लक्षण आमतौर पर 1-3 दिनों में व्याने के बाद सामने आते है| जानवर को कब्ज व बेअरामी हो जाती है| ग्रस्त पशु की मांस पेशियों में कमजोरी आने के कारण पशु खड़ा होने व चलने में असमर्थ हो जाता है| पिछले भाग में अकड़न या हल्का अधरंग होता है व पशु शरीर पर एक तरफ गर्दन मोड़ देता है व शरीर का तापमान सामान्य से कम होता है|
दुग्ध ज्वर एक बिमारी है जो आमतौर पर आमतौर पर ज्यादा दूध देने वाले पशु में व्याने के कुछ घण्टों/दिनों बाद होती है| कारण पशु के शरीर में कैल्शियम की कमी| आमतौर पर गाय 5-10 वर्ष की आयु में इससे ग्रसित होती है| अधिकतर पहली बार व्याने पर यह बिमारी नहीं होती है|
जीहाँ| इसके लिए निम्न संघटक डाल कर हम पशु आहार तैयार कर सकते हैं:-
खत्र- 25-35 कि.ग्रा.
दाने (गेहूं,मक्की,जौ, इत्यादि) :- 25-35 कि.ग्रा.
चोकर (गेहूं): 10-25 कि.ग्रा.
डाल चोकर : 5-20 कि.ग्रा.
मिनरल मिक्स्चर: 1 कि.ग्रा.
विटामिन A,D3 : 20-30 ग्रा.
अधिकतर परजीवी रोगों से पशुओं को निम्न उपायों द्वारा बचाया जा सकता है:
1. पशुओं के रहने के स्थान साफ़-सुथरा व सूखा होना चाहिये।
2. पशुओं का गोबर बाहर कहीं गड्डे में एकत्र करें।
3. पशुओं का खाना व पानी रोगी पशुओं के मल मूत्र से संक्रमित न होने दें।
4. पशुओं को फिलों (Snails) वाले स्थानों पर न चरायें।
5. पशुओं के चरागाहों में परिवर्तन करते रहें।
6. कम जगह पर अधिक पशुओं को न चराये।
7. पशुओं के गोबर कि जांच समय-समय पर करवायें।
8. पशुचिकित्सक की सलाह से कीड़े मारने की दवाई दें।
9. समय-समय पर पशुचिकित्सक की सलाह लें।
परजीवी हमारे पशुओं को मुख्यतया निम्न प्रकार से हानि पहुचाते है:
1. पशुओं का खून चूसकर।
2. पशुओं के आन्तरिक अंगों में सूजन पैदा करके।
3. पशुओं के आहार के एक भाग को स्वयं ग्रहण करके।
4. पशुओं की हड्डियो के विकास में बाधा उत्पन्न करके।
5. पशुओं को अन्य बीमारियों के लिये सुग्राही बना कर।
