मेहसाणाा भैंस से जुड़ी सारी जानकारी यहां पढ़ें!

feature-image

भारत में भैंस पालना किसानों के लिए एक मुख्य आय का स्त्रोत है। भारत विश्व में दूध उत्पादन के लिए सबसे बड़ा देश है और ये बनना भैंस के बिना मुमकिन नहीं है। भारत में कई नस्ल की भैंस अलग अलग राज्यों में मिलती है। भैंस की नस्लों में ही एक बहुत ही मशहूर है मेहसाणा। 

मेहसाणा नस्ल की भैंस आमतौर पर गुजरात के साबरकांठा, बनासकांठा, अहमदाबाद और गांधीनगर जिलों में पाई जाती हैं। इसका नाम मेहसाणा इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी उतपत्ति गुजरात राज्य के मेहसाणा जिले में हुई है। इसे मेहसानी नाम से भी जाना जाता है। मेहसाणा को उसकी बेहतरी प्रजनन क्षमता के लिए जाना जाता है। और पढ़ें

 

मेहसाणा नस्ल की पहचान

मेहसाणा नस्ल की भैंस काले, भूरे और सलेटी रंग की होती है। ये दिखने में मुर्रा की तरह ही होती है। हालांकि इसका शरीर मुर्रा भैंस की तुलना में बड़ा होता है, लेकिन वजन में ये उससे हल्की होती है। दिखने में ये भैंस बहुत धाकड़ दिखती है। मेहसाणा भैंस का वजन 480 किलो के आसपास होता है। वहीं मेहसाणा के सींग आम तौर पर दरांती से आकार के होते हैं और वो मुर्रा भैंस से कम घूमी हुई रहती है।

मेहसाणा के लिए कहते हैं कि ये मुर्रा और मेहसाणा नस्ल के क्रॉस ब्रीड से बनी है। इसी वजह से दिखने में काफी मुर्रा से मिलती होती है।

 

मेहसाणा भैंस के दूध की विशेषताएं

मेहसाणा भैंस का दूध गुणवत्ता में काफी अच्छा होता है। मेहसाणा भैंस की पहली ब्यात का समय 42 से 48 महीने होता है। ये भैंस रोजाना का 10 लीटर दूध दे सकती है। डेयरी फार्मिंग के नजरिये से ये नस्ल बेहद ही खास मानी जाती है। एक ब्यात में मेहसाणा भैंस 1200 से 1500 लीटर तक दूध दे सकती है। मेहसाणा के दूध में लगभग 7 फीसदी तक फैट होता है। और पढ़ें

 

मेहसाणा भैंस को चारे में क्या दें

मेहसाणा नस्ल की भैंस को खुराक बेहद ही संभाल कर देने की जरूरत होती है। उसे जरूरत से ज्यादा खुराक बिलकुल भी ना दें। अगर आप भैंस को फलीदार चारा दे रहें हैं तो उसमें तूड़ी या फिर कोई अन्य चारा जरूर मिला लें। ऐसा करने से पशु को अफारा या बदहजमी की शिकायत नहीं होगी।

एक मेहसाणा भैंस को खुराक में प्रोटीन, कैलशियम, फासफोरस, विटामिन ए की जरूरत होती है। उसे दाने के रूप में मक्की, गेहूं, जौं, जई, बाजरा जरूर दें। इसके अलावा उसे गेहूं का चोकर, चावलों की पॉलिश, बिना तेल के चावलों की पॉलिश भी दे सकते हैं।

 

भैंस की देखरेख कैसे करें

मेहसाणा भैंस को पालने के लिए आपको एक शेड की जरूरत होगी क्योंकि पसु को भारी बारिश, तेज धूप, ज्यदा ठंड, बर्फबारी जैसे वातावरण से बचाने की जरूरत होती है। इतना ही नहीं इस बात का भी ध्यान रकें की शेड में साफ हवा और पानी भी साफ ही रहे। इसके अलावा पशुओं की संख्या के हिसाब से उनके आसानी से चारा खाने के लिए खुली जगह का प्रबंध रखें। और पढ़ें

गर्भवती जानवरों की देखभाल:

अगर आप एक गर्भवती मेहसाणा का खास ध्यान रखते हैं, तो उसके कई पायदे हैं, जैसे की अच्छे प्रबंधन की वदह से जो बछड़ा होगा वो स्वस्थ और अच्छा होगा। साथ ही भैंस जो दूध देगी वो भी ज्यादा मात्रा में हो सकता है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होगी। गर्भवती भैंस को खाने में चारे की ज्यादा जरूरत पड़ती है।

पाड़ी/ पाड़ा की देखभाल और प्रबंधन:

भैंस जब बच्चा दे देती है तो उसके जन्म के बाद नाक या मुंह से कफ को तुरंत हटा दें। अगर पाड़ा या पाड़ी सांस नहीं ले पा रहा है, तो उसे बनावटी सांस दें।

 

मेहसाणा भैंस को होने वाली आम बीमारियां और उनका इलाज

भैंसों का गल-घोटू रोग

भैंसों में गल-घोटू रोग एक जानलेवा बीमारी है, ये बीमारी ज्यादातर 6 महीने से लेकर 2 साल के पशु को होती है। गल घोटू रोग का कारण पासचुरेला मलटूसिडा नामक जीवाणु होता है, ये जीवाणु पशु के टांसिल में होता है। इसके अलावा ज्यादा काम के बोझ की वजह से या फिर खराब पोषण, गर्मी और अन्य बीमारियां के कारण गल घोटू रोग होते हैं। ज्यादातर ये बीमारी बारिश के मौसम में होती है। और पढ़ें

गल-घोटू रोग के लक्षण

  •   बुखार होना
  •   मुंह से लार टपकना
  •   आंख और नाक से पानी निकलना
  •   भूख न लगना
  •   पेट दर्द होना और दस्त होना आदि

रोकथाम

  •   गर्मियों के मौसम में पशुओं को इक्ट्ठे और तंग जगह पर ना बांधे।
  •   बीमार पशुओं को बाकी पशुओं से अलग रखें।
  •   मॉनसून आने से पहले ही टीकाकरण करवाएं। पशुओं के पहले टीका 6 महीने की उम्र में और फिर हर साल जरूरी करवाएं।
  •   लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

तिल्ली का रोग (एंथ्रैक्स)

मेहसाणा भैंस को इस बीमारी काफी तेज बुखार होता है। ये बीमारी आमतौर पर कीटाणु या फिर गंदे पानी की वजह से होती है, लेकिन खराब खुराक भी इसका एक कारण हो सकता है। ये बीमारी अचानक होती है या कुछ समय भी ले सकती है।

लक्षण:

  • इसमें जानवर का शरीर अकड़ जाता है
  • चारों टांगे बाहर को खींची जाती हैं।

रोकथाम: इसका कोई असरदायक इलाज नहीं है। हर साल इसके बचाव के लिए टीके लगवाये जाने चाहिए।

 

Animall पर कैसे खरीदें भैंस

अगर आप भी एक मेहसाणा भैंस खरीदना चाहते हैं या फिर अपनी मेहसाणा भैंस को बेचना चाहते हैं तो तुरंत ही अपने फोन में Animall ऐप को डाउनलोड कर लो। इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको पशु खरीदने या बेचने की सारी सिरदर्दी से छुटकारा मिल जाएगा।

Animall ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको मार्केट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ऐप डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले आप प्ले स्टोर पर जाएं और वहां से Animall ऐप को डाउनलोड करें। आप इस लिंक से भी डाउनलोड कर सकते हैं Click Here

          

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आप अपने मोबाइल नंबर से रजिस्टर करें। साथ ही अपनी जगह को चुनें।
  2. इसके बाद आपको ऐप की भाषा चुनने का विकल्प मिलेगा।
  3. इसके बाद आप ऐप को पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं। यहां पर आपके सामने पशु खरीदने और बेचने दोनों के विकल्प नजर आएंगे।
  4. अगर आप मेहसाणा भैंस खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए आपको भैंस के विकल्प चुनने की जरूरत है।
  5. जो भी भैंस बिकाऊ होगी, उसकी पूरी सूची आपको यहां पर मिल जाएगी।
  6. इसके बाद आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प दिखाई देंगे। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पशुओं की सूची हासिल कर सकेंगे।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी भैंस को चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले इंसान से बात कर सकते हैं।
  8. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं और भैंस से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।

 

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. वहीं अगर आप अपनी भैंस बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप में नीचें देखेंगे तो पशु बेचें विकल्प मिलेगा। इसे दबाने के बाद आप पशु बेच सकेंगे।
  2. यहां पर क्लिक करने के बाद आपको अपनी भैंस से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी। जैसे की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध की क्षमता, फोटो आदि।
  3. जैसे ही आप ये सारी जानकारी देंगे उसके कुछ ही मिनटों के अंदर आपका पशु ऐप पर लिस्ट हो जाएगा। जो भी खरीदार होगा वो सीधा आपसे संपर्क कर सकेगा।

 

जहां एक तरफ आप बेहद आसानी से Animall ऐप पर अपना पशु बेच सकते हैं। तो वहीं दूसरी तरफ आपको पशु से जुड़ी जानकारियां और डॉक्टरों से सहायता भी ऐप पर मिल जाती है। और पढ़ें

… और पढ़ें arrow

भदावरी भैंस की जानकारी यहाँ पढ़ें

feature-image


Source -Pashugyan.org

देश के वह पशुपालक जो एक अच्छी नस्ल की भैंस ढूंढ रहे हैं। उनके लिए भदावरी भैंस एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह भारत में उत्तर प्रदेश के इटावा और आगरा में पाई जाती है। इस नस्ल की भैंस से प्राप्त दूध में न केवल अधिक मात्रा में फैट पाया जाता है। बल्कि इसके जरिए दिए गए दूध से सबसे ज्यादा घी निकलता है। जिसकी कीमत 1000 रुपए से 1500 रुपए किलो तक भी होती है। आज के समय में भी शहरों के अंदर भैंस के घी और दूध की मांग बहुत अधिक है। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि भदावरी भैंस को पालना पशुपालकों के लिए एक फायदे का सौदा है। 

आज हम अपने इस लेख में आपको भदावरी भैंस के दूध के गुण से लेकर इस भैंस से जुड़ी हुई तमाम जानकारियां देंगे। अगर आप भदावरी भैंस की जानकारी हासिल करना चाहते हैं, या फिर बिना किसी सिरदर्दी के भदावरी भैंस खरीदना और बेचना चाहते हैं तो आप इस लेख पर बने रह सकते हैं। इस भैंस को आप हमारी Animall App के जरिए खरीद सकते हैं। आइए जानते हैं आखिर कैसे भदावरी भैंस को खरीदा या बेचा जा सकता है और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में।  

 

भदावरी भैंस की पहचान कैसे करें 


Source – Alchetron.com

भदावरी एक कम कद वाली भैंस है। भदावरी भैंस का शरीर बेहद नुकीला और सिर छोटा होता है। भदावरी नस्ल की भैंस की टांगे काफी मजबूत और छोटी होती हैं। वहीं अगर भैंस के रंग की बात करें तो इनका तांबिया होता है और इनके शरीर पर बाल बेहद कम ही होते हैं। इसके अलावा इनके घुटने के नीचे का हिस्सा हल्के पीले रंग का होता है। साथ ही गर्दन के नीचे सफेद रंग की धारियां होती हैं।  इस भैंस के सींग काले होते हैं और इनकी पलके भूरे रंग की होती हैं। ज्ञात हो भदावरी नस्ल के पशु का औसतन वजन 300 से 400 किलो तक ही होता है। 

 

भदावरी भैंस का दूध और इसकी विशेषताएं

भदावरी भैंस के दूध में 6 से 12.5 प्रतिशत तक फैट होता है, जो अन्य भैंस की नस्ल के मुकाबले काफी अधिक है। आपको बता दें कि यह पशु ज्यादातर हर तरह के तापमान को बर्दाश्त कर सकता है। साथ ही इनमें दूध देने की क्षमता भी बेहद अधिक होती है। भदावरी भैंस एक ब्यात में करीब 800 से लेकर 1000 लीटर तक दूध देती है। यही नहीं भदावरी भैंस की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी मजबूत होती है। वहीं अन्य भैंस के कटड़ों के मुकाबले इस नस्ल के कटड़ों की मृत्यु 5 प्रतिशत तक कम ही होती है। 

 

भदावरी भैंस की देखरेख कैसे करें 

भदावरी नस्ल की भैंस यूं तो हर तरह के मौसम को झेलने की क्षमता रखती हैं। लेकिन भैंस की दूध उत्पादकता बढ़ाने और इन्हें स्वस्थ रखने के लिए कई कदम उठाना बेहद जरूरी होता है। भैंस को रखने के लिए एक शेड की जरूरत है। इस शेड का निर्माण कुछ इस तरीके से होना चाहिए कि यहां से हवा की आवाजाही बाधित न हो और भैंस का बारिश और धूप से भी बचाव हो सके। 

भदावरी भैंस का चारा 

भदावरी भैंस यूं तो एक बेहतर सहनशक्ति वाला पशु है। लेकिन इन्हें चारा देते समय यह देखना चाहिए कि वह हल्का और आसानी से पचाया जा सके। इसके लिए भैंस को फालीदार चारा तूड़ी में मिलाकर देना चाहिए। अगर आप इस तरह का चारा भैंस को देते हैं तो भैंस को बदहजमी और अफारा की समस्या नहीं होगी। इसके अलावा भी भदावरी भैंस को कुछ अन्य चीजें दी जा सकती हैं जो कुछ इस प्रकार हैं। 

भैंस को आप कई अनाज दे सकते हैं जैसे गेहूं, बाजरा, जौ, जई और मक्की आदि। 

भदावरी नस्ल की भैंस को आप मूंगफली, सोयाबीन, अलसी, बड़ेवे, सरसों और सूरजमुखी के बीज खाने को दे सकते हैं। 

इन सभी चीजों के अलावा शराब के कारखानों से बचे हुए दाने, खराब आलू, सब्जी, फल और आटा आदि दे सकते हैं। 

भदावरी भैंस को लगाए जाने वाले टीके 

भदावरी भैंस के जन्म के बाद इन पर थोड़ा अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ऐसे में जन्म के 7 से दिन बाद इलेक्ट्रिकल ढंग से कटड़े के सींग दागने की जरूरत होती है। इसके अलावा जन्म के दो से तीन सप्ताह के बाद विषाणु श्वसन टीका लगवाना चाहिए। साथ ही भदावरी भैंस के कटड़े को जब वह 1 से तीन महीने का हुआ हो, तो उसे क्लोस्ट्रीडायल टीका दें। 

 

भदावरी भैंस को होने वाले रोग और उनके उपचार 


Source – dairyknowledge.in

भदावरी नस्ल की भैंस भले ही एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली वाला जीव हो। लेकिन इन्हें कई बार कुछ रोग परेशान कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस नस्ल की भैंस को होने वाले रोग और उसके उपचार। 

तेजाबी बदहजमी और उसका इलाज 

अगर भैंस को तेजाबी बदहजमी की समस्या हो गई है तो उन्हें अधिक निशाचन वाली खुराक बिल्कुल न दें। इसके अलावा मठ्ठी बीमारी की हालत में पशु को मीठा सोडा मुंह के जरिए दें। 

कब्ज और इसका इलाज 

आपको बता दें कि कब्ज एक ऐसी समस्या है जिसके दौरान पशु को मल त्यागने में दिक्कत होती है। वहीं कई बार कब्ज लंबे समय तक रहने की वजह भयंकर बीमारियां भी हो जाती हैं। 

अगर हाल ही में भैंस को कब्ज का रोग हुआ है तो आप उन्हें 500 एमएल अलसी के तेल चारे के साथ दे और अधिक पानी पिलाएं। इसके अलावा बड़े जानवरों के लिए 800 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट पानी में डाले और 30 अदरक का चूरा बना दें। 

अफारा रोग और उसका उपचार 

भदावरी नस्ल की भैंस को अफारे की समस्या अक्सर हो जाती है। आपको बता दें कि इस रोग में पशु के पेट में दर्द और पेट फूल जाता है। इसके अलावा अफारा होने पर सांस लेने में भी दिक्कत होती है। 

पशु को अफारा होने पर उसे 30 से 60 एम एल तक तारपीन का तेल दें। साथ ही ध्यान रखें कि तेल की मात्रा अधिक न हो। वरना इसकी वजह से पेट भी खराब हो सकता है। इसके अलावा अगर पशु को बार – बार अफारा हो तो उसे एक्टिवेटेड चारकोल, 40 प्रतिशत फार्मलीन और 15 से 30 एम एल डेटॉल का पानी भी दे। अगर पशु को इन उपाय से कोई लाभ न हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

सिक्के का जहर और इसका इलाज 

भदावरी भैंस को जब यह समस्या होती है तो इस दौरान वह लड़खड़ाने लगती है और उसकी आंखें घूमने लगती है। साथ ही मुंह से झाग भी निकलने लगता है। आमतौर पर यह समस्या पशु को तब होती है जब वह किसी ऐसी चीज को चाट लेती हैं, जहां पेंट हुआ हो। 

अगर पशु को सिक्का जहर से बचाकर रखना है तो उन्हें सही स्थान पर बांध के रखे। इसके अलावा उन्हें ऐसी जगह से दूर रखें जहां सिक्का पिघलाया जाता है। साथ ही स्थिति काबू में करने के लिए आप डॉक्टर की राय पर पशु को 25 प्रतिशत कैल्शियम वरसीनेट दिन में दो बार दें। 

ब्लैक क्वार्टर बीमारी एवं इसका इलाज 

भदावरी भैंस को अगर बारिश के मौसमें गिली मिट्टी पर ही लंबे समय तक छोड़ दिया जाए तो उन्हें ब्लैक क्वार्टर रोग हो सकता है। आपको बता दें कि यह जीवाणु ज्यादातर बारिश के दिनों में मिट्टी से ही पैदा होता है। इस रोग का असर पशुधन पर बुरा होता है।  इस रोग के दौरान पशु को तेज बुखार हो जाता है और वह सही तरह से सांस भी नहीं ले पाता। हालांकि आमतौर पर यह 2 साल से कम उम्र के पशु को ही प्रभावित करता है। 

भदावरी भैंस को यह रोग होने पर प्रभावित स्थान पर पैनसीलिन का टीका दिया जाता है। इसके अलावा 4 महीने से 3 वर्ष के पशु को सूजन वाली जगह पर  हाइड्रोजन पेरोक्साइड और पोटेशियम परमैंगनेट  के से ड्रेसिंग करनी होती है। 

 

भैंस बेचने और खरीदने का ऑनलाइन तरीका 

भैंस खरीदने और बेचने के लिए आप Animall App अपने एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में  डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें Click Here

 

  1. लिंक पर क्लिक करने पर एक ऐसा पेज खुल जाएगा। यहां आपको इंस्टॉल के बटन पर क्लिक करना है।
  2. इसके बाद जब ऐप डाउनलोड हो जाए तो आप यहां रजिस्ट्रेशन हेतु अपना मोबाइल नंबर डालें।
  3. अब अपने स्थान का चुनाव करें या ऐप को खुद आपकी लोकेशन का पता लगाने दें।
  4. इसके बाद आपको अपनी भाषा का चुनाव करना होगा।
  5. आपके पिछले चुनाव के बाद ऐप इस्तेमाल के लिए तैयार हो गई होगी। यहां से आप गाय खरीद या बेच सकते हैं।

 

भैंस खरीदने का तरीका 

  1. उदाहरण के लिए अगर आपको भैंस खरीदनी है तो आप भैंस के विकल्प का चुनाव करें।
  2. यहां आपको जो भैंस खरीदी जा सकती हैं। उनकी सूची दिखाई देगी।
  3. इसके बाद एक नया पेज खुलेगा यहां आपको दूध, ब्यात, नस्ल का जानकारी देनी होगी। जैसे ही आप इन जानकारियों को ऐप पर डालेंगे आपके सामने सूची आ जाएगी। 
  4. इस सूची के आधार पर आप अपनी भैंस चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  5. यंहा भैंस की कीमत को कम कराने का काम भी आप कर सकते हैं। 

 

भैंस बेचना

  1. अगर आप भैंस बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। सहायता के लिए नीचे दी गई तस्वीर का इस्तेमाल कर सकते हैं। जहां आपको निशान दिखाई देगा वहीं आपको क्लिक करना है
  2. अब भैंस की ब्यात, दूध देने की क्षमता, नस्ल आदि जानकारी देनी है। सहायता के लिए नीचे चित्र को देखें।
  3. यहाँ आपके द्वारा दी गई जानकारी अपलोड हो गई है। अब भैंस को खरीदने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति आपसे स्वयं बात कर लेगा। 
… और पढ़ें arrow

जानें नागौर पशुमेला के बारे में सारी जानकारी!

feature-image

भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान – अपने किलों, महलों, आकर्षक वन्य जीवन और सुनहरे रेतीले रेगिस्तान के लिए मशहूर है। ये सारी चीजें इस खूबसूरत भारतीय राज्य की पहचान है। लेकिन राजस्थान सिर्फ अपने किलों, प्रेम और साहस की कहानियों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है बल्कि ये राज्य मेलों और त्योहारों के लिए भी उतना ही मशहूर है।

राजस्थान के मेले और त्योहार असंख्य हैं और न सिर्फ लोकल लोगों के लिए खास होते हैं बल्कि इस सुंदर पर्यटन स्थलों पर आने वाले यात्रियों पर भी एक अनूठा महत्व और प्रभाव छोड़ते हैं। ऐसा ही एक त्योहार जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है वो है नागौर पशुमला। ये पशुमेला लोगों के बीच में बहुत जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है और इस त्योहार के करिश्मे को देखने के लिए बहुत सारे पर्यटक दूर-दूर से इस जगह पर आते हैं।

नागौर पशुमेला हर साल जनवरी और फरवरी के महीने में आयोजित होता है। दूर-दूर से हर साल लोग यहां पर आते हैं और पशुओं को खरीदने और बेचने में हिस्सा लेते हैं। इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा पशुमेला कहते हैं।

नागौर पशुमेला का इतिहास

नागौर राजस्थान का एक प्राचीन शहर है जो इसके आसपास के मैदानी इलाकों के पुराने व्यापारिक मार्गों में से एक पर स्थित है। ये शहर पशुपालन में काफी धनी माना जाता है। थार मरुस्थल की जलवायु खेती के अनुकूल नहीं होती है। इसलिए यहां के लोग ऊंटों को पाल कर ही अपना जीवन यापन करते हैं। जोधपुर के आसपास के क्षेत्र जैसे हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अन्य हिस्से अपनी खेती के लिए मवेशियों को जोधपुर से ही लेकर जाते थे। और काफी ज्यादा नागौर पर भी निर्भर करते हैं।

पहले के जमाने में राजा यहां के लोगों से पशु बेचने पर या खरीदने पर टैक्स भी वसूला करते थे। यहां के स्थानीय लोगों ने व्यापारिक मार्ग से गुजरने वाले व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए असाधारण समारोह आयोजित करने शुरु कर दिए थे। ऐसा कहा जाता है कि दूर-दूर से आने वाले व्यापारी मेले के मैदान में कैंप लगाकर रात भर रुका करते हैं। शाम को अपना समय बिताने के लिए व्यापारियों ने अपने मनोरंजन के लिए गीत-संगीत के कार्यक्रम रखने शुरु कर दिए थे।

हालांकि नागौर पशुमेला की शुरुआत 56 साल पहले राजा उमेद सिंह के द्वारा की गई थी। इस मेले में उन्होंने मशहूर सूफी संत रामदेवजी को अपनी ताकत दिखाने के लिए बुलाया था। संत की ताकत का नमूना देखने के लिए शहर और शहर के आस पास के लोग आए थे और ताकत से संतुष्ट भी हो गए थे। लोगों ने उनसे नागौर में रहने के लिए आग्रह किया और वो साल में एक बार उनके सम्मान में उनसे मिलने जाते थे।

कैसे मनाया जाता है नागौर पशुमेला

इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा पशुमेला कहा जाता है। जो साल में एक बार जनवरी या फरवरी महीने में मनाया जाता है। ये मेला 4 दिनों तक चलता है।

हर दिन यहां पर लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। दिन की शुरुआत से ही मालिक अपने पशुओं की गतिविधियां और आकर्षण दिखाने लगते हैं, ताकि वो खरीददार को आकर्षित कर सकें। हर विक्रेता को एक शेड मिलता है, जिसमें वो अपने पशुओं को रख सकता है। खरीददार इन शेड्स में जाता है और अपने पसंद के पशु को खरीदता है।

शाम होने तक ज्यादातर खरीददार वापिस चले जाते हैं और सिर्फ पशुओं के मालिक ही वहां पर रह जाते हैं। जिसके बाद हर शाम वहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और लोग उत्सव मनाते हैं। जबकि बाजार सिर्फ दिन के वक्त में ही लगता है। वहां हर दिन यहां पर मनोरंजक खेल भी होते हैं, जो भी शाम होने से पहले तक ही होते हैं। राजस्थान का नागौर पशुमेल पर्यटन विभाग के सहयोग से पशुपालन विभाग द्वारा 4 दिनों तक चलता है।

नागौर पशुमेला में होने वाली मनोरंजक गतिविधियां

–    इस उत्सव में मजे का तड़का लगाने के लिए रस्साकशी यानी की टग ऑफ वॉर का खेल, ऊंट और बैल की दौड़, मुर्गों की लड़ाई जैसे खेल भी करवाते हैं। जिसका लोग जमकर आनंद लेते हैं।

–    पूरे पशुमेले के दौरान राजस्थान का लोक संगीत बजता रहता है। जिसे वहां के लोकल कलाकार बजाते हैं।

–    नागौर मेले की सबसे अद्भुत विशेषताओं में से एक लाल मिर्च का बाजार भी है जो मेले में लगाया जाता है। नागौर का लाल-मिर्च बाजार या “मिर्ची बाजार” हर तरह से लोकप्रिय रूप से जाना जाता है जो एशिया का सबसे बड़ा बाजार है।

–    वहां पर पशुओं को संवारने का भी मुकाबला होता है, जिसमें काफी सारे पशु मालिक हिस्सा लेते हैं।

–    मेले में हर वक्त हस्तकला की प्रदर्शनी लगी रहती है, जहां से पर्यटक सुंदर-सुंदर चीजें खरीद कर ले जा सकते हैं। यहां पर सबसे ज्यादा ऊंट से जुड़ी चीजें, लकड़ी का सामान, लोहे से बनी चीजें बिकती है।

–    यहां पर मनोरंजन के लिए पगड़ी बांधने का मुकाबला, मूंछों का मुकाबला, स्टंट, बाजीगर और कठपुतली के कार्यक्रम के साथ-साथ डांस का कार्यक्रम भी होता है।

नागौर पशु मेला में क्या करें

–    शाम होने के बाद भी मेले में ही रुकें, क्योंकि उस दौरान वहां पर नागौर के लोकल लोग लोक गीत और डांस के कार्यक्रम करते हैं। इसके अलावा मेले के दौरान और बाद में भी कई तरह की मनोरंजक गतिविधिया वहां पर की जाती है।

–    वहां पर होने वाले खेलों और मनोरंजक गतिविधियों में भी हिस्सा ले सकते हैं।

–    लोकल प्रदर्शनी से सामान खरीद सकते हैं।

–    आप देख सकते हैं कि किस तरह खरीददारों के लिए जानवरों को तैयार किया जाता है।

–    मेले में मिलने वाले लोकल खाने का भी मजा ले सकते हैं। ऊंट के दूध से बनी खाने की चीजें यहां पर काफी पसंद की जाती है।

–    कई बार रात को मेले में पटाखें भी जलाएं जाते हैं, तो आप देर रात तक रुक कर उसका भी मजा उठा सकते हैं।

नागौर कैसे पहुंचे

प्लेन के जरिये नागौर कैसे पहुंच सकते हैं?

नागौर तक पहुंचने के लिए आप फ्लाईट भी ले सकते हैं। नागौर शहर के सबसे नजदीकी हवाईअड्डा जोधपुर में है। जहां से शहर की दूरी 140 किलोमीटर है। जोधपुर तक आप सभी मुख्य शहरों से पहुंच सकते हैं। जोधपुर पहुंच कर आप टैक्सी लेकर नागौर जा सकते हैं।

ट्रेन के जरिये नागौर कैसे पहुंचे?

नागौर शहर का अपना खुद का रेलवे स्टेशन है। जहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं। नागौर तक जयपुर से, बंगाल से ट्रेन आती है, जबकि बाकी शहरों से जयपुर तक की ट्रेन लेकर आप पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे?

नागौर सड़क मार्ग से आने के लिए आप जयपुर से 2 रास्ते ले सकते हैं। एक सीकर से होकर और दूसरा जोधपुर से होकर। इसके अलावा राजस्थान स्टेट ट्रांसपोर्ट भी लगातार बसें चलाता है, जिसके जरिये आप नागौर पहुंच सकते हैं।

एंट्री फीस और मेले का समय

मेले में जाने के लिए कोई एंट्री फीस नहीं होती है। ये एक निशुल्क मेला है और यहां पर आप 9 से 6 बजे के बीच में आ सकते हैं।

नागौर पशुमेले के 4 दिनों में आप पशुओं के बारे में बहुत कुछ जान ता पाएंगे ही, साथ में आपको बहुत ही अलग अनुभव होगा। तो अगर आप किसान है तो आपको जरूर वहां पर जाना चाहिये, लेकिन अगर आप किसान नहीं है तो भी आप इसे अनुभव करने के लिए जरूर जाए। आपको ये काफी पसंद आएगा और बेहद ही अलग अनुभव होगा।

पशुओं से जुड़ी सारी परेशानियों के लिए आप Animall.in पर जा सकते हैं या फिर आप प्ले स्टोर से हमारी ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं। यहां पर आप पशु खरीदने/ बेचने के अलावा, डॉक्टर से सहायता, और पशु से संबंधित हर तरह का ज्ञान भी पा सकते हैं।

ये भी पढ़ें: पशु मेला: सभी जानकारी 2022

… और पढ़ें arrow

पशु मेला: सभी जानकारी 2022

feature-image

मेला शब्द सुनते ही दिमाग में कई तरह की तस्वीरें बनने लगती हैं। जहां झूले, चाट के ठेले और अलग – अलग प्रदर्शनी और कार्यक्रम होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी पशु मेले के बारे में सुना है।  सुनने में थोड़ा अजीब जरूर है। लेकिन भारत में कई स्थानों पर पशु मेला आयोजित किया जाता है।

आपको बता दें कि भारत की आज भी ज्यादातर आबादी या तो खेती पर निर्भर रहती है, या फिर उनका गुजारा पशुपालन के जरिए होता है। ऐसे में इस क्षेत्र के लोगों को एक सही बाजार दिया जा सके। इसलिए ही पशु मेला आयोजित कराया जाता है। इस तरह के पशु मेलों में गाय, भैंस, बकरी, ऊंट और अन्य पशुओं को खरीदा और बेचा जाता है। 

आज हम आपको अपने इस लेख में भारत के सबसे बड़े पशु मेले समेत पशु मेले में होने वाली कार्यक्रम और प्रदर्शनी के बारे में बताने वाले हैं। अगर आप भी पशु मेले से जुड़ी किसी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। 

ये भी पढ़ें: संकर पशुओं से कितनी बार दूध निकालना चाहिए?

पशु मेला क्या है 

हमारे देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह पशुपालन पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में पशु मेला उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो इस क्षेत्र से जुड़े हैं या फिर जुड़ना चाहते हैं। भारत के अलग – अलग राज्यों और स्थानों पर पशु मेलों का आयोजन किया जाता है। अकेले राजस्थान में ही 250 पशु मेले हर साल आयोजित किए जाते हैं। इन पशु मेलों में पशु पालन करने वाले लोगों को कई उन्नत नस्लों को खरीदने और बेचने का मौका मिलता है। इन पशु मेलों में पशु की कीमत काफी कम रखी जाती है, ताकि अधिक से अधिक पशुपालकों को मेलो तक लाया जा सके।

इसके अलावा इन मेलों में पशुओं की देखरेख, खानपान, ग्रामीण कला और खेती से जुड़े उपकरण भी बेचे जाते हैं। साथ ही किसानों को खेती की नई तकनीक से भी रूबरू कराया जाता है। यह पशु मेले कला, संस्कृति, और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होता है। इसके जरिए विदेशी पर्यटकों को देश की ग्रामीण सभ्यता और संस्कृति को जानने का मौका मिलता है। 

भारत में आयोजित होने वाले कुछ प्रमुख पशु मेले

देश में कई राज्यों में पशु मेलों का आयोजन होता है। इन्हीं में से कुछ बहुत महत्वपूर्ण हैं। आइए  भारत में आयोजित होने वाले ऐसे ही पशु मेलों के बारे में जानते हैं। 

ये भी पढ़ें: क्या अजोला से पशुओं में दूध बढ़ा सकते है ?

हरियाणा पशु मेला 

हरियाणा राज्य के भिवानी क्षेत्र में भी पशु मेला बड़े स्तर पर आयोजित कराया जाता है। इस मेले के अंदर पशुओं की 2000 से ज्यादा नस्ल देखने को मिल सकती है। मेले के अंदर पशुओं का रैंप वॉक भी रखा जाता है। हरियाणा में यह मेला फरवरी के अंत में आयोजित होता है। यहां पशु के बीच प्रतिस्पर्धा और कई कार्यक्रम कराए जाते हैं। पशु मेले के आयोजन से कई दिन पहले ही इस मेले में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। 

राजस्थान का बलदेव पशु मेला 

बलदेव पशु मेले का आयोजन मार्च के अंत में शुरू होता है और अप्रैल माह के शुरुआती दिनों तक चलता है। यह मेला मेड़ता में हर साल आयोजित कराया जाता है। आपको बता दें कि इस पशु मेले का नाम किसान नेता बलदेव के नाम पर रखा गया है। बलदेव पशु मेला सन 1947 से हर साल राज्य  के पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित कराया जाता है। इस मेले में नागौरी बैलों की बिक्री सबसे अधिक होती है।  

ये भी पढ़ें: घरेलू तरीके से भैंस का दूध कैसे बढाये ?

चंद्रभागा पशु मेला 

चंद्रभागा नाम का यह पशु मेला करीब 250 साल से आयोजित कराया जा रहा है। यह मेला राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन कस्बे में आयोजित किया जाता है। आपको बता दें कि इस मेले की शुरुआत 18 वी सदी में झाला जालिम सिंह ने की थी। लेकिन 1958 के बाद इस मेले का संचालन पशुपालन विभाग द्वारा किया जाने लगा था। ज्ञात हो कि यह मेला हर साल कार्तिक सुदी ग्यारस से मिगसर बदी पंचम तक चलता है। इस मेले में सबसे अधिक मालवी नस्ल के बैलों को खरीदा और बेचा जाता है। 

पुष्कर पशु मेला 

यह पशु मेला अजमेर से दूर स्थित पुष्कर में आयोजित किया जाता है। इस मेले के अंदर दुधारू पशुओं की बिक्री अधिक देखने को मिलती है। पुष्कर मेले में गाय, भैंस, बकरी और कई दूसरे पशु भी बेचे और खरीदे जाते हैं। इस मेले में गिरी गाय भी देखने को मिलती है। आपको बता दें कि यह पशु मेला कार्तिक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। ज्ञात हो कि कार्तिक पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म के लोगों के लिए बहुत अधिक महत्व रखता है। माना जाता है कि इस दिन सभी देवी देवता झील में एकत्रित होते हैं। यही कारण भी है कि इस मेले में लोग झील के अंदर नहाते हैं। यह उन चुनिंदा मेलों में से एक है जहां आपको विदेशी सैलानी भी भारी मात्रा में देखने को मिल सकते हैं।  

ये भी पढ़ें: जानिए कैसे करें दुधारू भैंस की पहचान

भारत का सबसे प्रसिद्ध पशु मेला 

सोनपुर पशु मेला भारत और एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है, जो बिहार में आयोजित होता है। इस पशु मेले को नवंबर या फिर दिसंबर महीने में लगाया जाता है। इस मेले को छत्तर और हरिहर क्षेत्र मेला के नाम से भी जाना जाता है। इस पशु मेले में बहुत सी अलग – अलग नस्लों की पशु आते हैं। मुख्यतौर पर इस मेले में अलग – अलग नस्ल के हाथी, ऊंट, घोड़े, गाय और भैंस आदि पशुओं को खरीदा और बेचा जाता है। यह मेला इतना बड़ा और विशाल होता है कि विदेशी लोग भी इस मेले को देखने आते हैं। 

 

पशु मेलों का कार्यक्रम 

भारत के अंदर हर साल बहुत मेले आयोजित किए जाते हैं। वहीं अगर आंकड़ों की बात करें तो केवल राजस्थान के अंदर ही हर साल 250 से ज्यादा पशु मेलों का आयोजन किया जाता है। इन पशु मेलों में न केवल पशु को खरीदा और बेचा जाता है। बल्कि कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा खेती से जुड़ी नई तकनीक और तरीकों  से लोगों को रूबरू कराया जाता है। इन पशु मेलों में पशुओं का रैंप वॉक भी कराया जाता है। इसके अलावा खाने पीने के ठेले और कई अलग – अलग वस्तुओं की दुकानें भी लगाई जाती हैं। 

ये भी पढ़ें: स्वच्छ दूध का उत्पादन कैसे करें ?

… और पढ़ें arrow

राजस्थान की सबसे बड़ी पशु मेला की जानकारी

feature-image

भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है, और राजस्थान अपने किलों, अपने महलों, सुंदर वन्य जीवन और बेहद ही सुंदर सुनहरे रेतीले रेगिस्तान के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं सब से बनता है खूबसूरत राजस्थान। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजस्थान सिर्फ अपने किलों, महान कहानियों के लिए ही मशहूर नहीं है। बल्कि ये राज्य अपने मेलों और त्योहारों के लिए भी काफी ज्यादा मशहूर है।

राजस्थान के मेले और त्योहार असंख्य हैं और न सिर्फ राजस्थान के लोगों के लिए खास होते हैं, बल्कि इन मेले और त्योहारों में आने वाले यात्रियों पर भी एक खास महत्व और प्रभाव छोड़ देते हैं। राजस्थान में करीब 250 से भी ज्यादा पशुमेले हर साल होते हैं। ये मेले कला, संस्कृति, पशुपालन, पर्यटन के लिहाज से काफी खास होते हैं। सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग इन पशु मेलों का आनंद लेने आते हैं। तो चलिये इस लेख में जानते हैं राजस्थान के मशहूर पशु मेलों के बारे में – 

इन पशु मेलों में सरकारों की तरफ से भी पूरी भागीदारी निभाई जाती है। जैसे इन पशु मेलों के आयोजनों में नगरपालिका और ग्राम पंचायतों की तरफ से पशुपालकों को पानी, बिजली पशु चिकित्सा और टीकाकरण की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है। सरकार की ओर से इन मेलों में समय-समय पर प्रदर्शनी और बाकी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राजस्थान में काफी पशु मेले लोक देवी देवताओं और महा पुरुषों के नाम से जुड़े हुए हैं। 

ये भी पढ़ें: स्वच्छ दूध का उत्पादन कैसे करें ?

राजस्थान में होने वाले प्रमुख पशु मेले

श्री रामदेव पशु मेला-नागौर

नागौर पशुमेला हर साल जनवरी और फरवरी महीनों में नागौर के अनूठे राजपूत शहर में आयोजित किया जाता है। नागौर जोधपुर और बीकानेर के बीच पड़ने वाला एक छोटा सा शहर है। नागौर पशुमेला राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध आकर्षणों में से एक है और दुनियाभर से हजारों पर्यटक यहां पर आते है। यहां पर 75 हजार से ज्यादा पशु लाए जाते हैं, जिन्हें खरीदने और बेचने का काम होता है।

श्री मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा-बाड़मेर

ये पशु मेला वीर योद्धा रावल मल्लिनाथ की याद में मनाया जाता है। इस मेले की शुरुआत मलीनाथ के गद्दी पर बैठने से हुई थी। दरअसल मलीनाथ के गद्दी पर बैठने के मौके पर एक विशाल समारोह आयोजित हुआ था। इस मौके पर दूर-दूर से लोग शामिल हुए थे। आयोजन खत्म होने पर लोगों मे आपस में ऊंट, घोड़े, गाय, भैंस बैल आदि का आदान प्रदान किया था। इस मेले का संचालन पशुपालन विभाग ने साल 1958 में संभाला था। ये मेला हर साल चैत्र बुदी ग्यारस से चैत्र सुदी ग्यारस तक बाड़मेर जिले के तिलवाड़ा गांव में लूनी नदी पर लगाय जाता है।

ये भी पढ़ें: जानिए कैसे करें दुधारू भैंस की पहचान

श्री बलदेव पशु मेला, मेड़ता सिटी-नागौर

ये पशु मेला मेड़ता सिटी में आयोजित किया जाता है। इस मेले में ज्यादा नागौरी नस्ल की बिक्री होती है। ये पशु मेला प्रसिद्ध किसान नेता श्री बलदेव राम मिर्धा की याद में अप्रैल 1947 से राज्य के पशुपालन विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है।

श्री वीर तेजाजी पशु मेला परबतसर नागौर

राजस्थान में ये पशु मेला लोक देवता वीर तेजाजी की याद में मनाया जाता है। पशुपालन विभाग ने इस मेले की बागडोर साल 1947 में अपने हाथ में ली थी। ये पशु मेला आमदनी के लिए प्रदेश का सबसे बड़ा मेला है। जोधपुर के महाराजा अजीत सिंह ने यहां तेजाजी का देवल बनाकर और उनकी मूर्ति स्थापित कर इस पशु मेले की शुरुआत की थी। ये मेला भी नागौरी नस्ल के लिए मशहूर है।

महाशिवरात्रि पशु मेला करौली

करौली जिले में आयोजित होने वाला ये पशु मेला काफी मशहूर है। इस पशु मेले का आयोजन हर साल फाल्गुन कृष्णा में किया जाता है। महाशिवरात्रि के पर्व पर आयोजित होने से इस पशु मेले का नाम शिवरात्रि पशु मेला पड़ गया है। इस मेले के आयोजन की शुरुआत रियासत काल में हुआ था। इस मेले में हरियाणवी नस्ल के पशुओं की बिक्री काफी ज्यादा होती है। राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के व्यापारी भी इस मेले में हिस्सा लेने आते हैं।

ये भी पढ़ें: घरेलू तरीके से भैंस का दूध कैसे बढाये ?

गोमती सागर पशु मेला-झालावाड़

झालावाड़ जिले के झालरापाटन कस्बे में ये पशु मेला हर साल आयोजित होता है। पशुपालन विभाग मई 1959 से इस पशु मेले को आयोजित कर रहा है।

श्री गोगामेड़ी पशु मेला-हनुमानगढ़

श्री गोगामेड़ी राजस्थान के पांच पीरों में से एक वीर और लोक देवता गोगा का समाधि स्थल है। ये आज हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में आता है यहां हर साल श्रावण के महीने में आयोजित होता है। इस मेले के संचालन का काम पशुपालन विभाग के द्वारा अगस्त 1959 से हो रहा है।

ये भी पढ़ें: क्या अजोला से पशुओं में दूध बढ़ा सकते है ?

श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला-भरतपुर

भरतपुर रियासत के महाराजा जसवंत सिंह की याद में इस मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में हरियाणा नस्ल के पशुओं का लेन-देन होता है। अक्टूबर 1958 से पशुपालन विभाग द्वारा इस पशु मेले को आयोजित किया जाता है। सरकार की आय के नजरिये से ये सबसे बड़ा पशु मेला है।

श्री चंद्रभागा पशु मेला-झालावाड़

झालावाड़ जिले के झालरापाटन कस्बे में ये पशु मेला हर साल कार्तिक सुदी महीने में आयोजित होता है। इस पशु मेले में मालवी नस्ल के पशुओं की भारी तादाद में खरीद होती है। पशुपालन विभाग द्वारा इस मेले का संचालन नवंबर 1958 से हो रहा है।

ये भी पढ़ें: जानिए कैसे बढ़ाएं मानसून में पशु की दूध देने की मात्रा

पुष्कर पशु मेला-अजमेर

अजमेर से 11 किलोमीटर दूर हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पुष्कर है। यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक भी आते हैं। हजारों लोग इस मेले में आते हैं।

राज्य प्रशासन भी इस मेले को विशेष महत्त्व देता है। स्थानीय प्रशासन इस मेले की व्यवस्था करता है और कला संस्कृति और पर्यटन विभाग इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयाजन करते हैं।

इस समय यहां पर पशु मेला भी आयोजित किया जाता है, जिसमें पशुओं से संबंधित अलग अलग कार्यक्रम भी किए जाते हैं, जिसमें श्रेष्ठ नस्ल के पशुओं को पुरस्कृत किया जाता है। इस पशु मेले का मुख्य आकर्षण होता है।

बहरोड़ पशु मेला

ये मेला राजस्थान के बहरोड़ (अलवर) में आयोजित किया जाता है। और इस मेले में सबसे ज्यादा खरीद मुर्रा भैंस की होती है।

सेवडिया पशु मेला

सेवडिया पशु मेला रानीवाड़ा, जालौर में आयोजित किया जाता है। ये क्षेत्र राज्य के सबसे बड़ी दुग्ध डेयरी के रूप में मशहूर है। ये मेला बडगांव रियासत के जागीरदार ठाकुर मालमसिंह की कोशिशों के बाद साल 1955 में शुरु हुआ था।  

ये भी पढ़ें: जानें क्या है भैंस और गाय का दूध बढ़ाने का मंत्र?

… और पढ़ें arrow