गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी, कलनी का देसी उपचार कैसे करें ?

  • खाद्य तेल (जैसे अलसी का तेल) का एक पतला लेप लगाना चाहिए। 
  • साबुन के गाढ़े-घोल का इस्तेमाल एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार करना चाहिए। 
  • आयोडीन को शरीर के ऊपर एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार रगड़ना चाहिये। 
  • लहसुन के पाउडर का शरीर की सतह पर इस्तेमाल करें। 
  • एक हिस्सा एसेन्सियल आयल और दो-तीन हिस्सा खाद्य तेल को मिलाकर रगड़ना चाहिए। 
  • किलनी के लिए होम्योपैथिक ईलाज भी काफी उपयोगी है, इसलिए इसका प्रयोग करना चाहिए। 
  • पाइरिथ्रम नामक वानस्पतिक कीटनाशक भी काफी उपयोगी होता है। 
  • पशुओं की रीढ़ पर दो-तीन मुट्ठी सल्फर का प्रयोग करना चाहिए। 
  • चूना-सल्फर के घोल का इस्तेमाल 7-10 दिन के अंतराल पर लगभग 6 बार करना चाहिये ।
  • किलनी नियंत्रण में प्रयोग होने वाले आइवरमेक्टिन इंजेक्शन के प्रयोग के बाद दूध को कम से कम दो से तीन हफ्तों तक प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। 

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी क्यों होता है और कैसे रोकें ?

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी के लिए कौन सी इंजेक्शन या दवाई देनी चाहिए ?

 

19 लाइक
… और पढ़ें arrow

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी के लिए कौन सी इंजेक्शन या दवाई देनी चाहिए ?

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी से दूध उत्पादन कम हो सकता है ।उनके प्रकोप से बड़े गाय भैंस में कब्ज, एनीमिया, पेट दर्द और डायरिया के लक्षण दिखाई देते है। इसलिए वर्ष में 2 बार भीतरी परजीवीयों के लिए कृमिनाशक दवा का प्रयोग करना चाहिए।

 

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी, कलनी का देसी उपचार कैसे करें ?

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी क्यों होता है और कैसे रोकें ?

 

7 लाइक
… और पढ़ें arrow

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी क्यों होता है और कैसे रोकें ?

  • जूँ, चिचड़ी होने का असली कारन पशु के आसपास की गंदगी होना है।अगर आप अपनी पशु के आसपास पूरी तरह से सफाई रखते है तोह ये समस्या अपने आप ही कम हो जाती है।
    पशुशाला को हर रोज़ पानी से झाड़ू द्वारा साफ़ कर देना चाहिये। इस से गोबर व मूत्र की गंदगी दूर हो जाती है।
    पानी से धोने के बाद एक बाल्टी पानी में 5ग्राम लाल दवाई (पोटाशियम पर्मंग्नते) या 50 मिली लीटर फिनाईल डाल कर धोना चाहिये । इस से जीवाणु ,जूं, किलनी तथा विषाणु इत्यादि मर जाते हैं, पशुओं की बीमारियां नहीं फैलती और स्वच्छ दूध उत्पादन में मदद मिलती है।
  • नए खरीदे गए पशुओं को कम से कम तीन सप्ताह तक अलग रखकर उन का निरीक्षण करना चाहिए। इस अवधि में अगर पशु सेहतमंद दिखाई दें और उन्हें टीका न लगा हो, तो टीकाकरण अवश्य करा देना चाहिए।

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी, कलनी का देसी उपचार कैसे करें ?

 

7 लाइक
… और पढ़ें arrow

पशुओं में गलघोंटू रोग के आम लक्षण क्या है?

गलघोंटू रोग के आम लक्षण निम्नलिखित है:-
(क) पिछले पुट्ठे का फड़फड़ाना व कम्पन होना|
(ख) ग्लूटियल गले की मांस पेशियों में सूजन होना|
(ग) शरीर की भारी मांस पेशियों में सूजन जैसे गर्दन, कंधा, पीठ छाती आदि|
(घ) शुरुआत में सूजन वाला भाग सख्त व दर्द भरा होता है परन्तु बाद में मृत्यु पहले ठंडा व दर्दरहित हो जाता है|
(ङ) रोग ग्रसित भाग को दबाने पर चुर-चुर की आवाज़ आती है|
(च) पशु 48 घण्टों के अन्दर मर जाता है|

4 लाइक
… और पढ़ें arrow

गर्भवस्था के मुख्य क्या लक्षण है?

आम लक्षण निम्नलिखित है:-
(क) जब पशु गर्भधार्ण कर लेता है तो 21 दिनों के बाद मद में नहीं आता|
(ख) 3-4 महीनों के बाद पेट सूजा हुआ लगता है|
(ग) जब गुदा के रास्ते निदान किया जाता है तो गर्भाश्य बड़ा हुआ महसूस होता है यह निदान केवल पशुपालन में प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही किया जाना चाहिए|

4 लाइक
… और पढ़ें arrow

दुग्ध ज्वर के आम लक्षण क्या है?

लक्षण आमतौर पर 1-3 दिनों में व्याने के बाद सामने आते है| जानवर को कब्ज व बेअरामी हो जाती है| ग्रस्त पशु की मांस पेशियों में कमजोरी आने के कारण पशु खड़ा होने व चलने में असमर्थ हो जाता है| पिछले भाग में अकड़न या हल्का अधरंग होता है व पशु शरीर पर एक तरफ गर्दन मोड़ देता है व शरीर का तापमान सामान्य से कम होता है|

2 लाइक
… और पढ़ें arrow