बारगुर गाय की संपूर्ण जानकारी यहां पढ़ें।

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Source – Wikipedia

भारत देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखता है और इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का गुजारा पशुपालन एवं खेती के जरिए ही होता है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर ऐसी गाय की तलाश में रहते हैं, जो उनके जीवन को आसान बना सकें और उन्हे आर्थिक रूप से फायदा पहुंचा सकें। आज हमने पशुपालकों के लिए ऐसी ही एक गाय की नस्ल खोजी है। दरअसल हम बात कर रहे हैं बारगुर गाय की। आपको बता दें कि बारगुर गाय एक छोटे और मध्यम कद की गाय है। जिसका ताल्लुक तमिलनाडु के डिरोज जिले से है। इसका नाम भी भवानी तहसील में मौजूद बारगुर पहाड़ी क्षेत्र पर ही रखा गया है। बारगुर गाय अपनी सहनशक्ति और गतिशीलता के लिए जानी जाती है। आज हम अपने इस लेख में आपको बारगुर गाय से जुड़ी संपूर्ण जानकारियां देंगे। इसके साथ ही आप किस तरह ऑनलाइन माध्यम से बारगुर गाय को खरीद या बेच सकते हैं, यह भी बताएंगे। बारगुर गाय से जुड़ी दिलचस्प जानकारी हासिल करने के लिए लेख पर अंत तक बने रहें। और पढ़ें

 

बारगुर गाय की पहचान कैसे करें


Source – Tanuvas

बारगुर नस्ल की गाय देखने में काफी खूंखार होती हैं। इनके सींग बाहर की ओर लंबे और पैने होते हैं। बारगुर गाय का रंग गहरा ब्राउन होता है और इनके शरीर पर सफेद रंग के धब्बे मौजूद होते हैं। वहीं इनका माथा सपाट होता है और कान बाहर की तरफ बिल्कुल सीधे रहते हैं। इस गाय का शरीर पर वसा अधिक मौजूद नहीं होता और यह सुडौल शरीर की होती है। बारुगर गाय के चेहरे पर भी सफेद रंग के दाग धब्बे दिखाई दे सकते हैं। गाय की कमर पर मौजूद कूबड़ का आकार हल्का ही ऊपर उठा होता है।

 

बारगुर गाय का दूध और विशेषताएं 

किसानों व पशुपालकों के लिए गाय का दूध देना बहुत महत्व रखता है। इसलिए बता दें कि बारगुर गाय अपनी एक ब्यात में 250 से लेकर 1300 किलोग्राम तक दूध देती है। इस गाय के दूध में फैट अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा यह गाय एक बार गर्भधारण करने बाद 270 से 310 दिन तक दूध दे सकती है। गाय के दूध के साथ – साथ इसके मूत्र और गोबर का भी इस्तेमाल किसान और पशुपालक कर सकते हैं। और पढ़ें

 

बारगुर गाय की देखरेख कैसे करें 

बारगुर गाय एक अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली गाय है। वहीं यह गाय पहाड़ी क्षेत्र से आती है। लेकिन इसके बावजूद गर्म मौसम की मार भी झेल सकती है। लेकिन गाय के रहने के लिए कुछ विशेष इंतजाम करना बेहद जरूरी है। बारगुर गाय को रखने के लिए एक शेड की जरूरत होती है। शेड का निर्माण इस तरह से होना चाहिए। जिससे गाय धूप, बारिश आदि से बच सकें। वहीं शेड में हवा की आवाजाही ठीक से हो, इस बात का भी ध्यान रखना अनिवार्य है। शेड की सफाई अंदर से रोजाना होनी चाहिए। गाय के द्वारा किए गए मल को जल्दी से जल्दी शेड के अंदर से हटा देना चाहिए। इससे गाय कई तरह की गंभीर बीमारियों से बच जाती है। 

बारगुर गाय को दिया जाने वाला चारा 

बारगुर गाय एक मध्यम आकार की गाय है। इसे दिन भर में केवल 5 से 7 किलो ही चारा देने की जरूरत होती है। आप इस गाय को हरा चारा दे सकते हैं जैसे, गेहूं, मक्का, ज्वार आदि। इसके अलावा घर से गेहूं, सब्जी फल आदि भी दिए जा सकते हैं। गाय को दिए जाने वाले चारे की गुणवत्ता बेहतर होनी चाहिए। गाय को किसी भी तरह का अशुद्ध भोजन नहीं देना चाहिए। पशु को अशुद्ध भोजन देने पर उनके बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। और पढ़ें

बारगुर गाय को लगने वाले टीके 

बारगुर गाय को सही देखरेख के साथ – साथ कुछ आवश्यक दवाओं की भी जरूरत होती है। यह दवाएं गाय को टीके के माध्यम से दी जाती हैं। ऐसे में एक पशुपालक को कुछ टीके समय – समय पर जरूर लगवाने चाहिए। इसमें जब गाय 6 माह से लेकर 24 माह तक की हो तो उसे ब्रुसेला का टीका दिया जाना चाहिए। इसके अलावा गाय को कुछ अन्य बीमारियों से बचाने के लिए गलघोटू और मुंह खुर का टीका दिया जाना चाहिए। 

 

बारगुर गाय की बीमारी और इसके इलाज


Source – Dairy Knowledge 

बारगुर नस्ल की गाय की देखरेख में की गई कुछ लापरवाही कई बार इन्हें खतरनाक बीमारियों की गिरफ्त में डाल देती हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी बीमारियां भी हैं जो गाय को परेशान कर सकती हैं। और पढ़ें

 

थनैला रोग और इसके उपचार के तरीके 

थनैला के नाम से ही आप समझ गए होंगे कि यह रोग गाय के थन से संबंधित है। आपको बता दें कि यह रोग आमतौर पर अधिक दूध देने वाली गाय को होता है। लेकिन कई बार कम दुधारू गाय भी इस रोग का शिकार हो जाती हैं। इस रोग के दौरान गाय के थन का आकार बढ़ जाता है और इनमें सूजन आ जाती है। साथ ही दूध निकालने का रास्ता संकरा हो जाता है। साथ ही थनों से पस और खून भी निकलने लगता है।  

थनैला का उपचार – थनैला के उपचार हेतु इस रोग का समय पर पता चलना बहुत जरूरी है। वरना इस रोग की वजह से पशु के थन भी काटने पड़ सकते हैं। इसके अलावा थनैला से पशु को बचाने के लिए गाय के दूध और थनों पर नजर बनाकर रखनी चाहिए। इसके साथ ही पशु की बदलती स्थिति पर नज़र भी बनाकर रखनी चाहिए। और पढ़ें

 

तिल्ली रोग और उपचार

बारगुर गाय या किसी भी अन्य पशु को यह रोग तब होता है, जब उन्हें खराब भोजन और पानी दिया जाए। इस रोग के होने पर पशु के शरीर से लुक जैसा रक्त निकलने लगता है। इसके साथ ही पशु को तेज बुखार भी हो जाता है। साथ ही कई पशुओं में शरीर अकड़ने की दिक्कत भी देखी जा सकती है। 

तिल्ली रोग का इलाज – आपको बता दें कि तिल्ली रोग की कोई ठोस उपचार प्रक्रिया या दवा मौजूद नहीं है। इसलिए पशु को यह रोग होने से बचाना ही एकमात्र विकल्प है। तिल्ली रोग से पशु को बचाने के लिए उसे शुद्ध भोजन और पानी ही देना चाहिए। वहीं अगर किसी पशु को यह रोग हो जाए तो स्वस्थ पशुओं से दूर बांध देना चाहिए। इसके अलावा अगर पशु की मौत तिल्ली रोग से हो जाए तो उसके शव को किसी गहरे गड्ढे में दफना देना चाहिए। और पढ़ें

 

 ब्लैक क्वार्टर रोग और उपचार 

यह एक खतरनाक रोग है जो पशु की जान को खतरे में भी डाल सकता है। आपको बता दें कि ब्लैक क्वार्टर जीवाणु बारिश के दौरान मिट्टी में पैदा होता है। इस रोग का बुरा प्रभाव पशुधन पर पड़ता है। इसके साथ ही पशु को इस रोग में सांस लेने में भी परेशानी होती है। यही नहीं कई बार पशु को बुखार भी हो जाता है। 

ब्लैक क्वार्टर रोग का उपचार – अगर समय पर इस रोग का पता चल जाए तो पेनसिलिन टीके के जरिए ठीक हो सकता है। पर अगर रोग के पता चलने में समय लग जाए तो स्थिति काबू से बाहर चली जाती है। ऐसे में पशु की जान जाने का खतरा भी बढ़ सकता है।

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

अगर कोई पशुपालक या किसान गाय ऑनलाइन खरीदना चाहता है तो वह Animall ऐप के जरिए ऐसा कर सकता है। ऐनिमॉल ऐप डाउनलोड करने के लिए इस Click Here विकल्प को चुने

  1. जब ऐप डाउनलोड हो जाए तो रजिस्ट्रेशन हेतु अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें।
     
  2. इसके बाद आपको अपने अनुसार भाषा का चुनाव करना है।
     
  3. अब आप का उपयोग करके पशु खरीद या बेच सकते हैं।
  4. उदाहरण के लिए अगर आपको गाय खरीदनी है तो आपको उसके विकल्प को चुनना होगा। सहायता के लिए आप नीचे दिए गए चित्र को देख सकते हैं।
     
  5. विकल्प पर क्लिक करने के बाद आपके सामने गाय की सूची आ जाएगी।
  6. यहां आप अपने अनुसार यह भी तय कर सकते हैं कि आपको कौन सी या किस तरह की गाय चाहिए। इसके लिए आपको गाय के दूध की मांग, नस्ल, और ब्यात आदि दर्ज करनी होगी।
  7. अब एक फिल्टर्ड सूची आपके सामने होगी। इस सूची में अपने अनुसार गाय का चुनाव करें और बेचने वाले व्यक्ति से सीधे बात करें।
     
  8. आप चाहें तो गाय बेचने वाले व्यक्ति से बात करके गाय की कीमत कम भी करवा सकते हैं।

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. अगर किसी व्यक्ति को अपनी गाय बेचनी है तो वह भी ऐप के जरिए कर सकता है। ऐप के होमपेज के नीचे पशु खरीदें का विकल्प दिखाई देगा। यहाँ क्लिक करें।
     
  2. इस विकल्प पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक अन्य पेज आएगा। यहां आपको पशु से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां दर्ज करनी होगी।
     
  3. आपके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पशु ऐप पर लिस्ट हो जाएगा। इसके बाद जिस भी व्यक्ति को आपके द्वारा बेचे जा रहे पशु में दिलचस्पी होगी और वह आपसे खुद संपर्क कर लेगा। और पढ़ें

 

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जानें हल्लीकर गाय के बारे में सारी जानकारी

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भारत में गायों की बहुत सारी नस्लें हैं, जिनमें से बहुत नस्लों की पहचान आज भी उनके राज्यों और क्षेत्रों के आधार पर की जाती है। इन्हीं में से एक नस्ल है हल्लीकर गाय की। जो कि दक्षिण भारत में बेहद मशहूर है।

हल्लीकर गाय को एक बेहद ही मजबूत शरीर वाली नस्ल माना जाता है। ये गाय कर्नाटक के मैसूर, मंडाया, बैंगलौर, कोलार, तुमकुर, हासन और चित्रदुर्ग जिलों में पाई जाती है। इस गाय को दक्षिणी भारत की गायों की नस्ल में सर्वोत्तम नस्ल मानी जाती है। इस नस्ल के बैल भी काफी ज्यादा उपयोगी माने जाते हैं। हल्लीकर गाय का नाम कर्नाटक की जनजाति हल्लीकर से पड़ा है। इस जनजाति का मुख्य पेशा पशुपालन ही होता है।

गाय की इस नस्ल के सम्मान में भारतीय डाक विभाग ने साल 2000 में एक विशेष डाक टिकट भी चालू की थी। इस नस्ल की खासियत ये है कि काफी दूर तक ये घूम सकती है। हल्लीकर गाय की नस्ल से ही दक्षिण भारत की कई अन्य नस्लों का विकास किया गया है। और पढ़ें

हल्लीकर गाय की पहचान

हल्लीकर नस्ल की गाय का रंग भूरा या गहरा भूरा होता है। ये नस्ल बनावट में मध्यम आकार की होती हैं और मांसल सी प्रतीत होती है। इसका माथे वाला भाग थोड़ा उठा हुआ होता है। तो वहीं चेहरा लंबा और नाक की ओर झुका हुआ होता है। इसका नाक काले या भूरे रंग का होता है। वहीं इसके सींग लंबे और सिरों पर एक दूसरे की ओर मुड़े हुए रहते हैं। इनका झुकाव पीछे की ओर रहता है।

इनकी आंखे और कान छोटे होने के साथ-साथ काफी झुकावदार भी होते हैं। इनके गले की झालर छोटी और कम लटकाव वाली होती है। इसके अलावा हल्लीकर गाय की पूंछ लंबी और काले सिर वाली होती है और पिछले पैरों के जोड़ से नीचे तक लटकी रहती है। हल्लीकर गाय का वजन 270 किलोग्राम के आसपास होता है।

हल्लीकर गाय के दूध की जानकारी

हल्लीकर गाय की पहली ब्यात का समय लगभग 1350 दिनों का होता है। ये गाय तकरीबन 1000 किलोग्राम तक का दूध दे सकती है। इसके दूध में फैट लगभग 5.7 फीसदी होता है।

हल्लीकर गाय बेहद ही मेहनती और सक्रिय नस्ल है। ये दिनभर बिना आराम किए भी काम कर सकती है। इस नस्ल को सभी प्रकार के कृषि कार्यों के इस्तेमाल में लाया जाता है। ये गाय अपनी शक्ति और सहनशीलता के लिए जानी जाती है। और पढ़ें

हल्लीकर गाय की देखरेख कैसे करें

चारे में क्या दें

इस नस्ल की गाय को चारे में इसकी जरूरत के अनुसार ही खाना दें। जरूरत से ज्यादा चारा देने की वजह से इसे बदहजमी जैसी बीमारी हो सकती है। वहीं अगर इसे फलीदार चारा दें तो उसमें तूड़ी या फिर अन्य चारा जरूर मिलाए। ताकि पशु को अफारा बीमारी ना हो।

खुराक

हल्लीकर के लिए जरूरी तत्व – उर्जा, प्रोटीन, विटामिन

क्या दें खाने में

अनाज – मक्की, जौ, ज्वार, बाजरा, छोले, गेहूं, जई, चावलों की पॉलिश, मूंगफली, तिल, अलसी आदि।

हरा चारा – लोबिया, ज्वार, लूसर्न, सुडान घास, सेंजी, नेपियर बाजरा, हाथी घास आदि

अन्य खुराक – चावल की कणी, चोकर, सोयाबीन की खल, सरसों की खल, शीरा, नमक आदि

शेड – हर पशु को अनुकूल परिस्थितियों की जरूरत होती है। ऐसे में पशु को बारिश, घूप, बर्फबारी, ठंड से बचाने के लिए एक शेड की जरूरत होती है। इतना ही नहीं शेड में साफ-सफाई का भी खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। पशुओं के लिए सही भोजन की जगह भी होनी चाहिये।

गाभिन गाय की देखभाल – एक गाभिन गाय का अच्छे से रखा गया ध्यान, उसके बछड़े पर तो पड़ेगा साथ ही उसकी दूध देने की गुणवत्ता भी उससे सुधरेगी। इस वक्त में गाय को 1 किलो ज्यादा फीड करें।

टीके – 6 महीने के बछड़े को सबसे पहला टीका ब्रूसीलोसिस का लगवाने की जरूरत होती है। इसके एक महीने के बाद गलघोटू का टीका लगवाएं। इसके एक महीने के बाद लंगड़े बुखार का टीका लगवाएं। बड़ी गायों को हर 3 महीने के बाद डीवॉर्मिंग का टीका लगवाएं। और पढ़ें

हल्लीकर गाय को होने वाली बीमारियां

बदहजमी: गाय को बदहजमी होने पर ऐसी खुराक दें जो वो जल्दी से पचा सके।

कब्ज: अगर पशु को बार-बार कब्ज हो रहा है तो उसे 800 ग्राम मैगनीशियम सल्फेट पानी में घोलकर और 30 ग्राम अदरक का चूरा मुंह के जरिये दें।

मरोड़/ खूनी दस्त: मरोड़ या फिर खूनी दस्त की स्थिति में गाय को मुंह के द्वारा या फिर टीके के जरिये सलफा दवाइयां दें। इसके अलावा 5 प्रतिशत गुलूकोज और नमक का पानी ज्यादा दें

अफारे: गाय को अफारे होने की स्थिति में तारपीन का तेल 30-60 मिलीलीटर, हींग का अर्क 60 मिलीलीटर या सरसों अलसी का 500 मिलीलीटर तेल दें। लेकिन ध्यान रहें की तारपीन का तेल ज्यादा मात्रा में ना दें, नहीं तो पशु का पेट खराब हो सकता है।

मैगनीश्यिम की कमी: मैगनीश्यिम की कमी को पूरा करने के लिए खाने में 5 ग्राम मैगनीश्यिम ऑक्साइड डाल दें।

रिंडरपैस्ट (शीतला माता): ये गाय में होने वाली गंभीर बीमारी है। इस बीमारी को होने में 6 से 9 दिनों का वक्त लगता हैं। इसमें तेज बुखार, मुंह से पानी बहना और खूनी दस्त लगने की शिकायत होती है। इसका इलाज पेंसीलिन के द्वारा किया जाता है।

निमोनिया: गाय को निमोनिया की बीमारी गीले फर्श की वजह से होती है। इसलिए ध्यान रखें की जगह सूखी रहे।

थनैला: ये बीमारी हर गाय को हो सकती है। थनैला रोग में पशु के थन काफी गर्म हो जाते हैं और उसमें दर्द और सूजन की शिकायत होने लगती है। इसके अलावा गाय के दूध में खून और पस की मात्रा बढ़ने लग जाती है। इसका इलाज अगर शुरुआत में ही हो जाए तभी संभव है, बीमारी ज्यादा बढ़ने के बाद थन बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। और पढ़ें

 

Animall ऐप से कैसे खरीदें हल्लीकर गाय?

अगर आप हल्लीकर गाय खरीदना चाहते हैं, तो अपने फोन में Animall ऐप को डाउनलोड करें। ऐप में अपना मोबाइल नंबर डाल कर खुद को रजिस्टर करें। जिसके बाद आपको गाय का बटन दबाना है। बटन दबाते ही आप ढेर सारी गायों की नस्लों को देख पाएंगे। जिसमें आप हल्लीकर चुन कर अपने पसंद की ब्यात और दूध की क्षमता वाली गाय खरीद सकते हैं। 

इन तीन आसान तरीकों से घर लायें देवनी गाय
     

  1. अपने गांव या जिले का नाम या पिनकोड डालें।
     
  2. पिनकोड डालने के बाद, गाय पर दबायें। यहां पर नस्ल हल्लीकर को चुनें और अपने मन के अनुसार दूध की क्षमता और ब्यात का चुनाव करें।
  3. अब आपको अपने आसपास की सारी हल्लीकर गाय दिखने लगेंगी। इनमे से अपने पसंद की गाय चुन सकते हैं। 

Animall ऐप पर बेचें अपनी हल्लीकर गाय

आप हल्लीकर गाय बेचना चाहते हैं तो Animall ऐप पर कर सकते हैं। सबसे पहले आपको रजिस्टर करना होगा और उसके बाद पशु बेचें पर जाएं। वहां जाकर आप हल्लीकर गाय की दूध क्षमता, ब्यात और कीमत डालें। सारी जानकारियां डालने के बाद आपकी गाय Animall ऐप पर रजिस्टर हो जाएगी। जो भी खरीदार आपकी गाय लेने में इच्छुक होगा वो सीधा आपको फोन कर सकता है।

Animall ऐप पर जहां एक तरफ पशु खरीद और बेच सकते हैं। तो वहीं आपको वहां पर पशु से जुड़ी सारी जानकारी भी मिल जाएगी। तो पशु के बीमार होने पर आप ऐप पर ही डॉक्टर से भी बात कर सकते हैं। आपको बेहतरीन गुणवत्ता की और वेरिफाइड गाय बेहद ही अच्छे दाम में और वो भी बिना कुछ भी कमीशन दिए मिल जाएगी। और पढ़ें

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कांकरेज गाय की जानकारी यहां पढ़ें

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क्या आप एक ऐसी गाय खोज रहे हैं जो ढुलाई का काम भी कर सके और दूध भी अधिक मात्रा में दे सकें। अगर हां तो भारतीय नस्ल की कांकरेज गाय एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कंकरेज गाय का अस्तित्व गुजरात के कच्छ से जुड़ा हुआ है। साथ ही यह पाकिस्तान के थारपारकर जिले में भी पाई जाती है।  आपको बता दें कि कंकरेज गाय को वगाड़िया, बोनई, तालबंदा के नाम से भी जाना जाता है।

कांकरेज गाय को लेकर हैरान कर देने वाली बात यह है, कि ब्राजील में पाई जाने वाली गुजेरा नस्ल इसी नस्ल के जरिए बनी थी। दरअसल 1870 में भारत से कंकरेज गाय और बैल को ले जाया गया था। जिसके बाद गुजेरा नस्ल का जन्म हुआ था। यही नहीं जानकार बताते हैं कि आगे चलकर कई अमेरिकी गाय की कई नस्ल कांकरेज के जरिए ही बनी थी। आज हम आपको अपने इस लेख में कंकरेज गाय से जुड़ी तमाम जानकारियां देंगे।

अगर आप भी कंकरेज गाय को खरीदना या बेचना चाहते हैं तो यह आप Animall ऐप के जरिए ऐसा कर सकते हैं। इसके अलावा कंकरेज गाय से जुड़ी हुई तमाम जानकारियां हासिल करने के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

कांकरेज गाय की पहचान कैसे करें 

जानकारों की मानें तो कांकरेज गाय का इतिहास 5000 साल पुराना है। इतिहास में मोहनजोदड़ो के समय पर की गई नक्काशी और रचनाओं में कांकरेज गाय के चित्र दिखाई देते हैं। कांकरेज गाय पहले के समय में गुजरात और पाकिस्तान में पाई जाती थी। आमतौर पर कांकरेज गाय का उपयोग दोहरा होता है। इसके जरिए दूध तो प्राप्त किया ही जाता है। साथ ही यह गाय ढुलाई और हल जोतने के काम भी कर सकती है। यही कारण भी है जिसकी वजह से कांकरेज गाय की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। 

कांकरेज एक ऊंचे आकार की गाय है जिसके सींग बेहद बड़े होते हैं। इस गाय की कमर भी ऊंट की भांति उभरी हुई रहती है। कांकरेज गाय की पूंछ लंबी होती है पर यह जमीन पर नहीं टिकती। इनके शरीर पर फैट अधिक नहीं होता पर यह सुडौल शरीर की होती है। कांकरेज गाय आपको अलग – अलग रंग में देखने को मिल सकती है जैसे स्टील ब्लैक, सिल्वर ग्रे, और आयरन ग्रे आदि। ज्ञात हो कि कांकरेज गाय और बैल अधिक वजन वाले पशु होते हैं। कांकरेज पशु का वजन 590 किलोग्राम तक हो सकता है। वहीं कांकरेज गाय का वजन 431 किलोग्राम तक होता है। 

कांकरेज गाय के दूध की विशेषताएं 

कांकरेज एक बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली गाय है। यह एक बार के दुग्ध काल में 1738 से लेकर 1800 किलोग्राम तक सालाना दूध दे सकती है। वहीं अगर यह गाय ग्रामीण इलाकों में रहे तो इसकी दूध देने की क्षमता बहुत अधिक बढ़ जाती है। एक शोध के दौरान विशेषज्ञों ने कुछ ऐसी कांकरेज गाय भी देखीं जो ग्रामीण क्षेत्रों में थी और सालाना 4900 किलो दूध देती थी। आपको बता दें कि कांकरेज गाय के दूध में 4.8 प्रतिशत तक फैट होता है। कांकरेज गाय के दूध से प्राप्त घी को भी अधिक दाम पर बेचा जा सकता है। कांकरेज गाय 39 से 56 महीने के बीच गर्भधारण के लिए तैयार हो जाती है।

जानिए क्या है, दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने का सही तरीका

कांकरेज गाय की कीमत 

कांकरेज गाय एक नहीं बल्कि पशुपालकों के कई काम कर सकती है। यह परिवहन और सामान ढुलाई का काम भी कर सकती है। साथ ही खेत जोतने के भी काम आ सकती है। इसके अलावा कांकरेज गाय दूध भी अधिक मात्रा में देती है। इसकी वजह से कांकरेज गाय की कीमत अभी के समय में एक लाख रुपए तक पहुंच गई है। वहीं भविष्य में इसकी कीमत और अधिक हो सकती है। 

कांकरेज गाय की देखरेख

कांकरेज गाय को एक निर्धारित मात्रा में ही चारा देना चाहिए। वरना इन्हें बदहजमी की समस्या हो सकती है। अपनी गाय को पूरी तरह तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए आप कई तरह की सूखी घास चारे के रूप में दे सकते हैं, जैसे मक्की, लूर्सन, जई, पराली, और दूर्वा आदि। इसके अलावा गाय को आप मक्की, चावलों की कणी, चोकर, सोयाबीन, मूंगफली की खल, सरसो की खल आदि भी दे सकते हैं। ध्यान रहे कि एक सही आहार ही गाय के दूध की उत्पादन क्षमता को बेहतर कर सकता है।  

कांकरेज गाय को लगवाए जाने वाले टीके 

कांकरेज गाय की बछड़ी के पैदा होने के 6 महीने बाद ही इसे ब्रुसेला का टीका जरूर जरूर लगवाएं। इसके अलावा गाय को दूसरे कई रोगों से बचाने के लिए इन्हें गलघोटू और खुर का टीका भी जरूर लगवाना चाहिए। वहीं अगर गाय की नस्ल के हिसाब से भी कुछ सावधानियां और टीके होते हैं। जिनके बारे में आपको डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

जानिए मानसून में पशुओं के लिए कौन से टीके लगवाना है जरूरी 

कांकरेज गाय को होने वाले रोग और इलाज 

एक पशुपालक के लिए उसका पशु आय का मुख्य जरिया होता है। ऐसे में अपने पशु को बीमारियों से बचाए रखने के लिए सभी जरूरी उपाय अपनाने चाहिए। साथ ही बीमारियों के लक्षणों की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कांकरेज गाय को होने वाली ऐसी ही कुछ बीमारियां और उनके इलाज के बारे में। 

थनैला रोग और इलाज 

यह रोग अधिक दूध देने वाली गाय या भैंस को हो सकता है। इस रोग के शुरुआती लक्षणों को समझ कर पशु के प्राणों को संकट से बचाया जा सकता है। थनैला रोग के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं, थन में सूजन आना, थनों में दर्द होना, थन का आकार बढ़ जाता है, थनों में दूध के साथ खून भी आने लगता है। 

थनैला के इलाज – गाय को होने वाली इस बीमारी का इलाज केवल तभी संभव है, जब बीमारी का पता शुरुआती समय में चल जाए। ऐसे में गाय को इस बीमारी से बचाए रखने के लिए आप समय समय पर दूध की जांच कराते रहें।

एनाप्लजमोसिस एवं इसका इलाज 

कांकरेज गाय के लिए यह रोग बहुत खतरनाक हो सकता है। आपको बता दें कि यह रोग एनाप्लाज़्मा मार्जिनल की वजह से होता है। यह रोग होने पर कांकरेज गाय में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे नाक से गाढ़ा तरल पदार्थ निकलना, शरीर का तापमान बढ़ना, खून की कमी होना और मुंह से लार गिरना आदि। 

इलाज – पशु पर यह लक्षण दिखाई देने पर आप चाहें तो गाय को अकार्डीकल दवा  दे सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना बिल्कुल न दे।

तिल्ली रोग और इसका इलाज 

यह एक बेहद खतरनाक रोग है जो खराब भोजन और गंदे पानी की वजह से पशुओं में हो जाता है। इस रोग के दौरान पशुओं को बहुत दर्द रहता है और शरीर के कई हिस्सों से लुक जैसा खून निकलने लगता है। साथ ही इस स्थिति में पशु का शरीर भी अकड़ जाता है। 

तिल्ली का इलाज – इस स्थिति से पीड़ित पशु का कोई भी तय इलाज नहीं है। ऐसे में तिल्ली रोग के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा पशुओं को स्वस्थ आहार और पानी देना चाहिए। साथ ही उनके आस पास साफ सफाई बनाकर रखनी चाहिए। 

ब्लैक क्वार्टर एवं इसका इलाज 

यह रोग गाय को बारिश के दिनों में मिट्टी से पैदा होने वाले जीवाणु की वजह से होता है। उन पशुओं को ब्लैक क्वार्टर से अधिक खतरा होता है जिनकी आयु 6 से 24 महीने के बीच है। यह रोग होने पर कांकरेज गाय को तेज बुखार हो जाता है। साथ ही इस स्थिति में कई बार सांस लेना भी दूभर हो जाता है। 

ब्लैक क्वार्टर का इलाज – इस बीमारी में गाय को पैनसीलिन टीका प्रभावित स्थान पर दिया जाता है। साथ ही डॉक्टर पशु की ड्रेसिंग भी करने की सलाह देते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि ब्लैक क्वार्टर पर टीका केवल तभी कारगर सिद्ध हो सकता है, जब इसे बीमारी के शुरुआती समय में दिया जाए।

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

घर बैठे – बैठे कोई भी गाय खरीदने के लिए आप Animall ऐप को डाउनलोड करें। लेकिन ध्यान रहे कि ऐप केवल एंड्रॉयड फोन में ही डाउनलोड किया जा सकता है। एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में यह ऐप डाउनलोड करने के लिए आप प्ले स्टोर पर जाएं, या नीचे दिए गए विकल्प  पर क्लिक करें। Click Here           

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आप इसमें मोबाइल नंबर डालें और अपनी जगह का चुनाव करें।
  1. इसके बाद आपको भाषा चुन्नी है।
  1. अब आप ऐप को इस्तेमाल कर पाएंगे। यहां से आपको चुनाव करना है कि आपको पशु बेचना है या खरीदना है।
  1. अगर आपको गाय खरीदनी है तो आप गाय के विकल्प का चुनाव करें। 
  1. यहां आपको जो भी गाय बिकाऊ है, उनकी सूची दिख जाएगी।
  2. अब आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प सामने नजर आएंगे । इन विकल्पों को चुनने के बाद आपके सामने एक सूची आ जाएगी।  
  3. इस सूची के आधार पर आप अपनी गाय चुन सकते हैं। इसके साथ ही गाय बेचने वाले से सीधा बात कर सकते हैं 
  1. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव करके, पशु से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं। 

ऐप पर कैसे बेचें पशु

 

  1. अगर आप गाय बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। वहां बीचों बीच आपको पशु बेचने का विकल्प दिखाई देगा।
  1. क्लिक करने के बाद आपको गाय की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो अपलोड करनी होगी।
  1. इस तरह आपका पशु Anmall ऐप पर लिस्ट हो जाएगा। अब जिस भी व्यक्ति को गाय खरीदनी होगी, वह आपसे कॉल या मैसेज के जरिए बात कर लेगा। 
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मलनाड गिद्दा गाय की संपूर्ण जानकारी

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मलनाड गिद्दा एक देसी नस्ल की गाय है। जिसकी उत्पत्ति कर्नाटक राज्य के पहाड़ी क्षेत्र से हुई है। मलनाड गिद्दा गाय को पालने से पशुपालकों को बहुत मुनाफा होता है। आपको  बता दें कि यह गाय दूसरी देसी गायों के मुकाबले आकार में छोटी होती है। लेकिन यह दूध देने के अलावा ढुलाई और खेत जोतने के भी काम आ सकती हैं। साथ ही मलनाड गिद्दा के मूत्र और गोबर को भी अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है। यह नहीं मलनाड गिद्दा गाय के जरिए प्राप्त घी की मांग भी लोगों के बीच काफी है। 

आज अपने इस लेख में हम आपको मलनाड गिद्दा गाय  से जुड़ी संपूर्ण जानकारियां मुहैया कराएंगे। अगर किसान भाई या कोई अन्य पशुपालक मलनाड गिद्दा गाय को पालने का मन बना रहे हैं, तो उनके लिए इससे जुड़ी जानकारी जानना बेहद जरूरी है। इसके अलावा अगर आप मलनाड गाय को बिना किसी सिरदर्द के खरीदना या बेचना चाहते हैं तो आप ऐसा Animall App के जरिए कर सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं मलनाड गिद्दा गाय से जुड़ी जानकारी। 

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मलनाड गिद्दा गाय की पहचान कैसे करें 


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एक मलनाड गिद्दा गाय की अधिकतम ऊंचाई 90 सेमी या 3 फीट तक होती है। मलनाड गिद्दा गाय को बहुत से लोग वर्षागंधी और उरदाना के नाम से भी जानते हैं। गाय की इस नस्ल का शरीर बेहद सुडौल होता है। यह आपको गहरे काले और लाल एवं भूरे रंग में देखने को मिल सकती हैं। इनकी त्वचा पर किसी तरह के धब्बे या निशान दिखाई नहीं देते। इनके सींग छोटे, नोकिले और पीछे की ओर मुड़े हुए होते हैं। वहीं इनका माथा थोड़ा छोटा होता है और गला गहरे रंग का होता है। मलनाड गिद्दा गाय स्वभाव से बेहद शर्मीली और सीधी होती हैं। 

 

मलनाड गिद्दा गाय के दूध और विशेषताएं 

मलनाड गिद्दा गाय एक ऐसी गाय है जो सालाना 220 किलोग्राम तक दूध दे सकती हैं। इस गाय के दूध में 5.5 से लेकर 8 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है। यह गाय ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों और गर्म मौसम में आसानी से रह सकती हैं। एक बार गर्भ धारण करने के बाद मलनाड गिद्दा गाय 250 दिन तक दूध दे सकती है। आपको बता दें कि यह गाय अधिकतम 12 साल तक जीवित रहती हैं। 

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मलनाड गिद्दा गाय की देखरेख कैसे करें 

मलनाड गिद्दा को लगाए जाने वाले टीके

मलनाड गिद्दा गाय की बछड़ी के जन्म के 6 महीने पश्चात इन्हें ब्रुसेला का टीका दिया जाता है। वहीं आमतौर सभी गाय की नस्लों को गलघोटू और खुर का टीका भी जरूर दिया जाता है। इसके अलावा कुछ गाय की किस्म ऐसी भी होती हैं, जिन्हें अन्य टीके लगवाने की आवश्यकता होती है। इसलिए गाय को कब किस टीके की जरूरत है, इस बारे में डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए। 

मलनाड गिद्दा गाय का आहार

मलनाड गिद्दा गाय के दूध देने के समय पर बहुत से किसान इन्हें मद्दी देते हैं। आपको बता दें कि मद्दी घोड़े – चने की चुन्नी, टूटे चावल, तेल केक और चावल के आटे के जरिए बनता है। यह आमतौर पर दूध की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

मलनाड गिद्दा को शेड में कैसे रखें

मलनाड गाय की देखरेख में किसानों और पशुपालकों को अधिक खर्च करने की जरूरत नहीं होती। इन्हे केवल एक शेड में रखा जा सकता है। साथ ही आहार के तौर पर इन्हें सुखी घास दी जा सकती है। वहीं मलनाड गिद्दा गाय को पालने वाले पशुपालक या किसान इसके मूत्र और गोबर को बेचकर भी मुनाफा कमा सकते हैं। 

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मलनाड गिद्दा गाय को होने वाली बीमारियां

आपको बता दें कि मलनाड गिद्दा गाय वैसे तो एक मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाला पशु है। लेकिन कई बार इस गाय को कुछ खतरनाक रोग लग जाता है। जिसकी वजह से इनकी मृत्यु तक हो जाती है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ बीमारियों के बारे में जो मलनाड गिद्दा गाय को हो सकते हैं। 

थनैला रोग और जानें उसका इलाज

यह रोग गाय के थनों पर होता है और इसकी वजह से थनों में सूजन आने लगती है। साथ ही दूध में खून आने लगता है। इसके अलावा गाय इस रोग के दौरान खाना पीना भी छोड़ देती है। थनैला के दौरान थनों का आकार बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और इनमें दर्द भी रहता है।  

इलाज – इस रोग का उपचार केवल तभी संभव है जब बीमारी का पता शुरुआती समय में ही लग जाए। शुरुआती समय में थनैला के बारे में पता लगाने के लिए किसान भाई पशु के दूध की जांच समय – समय पर कराते रहें। आपको बता दें कि एक बार स्थिति बिगड़ गई तो गाय के थन को ही काटना पड़ता है। 

गाय को तिल्ली रोग और इसका इलाज 

यह रोग बेहद खतरनाक होता है और आमतौर पर यह पशुपालकों की गलती की वजह से ही होता है। इस रोग की मुख्य वजह खराब चारा और गंदा पानी हो सकता है। यह अचानक होता है। इस बीमारी के दौरान पशु के शरीर के हिस्सों से लुक जैसा खून आने लगता है। इसके अलावा पशु का शरीर भी अकड़ सकता है। 

इलाज – अगर गाय पर तिल्ली रोग के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हालांकि तिल्ली रोग का कोई ठोस इलाज नहीं है। लेकिन इस रोग से अपनी गाय को बचाए रखने के लिए आप उन्हें स्वस्थ आहार दें और उनके आस पास सफाई रखें। वहीं अगर किसी पशु को यह रोग हो गया है तो उसे दूसरे पशुओं से बिल्कुल अलग कर दें।  

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मलनाड गिद्दा को होने वाला ब्लैक क्वार्टर रोग और इसका इलाज


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हमने आपको पहले ही बताया है कि यह अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में रहती है और ब्लैक क्वार्टर रोग बारिश के दौरान मिट्टी में ही पैदा होता है। मिट्टी से यह पशु में फैलता है और इस रोग में पशु को तेज बुखार हो जाता है। अमूमन यह रोग 6 से 24 महीने की आयु में ही होता है।

इलाज – इस रोग के दौरान पीड़ित गाय को पैनसीलिन टीका दिया जाता है। इसके अलावा पशु की समय – समय पर ड्रेसिंग भी कराने की जरूरत होती है। लेकिन पशुपालक इस बात का खास ध्यान रखें कि ब्लैक क्वार्टर में दिया गया टीका केवल तभी असरदार हो सकता है। जब इस रोग का पता शुरुआती समय में चल गया हो।  

एनाप्लाजमोसिस रोग और इलाज 

मलनाड गिद्दा को होने वाली यह एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जो एनाप्लाज़मा मार्जिनल के कारण होती है। इस रोग के दौरान पशु के नाक से गाढ़ा तरल पदार्थ बहने लगता है। साथ ही इस दौरान गाय के शरीर का तापमान बढ़ जाता है और शरीर में खून की कमी भी हो जाती है। 

इलाज – यह एक खतरनाक रोग है इसलिए इसे जरा भी हल्के में न ले। अगर गाय पर इसके कुछ लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह पर और पशु को अकार्डीकल की दवा भी दे सकते हैं। साथ ही बीमारी से बचाए रखने के लिए डॉक्टर से पशु की समय – समय पर जांच कराते रहें। 

 

Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

क्या आप भी घर बैठे – बैठे गाय खरीदना चाहते हैं अगर हां तो आप Animall ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए आपके पास एक एंड्रॉयड फोन होना जरूरी है। एंड्रॉयड फोन में Animall App को डाउनलोड करने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें।  Click Here

          

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद इसमें अपना रजिस्ट्रेशन करने के लिए मोबाइल नंबर डालें।
     
  2. अब अपने अनुसार ऐप पर भाषा को चुनें।
     
  3. अब आप ऐप को इस्तेमाल करके गाय, भैंस बेच और खरीद सकते हैं।
  4. गाय खरीदनी है तो गाय के विकल्प को चुने।
     
  5. यहां बिकाऊ गाय की सूची सामने दिखाई देगी।
  6. यहां से  आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के बारे में डालना होगा। इसके बाद एक फिल्टर लिस्ट आपके सामने आ जाएगी।
  7. इस सूची आप गाय चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले पशुपालक  से बात कर सकते हैं।
     
  8. अब बेचने वाले व्यक्ति से बात करके दाम तय कर सकते हैं और पशु से जुड़ी जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। 

 

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. पशु बेचने के इच्छुक लोग ऐप के नीचे और बीचों बीच देखें। सहायता के लिए आप नीचे दिए गए चित्र को भी देख सकते हैं।
     
  2. यहां पशु बेचने वाले व्यक्ति को पशु से जुड़ी हुई संपूर्ण जानकारी दर्ज करनी होगी, जैसे ब्यात, नस्ल, और दूध देने की क्षमता आदि
     
  3. बताए गए तरीके से आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो जाएगा।अब अगर किसी भी खरीदार को आपकी गाय खरीदनी होगी, तो वह खुद आपसे संपर्क कर लेगा। 

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होल्सटीन फ्रिसियन के सामने फेल है देसी दुधारू गाय

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भारत में दूध और उससे बने वाली चीजों की मांग काफी ज्यादा है। आज के वक्त में डेयरी फार्मिंग से किसानों को काफी अच्छा मुनाफा हो सकता है, अगर सही तरीका अपनाया जाए। इस बिजनेस की सफलता का मुख्य आधार बेहतरीन नस्ल के पशुओं को माना जाता है।

अगर आप दूधारू पशु की नस्ल का चयन सही तरीके से नहीं कर पाते हैं, तो आपके बिजनेस पर इसका काफी ज्यादा असर होगा। ऐसे में किसान और पशुपालक को हमेशा दुधारू पशुओं की नस्ल पर ध्यान देना होता है। देश में गाय की कई ऐसी नस्लें हैं जो कि डेयरी फार्मिंग में बहुत ज्यादा मुनाफा देती है। लेकिन इनमें 2 विदेशी नस्लें भी शामिल है, जो भारत में काफी ज्यादा मशहूर है। इनमें से एक है होल्सटीन फ्रिसियन नस्ल की गाय।

इस गाय को दुनियाभर में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय कहते हैं। इसका शरीर काफी बड़ा होता है और ये आमतौर पर काले और सफेद रंग की होती है। आमतौर पर इसका वजन लगभग 580 किलोग्राम होता है। जबकि दूध देने में तो इसका कोई मुकाबला नहीं है। एचएफ गाय यानी की होल्सटीन फ्रिसियन को एक संवेदनशील पशु माना जाता है, लेकिन इसकी शुद्ध नस्ल अधिक तापमान सहन नहीं कर पाती है। ये गाय रोज 25 से 30 लीटर दूध दे सकती है और इसके दूध में फैट की मात्रा 3.5 फीसदी होती है। वहीं इसे काफी कम कीमत पर भी खरीदा जा सकता है। ये आमतौर पर 45-50 हजार तक मिल जाती है।

होल्स्टीन फ्रिसियन गाय का इतिहास काफी ज्यादा पुराना है। लगभग 2 हजार साल पहले होल्सटीन फ्रिसियन गाय लीदरलैंड में देखी गई थी। ये वीटाविनस ( काली रंग की गाय) और  एफ.आर.आई.ई.एन.एस. (सफेद रंग की गाय) के क्रॉस से बनी है। इस गाय की प्रजाति 1861 में नीदरलैण्ड से पहली बार अमेरिका लाई गई थी। 

होल्सटीन फ्रिसियन की पहचान

होल्सटीन फ्रिसियन की बनावट की अगर बात करें तो ये गाय बहुत बड़े आकार की होती है। इसके शरीर पर काले – सफेद या लाल सफेद धब्बेदार चिह्न होते हैं। होलस्टीन गाय काफी आकर्षक दिखती है, शरीर चमकदार होता है और आंखें शरारती होते हैं, इसके कान मध्यम आकार के होते हैं। सिर की स्थिति सीधी होती है और पूंछ का रंग सफेद होता है। वहीं इसके नथुने मोटे तौर पर खुले होते हैं। जबकि इसके जबड़े मजबूत होते हैं। वहीं एक स्वस्थ बछरा जन्म के समय पर 40 से 45 किलो वजन का होता है। जबकि एक हॉल्स्टीन गाय का वजन आम तौर पर 580 किलो का होता है और इसकी लंबाई 147 सेमी होती है।

होल्सटीन फ्रिसियन गाय के दूध की जानकारी

होल्सटीन फ्रीजियन प्रजाति कि गाय अधिक दूध देने के लिए जानी जाती है। और इसी वजह से ये डेयरी फार्मिंग में काफी पसंद की जाती है। ये गाय दुनिया में सबसे ज्यादा दूध देने वाली नस्ल में से एक है। ये गाय रोज 25-25 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है। अच्छी सुविधाओं और परिस्थितियों में ये गाय 40 लीटर दिन का दूध भी दे सकती है। इस गाय के दूध में फैट 3.5 फीसदी होता है।

होल्सटीन फ्रिसियन की देखरेख कैसे करें

होल्सटीन फ्रिसियन गाय को खाने में क्या दें

आप सिर्फ होल्सटीन फ्रिसियन गाय को ही नहीं बल्कि किसी भी नसल की गायों को जरूरत के अनुसार ही खुराक दें। होल्सटीन फ्रिसियन गाय को फलीदार चारे खिलाने से पहले उनमें तूड़ी या अन्य चारा मिला लें। ताकि उसे अफारा या बदहजमी की शिकायत ना हो।

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होल्सटीन फ्रिसियन गाय के लिए उर्जा, प्रोटीन, खनिज पदार्थ और विटामिन जरूरी तत्व होते हैं। इसे अनाज में मक्की, ज्वार, बाजरा, छोले, गेहूं, जई, चावलों की पॉलिश, मक्की का छिलका, चूनी, मूंगफली, सरसों, तिल, अलसी, मक्की से तैयार खुराक, आदि दे सकते हैं। वहीं हरे चारे में बरसीम, लूसर्न, लोबिया, सेंजी, ज्वार, हाथी घास, नेपियर बाजरा, सुडान घास दे सकते हैं।

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शेड की जरूरत होगी

अगर आप एक होल्सटीन फ्रिसियन नस्ल की गाय पालते हैं, तो उसके लिए सबसे पहले एक अच्छे शेड की जरूरत होगी। क्योंकि पशु को भारी बारिश, तेज धूप, ठंड, बर्फबारी से बचाना जरूरी है। सिर्फ शेड लगा देना ही काफी नहीं होगा, उसकी साफ सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। शेड में साफ हवा और पानी की सुविधा होना जरूरी है। इसके अलावा पशुओं की संख्या के अनुसार खाने की जगह बड़ी और खुली होनी चाहिए। 

वहीं एक बछड़े के पैदा होने पर उसका खास ध्यान रखना होता है। उसके जन्म के वक्त मुंह, नाक और शरीर को अच्छे से साफ करें। जन्म के बाद ही अगर बछड़े को सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो उसे बनावटी सांस दें। इसके अलावा, बछड़े की छाती को अच्छी तरह से दबाएं।

कौन सा टीका लगाना चाहिए

बछड़े को जन्म के 6 महीने बाद सबसे पहले ब्रूसीलोसिस का टीका देना होता है। इसके एक महीने बाद उसे गलघोटू, मुंह और खुर पका का टीका लगवाना जरूरी होता है। इन टीकों को लगवाने के एक महीने बाद लंगड़े बुखार का टीका भी लगवा दें। वहीं बात अगर बड़े पशुओं की करें तो हर 3 महीनों के अंतराल में उसे डीवॉर्मिंग करें।

होल्सटीन फ्रिसियन गाय को होने वाली आम बीमारियां

मरोड़/ खूनी दस्त: मरोड़ या फिर खूनी दस्त लगने की स्थिति में पशु को मुंह के द्वारा या फिर टीके के जरिये सलफा दवाइयां देनी है। इसके अलावा 5 प्रतिशत गुलूकोज और नमक का पानी ज्यादा दें

रिंडरपैस्ट (शीतला माता): ये गाय में होने वाली एक बेहद ही गंभीर बीमारी है। ये 6 से 9 दिनों में होती है और इसमें तेज बुखार, खूनी दस्त की शिकायत होती है। इसका इलाज पेंसीलिन के द्वारा होता है।

थनैला: ये बीमारी किसी भी दुधारू पशु को हो सकती है। थनैला में पशु के थन काफी गर्म होने लगते हैं और पशु को दर्द और थनों में सूजन महसूस होने लगती है। इसके अलावा गाय के दूध में भी खून और पस आने लगता है। शुरुआती दिनों में ही इसकगा इलाज किया जा सकता है, बाद में पशु के थन बचाना मुश्किल हो जाता है।

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Animall ऐप पर कैसे खरीदें गाय:

अगर आप घर बैठे – बैठे कोई भी गाय खरीदना चाहते हैं तो आप Animall ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। अपने एंड्रॉयड स्मार्ट फोन में यह ऐप डाउनलोड करने के लिए आप प्ले स्टोर पर जाएं, या नीचे दिए गए विकल्प  पर क्लिक करें। Click Here

  1. ऐप डाउनलोड होने के बाद आपको इसमें मोबाइल नंबर डालें और अपनी जगह का चुनाव करें।
  2. अब आप ऐप की भाषा का चुनाव करें।
  3. इसके बाद आप ऐप को पूरी तरह इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं और यहां पर आपके सामने पशु खरीदने या बेचने का विकल्प आएगा।
  4. अगर आपको गाय खरीदनी है तो आप गाय के विकल्प का चुनाव करें।
  5. यहां आपको जो भी गाय बिकाऊ है, उनकी सूची दिख जाएगी।
  6. इसके बाद आपको पशु के दूध की क्षमता, ब्यात, नस्ल के विकल्प दिखाई देंगे। इसमें आप अपनी जरूरत के हिसाब से पशु की सूची हासिल कर सकेंगे।
  7. इस सूची के आधार पर आप अपनी गाय चुन सकते हैं और सीधा बेचने वाले व्यक्ति से बात कर सकते हैं।
  8. आप बेचने वाले व्यक्ति से मोल भाव भी कर सकते हैं और गाय से जुड़ी अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।

ऐप पर कैसे बेचें पशु

  1. अगर आप गाय बेचना चाहते हैं तो इसके लिए आप ऐप के ठीक नीचे देखें। वहां बीचों बीच आपको पशु बेचने का विकल्प दिखाई देगा।
  2. यहां क्लिक करने के बाद आपको पशु से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसमें गाय की ब्यात, नस्ल, कीमत, दूध देने की क्षमता, गाय की फोटो अपलोड कर दें।
  3. आपका पशु Animall ऐप पर लिस्ट हो गया है, जो भी खरीदार आपका पशु लेने में रुचि लेगा, वो आपसे सीधा संपर्क कर सकेगा।

आप Animall ऐप पर सिर्फ पशु खरीद या बेच ही नहीं बल्कि उनके अच्छे स्वास्थ्य के बारे में जानकारी भी ले सकते हैं। पशु बीमार होने पर आप डॉक्टर की मदद भी ऐप के जरिये ले सकते हैं।

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