अगर लंबे समय बाद हीट में आई हो या गर्भाधान किया गया हो तो गाय चिड़चिड़ी हो जाती है और लात मारने लगती। 
  2. गाय को अगर किसी तरह का रोग हो जाए या उसके थनों में दर्द हो तो भी वह लात मारने लगती है। 
  3. ऐसा कई बार देखने को मिलता है कि पशु किसी विशेष व्यक्ति से चिड़ता है। जिसकी वजह से वह उसे दूध दुहने नहीं देता और बार – बार लात मारने लगता है। 
  4. गर्भधारण करने के दौरान पशु के शरीर में कई बदलाव आते हैं। जिसकी  वजह से पशु दूध दुहते समय लात मारने लगता है। 
  5. अगर पशु को सही तरह से चारा न दिया जा रहा हो और वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाए तो भी वह दूध दुहते समय लात मार सकता है। 
  6. अगर गाय या भैंस की तबीयत खराब हो या वह किसी पीड़ा में हों तो भी वह बार – बार लात मार सकते हैं। 

गाय लात मारती है तो क्या करना चाहिए

गाय या भैंस दूध देते समय कई कारणों के चलते लात मार सकते हैं। पशुपालकों को ऐसे में सब्र और समझदारी से काम लेना चाहिए। अगर पशुपालक ऐसे में किसी तरह की जोर जबरदस्ती करें या पशु के खिलाफ सख्त रुख अपनाएं तो इससे पशु अधिक गुस्से में या तनाव में आ जाता है और उसके दूध देने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। इसलिए पशु को बहुत प्यार से और तरीके से काबू में करना चाहिए। ऐसे ही कुछ तरीके हम आपको बताते हैं जो दूध दुहते समय आप आजमा सकते हैं। लेकिन इन उपाय को आजमाते हुए पशुपालक को यह समझना होगा कि पशु लात मार क्यों रहा है। 

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गाय न मारे लात इसके उपाय

  • अगर पशु किसी विशेष व्यक्ति से चिड़ा हुआ है तो बेहतर है कि पशु का दूध कोई दूसरा व्यक्ति निकाले। लेकिन अगर कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं है तो ऐसे में पशुपालक उसके आगे के एक पैर को मोड़ कर बांध दे और फिर दूध निकाले। ऐसा करने से पशु लात नहीं मार पाएगा। लेकिन ध्यान रहे कि इससे पशु अधिक चिड़चिड़ा हो सकता है। इसलिए किसी भी सूरत में यह आखिरी उपाय है जो आपको करना है। 
  • अगर पशु दूध दुहते समय लात मारता है तो बेहतर है कि आप उसे खाने में दाना डालना शुरू करें। जब भी दूध निकालना हो तो पशु को दाना खाने को दें। ऐसा करने से पशु का पूरा ध्यान दाना खाने में लगा रहेगा और वह खुशी – खुशी दूध दे देगा। 
  • गाय या भैंस को दूध निकालते समय अगर उनकी मनपसंद चीज या चारा खाने में दिया जाए, तो इससे वह दूध निकालते समय लात नहीं मारते। 
  • गाय या भैंस शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसे अधिक मात्रा में चारा दें। ताकि वह कमजोरी का शिकार न रहे। 
  • अगर पशु को गर्मी में रखा गया है तो इसकी वजह से भी वह लात मार सकती है। इसलिए पशु के आस पास कूलर या पंखे का इंतजाम करें।  
  • पशु अपनी चोट या दर्द बता नहीं सकता। ऐसे में अगर कोई उपाय काम नहीं कर रहा है तो आप इस सूरत में चिकित्सक की मदद लें, हो सकता है किसी दर्द या रोग के चलते वह ऐसा कर रहा हो। 

आप इसी तरह की जानकारी हमारी Animall App के जरिए भी पढ़ सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो पशु खरीदने और बेचने के लिए भी Animall App का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐप को डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें और अपनी पसंद का पशु खरीदें।

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जानें गाय भैंस को ठंड में होने वाले रोग के बारे में और उनसे बचाव के तरीके!

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सर्दियों के मौसम का लुत्फ इंसान तो लेते हैं। लेकिन यह मौसम पशुओं के लिए बहुत खतरनाक होता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इस दौरान गाय भैंस को कई खतरनाक बीमारियां लग जाती हैं। यह बीमारियां इतनी खतरनाक होती है कि जिसकी वजह से पशुओं की जान तक चली जाती है। जिसके चलते पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी होता है। 

इसलिए पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वह सर्दियों के मौसम में होने वाली बीमारियों से पशुओं को बचाकर रखें। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे कि ऐसे कौन से रोग हैं जो  गाय भैंस को सर्दियों के दौरान लग सकते हैं। इसके अलावा किस तरह इन रोगों से पशुओं को बचाया जा सकता है। 

दुधारू पशुओं के 10 प्रमुख रोग और उनके उपचार

अफारा रोग 

पशुओं को होने वाला यह रोग पशुपालकों की लापरवाही का नतीजा है। आमतौर पर पशुपालक गाय या भैंस को सर्दियों के दौरान अधिक हरा चारा या बचा हुआ और खराब खाना दे देते हैं। जिसके चलते उन्हें अफारा रोग हो जाता है। आपको बता दें कि इस रोग की स्थिति में पशु के पेट में गैस बन जाती है। जिसकी वजह से पशु खासा परेशान रहता है और चिड़चिड़ा हो जाता है। यही नहीं इसकी वजह से पशु की दूध उत्पादन क्षमता भी कम हो जाती है।  

पशुपालक भाई अपने पशु को इस रोग से बचाए रखने के लिए घर का बचा हुआ खाना कम मात्रा में या कभी – कभी ही दें। इसके अलावा हरे चारे के साथ सर्दियों के दौरान गाय भैंस को गुड़ भी खिलाएं। अगर पशुपालक इन छोटी बातों को ध्यान में रखते हैं तो वह पशु को अफारा रोग से बचा पाएंगे।  

निमोनिया रोग

किसान अक्सर कई बार शेड का निर्माण कुछ इस तरह करा देते हैं, जिसमें हवा की आवा जाही सही प्रकार नहीं हो पाती। इसके अलावा शेड में मौजूद गंदगी या धूल मिट्टी के चलते पशु इस रोग से पीड़ित हो जाता है। इस रोग के दौरान पशु की आंख और नाक से पानी गिरने लगता है।

किसान भाई पशु को निमोनिया के रोग से बचाए रखने के लिए उन्हें एक साफ वातावरण में रखे। इसके अलावा पशु के शेड का निर्माण ही तरह से कराएं। ताकि शेड को साफ भी आसानी से किया जा सके और हवा की आवा जाही भी बाधित न हो। 

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ठंड लगना 

सर्दियों के दौरान अगर पशु को बाहर रखा जाए या उसके ऊपर शेड मौजूद न हो तो ऐसे में उसके शरीर पर ओस गिरती रहती है। जिसकी वजह से पशु बीमार पड़ जाता है और उसका नाक बंद हो जाता है। जिसकी वजह से पशु को सांस लेने में भी खासी दिक्कत होने लगती है। 

पशु को ठंड से बचाए रखने के लिए उन्हें एक अच्छे शेड में रखें। जहां वह सूखे रह सकते हैं। इसके अलावा पशु को ठंड लग जाने की स्थिति में उन्हें भांप दिलाएं। भाप दिलाने के लिए सबसे पहले एक बाल्टी में खौलता हुआ पानी लें और उसके ऊपर घास रख लें। अब पशु के नाक पर एक भारी कपड़ा रखें ताकि पानी से उठता हुई भांप उसके नाक को खोल सके। ऐसा करके आप अपने पशु को सर्दियों में होने वाली बीमारियों से बचा सकते हैं। 

किसान भाइयों को अगर हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी पसंद आई हो, तो इसे अपने साथियों के साथ जरूर शेयर करें। आपको बता दें कि हमारे द्वारा Animall App भी बनाई गई है। आप इस ऐप से पशु खरीद और बेच तो सकते ही हैं। इसके अलावा आप पशुओं के डॉक्टर से भी बात कर सकते हैं। हमारी ऐप डाउनलोड करने के लिए या तो प्ले स्टोर पर जा सकते हैं या फिर इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। 

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जानिए गाय के बछड़े की देखभाल किस तरह से करें

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कहा जाता है कि एक पौधे का जितना अच्छी तरह ध्यान रखा जाएगा, वह उतना ही मजबूत पेड़ बनेगा। इसी तरह पशुपालक जितनी अच्छी तरह बछड़े का ध्यान रखेंगे वह उतना ही तंदुरुस्त बैल या गाय बनेगी। पशुपालक अक्सर गाय के ब्याने के बाद बछड़े के ऊपर ध्यान ही नहीं देते।
जिसकी वजह से न केवल बछड़ा कमजोर रह जाता है। बल्कि कई बार बछड़े की मौत तक हो जाती है। जिसका असर गाय के ऊपर भी पड़ता है और कई बार तो गाय दूध तक देना बंद कर देती है।
इसलिए जरूरी है कि बछड़े के जन्म के साथ ही उनकी देखरेख अच्छी तरह की जाए।
अगर आप भी एक पशुपालक हैं और आपकी गाय ब्याने वाली है, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि बछड़े की देखभाल किस तरह की जाती है। आज हम आपको अपने इस लेख में बछड़े की देखरेख से जुड़ी संपूर्ण जानकारियां मुहैया कराएंगे। अगर आप यह जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो लेख पर अंत तक बने रहें।
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बछड़े की शुरुआती देखरेख का तरीका

  1. बछड़े के पैदा होने के साथ ही उसके नाक और मुंह में श्लेष्मा होता है। जिसे कुछ लोग कफ भी कहते हैं। इसे बछड़े के पैदा होने के तुरंत बाद ही साफ कर देना चाहिए। अगर ऐसा ना किया जाए तो बछड़े को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। 
  2. पशुपालकों ने अक्सर यह देखा होगा की गाय ब्याने के बाद अपने बछड़े को चाटने लगती है। गाय ऐसा इसलिए करती है ताकि बछड़े की त्वचा आसानी से सूख जाए। लेकिन अगर गाय बछड़े को चाटे ही ना, तो आप बिना वक्त गवाएं, बछड़े के शरीर को टाट से या फिर सूखे कपड़े से साप कर दें। इसके अलावा बछड़े को छाती दबाकर सांस दिलाने की कोशिश करें। 
  3. जिस स्थान पर बछड़े को रखें वह पूरी तरह सूखा रहना चाहिए। गीले स्थान पर रहने से बछड़े को कई गंभीर रोग हो सकते हैं। 
  4. एक स्वस्थ शिशु की पहचान के लिए हम अक्सर उनके वजन पर नजर बनाकर रखते हैं। ठीक उसी तरह आपको बछडे़ के वजन को भी देखना होगा। अगर बछड़े का वजन कम हो तो आप उसके स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टर से बात करें। 
  5. एक शिशु के लिए जिस तरह मां का पहला दूध बेहद महत्वपूर्ण होता है। उसी तरह बछड़े के लिए गाय का पहला दूध जिसे खीस भी कहते हैं। वह पीलानी चाहिए। इस पहले आहार के जरिए बछड़ा कई तरह के रोग से बचा रह सकता है। 
  6. गाय के ब्याने के बाद उसके थनों को क्लोरीन के घोल से धोना चाहिए।
  7. अमूमन गाय के ब्यान के एक घंटे बाद ही बछड़ा दूध पीने का प्रयास करने लगता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाता तो आप इसमें बछड़े की सहायता करें। 

बछड़े का आहार कैसा होना चाहिए 

पशुपालकों को सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बछड़े को पहला आहार खीस ही मिले। आपको बता दें कि गाय के ब्याने के 3 से 7 दिन बात तक भी खीस का निर्माण होता रहता है। यह खीस बछड़े के शारीरिक और मानसिक विकास में तो एक अहम भूमिका निभाता ही है। इसके साथ ही बछड़े की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। इसलिए बछड़े के जन्म तीन दिन बाद तक कोशिश करें कि बछड़े को यह खीस ही दें। 

एक शिशु के लिए जिस तरह शुरुआती समय में मां का दूध महत्वपूर्ण होता है। उसी तरह बछड़े को भी कम से कम 3 से 4 सप्ताह मांक का दूध पीने दें। इसके बाद आप आगे चाहें तो बछड़े को कुछ हल्का चारा देना शुरू कर सकते हैं। वैसे ज्यादातर समय तक बछड़े के लिए गाय का दूध ही फायदेमंद रहता है। लेकिन यह अनाज और चारे के मुकाबले काफी महंगा पड़ता है। इसलिए कुछ ही समय बाद पशुपालक बछड़े को अन्य आहार देने लगते हैं। 

बछड़े की देखभाल में किसी तरह की कोई लापरवाही ना हो इस बात का खास ध्यान रखें। इसके अलावा जिस भी बरतन में बछड़े को खाना या पानी दें और उस कुछ – कुछ समय में धोते रहें। 

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बछड़े के पीने का पानी 

अमूमन पशुपालक बछड़े के खाने पर तो थोड़ा बहुत ध्यान दे देते है। लेकिन उनके पीने के पानी का ध्यान नहीं रखते। इसलिए ध्यान रहे कि किसी भी स्थिति में बछड़े को पीने का पानी साफ दें। इसके अलावा बछड़ा अधिक मात्रा में पानी न पिए इस बात का भी खास ख्याल रखें। 

बछड़े को खिलाने की व्यवस्था रखें कुछ ऐसे 

  1. अगर गाय का हाल ही में प्रसव हुआ है तो ऐसे में बछड़े के खाने पीने का अधिक ध्यान रखना चाहिए। आप बछड़े को ऐसे में कुछ पेय पदार्थ दे सकते हैं। 
  2. बछड़े को आप मक्खन निकाला हुआ दूध दे सकते हैं। 
  3. आप बछड़े को कुछ अन्य द्रव पदार्थ भी दे सकते हैं जैसे छाछ, दही, मीठा पानी, दलिया आदि। 
  4. बछड़े को पूरी तरह दूध पर भी पाला जा सकता है।
  5. बछड़े को पोषक गाय को दूध पिलाना।
  6. एक नए बछड़े को जिसकी आयु 15 दिन है, उसे सूखे पदार्थ की आवश्यकता अधिक होती है। ऐसे में उसे रोजाना तीन महीने तक डीएम 1.43 किग्राम ही दें।
  7. कोशिश करें की बछड़े को हरे चारे की जगह सूखा चारा दें। 
  8. बछड़े की उम्र तीन महीने से अधिक होने के बाद अगर गाय का दूध अधिक नहीं है तो बछड़े को मक्खन निकाला हुआ दूध, छाछ और अन्य तरल पदार्थ दे सकते हैं। 

बछड़े की विकास से जुड़ी कुछ अहम बातें 

  1. बछड़े का शारीरिक विकास सही तरह से हो रहा है या नहीं, यह कुछ बातों पर निर्भर करता है जो कुछ इस प्रकार हैं। 
  2. बछड़े के वजन की समय – समय पर जांच करते रहें। अगर बछड़े का वजन कम है तो किसी चिकित्सक से बात करें और उसके आहार में कुछ बदलाव करें। 
  3. बछड़े के जन्म के शुरुआती तीन महीनों में उसके आहार का खास ध्यान रखें। 
  4. गर्भावस्था के दौरान गाय को अच्छी मात्रा में और पोषक तत्वों से भरा आहार दें। 
  5. जन्म के समय बछड़े का वजन कम से कम 20 से 25 किलो होना चाहिए। 
  6. जन्म के कुछ घंटे बाद अगर बछड़ा दूध न पी पाए तो उसे उठाकर दूध पीलाने में मदद करें। 
  7. बछड़े को समय – समय पर टीके लगवाते रहें। 

बछड़े को रखने का स्थान 

बछड़े को एक अलग बाड़े में तब तक बांधना चाहिए, जब तक वह दूध पूरी तरह न छोड़ दें। बछड़े को अलग इसलिए भी बांधना जरूरी है क्योंकि अगर बछड़े एक ही जगह पर रहते हैं तो एक दूसरे को चाटने लगते हैं। जिसकी वजह से कई रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा बछड़े को जिस बाड़े में बांधे वहां साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें। इसके साथ ही बछड़े के बाड़े में वैंटिलेशन का पूरा इंतजाम करके रखें।  नन्हे बछड़े के बाड़े में एक बिस्तर रखें और कोशिश करें कि वह सूखा ही रहे। 

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जानिए SBI से पशुपालन के लिए लोन कैसे ले सकते हैं

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हमारे देश का एक बड़ा हिस्सा आज भी पशुपालन के जरिए ही गुजारा करता है। यही कारण भी है कि सरकार और बैंकिंग संस्थान इनके कामकाज को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाते रहती हैं। आज हम ऐसी ही एक स्कीम के बारे में आपको बताने वाले हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं SBI से मिलने वाले डेयरी लोन के बारे में।
किसान और पशुपालकों के व्यापार को बढ़ाने के लिए यह सेवा सरकारी बैंक द्वारा शुरू की गई है। इस सेवा के अंतर्गत डेयरी कारोबारी एसबीआई से लोन ले सकते हैं। किसान लोन डेयरी लगाने, शेड के लिए, पशु खरीदने और दूसरी जरूरतों के लिए ले सकते हैं। हालांकि SBI के जरिए दिए जाने वाले इस लोन की कुछ पात्रता भी हैं और इससे संबंधित दस्तावेज का होना भी जरूरी है। लेकिन आप घबराइए मत हम आपको SBI डेयरी लोन से जुड़ी सभी जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया के बारे में बताएंगे। अगर आप एसबीआई से डेयरी लोन लेना चाहते हैं या इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख पर अंत तक बने रहें।

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क्या है SBI डेयरी लोन और इसका उद्देश्य 

भारत देश में किसान और पशुपालक अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकें और अधिक आय अर्जित कर पाएं। इसलिए ही यह स्कीम शुरू की गई है। इस स्कीम के जरिए पशुपालक और किसान भाई डेयरी लगाने, शेड बनाने, पशु खरीदने, डेयरी मशीन खरीदने आदि के लिए कम ब्याज दर पर लोन ले सकते हैं। डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने और भारत में दूध उत्पादन की स्थिति को अधिक बेहतर बनाने के लिए यह स्कीम शुरू की गई है।

एसबीआई पशुपालन लोन की पात्रता क्या है

यूं तो देश का बड़ा हिस्सा पशुपालन के जरिए गुजारा करता है। लेकिन इस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक को अपनी पात्रता सिद्ध करनी होगी। एसबीआई पशुपालन लोन लेने के लिए जो पात्रता चाहिए वह कुछ इस प्रकार हैं।

SBI डेयरी लोन की योग्यता

किसान या पशुपालक भाइयों के लिए शुरू की गई इस स्कीम के जरिए बहुत से कार्यों के लिए लोन लिया जा सकता है। लेकिन लोन लेकिन उसकी कुछ योग्यता होनी चाहिए।

लोन की सामान्य योग्यता

  • लोन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की आयु कम से कम 18 साल और अधिकतम 70 साल होनी चाहिए।
  • यह लोन उन लोगों को दिया जा सकता है, जो लोग पहले से डेयरी उद्योग या अन्य किसी व्यापार में कार्यरत होना चाहिए। 
  • किसान और पशुपालन का सीबील स्कोर कम नहीं होना चाहिए और वह किसी भी बैंक की सूची में डिफाल्टर नहीं होना चाहिए। 
  • आवेदन करने वाले व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। 

SBI डेयरी लोन के दस्तावेज 

अगर कोई पशुपालक या किसान इस स्कीम के तहत लोन लेना चाहता है, तो उसे कुछ दस्तावेज बैंक को दिखाने होंगे। 

  • व्यक्ति के पास अपना पहचान पत्र होना चाहिए, जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस आदि। 
  • आवेदनकर्ता को अपनी पासपोर्ट साइज फोटो भी देनी होगी। 
  • आवेदनकर्ता को अपने निवास स्थान से जुड़ा कोई सबूत देना होगा जैसे बिजली बिल, पानी का बिल या घर के रजिस्ट्री के कागजात आदि। 
  • अपना बिजनेस रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी देना होगा। 
  • अगर कारोबार में कोई पार्टनर है तो उसके दस्तावेज और पार्टनरशिप डीड भी पेश करनी होगी। 
  • बीते 6 महीनों में कितनी आय अर्जित हुई है इसका सबूत भी देना होगा।  

एसबीआई डेयरी लोन आवेदन प्रक्रिया

अगर आप डेयरी लोन के आवेदन हेतु किसी भी नजदीक के एसबीआई बैंक जाना होगा। यहां आपको डेयरी लोन के लिए फॉर्म मिल जाएगा। आप फॉर्म भरकर जरूरी दस्तावेज के साथ अटैच कर दें। अगर आपकी पात्रता सिद्ध हुई और दस्तावेज सही हुए तो आपको कुछ ही समय में लोन मिल जाएगा।
किसान और पशुपालक भाई इसी तरह की जानकारी हमारे ब्लॉग से लगातार हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो हमारी Animall App को भी डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप के जरिए आप पशु खरीद और बेच भी सकते हैं। इसके अलावा ऐप पर पशु चिकित्सक से भी सहायता ले सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
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पशुओं में फॉस्फोरस की कमी के लक्षण एवं उपचार क्या है ?

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एक जीवित शरीर को सही तरह से काम करने के लिए कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। ऐसे में जब इन पोषक तत्वों की कमी पूरी नहीं होती तो शरीर में कई गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती है और ऐसा केवल इंसानों के साथ ही नहीं होता। बल्कि यह पशुओं के साथ भी होता है। आज हम पशुओं के शरीर में फास्फोरस की कमी के लक्षण से जुड़ी जानकारियां साझा करेंगे। इसके अलावा फास्फोरस की कमी की वजह से होने वाली परेशानियों पर भी नजर डालेंगे। अगर आप एक पशुपालक हैं और आपका पशु किसी तरह की समस्या से पीड़ित है, तो हो सकता है कि यह फास्फोरस की कमी की वजह से हो रहा हो। ऐसे में पशुपालक भाइयों को यह जानना चाहिए कि फास्फोरस की कमी के लक्षण क्या क्या हो सकते हैं और किस तरह इस कमी को ठीक किया जा सकता है।
 

फास्फोरस का काम क्या होता है 

किसान भाइयों को बता दें कि शरीर में 70 प्रतिशत फास्फोरस का उपयोग हड्डियों और दांतों की संरचना के लिए होता है। इसके अलावा फास्फोरस कोशिकाओं के केंद्रक टिशूज के लिए फायदेमंद माना जा सकता है। ऐसे में जब पशु के शरीर में फास्फोरस की कमी हो जाती है तो उन्हें हड्डियों और दांतों से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती है। लेकिन इससे पहले हम आपको फास्फोरस की कमी के लक्षण बताएं। इससे पहले हम आपको फास्फोरस फास्फोरस के कारण बताएंगे।

फास्फोरस की कमी के कारण

  1. एक पशुपालक होने के नाते आपको एक सही आहार की जानकारी होनी चाहिए। अगर आप सही आहार से जुड़ी जानकारी रखते हैं तो पशु के शरीर में किसी तरह की कमी नहीं होगी। आइए फास्फोरस की कमी के कुछ कारणों को जानते हैं। 
  2. अगर पशुपालक पशु को ऐसी घास या चारा दे रहे हैं, जिसमें फास्फोरस कम मात्रा में मौजूद हो, तो पशु के शरीर में फास्फोरस की कमी हो सकती है। 
  3. मिट्टी मृदा में फास्फोरस की कमी होने की वजह से भी शरीर में फास्फोरस की कमी हो सकती है। 
  4. अगर आपके पास एक दुधारू पशु है जो अधिक मात्रा में दूध देता है तो हो सकता है कि उसके दूध में अधिक फास्फोरस शरीर से निकल जाता हो। इसलिए पशु के शरीर में फास्फोरस की कमी हो सकती है। 
  5. पशु की गर्भावस्था के दौरान अगर उसके खाने पीने में कोई दिक्कत हो तो इससे शरीर फास्फोरस को सही तरह से अवशोषित नहीं कर पाता।  यह भी एक कारण हो सकता है जिसकी वजह से शरीर में फास्फोरस की कमी हो जाए। 

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पशु में फास्फोरस की कमी के लक्षण

दोस्तों आपको बता दें कि पशु के शरीर में फास्फोरस की कमी है, इसे कई तरीकों से समझा जा सकता है। फास्फोरस की कमी के कुछ ऐसे ही लक्षण हम आपको बता रहे हैं। 

  • फास्फोरस की कमी होने पर पशु की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। 
  • पशु में फास्फोरस की कमी के चलते उनकी हड्डियों में दर्द रहने लगता है। 
  • पशु के शरीर में रेड ब्लड सेल्स अधिक टूटने लगता है। 
  • पशु को इस दौरान बहुत कम भूख लगने लगती है। 
  • फास्फोरस की कमी के चलते कई बार पशु की हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती है कि वह लंगड़ा कर चलने लगते हैं। 
  • पशु में फास्फोरस की कमी के चलते कई बार वह अपने खड़े होने की ताकत भी खो देता है। 
  • पशु की अचानक हृदय गति बढ़ना भी फास्फोरस की कमी का लक्षण हो सकता है।  

फास्फोरस की कमी को दूर करने के उपाय 

अगर आपका पशु भी फास्फोरस की कमी से पीड़ित है तो आप इसका उपचार घर पर ही कर सकते हैं। इसके लिए केवल आपको अपने पशु को सही समय पर सही आहार देना होगा। अगर आप ऐसा करते हैं तो इससे आपका पशु जल्दी ही ठीक हो जाएगा। लेकिन अगर पशु ठीक न हो पाए तो आप समय पर डॉक्टर से भी बात कर सकते हैं। 

हमारे सभी पशुपालक भाइयों के लिए हम अपने ब्लॉग और ऐप पर ऐसी जानकारियां साझा करते रहते हैं। अगर आप हमारे साथ जुड़े रहना चाहते हैं तो आप हमारी Animall App को डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने से आप न केवल जानकारियां हासिल कर पाएंगे। बल्कि पशु को खरीद या बेच भी पाएंगे। यहां से डाउनलोड करें Animall App ।

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