गाय के दस्त बंद करने की देसी और अंग्रेजी दवा के बारे में जानिए

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एक पशु का स्वस्थ रहना पशुपालक की आय के लिए बहुत जरूरी है। पशु की जरा भी हालत बिगड़ती है तो इसका सीधा असर पशुपालक की आय पर भी पड़ने लगता है। ऐसी ही एक समस्या है जो अक्सर भैंस और गाय आदि को परेशान करती रहती है। हम बात कर रहे हैं गाय को लगने वाली बीमारी दस्त के बारे में। सुनने में बेहद समान लगने वाला यह रोग, गाय को शारीरिक रूप से कमजोर बना देता है। इसके अलावा दस्त लगने की वजह से गाय की दूध देने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इसलिए आज हम अपने इस लेख में आपको गाय के दस्त की देसी और अंग्रेजी दवा के बारे में बताएंगे। अगर आपकी गाय को अक्सर दस्त की समस्या रहती है, तो आप भी अपनी गाय को दस्त की दवा दे सकते हैं। 

गाय को दस्त लगने का कारण 

यूं तो दस्त लगना एक आम समस्या है जो पशुओं और इंसानों को हो जाती है। कई बार तो दस्त लगने की वजह का पता भी नहीं चल पाता। हालांकि दस्त लगने के कुछ सामान्य कारण भी हैं, जिन्हें जानकर दस्त की समस्या का उपचार किया जा सकता है। इसलिए चलिए जानते हैं दस्त लगने के क्या कारण हो सकते हैं।  

  1. अगर गाय को अधिक हराई खिलाई जाए तो इसकी वजह से भी दस्त की समस्या हो सकती है। 
  2. गाय को अगर जरूरत से ज्यादा आहार या चारा खिला दिया जाए तो इसकी वजह से भी उसे दस्त लग सकते हैं।
  3. कई बार पशुपालक घर का सड़ा गला भोजन गाय को दे देते हैं। जिसकी वजह से पशु को दस्त लग सकते हैं। 
  4. गाय को अगर गंदा पानी पिलाया जाए या वह किसी दूषित तालाब का पानी पी ले तो इसकी वजह से भी दस्त हो सकते हैं। 
  5. घास में अगर अधिक मात्रा में कीटनाशक या दवाएं डाली गई हों और यह घास पशु खा ले तो उसे दस्त हो सकते हैं। 
  6. अगर गाय चारे के साथ किसी कीड़े आदि को खा ले तो इसकी वजह से भी उसे दस्त लग सकते हैं। 
  7. गाय को अधिक मात्रा में खल या बिनौला खिलाने की वजह से भी दस्त की समस्या हो सकती है। 

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गाय के दस्त के लक्षण

गाय या किसी भी पशु को दस्त लगे हैं या नहीं इसका बहुत आसानी से पता लगाया जा सकता है। गाय ने कितनी बार गोबर किया है और वह गोबर कैसा है उसे देखकर गाय के दस्त का पता लगाया जा सकता है। गाय को दस्त लगने की सूरत में आपको जो लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वह कुछ इस प्रकार हैं। 

  • गाय जब गोबर करती है तो किसी पिचकारी की तरह निकलता है। 
  • गाय को दस्त होने की सूरत में आपको उसके मल में झाग दिखाई देने लगेंगे। 
  • गाय के गोबर से बहुत गंदी बदबू आती है। 
  • गाय बार – बार गोबर करने लगती है। 
  • गोबर करते समय गाय के गोबर में खून आने लगता है। 
  • गाय शारीरिक रूप से कमजोर हो जाती है। 
  • गाय को दस्त लंबे समय तक रहे तो उसे बुखार होने लगता है। 
  • लंबे समय तक गाय को दस्त होने पर उसके शरीर की हड्डियां दिखने लग जाती है। 

गाय के दस्त बंद करने की दवा 

किसान और पशुपालक आमतौर पर पशु को लगे दस्त की समस्या पर ध्यान नहीं देते। लेकिन ऐसा करना पशु की जान भी ले सकता है। ऐसे में अगर गाय को दस्त लगे हो उसे दवा देना बेहद जरूरी है। गाय के दस्त की अंग्रेजी और देसी दवा दोनो ही दी जा सकती है। लेकिन यह गाय की स्थिति पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं किस स्थिति में गाय को देसी और अंग्रेजी दवा दी जाती है।  

गाय के दस्त बंद करने की देसी दवा 

गाय को दस्त की देसी दवा तब दी जाती है, जब उसकी स्थिति सामान्य हो। यानी दस्त में खून आदि न आ रहा हो। इस स्थिति में गाय को देसी दवा के तौर पर ठंडी चीजें और आसानी से पचने वाली चीजें दी जानी चाहिए जैसे दही, छाछ, सरसों का खल, सरसों का तेल आदि। इसके अलावा ध्यान रहे कि गाय को जब दस्त लगे हो तो उन्हें किसी भी सूरत में  उन्हें बिनौला और अन्य अनाज नहीं देने चाहिए। 

गाय के दस्त की अंग्रेजी दवा 

गाय को दस्त की अंग्रेजी दवा आप तभी दें जब गाय की स्थिति अधिक गंभीर हो। वह भी डॉक्टर के परामर्श पर ही गाय को अंग्रेजी दवा दे। अगर गाय के दस्त से खून गिर रहा है या गाय अधिक गोबर कर रही है तो इस सूरत में उन्हें आप रिहाइड्रेशन फ्लूइड और अन्य खनिज पदार्थ दे सकते हैं। ध्यान रहे कि गाय को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। इसके अलावा गाय की समय – समय पर जांच कराते रहें। 

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पशुओं में अफारा होने के क्या लक्षण है?

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आम लक्षण निम्नलिखित है:-
(क) ज्यादा मात्रा में गीला हरा चारा, मूली, गाजर आदि यदि सड़ी हुई है|
(ख) आधा पका ल्पूसरन बरसीम व जौ का चारा|
(ग) दाने में अचानक बदलाव|
(घ) पेट के कीड़ों में संक्रमण|
(ङ) जब पशु अधिक चारा खाने के बाद पानी पीए|

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पशुओं की संक्रामक बीमारियों से रक्षा किस प्रकार की जा सकती है?

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(क) पशुओं को समय-समय पर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बचाव के टीके लगवा लेने चहिये।
(ख) रोगी पशु को स्वस्थ पशु से तुरन्त अलग कर दें व उस पर निगरानी रखें।
(ग) रोगी पशु का गोबर , मूत्र व जेर को किसी गढ़ढ़े में दबा कर उस पर चूना डाल दें।
(घ) मरे पशु को जला दें या कहीं दूर 6-8 फुट गढ़ढ़े में दबा कर उस पर चूना डाल दें।
(ड़) पशुशाला के मुख्य द्वार पर ‘फुट बाथ’ बनवाएं ताकि खुरों द्वारा लाए गए कीटाणु उसमें नष्ट हो जाएँ।
(च) पशुशाला की सफाई नियमित तौर पर लाल दवाई या फिनाईल से करें।

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पशुओं में परजीवी रोगों के मुख्य लक्षण क्या होते हैं?

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पशुओं में पाये जाने वाले आम परजीवी रोगों के मुख्य लक्षण इस प्रकार है:
1. पशुओं का सुस्त दिखायी देना।
2. पशुओं के खाने पीने में कमी आना।
3. पशुओं की तत्व की चमक में कमी आना।
4. पशु में खून की कमी हो जाना।
5. पशुओं की उत्पादन क्षमता में कमी आना।
6. पशुओं का कमजोर होना।
7. पशुओं के प्रजजन में अधिक बिलम्ब होना।

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ऐसे करें अपनी गाय और भैंस के ब्याने के लक्षणों की पहचान!

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किसान और पशुपालकों को न केवल पशुओं का ध्यान रखना चाहिए। बल्कि उनके व्यवहार को भी समझना चाहिए। क्योंकि पशु के व्यवहार को समझकर ही पशुपालक पशु की समस्या और उसकी तकलीफ का पता लगा सकता है। इसके अलावा पशुपालक पशु के बदले हुए व्यवहार के जरिए ही उसके ब्याने के लक्षण का भी पता लगा सकता है। 

अगर आप एक पशुपालक हैं और गाय या भैंस से प्राप्त दूध के जरिए ही गुजारा करते हैं, तो आपके लिए गाय या भैंस के ब्याने के लक्षणों की पहचान रखना बहुत जरूरी है। आज हम अपने इस लेख में आपको बताएंगे कि गाय या भैंस में ब्याने से पहले कौन से लक्षण देखें जा सकते हैं। हमारे द्वारा बताए गए इन लक्षणों के आधार पर न केवल आपको भैंस और गाय के ब्याने का सही अंदाजा हो जाएगा। बल्कि अगर भैंस और गाय को कोई समस्या है तो इसका भी पता चल जाएगा

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गाय भैंस के ब्याने से पहले की अवस्था 

गाय और भैंस ब्याने से पहले एक लंबे समय तक गर्भावस्था में होती हैं। ऐसे में एक पशुपालक के लिए जरूरी है कि वह उनके प्रसव के इंतजाम सही समय पर करके रखें। आपको बता दें कि गाय और भैंस ब्याने से पहले तीन स्थितियों से गुजरती हैं जो कुछ इस प्रकार हैं। 

  1. ब्याने से 24 घंटे पहले के लक्षण 
  2. ब्याना
  3. गर्भनाल या जेर निकलना

गाय और भैंस के ब्याने से पहले लक्षण 

गाय और भैंस ब्याने से पहले कुछ ऐसे संकेत देती हैं, जिन्हें देखकर आप पता लगा सकते हैं कि उनके ब्याने का समय नजदीक आ गया है। ब्याने के यही लक्षण कुछ इस प्रकार हैं। 

  • भैंस या गाय ब्याने से पहले दूसरे पशुओं से दूर रहने लगती है। 
  • ब्याने से कुछ समय पहले पशु खाने पीने में दिलचस्पी नहीं दिखाता। 
  • अगर पशु की योनि से श्लेष्मा निकलने लगा हो और थनों में दूध भरने लगा हो तो इसका मतलब है कि गाय के ब्याने का समय करीब आ गया है। 
  • गाय या भैंस ब्याने से पहले पेट पर लात मारने लगते हैं और बेचैन हो जाते हैं। 
  • भैंस या गाय के ब्याने से पहले उनका आकार बड़ा हो जाता है। 
  • प्रसव का समय आने से पहले गाय और भैंस के पेट का आकार बदलने लग जाता है। 

ग्याभिन पशु की पहचान कैसे की जा सकती है?

गाय के ब्याने के सही दिन का पता लगाना

अगर पशुपालक भाई गाय या भैंस के ब्याने के सटीक समय का पता लगाना चाहते हैं तो वह ऐसा बहुत आसानी से कर सकते हैं। इसका पता करने के लिए पशुपालकों को कुछ बातों का पता होना जरूरी है। जिनके बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं।

  1. गाय या भैंस का जिस दिन भी गर्भाधान करवाया है उस तारीख को लिखकर रख लें। 
  2. अगर गर्भधान की तारीख जानते हैं तो आपको बता दें कि फिर पशु के प्रसव के समय का पता लगाना और भी आसान है। आपको पता हो कि गाय का गर्भकाल करीब 280 से 290 दिन का होता है। वहीं भैंस का गर्भकाल 305 से 318 दिन तक का होता है। ऐसे में इस आधार पर गर्भधान की तारीख से प्रसव की तारीख आप निकाल सकते हैं। 

गाय और भैंस के ब्याने से कुछ देर पहले के लक्षण

  1. अगर पशु के प्रसव का समय आ गया है तो ऐसे में आपको बछड़े के आगे पैर और मुंह बाहर निकलता हुआ दिखाई दे जाएगा। 
  2. गाय या भैंस के ब्याने से पहले पानी की थैली दिखाई दे जाएगी। 
  3. पशु के पानी का थैला फटने के आधे घंटे के अंदर प्रसव हो जाएगा। 
  4. अगर पशु पहली बार ब्या रहा है तो ऐसे में उसे ब्याने में 4 घंटे तक लग सकते हैं। 
  5. अगर पशु को ब्याने से पहले पानी का थैला दिखाई न दें तो तुरंत डॉक्टर को बुलाना चाहिए। 

ब्यात के बाद पशु को कब गाभिन करवाना चाहिए?

जेर का निकलना 

  1. जब पशु ब्या चुका होता है तो उसके तीन से आठ घंटे बाद जेर निकल आती है। 
  2. अगर पशु के ब्याने के बारह घंटे बाद तक जेर न निकले तो इसे गर्भनाल के रूकाव के नाम से जाना जाता है। 
  3. गर्भनाल के खुद न निकलने पर इसे जोर लगाकर नहीं खींचना चाहिए। ऐसा करने से पशु के शरीर से रक्त निकलने लगता है और कई बार पशु की मौत तक हो जाती है।

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