TMR मशीन का उपयोग कैसे करें और इसके लाभ?

इस वीडियो में हम TMR मशीन के बारे में चर्चा कर रहे हैं। इस प्रणाली का उपयोग जानवरों के लिए भोजन बनाने के लिए किया जाता है। इस उपकरण का मालिक वर्तमान में एक डेयरी नाम श्री कृष्ण डेयरी फार्म चला रहा है। वर्तमान में वह अपनी गायों के लिए तैयार भोजन बनाने के लिए इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने इस मशीन के लाभों पर चर्चा के अलावा उन्होंने कहा कि एक बार इस प्रणाली को लागू करने के बाद श्रम लागत का वजन कम से कम हो गया है और यह भी कहा कि। इस गैजेट के उपयोग से वह अपनी गायों के लिए उच्च उपज खनिज भोजन का उत्पादन करने में सक्षम है। उन्होंने उच्चारण की सहायता से निष्कर्ष निकाला कि इस प्रणाली का शुल्क लगभग 400000 लाख रुपये है और इस प्रणाली को चलाने के लिए एक मनुष्य पर्याप्त है। एक बार में इस मशीन की वजन क्षमता लगभग 1000 किलोग्राम है

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गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी, कलनी का देसी उपचार कैसे करें ?

  • खाद्य तेल (जैसे अलसी का तेल) का एक पतला लेप लगाना चाहिए। 
  • साबुन के गाढ़े-घोल का इस्तेमाल एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार करना चाहिए। 
  • आयोडीन को शरीर के ऊपर एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार रगड़ना चाहिये। 
  • लहसुन के पाउडर का शरीर की सतह पर इस्तेमाल करें। 
  • एक हिस्सा एसेन्सियल आयल और दो-तीन हिस्सा खाद्य तेल को मिलाकर रगड़ना चाहिए। 
  • किलनी के लिए होम्योपैथिक ईलाज भी काफी उपयोगी है, इसलिए इसका प्रयोग करना चाहिए। 
  • पाइरिथ्रम नामक वानस्पतिक कीटनाशक भी काफी उपयोगी होता है। 
  • पशुओं की रीढ़ पर दो-तीन मुट्ठी सल्फर का प्रयोग करना चाहिए। 
  • चूना-सल्फर के घोल का इस्तेमाल 7-10 दिन के अंतराल पर लगभग 6 बार करना चाहिये ।
  • किलनी नियंत्रण में प्रयोग होने वाले आइवरमेक्टिन इंजेक्शन के प्रयोग के बाद दूध को कम से कम दो से तीन हफ्तों तक प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। 

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी क्यों होता है और कैसे रोकें ?

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी के लिए कौन सी इंजेक्शन या दवाई देनी चाहिए ?

 

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गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी के लिए कौन सी इंजेक्शन या दवाई देनी चाहिए ?

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी से दूध उत्पादन कम हो सकता है ।उनके प्रकोप से बड़े गाय भैंस में कब्ज, एनीमिया, पेट दर्द और डायरिया के लक्षण दिखाई देते है। इसलिए वर्ष में 2 बार भीतरी परजीवीयों के लिए कृमिनाशक दवा का प्रयोग करना चाहिए।

 

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी, कलनी का देसी उपचार कैसे करें ?

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी क्यों होता है और कैसे रोकें ?

 

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गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी क्यों होता है और कैसे रोकें ?

  • जूँ, चिचड़ी होने का असली कारन पशु के आसपास की गंदगी होना है।अगर आप अपनी पशु के आसपास पूरी तरह से सफाई रखते है तोह ये समस्या अपने आप ही कम हो जाती है।
    पशुशाला को हर रोज़ पानी से झाड़ू द्वारा साफ़ कर देना चाहिये। इस से गोबर व मूत्र की गंदगी दूर हो जाती है।
    पानी से धोने के बाद एक बाल्टी पानी में 5ग्राम लाल दवाई (पोटाशियम पर्मंग्नते) या 50 मिली लीटर फिनाईल डाल कर धोना चाहिये । इस से जीवाणु ,जूं, किलनी तथा विषाणु इत्यादि मर जाते हैं, पशुओं की बीमारियां नहीं फैलती और स्वच्छ दूध उत्पादन में मदद मिलती है।
  • नए खरीदे गए पशुओं को कम से कम तीन सप्ताह तक अलग रखकर उन का निरीक्षण करना चाहिए। इस अवधि में अगर पशु सेहतमंद दिखाई दें और उन्हें टीका न लगा हो, तो टीकाकरण अवश्य करा देना चाहिए।

गाय भैंस में जूँ, चिचड़ी, कलनी का देसी उपचार कैसे करें ?

 

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पशुओं में गलघोंटू रोग के आम लक्षण क्या है?

गलघोंटू रोग के आम लक्षण निम्नलिखित है:-
(क) पिछले पुट्ठे का फड़फड़ाना व कम्पन होना|
(ख) ग्लूटियल गले की मांस पेशियों में सूजन होना|
(ग) शरीर की भारी मांस पेशियों में सूजन जैसे गर्दन, कंधा, पीठ छाती आदि|
(घ) शुरुआत में सूजन वाला भाग सख्त व दर्द भरा होता है परन्तु बाद में मृत्यु पहले ठंडा व दर्दरहित हो जाता है|
(ङ) रोग ग्रसित भाग को दबाने पर चुर-चुर की आवाज़ आती है|
(च) पशु 48 घण्टों के अन्दर मर जाता है|

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