पशुओं की संक्रामक बीमारियों से रक्षा किस प्रकार की जा सकती है?

(क) पशुओं को समय-समय पर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बचाव के टीके लगवा लेने चहिये।
(ख) रोगी पशु को स्वस्थ पशु से तुरन्त अलग कर दें व उस पर निगरानी रखें।
(ग) रोगी पशु का गोबर , मूत्र व जेर को किसी गढ़ढ़े में दबा कर उस पर चूना डाल दें।
(घ) मरे पशु को जला दें या कहीं दूर 6-8 फुट गढ़ढ़े में दबा कर उस पर चूना डाल दें।
(ड़) पशुशाला के मुख्य द्वार पर ‘फुट बाथ’ बनवाएं ताकि खुरों द्वारा लाए गए कीटाणु उसमें नष्ट हो जाएँ।
(च) पशुशाला की सफाई नियमित तौर पर लाल दवाई या फिनाईल से करें।

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संकर पशुओं से कितनी बार दूध निकालना चाहिए?

अधिक दूध देने वाले संकर पशुओं से दिन में तीन बार दूध निकालना चाहिये और दूध निकालने के समय में बराबर का अंतर होना चाहिये। अगर पशु कम दूध देता है तो दो बार (सुबह और शाम को) दूध निकालना उचित है, लेकिन इसके बीच भी बराबर समय होना चाहिये। इस से दूध का उत्पादन बढ़ जाता है और निशचिंत समय पर पशु स्वयं दूध निकलवाने के लिए तैयार हो जाता है।

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पशुओं में परजीवी रोगों के मुख्य लक्षण क्या होते हैं?

पशुओं में पाये जाने वाले आम परजीवी रोगों के मुख्य लक्षण इस प्रकार है:
1. पशुओं का सुस्त दिखायी देना।
2. पशुओं के खाने पीने में कमी आना।
3. पशुओं की तत्व की चमक में कमी आना।
4. पशु में खून की कमी हो जाना।
5. पशुओं की उत्पादन क्षमता में कमी आना।
6. पशुओं का कमजोर होना।
7. पशुओं के प्रजजन में अधिक बिलम्ब होना।

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पशुओं में दूध की मात्रा को कैसे बढाएं ?

कई लोग अपने गाय और भैंसों से अधिक दूध प्राप्त करने के लिए टीके आदि का सहारा लेतें हैं, यह पहले कारगर तो साबित होता है लेकिन कई बार इसका प्रभाव विपरीत भी पड़ जाता है.
किसान भाइयों आज हम इस लेख के माध्यम से आपको एक ऐसे रामबाण घरेलू उपाय के बारे में बताएंगे जो गाय और भैंस का दूध बढाने में कारगर साबित होता है. उपाय बहुत सरल है और आपको बहुत ही जल्द इसके नतीजे भी मिलने लगेंगे.
सामग्री :- इसको बनाने के लिए निम्न चीजों की आवश्यकता पड़ती है…
250 ग्राम गेहू दलिया,
100 ग्राम गुड सर्बत (आवटी),
50ग्राम मैथी,
1 कच्चा नारियल,
25-25 ग्राम जीरा व अजवाईन आदि.
उपयोग:-
1- सबसे पहले दलिये, मैथी व गुड़ को पका ले, बाद मे उसमे नारियल को पीसकर डाल दे. ठण्डा होने पर खिलाये.
2- ये सामग्री 2 महीने तक केवल सुबह खाली पेट ही खिलाये.
3- इसे गाय को बच्चा देने से एक महीने पहले शूरू करना और बच्चा देने के एक महीने बाद तक देना.
4- 25-25 ग्राम अजवाईन व जीरा गाय के ब्याने के बाद केवल 3 दिन ही देना. बहुत अच्छा परिणाम ले सकते हैं.
5- ब्याने के 21 दिन तक गाय को सामान्य खाना ही दे.
6- गाय का बच्चा जब 3 महीने का हो जाय या जब गाय का दूध कम हो जाये तो उसे 30 gm/दिन जवस औषधि खिलाये दूध कम नही होगा।
रोग – दूधारू गाय व भैंस का दूध बढ़ाने के उपाय ।
औषधि – 200 से ३०० ग्राम सरसों का तेल , 250 ग्राम गेहूँ का आटा लेकर दोनों को आपस में मिलाकर सायं के समय पशु को चारा व पानी खाने के बाद खिलायें इसके बाद पानी नहीं देना है ओर यह दवाई भी पानी के साथ नहीं देनी है। अन्यथा पशु को खाँसी हो सकती है । पशु को हरा चारा व बिनौला आदि जो खुराक देते है वह देते रहना चाहिए । 7-8 दिनों तक खिलाए फिर दवा बन्द कर देनी चाहिए।

दूध में फैट और SNF कैसे बढाएं ?

 

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दुधारू पशु के दूध को सुखाना क्यों जरूरी है?

गर्भवस्था के समय दोनों माँ व पेट में पल रहे बच्चे को अधिक पोषाहार की आवश्यकता होती है इसलिए पशु को व्याने से तीन महीने पहले दूध सुखा देना/छोड़ देना चाहिए इससे पशु की आदर्श दूध उत्पादक क्षमता सुनिश्चित होती है|

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