गाय भैंस को ठंड से क्या क्या रोग रोग हो सकता है ?

अफारा: ठंड के मौसम में पशुपालन करते समय पशुओं को जरूरत से ज्यादा दलहनी हरा चारा जैसे बरसीम व अधिक मात्रा में अन्न व आटा, बचा हुआ बासी भोजन खिलाने के कारण यह रोग होता है। इसमें जानवर के पेट में गैस बन जाती है। बायीं कोख फूल जाती है। सर्दियों में पशुओं को चारे के साथ गुड़ देना, जो बहुत अधिक लाभदायक होता है।

निमोनिया: दूषित वातावरण व बंद कमरे में पशुओं को रखने के कारण और संक्रमण से यह रोग होता है। रोग ग्रसित पशुओं की आंख व नाक से पानी गिरने लगता है।

ठण्ड लगना: इससे प्रभावित पशु को नाक व आंख से पानी आना, भूख कम लगना, शरीर के रोएं खड़े हो जाना आदि लक्षण आते हैं। उपचार के लिए एक बाल्टी खौलते पानी के ऊपर सूखी घास रख दें। रोगी पशु के चेहरे को बोरे या मोटे चादर से ऐसे ढ़के कि नाक में भाप दें। शीतऋतु में मुर्गियों को श्वास संबंधी बीमारी से बचाने के लिए सिप्रोकोलेन दवा मुर्गियों को पानी में मिलाकर सात से दस दिन तक देना चाहिए। दुधारू गायों से अधिक दूध लेने के लिए बछड़े एवं बाछियों की अच्छी बढ़ोत्तरी के लिए उन्हें साफ-सुथरी एवं सुखी जगह पर रखना जरूरी है।

गाय-भैंस का ठंड जुकाम का घरेलू तरीके से कैसे इलाज करें?

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