पशुओं को कितना चारा पानी देना चाहिए ?

निम्न लिखित अनुसूची अपनाई जानी चाहिए:-
(क) रोज़ का आहार 3-4 भागों में बांटना चाहिए|
(ख) दाना दो बराबर भागों में दिया जाना चाहिए|
(ग) सूखा व हर चारा अच्छी तरह मिलाकर देना चाहिए|
(घ) कमी के समय साईंलेज दिया जाना चाहिए|
(ङ) चारा खिलने के बाद ही दाना देना चाहिए|
(च) औसतन वज़न की गाय को 35-40 लीटर प्रतिदिन पानी की आवश्यकता होती है|

43 लाइक
… और पढ़ें arrow

पशु लोन के लिए क्या दस्तावेज होना जरुरी है ?

पशुपालन में सरकारी हॉस्पिटल या ग्रामीण बैंक के पास अनेक प्रकार की योजनाये आती हैं तो उनसे किसान भाई सम्पर्क करके लोन का आवेदन कर सकते है .

लोन के लिए आवश्यक दस्तावेज 

1. जिस जमीन पर पशु पालन हो उसकी रजिस्ट्रेशन हो या किराए पर हो तो उसका अग्रीमेंट होना जरूरी हैं

2. पशुपालन में कौन कौन से पशु है उसका पूरा ब्यौरा सरकारी डॉक्टर से लिखवाना होता हैं

3. कितना लोन चाहिए किसान को कितना पशुपालन में खर्चा हुआ है उसका ब्यौरा देना पड़ता है

4. पशुपालक का जाति प्रमाण पत्र होना चाहिए

 

186 लाइक
… और पढ़ें arrow

पशुओं में अफारा होने के क्या लक्षण है?

आम लक्षण निम्नलिखित है:-
(क) ज्यादा मात्रा में गीला हरा चारा, मूली, गाजर आदि यदि सड़ी हुई है|
(ख) आधा पका ल्पूसरन बरसीम व जौ का चारा|
(ग) दाने में अचानक बदलाव|
(घ) पेट के कीड़ों में संक्रमण|
(ङ) जब पशु अधिक चारा खाने के बाद पानी पीए|

23 लाइक
… और पढ़ें arrow

बछड़ों- बछड़ियों को खीस कितना और कैसे पिलाना चाहिये?

सबसे ध्यान देने योग्य बात है कि पैदा होने के बाद जितना जल्दी हो सके खीस पिलाना चाहिये। इसे गुनगुना (कोसा) कर के बछड़े के भार का 10 वां हिस्सा वज़न खीस कि मात्रा 24 घंटों में पिलाएं। जन्म के 24 घंटों के बाद बछड़े की आंतों की प्रतिरोधी तत्व (इम्यूनोग्लोब्यूलिन) को सीखने की क्षमता कम हो जाती है। और तीसरे दिन के बाद तों लगभग समाप्त हो जाती है। इसलिए बछडों को खीस पिलाना आवश्यक है।

26 लाइक
… और पढ़ें arrow

पशुओं की संक्रामक बीमारियों से रक्षा किस प्रकार की जा सकती है?

(क) पशुओं को समय-समय पर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बचाव के टीके लगवा लेने चहिये।
(ख) रोगी पशु को स्वस्थ पशु से तुरन्त अलग कर दें व उस पर निगरानी रखें।
(ग) रोगी पशु का गोबर , मूत्र व जेर को किसी गढ़ढ़े में दबा कर उस पर चूना डाल दें।
(घ) मरे पशु को जला दें या कहीं दूर 6-8 फुट गढ़ढ़े में दबा कर उस पर चूना डाल दें।
(ड़) पशुशाला के मुख्य द्वार पर ‘फुट बाथ’ बनवाएं ताकि खुरों द्वारा लाए गए कीटाणु उसमें नष्ट हो जाएँ।
(च) पशुशाला की सफाई नियमित तौर पर लाल दवाई या फिनाईल से करें।

14 लाइक
… और पढ़ें arrow