जानें लाल सिंधी गाय के बारे में सारी जानकारी!

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पशुपालक अक्सर ऐसी नस्ल की गाय या भैंस की जानकारी हासिल करना चाहते हैं। जिसके जरिए वह अधिक से अधिक मुनाफा कमा सके। ऐसे पशुपालकों के लिए लाल सिंधी गाय काफी फायदेमंद हो सकती है। लाल सिंधी गाय को एक अधिक दूध देने वाली गाय के तौर पर भी जाना जाता है। यह गाय सालाना करीब 2000 से 3000 लीटर तक दूध दे सकती है। साथ ही लाल सिंधी गाय को पालने का खर्च भी कम ही रहता है।

शुरुआती समय में यह गाय केवल पाकिस्तान में पाई जाती थी। लेकिन आज के समय में यह भारत के अलग – अलग राज्यों समेत श्रीलंका और बांग्लादेश में भी पाई जाती है। आज हम अपने इस लेख में लाल सिंधी गाय की पहचान से लेकर इसे ऑनलाइन बेचने और खरीदने का तरीका भी बताएंगे। 

लाल सिंधी गाय की पहचान कैसे करें 


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लाल सिंधी गाय का नाम इसके लाल रंग के कारण पड़ा है। वहीं इसके सिंधी होने की पीछे की वजह पाकिस्तान का सिंध प्रांत है। दरअसल यह सबसे पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ही पाई जाती थी। बता दें कि कुछ लोग लाल सिंधी गाय को  कराची और माही के नाम से भी जानते हैं। लाल सिंधी गाय एक मध्यम ऊंचाई वाली गाय है, जिसका सिर चौड़ा, सींग छोटे – मोटे और घुमावदार होते हैं। इस गाय की पूंछ लंबी और टांगे छोटी होती है। 

वहीं इसका रंग हल्का लाल होता है और इसकी त्वचा काफी ढीली होती है। लाल सिंधी गाय की नस्ल सभी तरह के मौसम में रह सकती है। इस लाल सिंधी गाय का वजन करीब 350 किलोग्राम तक हो सकता है। यह गाय अमूमन हल्के लाल रंग की ही होती है। लेकिन यह हल्के पीले लाल और गहरे लाल रंग में भी पाई जाती हैं।  पशुपालकों के लिए यह गाय रखना इसलिए भी अधिक फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि इसे बीमारियों का खतरा बेहद कम होता है। 

लाल सिंधी गाय के दूध की जानकारी

यह लाल सिंधी गाय सालाना 2000 से 3000 लीटर तक दूध दे सकती हैं। लाल सिंधी गाय के दूध में 4 – 5 प्रतिशत फैट पाया जाता है। यूरोपीय देशों में भी दूध के उत्पादन को बढ़ाने के लिए इन्हीं गायों का उपयोग किया जाता है। यह साल में एक बार गर्भधारण करने के बाद 300 दिन तक दूध दे सकती है। वहीं गाय का ड्राई पीरियड करीब 180 दिन का होता है। वहीं बच्चे देने के बाद यह करीब 380 दिन का हो हो जाता है।  

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लाल सिंधी गाय की देखरेख कैसे करें

लाल सिंधी गाय की देखरेख सही प्रकार से करने के लिए इन्हें समय – समय पर सही चारा देना होता है। साथ ही इन्हें रखने के लिए आपको एक स्टील का शेड भी लगवाना जरूरी है। ताकि पशु धूप, बारिश और अन्य मौसम के प्रकोप से बच सकें। गाय को चारे के रूप में बरसीम की सूखी घास, लूर्सन की सूखी घास, जई की सूखी घास, पराली, मक्की के टिंडे, दूर्वा की सूखी घास दे सकते हैं। इसके अलावा अनाज, रोटी, चावल, तुड़ा आदि भी इस गाय को दिया जा सकता है। गाय को आवश्यकता के अनुसार ही चारा देना होगा। वरना उन्हें कब्ज की समस्या होने लगती है। 

लाल सिंधी गाय को लगवाएं यह टीके

यूं तो इस गाय को रोग लगने की संभावना थोड़ी कम होती है। लेकिन एक भारी नुकसान से बचने के लिए बछड़े या बछड़ी के पैदा होने के 6 महीने बाद, ब्रुसेला का टीका लगवाएं। इसके अलावा खुर का टीक लगवाएं और गलघोटू का टीका लगवाएं। टीके कब और कितने अंतराल में लगवाने हैं। इसकी सही जानकारी के लिए डॉक्टर से समय – समय पर बात करते रहें। 

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लाल सिंधी गाय को होने वाली बीमारियां और इलाज 

गायों को कई तरह की बीमारियां और समस्याएं पैदा हो सकती है। ऐसे में बीमारियों का समय पर पता लगना और उसके लक्षण की पहचान होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ बीमारियों के बारे में, जो आपकी गाय के दूध की उत्पादकता को प्रभावित कर सकती है। 

थनैला रोग और इलाज

यह रोग अक्सर उन गाय और भैंस को होता है जो अधिक दूध देती है। इस रोग के अंदर पशु के थनों में सूजन आ जाती है और दूध से पस एवं खून आने लगता है। इसके अलावा थनों में भयंकर दर्द होने लगता है। जिसके कारण पशु खाना पीना भी छोड़ देता है। यह कई तरह के फंगस, विषाणु और जीवाणु की वजह से हो जाता है। 

थनैला का इलाजथनैला रोग होने पर अगर शुरुआती समय में ही इसका उपचार करा दिया जाए, तो पशु ठीक हो जाता है। वरना स्थिति बिगड़ने पर थनों को कटवाना पड़ता है। अपनी लाल सिंधी गाय को बचाए रखने के लिए गाय के थनों पर नजर बनाकर रखें और समय – समय पर डॉक्टर से दूध की जांच कराएं। 

तिल्ली रोग और उसका इलाज 

लाल सिंधी गाय को होने वाली यह बीमारी बेहद खतरनाक होती है। यह खराब खुराक और गंदे पानी को पीने से हो सकती है। यह बीमारी आमतौर पर अचानक ही होती है। इस दौरान पशु के शरीर के कई हिस्सों से लुक जैसा खून निकलने लगता है। इसके अलावा यह रोग होने पर गाय को तेज बुखार भी होने लगता है और शरीर अकड़ जाता है। साथ ही सांस लेने में दिक्कत होती है और दौरे भी पड़ने लगते हैं। 

इलाज – यूं तो इस बीमारी का कोई असरदार इलाज मौजूद नहीं है। लेकिन गाय को इससे बचाए रखने के लिए, स्वस्थ खुराक और पानी देना चाहिए। वहीं संक्रमित पशु की मौत हो जाने के बाद उसे एक गहरे गड्ढे में दफनाना चाहिए और उसके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं को भी जला देना चाहिए। 

एनाप्लाजमोसिस और इलाज 

यह एक बेहद संक्रामक रोग है जो एनाप्लाज़मा मार्जिनल की वजह से होती है। इस रोग के दौरान गाय के नाक से एक गाढ़ा तरल पदार्थ निकलने लगता है। साथ ही इस रोग के होने पर पशु के शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। इसके अलावा शरीर में खून की कमी हो जाती है और मुंह से लार गिरती हुई दिखाई दे सकती है। 

इलाज – इस बीमारी के होने पर लक्षणों का ध्यान रखें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा आप चाहें तो डॉक्टर की निगरानी में अकार्डीकल दवा दें। 

ब्लैक क्वार्टर और इलाज 

ब्लैक क्वार्टर नामक जीवाणु पशुधन पर बहुत बुरा असर डालता है। आमतौर पर यह बारिश के दिनों में मिट्टी के जरिए पैदा होता है। इस जीवाणु से सबसे ज्यादा खतरा उन पशुओं को होता है जिनकी आयु 6 से 24 महीने के बीच है। इस रोग में गाय को तेज बुखार तो होता ही है। साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत आती है। 

ब्लैक क्वार्टर का इलाज – अगर समय पर रोग का पता चल जाए तो गाय को पेनसिलिन टीका प्रभावित स्थान पर दिया जा सकता है। इसके अलावा यह रोग होने पर पशु की ड्रेसिंग करने के लिए डॉक्टर से सहायता जरूर लें। 

ये भी पढ़ें: जानिए गाय को गर्भावस्था में ड्राई करना क्यों है जरूरी?

गाय को होने वाली अन्य आम बीमारियां और इलाज 

  1. लाल सिंधी गाय में बदहजमी की समस्या सबसे अधिक देखने को मिलती है। इससे अपनी गाय को बचाए रखने के लिए वह चारा दें जो उनके लिए उपयुक्त हो। गाय को सदा ऐसा चारा दें जो आसानी से पच सके। अगर आप ऐसा करते हैं तो गाय को बदहजमी नहीं होगी। 
  2. गाय को कब्ज की समस्या होना भी आम है। इससे राहत दिलाने के लिए आप अलसी का 500 एमएल तेल चारे में मिलाएं और गाय को अधिक पानी पिलाएं। 
  3. अगर आपकी लाल सिंधी गाय मरोड़, दस्त और मोक से पीड़ित है तो आप उन्हें, डॉक्टर की राय पर दवा या टीका दें। साथ ही अधिक ग्लूकोज वाला पानी भी दें। अगर गोबर में कीड़े दिखाई दें या मरोड़ की समस्या दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लेकर गाय को एंटीबायोटिक दवा दें। 
  4. गाय को ब्रुसेला रोग न हो इसके लिए आप ब्रुसेला S-19 टीका समय पर जरूर लगवाएं। टीका कब लगना चाहिए इसकी सही सलाह डॉक्टर से लें। 
  5. गाय को सर्रा रोग होने पर कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे बार – बार बुखार होना,  अधिक पेशाब आना, भूख कम लगना, मुंह से लार गिरना और आंख नाक से पानी गिरना आदि। गाय पर इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

ये भी पढ़ें: गाय, भेंस एवं पशु के लिए सबसे उत्तम चारा जो दूध बढ़ाये ? | Best Cattle Fodder for Cow & Buffalo

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

आप गाय खरीदने बेचने या उनसे जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए  Animall App को डाउनलोड करें।  ऐप डाउनलोड करने के लिए  Click Here

          

  1. अब आप इसमें मोबाइल नंबर डालें और अपनी जगह का चुनाव करें।
  2. अब भाषा चुनें।
  3. इसके बाद यहां पर आपके सामने पशु खरीदने या बेचने का विकल्प आएगा।
  4. अगर आपको गाय लेनी है तो आप गाय के विकल्प का चुनाव करें। सहायता के लिए नीचे दिए गए चित्र को देखें।
  5. अब आपके सामने उन सभी गायों की सूची आ जाएगी जो बेचने के लिए ऐप पर डाली गई हैं।
  6. इसके बाद आपको गाय के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प सामने दिखाई देंगे। इन्हें चुनने के बाद आपके लिए एक सही सूची सामने आ जाएगी। 
  7. गाय के चुनाव के बाद आप उस व्यक्ति से सीधा बात कर सकते हैं, जो गाय का मालिक है।
  8. इस सब के बाद आप गाय बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव कर सकते हैं।

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. अगर आप गाय बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आपको ऐप पर जहां क्लिक करना है। इसे जानने के लिए चित्र से सहायता ले सकते हैं।
  2. अब आपको पशु से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसमें गाय की ब्यात,  कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो और नस्ल की जानकारी अपलोड कर दें।
  3. इस तरह आपकी गाय Animall ऐप पर लिस्ट हो जाएगी। अब गाय को जो भी खरीदने की इच्छा रखेगा। वह आपसे फोन के जरिए बात कर लेगा।   ये भी पढ़ें: 12 महीने होने वाला सस्ता चारा|Hydroponic Green Fodder for Dairy
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जानें सुरती भैंस के बारे में सारी जानकारी!

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आज के समय में किसान पशुपालन के जरिये अच्छी कमाई कर पा रहे हैं। भारत में काफी बड़े पैमाने पर पशुपालन का काम किया जा रहा है। भारत पशुपालन के क्षेत्र में पूरी दुनिया में दुसरे स्थान पर आता है। वहीं जब बात दूध उत्पादन और दुधारू पशुओं के पालन की होती है, तो उसमें भैंस को काफी बेहतर माना जाता है। आज हम आपको इस लेख में भैंस की विशेष नस्ल के बारे में बताएंगे, जो काफी ज्यादा मात्रा में दूध का उत्पादन करती हैं। इस नस्ल का नाम है सूरती

सूरती नस्ल आमतौर पर गुजरात में पाई जाती है। ये भूरे और काले रंग की होती है। वहीं अगर वजन की बात करें तो सुरती भैंस आमतौर पर लगभग 400 किलोग्राम की होती है। इस नस्ल के सबसे अच्छे पशु गुजरात के आणंद, बड़ौदा और कैरा में पाए जाते हैं। सुरती को चारोटारी, दक्कनी, गुजराती, नडियादी और तालाबड़ा के नाम से भी जाना जाता है।

सुरती भैंस की पहचान

सुरती के कोट का रंग रस्टी ब्राउन से सिल्वर-ग्रे तक होता है। और इसकी त्वचा काली या भूरी होती है। इसके शरीर पर सफेद धब्बे होते हैं। ये धब्बे माथे, पैर और पूंछ पर भी होते हैं। इसका शरीर अच्छी तरह से आकार और मध्यम आकार का होता है। सुरती का सिर लंबा होता है। इसके सींग मध्यम आकार के होते हैं और नुकीले होते हैं। सुरती की पूंछ काफी लंबी और पतली होती है। इसके कान ढंके हुए और सफेद बालों से घिरे हुए होते हैं। नस्ल की खासियत 2 सफेद कॉलर हैं, एक गोल जबड़े और दूसरा ब्रिस्केट पर। इसका वजन 400 किलोग्राम के आसपास होता है।

सुरती भैंस के दूध की जानकारी

आमतौर पर सुरती भैंस एक ब्यात में 900 से 1300 लीटर तक का दूध देती है। इसकी खासियत ये है कि सुरती बाकी भैंसों की तुलना में कम फीड लेती है। अगर बात करें इसके दूध में मौजूद फैट की तो वो 8 फीसदी से 12 फीसदी तक होता है। इसका दूध काफी अच्छी गुणवत्ता का होता है।

सुरती भैंस के स्तनपान की अवधि 290 दिनों तक की होती है। सुरती भैंस की पहली ब्यात लगभग 40 महीने से 55 महीनों तक होती है। 

सुरती भैंस की देखरेख कैसे करें

सुरती भैंस को चारे में क्या दें

इस नसल की भैंसों को जरूरत के अनुसार ही खुराक दें। वहीं फलीदार चारे को खिलाने से पहले उनमें तूड़ी या अन्य चारा मिला लें। ताकि अफारा या बदहजमी की शिकायत ना हो। 

एक सुरती भैंस को आवश्यक खुराकी तत्व में उर्जा, प्रोटीन, कैलशियम, फासफोरस, विटामिन ए की जरूरत होती है। उसे दाने के रूप में मक्की, गेहूं, जौं, जई, बाजरा दे सकते हैं। इसके अलावा गेहूं का चोकर, चावलों की पॉलिश, बिना तेल के चावलों की पॉलिश दे सकते हैं।

शेड की आवश्यकता:

भैंस के बेहतर प्रदर्शन के लिए अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। भैंस को भारी वर्षा, तेज धूप, बर्फबारी, ठंड से बचाने के लिए शेड जरूरी है। ध्यान रखें की शेड में साफ हवा और पानी रहे। इसके अलावा आसानी से चारा खाने के लिए जगह खुली होनी चाहिये। 

गर्भवती जानवरों की देखभाल:

अच्छे प्रबंधन के अभ्यास से अच्छे बछड़े पैदा होंगे और दूध का उत्पादन भी बेहतर होगा। इसके अलावा गर्भवती भैंस को 1 किलो अधिक चारा दें क्योंकि वो भी शारीरिक रूप से बढ़ रही हैं।

कटड़ों की देखभाल और प्रबंधन:

जन्म के बाद नाक या मुंह से कफ को तुरंत हटा दें। अगर बछड़ा सांस नहीं ले पा रहा है, तो उसे बनावटी सांस दे।

ये भी पढ़ें: जानिए गाय को गर्भावस्था में ड्राई करना क्यों है जरूरी?

सुरती भैंस को होने वाली आम बीमारियां और उनका इलाज

बदहजमी: भैंस को बदहजमी होने की स्थिति बेहद आम बात होती है, लेकिन इसमें ध्यान देना जरूरी होता है। जब भी आपकी बैंस को बदहजमी हो जाए तो उसे जल्दी पचने वाली खुराक दें।

भैंसों का गल-घोटू रोग

गल-घोटू रोग भैंसों में होने वाली एक जानलेवा बीमारी है, जो ज्यादातर 6 महीने से लेकर 2 साल के पशु को होती है। गल घोटू रोग का कारण पासचुरेला मलटूसिडा नामक जीवाणु होता है, जो पशु के टांसिल में होता है। इसके अलावा ज्यादा काम का बोझ, खराब पोषण, गर्मी और अन्य बीमारियां जैसे कि खुरपका-मुंहपका रोग होते हैं। ज्यादातर ये बीमारी बारिश के मौसम में होती है।

गल-घोटू के लक्षण

  •   बुखार होना
  •   मुंह से लार टपकना
  •   आंख और नाक से पानी निकलना
  •   भूख न लगना
  •   पेट दर्द होना और दस्त होना आदि

रोकथाम

  •   गर्मियों के मौसम में पशुओं को इक्ट्ठे और तंग जगह पर ना बांधे।
  •   बीमार पशुओं को बाकी पशुओं से अलग रखें।
  •   मॉनसून आने से पहले ही टीकाकरण करवाएं। पशुओं के पहले टीका 6 महीने की उम्र में और फिर हर साल जरूरी करवाएं।
  •   लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

तिल्ली का रोग (एंथ्रैक्स)

इस बीमारी में सुरती भैंस को काफी तेज बुखार होता है। ये बीमारी आमतौर पर कीटाणु और दूषित पानी या फिर खराब खुराक की वजह से होती है। ये बीमारी अचानक होती है या कुछ समय भी ले सकती है।

लक्षण:

  • इसमें जानवर का शरीर अकड़ जाता है
  • चारों टांगे बाहर को खींची जाती हैं।

रोकथाम: इसका कोई असरदायक इलाज नहीं है। हर साल इसके बचाव के लिए टीके लगवाये जाने चाहिए।

Animall पर कैसे खरीदें भैंस

आप अगर अपने घर बैठे ही भैंस खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अब मार्केट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे क्योंकि ये तुरंत Animall की ऐप से आप कर सकते हैं। सबसे पहले आप प्ले स्टोर से Animall ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। अपने एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में ये ऐप डाउनलोड करने के लिए आप प्ले स्टोर पर जाएं, या नीचे दिए गए विकल्प  पर क्लिक करें। Click Here

       

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आप अपना मोबाइल नंबर इसमें डालें और फिर अपनी जगह का चुनाव करें।
  2. अब आप अपनी मर्जी के मुताबिक ऐप की भाषा को चुन सकते हैं।
  3. इसके बाद आप ऐप को पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं। यहां पर आपके सामने पशु खरीदने या बेचने का विकल्प आ जाएगा।
  4. अगर आपको भैंस खरीदनी है तो आपको भैंस के विकल्प का चुनाव करना होगा।
  5. जो भी भैंस बिकाऊ होगी, यहां पर आपको उनकी पूरी सूची दिख जाएगी।
  6. इसके बाद आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प दिखाई देंगे। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पशु की सूची हासिल कर सकते हैं।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी भैंस का चुनाव कर सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  8. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं और भैंस से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें: जानिए गाय को गर्भावस्था में ड्राई करना क्यों है जरूरी?

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. अगर आप भैंस को बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। वहां बीचों बीच आपको पशु बेचने का विकल्प दिखाई दे जाएगा।
  2. यहां पर क्लिक करने के बाद आपको पशु से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी। जैसे की भैंस की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, भैंस की फोटो अपलोड करना।
  3. इसके बाद आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो जाता है, और जो भी खरीदार आपका पशु लेने में रुचि लेगा, वो आपसे सीधा संपर्क कर सकेगा।

Animall ऐप पर जहां आप पशु आसानी से बेच या खरीद सकते हैं तो वहीं पर आप पशु से जुड़ी सारी जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। अगर आपका पशु बीमार भी हो जाता है, तो उसके लिए हमारे डॉक्टर आपकी पूरी मदद करेंगे।

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यहां पढ़ें गिर गाय से जुड़ी सारी जानकारी!

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गिर गाय के बारे में

गिर गाय मूल रूप से गुजरात के कठियावाड़ इलाके की नस्ल है। धीरे धीरे देश के कई राज्यों तक पहुंची और अलग अलग नामों से जानी गई। भारत की सबसे पुरानी गाय की नस्ल की सूची में गिर गाय की पहचान होती है।

कितना दूध देती है है गिर गाय?

अगर अच्छे से गाय की देख रेख हुई, बढ़िया पशु आहार सही समय पर मिलता रहा तो एक गिर गाय दिन में 20 से 25 लीटर तक दूध निकाल देगी। वही एक ब्यात की बात करें तो गिर गाय 1600 से 1800 लीटर आसानी से निकाल देगी। बहुत से किसान गिर गाय के फैट के बारे में जानना चाहते हैं। एक गिर गाय के दूध से 4.5 से 5 प्रतिशत तक फैट देखने को मिलता है। जिसके कारण इसका दूध भी डिमांड में रहता है।

इसमे सबसे ख़ास बात गिर गाय का साल के पूरे 300 दिनों तक दूध देने की है। बहुत ही कम समय के लिए गाय रुकती है। इससे किसानों को फ़ायदा होता है, साल के कई महीने दूध निकाल सकते है। 

अपने आस पास की सारी  दुधारू गिर गाय खरीदने के लिए, क्लिक करें

गिर गाय कहाँ से खरीदें ?

गिर गाय खरीद  कर अपने दूध के बिज़नेस से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं। गाय भैंस वाला Animall ऐप पर आसानी से मनचाहा गिर गाय ख़रीद सकते हैं। नीचे दिए गाय लिंक पर क्लिक कर आसपास की दुधारू गिर गाय कुछ ही मिनटों में खोज सकते हैं। आपके से ढेर सारे किसान हर घंटे यहां से हज़ारों पशुओं की ख़रीद करते हैं।

गिर गाय की पहचान ?

80% से अधिक गिर गायें लाल रंग की होती हैं। लाल रंग के गिर गायों पर उजला धब्बा देखने को मिलता है, वहीं कुछ इलाकों में उजले रंग के गिर गायों पर लाल रंग का धब्बा भी देखने को मिलता है।

देश में सबसे अधिक गिर गायों की संख्या गुजरात में है। दूसरे स्थान पर राजस्थान और तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र हैं। इनमें से किसी भी राज्यों में दुधारू देसी नस्ल की गिर गाय खरीदने के लिए Animall ऐप अपने फ़ोन में डालेंगिर गायों को उनकी सींगें अलग पहचान दिलाती हैं। इनकी सीगें घुमावदार होती हैं। ध्यान से देखने पर सींगें अर्ध चांद जैसी आकृति जैसी दिखती हैं।

अपनी गिर गाय बेचनी है?

ऐप पर गिर गाय डालकर घर बैठ बैठ पसंदीदा खरीदार खोजें.

आपने अपने गिर गाय बेचने का मन बनाया है। बिना किसी पशु मंडी ले जाए घर बैठ बैठ अपना गाय ऐप पर डाले और अच्छी कीमत पर गिर बेच डालें।

अपना गिर गाय बेचने के लिए क्या करना होगा?

  1. अपने फोन में गाय भैंस वाला Animall ऐप डालें।
  2. अपने मोबाइल नंबर दर्ज़ कर ऐप में रजिस्टर करें।
  3. अपने गिर गाय का फ़ोटो लेकर ऐप पर डालें।
  4. फोटो के साथ साथ पशु के ब्यात, बच्चे और कीमत की जानकारी Animall ऐप पर दर्ज करें
  5. अब आपकी गिर गाय लाइव हो गई है यानी आसपास के सारे खरीदार आपके गिर गाय को देख  कर खरीदने का मन बना रहे हैं।

गिर गाय स्वस्थ्य रखने के लिए क्या खिलाएं?

पशु के दूध के लिए सबसे जरुरी बात उसकी सेहत है। ठीक उसी तरह इन छोटी छोटी बातों को ध्यान में रखकर अपने गिर गाय से अधिक दूध उत्पादन लें।

गिर गाय के खाने में हरा और सुखा दोनों प्रकार के चारा दें। बढ़िया दूध उत्पादन के लिए हरा चारा में बरसीम और जौ खिलाएं। 

गिर गाय के खुराक में गेहूं ,मक्का और बाजरा जैसे अनाज की मात्रा को बढ़ा दें। इसके साथ खली का उपयोग भी इन्ही अनाज के साथ करें। मिनरल मिक्सचर के रूप में चुरी-वाट देकर भी गिर गाय का दूध बढ़ाया जाता है।

ये देसी नुस्खा अपनाकर गिर गाय का दूध बढ़ा सकते हैं।

  • 100 किलो चूरी वाट के लिए 
  • मक्का एवं गेहूं की चापड़ -40 किलो
  • सरसों खल और विनोला -30 किलो
  • सोयाबीन -15 किलो
  • सगा -9.5 किलो
  • मोलासस -5 किलो
  • नमक -1 किलो
  • सोडा -500 ग्राम

इन सब को मिला कर अपने गिर गाय को खिलाएं

गिर गाय खरीद बिक्री के लिए सबसे सरल तरीका गाय- भैंस  वाला ऐप Animall मुहैया कराता है। अपने लिए दुधारू गिर गाय खरीदने के  लिए 95 लाख से अधिक डेयरी किसानों की पसंद Animall ऐप को फ़ोन में डाले। 

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Murrah Buffalo: Identification, Buying and Selling

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मुर्रा भैंस

हरियाणा में पाये जाने वाले इस  दुधारू देसी भैंस के बारे में जानिए। 

मूलतः हरियाणा में पायी जानी वाली मुर्रा नस्ल भैंस की सर्वश्रेष्ठ प्रजातियों में से एक है 

मुर्रा।  साल भर में 10 महीने तक आसानी से दूध देने के कारण  डेयरी किसान इसे पसंद करते हैं ।  बल्कि हरियाणा में एक कहावत भी काफी प्रचलित है “ जिसके घर मुर्रा उसका ऊँचा तुर्रा “।  इसी कहावत से इस भैंस के लोकप्रियता का पता चलता है। और पढ़ें

मुर्रा भैंस की पहचान 

इस नस्ल की भैंस का रंग पूरा काला होता हैमुर्रा भैंस का प्रजनन क्षेत्र गुरुग्राम, हिसार,जींद और रोहतक जिले हैंनर मुर्रा भैंसों का औसत  वजन 567 किलो का होता हैवहीँ मादा मुर्रा भैंसों का औसत वजन 516 किलो होता हैइस नस्ल के भैंसों की दुग्ध काल उत्पादकता 1003 से 2057 किलोग्राम है इनका ब्यात अंतराल 423 से 597 दिनों का है इनके दूध का औसत फैट 7.3% है

मुर्रा भैंसों में A.I की पूरी प्रक्रिया 

मुर्रा भैंसों में ये लक्षण दिखे तो A.I कराएं .

अगर आप अपने भैंस  को खुले में अन्य भैंस  के साथ रखते हैं तो हीट में आने का पता चल पाएगा। वो दूसरे पशुओं पर चढ़ने की कोशिश करेगा।  जब भैंस  एक दूसरे पर चढ़ने लगे तो उसके 24 घण्टे बाद  कृत्रिम गर्भाधान करवाना चाहिए।   

यदि भैंस दूध देने के समय में  दूध देने से कतराती है तो समझे की आपकी मुर्रा भैंस  साइलेंट हीट में आ गयी  है।  अगर आपकी मुर्रा भैंस सफ़ेद रंग का गाढ़ा तांता दे रही है तो ये हीट में आने के लक्षण हैं।  जब मुर्रा में  भैंस पारदर्शी (आर पार दिखने वाले)तातें दे रही हो तो इसका मतलब है कि वो हीट में आ चुकी है। बार बार पेशाब करना, नाक को उपर नीचे सूँघते रहना ये सभी आपके भैंस के हीट में आने के लक्षण हैं।

हीट में आने के दौरान मादा मुर्रा  भैंस नर भैंस की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं।

गाय भैंस के हीट को तीन भागों में बाँटा गया है ये हैं प्रारम्भिक अवस्था, मध्यव्स्था और  अन्तिम अवस्था भैंस  सामान्य तौर पर हर 18 से 21 दिन के बाद हीट में आते हैं भेंसों में ब्याने के लगभग डेढ़ माह के बाद यह चक्र दोबारा शुरू हो जाता है

अगर आपकी मुर्रा भैंस ये लक्षण दिखाती हैं तो समझ लें कि वो हीट में हैं। इसे बाद आप नजदीकी पशु चिकित्सक से मिले और प्रमाणित कंपनी से A.I  बिना पशु जानकार के A.I  कराने पर गर्भ न ठहरने का खतरा बना रहता है। और पढ़ें 

मुर्रा भैंस का दूध 

दुधारू भैंसों की सूची में पहला स्थान मुर्रा भैंसों का आता है।  अच्छा  चारा और बढ़िया देखरेख करने पर मुर्रा प्रतिदिन 15 से 20 लीटर दूध  निकाल देती है। इसके दूध में 7 प्रतिशत तक फैट देखने को मिलता है।  इन्ही गुणों के कारण मुर्रा भैंस डिमांड में रहती हैं। 

Animall से ख़रीदे मुर्रा भैंस .

Animall ऐप से आसानी से  दुधारू मुर्रा भैंस खरीद सकते हैं ।  सबसे पहले अपने मोबाइल फ़ोन में गाय-भैंस वाला Animall ऐप डाउनलोड करें। इसके अपना फ़ोन नंबर डाल कर भैंस खरीदने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाये। और पढ़ें

इन तीन आसान तरीकों से ख़रीदे नयी मुर्रा भैंस।

  1. अपने गाँव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।पिनकोड डालने के बाद, भैंस पर दबाएँ ।pin
  2. यहाँ पहले स्थान पर मुर्रा भैंस दिखाई देगा।इसी भैंस पर क्लिक करें।bhes
  3. यहाँ आप नस्ल के साथ साथ अपने मन के अनुसार दूध क्षमता और ब्यात का का चुनाव भी कर सकते है।Step3

ये लीजिए अपने आसपास के सारे दुधारू मुर्रा भैंस दिखने लगी हैं। इनमे से अपने पसंद का पशु चुनकर ख़रीदार से बात कर घर ले जायें नया पशुधन।

मुर्रा भैंस बेचनी ऐसे Animall ऐप पर अपना पशु बेचें।

इन सरल तरीकों को अपनाकर मुर्रा भैंस Animall ऐप पर बेचें ऐसे Animall ऐप से तुरंत  मुर्रा भैंस बेचें । ऊपर लिखे गये तरीके से Animall ऐप में खुद को रजिस्टर कर लें ।  इसके बाद पशु बेचें पर दबाएँ । इस बटन पर दबाते ही आपको आप अपने मुर्रा भैंस की दूध क्षमता, ब्यात और कीमत लिख सकते हैं।   अपने मुर्रा भैंस की इन सभी जानकारियाँ डालने के बाद आपका पशु ऐप पर दर्ज हो जायेगा ।   आपकी मुर्रा ऐप पर दर्ज होने के बाद ख़रीदार आपको भैंस के लिए कॉल करेंगे। और पढ़ें

मुर्रा भैंस में होने वाली कुछ प्रमुख बीमारियाँ .

  • सर्रा रोग 

सर्रा बीमारी क्या है?

यह एक परजीवी से होने वाला रोग है। ट्रिपैनोसोमा  ईवासाई नामक सूक्ष्म परजीवी से ये बीमारी फैलता है।

इस बीमारी के फैलने से भैंस की उत्पादन क्षमता में भारी कमी आती है। इस बीमारी से तुरंत भैंसों  की मृत्यु हो जाती है जिससे पशुपालकों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। सबसे पहले साल 1885 में इस बीमारी को देखा गया था।

एक भैंस से दूसरे में सर्रा बीमारी कैसे फैलता है? 

मान लीजिए अगर कोई भैंस  सर्रा बीमारी से ग्रसित है अगर मक्खी उसका खून चूसकर स्वस्थ भैंस  को काट लेगा तो उसे ये बीमारी फेल जाएगी। विज्ञान में सर्रा रोग के लिए जिम्मेदार मक्खी को टेबनेस मक्खी  कहते हैं।

भारत में पशुओं को काटने वाले मक्खी को लोग डांस मक्खी के नाम से जानते हैं।

मुर्रा भैंस में सर्रा रोग के क्या लक्षण हैं ? 

  • रुक रुक कर बुखार आना।
  • बार बार पेशाब करना।
  • भैंस गोल गोल चक्कर काटने लगते हैं।
  • भूख कम लगना।
  • मुंह से लार गिरना।
  • आंख और नाक से पानी गिरना।

मुर्रा भैंसों  में सर्रा रोग के लक्षण को ऐसे पहचाने?

दुधारू मुर्रा भैंसों का  का दूध कम हो जाता है । मुर्रा भैंस धीरे धीरे कमज़ोर होते चले जाते हैं। कई बार भैंस का पिछला भाग लकवाग्रस्त हो जाता है। कई पशुओं के आंख में सफेदी आने लगता है। पशुओं के निचले भाग में सूजन आने लगता है।

  • मुर्रा भैस में होने वाले  गला घोटूं रोग के बारे में जान लीजिये.

एच एस यानि गलाघोंटू रोग क्या है?

बैक्टीरिया को जरिए पशुओं के स्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाला बीमारी को एच एस रोग कहा जाता है।

आमतौर गाय भैंस में ये बीमारी देखने को मिलती है। बरसात के मौसम में ये बीमारी अधिक देखी जाती है। सड़ा हुआ और दूषित पशु चारे खाने से इस बीमारी के कारण मुर्रा भैंस बीमार हो जाती हैं।

अगर ये लक्षण दिखे तो समझ जाएं मुर्रा भैंस  को गलाघोंटू रोग है।

  • गर्दन और मुंह में सूजन। 
  • तेज बुखार।
  • मुंह से लार टपकना।
  • पशु चारा खाना बंद कर देगा।
  • सांस लेने में दिक्कत होगी।
  • जीभ बाहर निकाल कर सांस लेगा।
  • घर्र घर्र की आवाज करेगा।

अगर भैंस  को  गलाघोंटू रोग है तो ये न करें।

मुर्रा भैंस को बरसाती घास न खिलाएं। तालाब और खुले स्थान पर जमा पानी न पिलाएं। पशु के रहने के स्थान को साफ रखें। एच एस रोग से ग्रसित पशु को बाकियों से अलग रखें।

गला घोटूं रोग  यानि एच एस  रोग का कौन सा टीका मुर्रा भैंसों  को कब लगाना चाहिये?

गला  घोंटू  से भैंसों  को बचाने के लिए हर साल टीका लगवाया जाता है. गला घोंटू  रोग के लिए  रक्षा ट्राई वैक नामक टीके का उपयोग होता है . यह टीका तीन से पांच 5 एमएल चमड़ी के नीचे लगाया जाता है. छह महीने से अधिक उम्र के मवेशियों को पशु पालन विभाग मुफ़्त में ये टीका लगाती है.  लेकिन अगर आप इसे निजी दवा दुकान से खरीद रहें है तो इसकी कीमत करीब तीन सौ रुपय के पास आएगी.

नए ख़रीदे गए मुर्रा भैंस के ऐसे देखभाल करें.

नए खरीदे गए मुर्रा भैंस  को कम से कम 3 सफ्ताह के लिए बाकी पशुओं से अलग रखना चाहिए.  खरीदे गए मुर्रा भैंस का दूध  बाकी मवेशियों से अलग निकालें. इसी दौरान अपने मुर्रा भैंस  में ब्रुसेला और टीबी जैसी बिमारियों की जांच करा,जरूरी टीके लगवाएं. नए खरीदे गये मुर्रा भैंस  को कीड़े की दवाई भी दें. जहाँ पशुओं को रखा है वहां साफ सफाई करते रहें.  इससे संक्रमण फैलने का खतरा नहीं रहता है. और पढ़ें

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 देसी गायों की जानकारी

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देसी नस्ल के गायों की खूबी

देसी गाय प्राकृतिक गुणों से भरपूर है। आदि काल से देसी गायें भारत की संस्कृति का हिस्सा रही हैं। हर घर में इन्हे इंसानों जैसा मान सम्मान मिलता रहा है। पशु गणना के अनुसार पूरे भारत में 14 करोड़ से अधिक गायें हैं। इसमें गिर, राठी थारपारकर, साहीवाल, कांकरेज, हरियाणा आदि देसी नस्लें शामिल हैं।

आपको ये सारी नस्ल की गायें खरीदनी है तो Animall ऐप अपने फोन में डालें। यहां आपके आसपास के सारे पशु मिल जाएंगे। देसी नस्ल की गायें भारतीय मौसम के अनुकूल आराम से सकती है। आसान शब्दों में कम लागत में अधिक मुनाफा डेयरी किसान इन गायों के जरिए कमा सकते हैं। पशु आहार और रख रखाव के लिए किफायती दाम पर इन नस्लों का पालन किया जा सकता है। ये देसी नस्ल की गायें प्रति ब्यात 1500 से 3000 लीटर तक दूध देती हैं। शुरूआत में एक दो गाय के साथ भी डेयरी किसान दूध बेच कर घर की आमदनी बढ़ा सकते हैं। धीरे धीरे गायों की संख्या बढ़ाकर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं।

संकर नस्ल की गायों की खूबी

संकर नस्ल की गायों को दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से भारत लाया गया। यूरोप और अमेरिका से ये भारत आएं। जर्सी और एच. एफ जैसे नस्ल इसमें शामिल हैं। संकर नस्ल की गायें प्रतिदिन 8 से 25 लीटर के बीच दूध देती हैं। संकर नस्ल में एच. एफ गाय प्रति ब्यात 7200 से 9200 किलोग्राम के बीच दूध देती है। वहीं जर्सी गाय प्रति ब्यात 7000 से 9000 किलोग्राम दूध देती है।

अगर डेयरी बिजनेस को बड़ा कर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते है तो Animall ऐप से संकर नस्ल की गाय ख़रीद सकते हैं। यहां आसपास के सारे दूधारू गाय बिकने के लिए उपलब्ध है। बस एक कॉल से घर बैठे बैठे गाय खरीद सकते हैं।

देसी नस्ल की प्रमुख गायें.

  • साहीवाल

साहीवाल नस्ल के गायों का  मूल जन्म स्थान पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में है।  साहीवाल नस्ल की गायें प्रति ब्यात 1400 से 3175 लीटर दूध देने की क्षमता रखती हैं। जबकि प्रतिदिन  दूध देने की क्षमता 10 से 16 लीटर प्रतिदिन हैएक साहीवाल  गाय सालभर में  10 महीने तक दूध सकती है | इन्ही गुणों के कारण  डेयरी बिजनेस के लिए साहीवाल भारत के किसानों की पसंदीदा गायों में से एक है।  दिखने में  माथा चौड़ा  होता है,सींग काफी छोटे होते हैंवहीँ चमड़ी की बात करें तो इनकी चमड़ी काफी मोटी और सख्त होती हैजबकि टाँगे छोटी और बाकी शेष शरीर लंबा होता है। ।  

ढीली चमड़ी के कारण कुछ लोग इस नस्ल की गाय को लोला के नाम से जानते हैं। देसी नस्ल के साहीवाल  गायों का वजन 300 से 500 किलोग्राम के बीच पाया जाता है यह गाय आम तौर पर लाल या गहरे भूरे रंग में पाई जाती है इनके शरीर पर सफेद चमकदार धब्बे भी मौजूद होते हैं 

अपने आसपास की दुधारू  साहीवाल  नस्ल की गायें अब Animall ऐप पर भी उपलब्ध हैं। अपने फोन में ऐप इंस्टॉल कर घर बैठे बैठे इन गायों की खरीद बिक्री कर सकते है। 

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  • राठी 

देसी नस्ल की गायों में हमारे किसानों के बीच लोकप्रिय है राठी गाय। कम चारा खा कर भी अधिक दूध देती है राठी गाय। इस नस्ल के गायों की बनावट मध्यम आकार और अच्छी किस्म की होती है। राठी नस्ल के पशुओं का ललाट धंसा हुआ होता हैवहीँ सींगे छोटी होती और त्वचा ढीली होती हैराठी नस्ल के पशुओं की पूंछ काली और छोटी होती है जो टखने के नीचे तक पहुंच जाती है। 

एक देसी नस्ल की  राठी गाय का  औसत वजन 280 से 300 किलो तक होता है। वही अगर बात दूध की करें तो एक  देसी नस्ल की गाय राठी आपको प्रतिदिन 6 से 8 लीटर तक दूध निकाल सकती है। मतलब आपके बिजनेस और घर दोनों स्थिति में राठी गाय दूध की कमी महसूस नही होने देगी। अगर आप दूध फैट यानि वसा जानना चाहते हैं तो देसी नस्ल  राठी गायों के दूध में फैट  की मात्रा 5% से भी अधिक मिलेगा।  Animall ऐप पर आपको बहुत सी देसी नस्ल की  दुधारू राठी गायें मिल जायेंगी। 

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  • गिर 

इस नस्ल के गायों का जन्म स्थान गुजरात है। गिर भारत की सबसे पुरानी देसी नस्लों में से एक है।  गिर गायों का माथा चौड़ा होता है और शरीर गठीला होता है।  गिर गाय एक ब्यात में 1600 से  3100  लीटर दूध देती है।  नर गिर गायों का औसत वजन 540 किलोग्राम के आसपास रहता है तो वहीं मादा गिर गायों का औसत वजन 310 किलोग्राम रहता है। 

गिर गाय का रंग

80% से अधिक गिर गायें लाल रंग की होती हैं। लाल रंग के गिर गायों पर उजला धब्बा देखने को मिलता है, वहीं कुछ इलाकों में उजले रंग के गिर गायों पर लाल रंग का धब्बा भी देखने को मिलता है।

देश में सबसे अधिक गिर गायों की संख्या गुजरात में है। दूसरे स्थान पर राजस्थान और तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र हैं। इनमें से किसी भी राज्यों में दुधारू देसी नस्ल की गिर गाय खरीदने के लिए Animall ऐप अपने फ़ोन में डालें।

गिर गाय की पहचान  

गिर गायों को उनकी सींगें अलग पहचान दिलाती हैं। इनकी सीगें घुमावदार होती हैं। ध्यान से देखने पर सींगें अर्ध चांद जैसी आकृति जैसी दिखती हैं। गिर नस्ल के 

गिर गाय दूध

एक साल में औसतन देसी नस्ल के गिर गाय 3000 लीटर दूध देने की क्षमता रखती हैं। वहीं साल के 300 दिन आप इनका दूध निकाल सकते है। इस देसी नस्ल के गाय को  डेयरी बिजनेस के नजरिए से काफ़ी अच्छा माना जाता है।

gir cow

  •  थारपारकर गाय

डेयरी किसानों के बीच ये देसी नस्ल की गाय काफ़ी पसंद की जाती है। थारपारकर नस्ल की गाय मुख्यतः राजस्थान में पाई जाती है। इस नस्ल का नाम हुई राजस्थान स्थित थार रेगिस्तान के नाम पर रखा गया। राजस्थान के अलावा नस्ल की गायें गुजरात के कच्छ इलाके में पाई जाती है।

थारपारकर नस्ल की गायें गर्म स्थानों में भी आसानी से रहने की लिए जानी जाती हैं। राजस्थान में गर्म स्थानों में किसान इस देसी नस्ल को आसानी से रखते हैं।

थारपारकर गाय की पहचान

इस नस्ल के गायों का औसत दर्जे का लंबा चेहरा, चौड़ा मस्तक तथा उभरा हुआ ललाट होता है। सींग मध्यम दर्जे के होते हैं। पशुओं का थन विकसित होता है। दुग्ध शिराएं थनों पर स्पष्ट दिखाई देती है। वहीं काले झंवर वाली पूंछ ऐड़ी तक पहुंचती है। 

थारपारकर गायों का दूध

प्रति ब्यात थारपारकर गायें 1400 लीटर दूध देने की क्षमता रखती हैं। थारपारकर गायों के दूध में 5 प्रतिशत वसा पाया जाता है। आपके आसपास की दुधारू थारपारकर गायें Animall ऐप पर उपलब्ध हैं। अपने फ़ोन में ऐप डालकर आप दुधारू थारपारकर गाय खरीद सकते हैं।

tharparkar cow

  •  रेड सिन्धी 

इस देसी नस्ल के गाय का मूल जन्म स्थान पाकिस्तान का सिंध प्रांत है। रेड सिंधी गायों को मलीर या लाल सिंधी भी कहते हैं। अधिक दूध देने की वजह से डेयरी किसान इसे अपने घर या फार्म पर रखते हैं।

रेड सिंधी गाय की पहचान 

लाल सिंधी गाय देखने में त्रिकोणीय आकार के होते हैं। सिर औसत आकार का होता है तथा विकसित होता है। इस नस्ल की गायों का रंग गहरा लाल होता है।

वहीं देसी नस्ल की रेड सिंधी गायों के थनों की बात करें तो यह काफी विकसित होते हैं। देसी नस्ल की एक रेड सिंधी गाय प्रति ब्यात 1500 से 5400 लीटर दूध देने की क्षमता रखता है।

  • हरियाणा गाय  

इस देसी नस्ल की गाय हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसानों के बीच लोकप्रिय है। देसी नस्ल की हरियाणा गाय सफेद रंग की होती है। छोटे कान और चमकीली आंखें , चपटा माथा, लंबी और पतली टांगे इसकी पहचान हैं। देसी नस्ल की गाय प्रति ब्यात 1500 लीटर दूध देती हैं।  वहीं  एक देसी नस्ल की  हरियाणा गाय का औसत भार 350 से 400 किलोग्राम के बीच होता है। प्रतिदिन एक गाय 10 से 15 लीटर दूध देती करती है। डेयरी बिजनेस के नजरिए से देखें तो देसी नस्ल की हरियाणा नस्ल की देसी गायें अच्छा मुनाफा देती हैं। अपने आसपास की दुधारू हरियाणा नस्ल की गायें अब Animall ऐप पर भी उपलब्ध हैं। अपने फोन में ऐप इंस्टॉल कर घर बैठे बैठे देसी गायों की खरीद बिक्री कर सकते है। 

Red sindhi Cow

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