मेला शब्द सुनते ही दिमाग में कई तरह की तस्वीरें बनने लगती हैं। जहां झूले, चाट के ठेले और अलग – अलग प्रदर्शनी और कार्यक्रम होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी पशु मेले के बारे में सुना है। सुनने में थोड़ा अजीब जरूर है। लेकिन भारत में कई स्थानों पर पशु मेला आयोजित किया जाता है।
आपको बता दें कि भारत की आज भी ज्यादातर आबादी या तो खेती पर निर्भर रहती है, या फिर उनका गुजारा पशुपालन के जरिए होता है। ऐसे में इस क्षेत्र के लोगों को एक सही बाजार दिया जा सके। इसलिए ही पशु मेला आयोजित कराया जाता है। इस तरह के पशु मेलों में गाय, भैंस, बकरी, ऊंट और अन्य पशुओं को खरीदा और बेचा जाता है।
आज हम आपको अपने इस लेख में भारत के सबसे बड़े पशु मेले समेत पशु मेले में होने वाली कार्यक्रम और प्रदर्शनी के बारे में बताने वाले हैं। अगर आप भी पशु मेले से जुड़ी किसी प्रकार की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
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पशु मेला क्या है
हमारे देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह पशुपालन पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में पशु मेला उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो इस क्षेत्र से जुड़े हैं या फिर जुड़ना चाहते हैं। भारत के अलग – अलग राज्यों और स्थानों पर पशु मेलों का आयोजन किया जाता है। अकेले राजस्थान में ही 250 पशु मेले हर साल आयोजित किए जाते हैं। इन पशु मेलों में पशु पालन करने वाले लोगों को कई उन्नत नस्लों को खरीदने और बेचने का मौका मिलता है। इन पशु मेलों में पशु की कीमत काफी कम रखी जाती है, ताकि अधिक से अधिक पशुपालकों को मेलो तक लाया जा सके।
इसके अलावा इन मेलों में पशुओं की देखरेख, खानपान, ग्रामीण कला और खेती से जुड़े उपकरण भी बेचे जाते हैं। साथ ही किसानों को खेती की नई तकनीक से भी रूबरू कराया जाता है। यह पशु मेले कला, संस्कृति, और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होता है। इसके जरिए विदेशी पर्यटकों को देश की ग्रामीण सभ्यता और संस्कृति को जानने का मौका मिलता है।
भारत में आयोजित होने वाले कुछ प्रमुख पशु मेले
देश में कई राज्यों में पशु मेलों का आयोजन होता है। इन्हीं में से कुछ बहुत महत्वपूर्ण हैं। आइए भारत में आयोजित होने वाले ऐसे ही पशु मेलों के बारे में जानते हैं।
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हरियाणा पशु मेला
हरियाणा राज्य के भिवानी क्षेत्र में भी पशु मेला बड़े स्तर पर आयोजित कराया जाता है। इस मेले के अंदर पशुओं की 2000 से ज्यादा नस्ल देखने को मिल सकती है। मेले के अंदर पशुओं का रैंप वॉक भी रखा जाता है। हरियाणा में यह मेला फरवरी के अंत में आयोजित होता है। यहां पशु के बीच प्रतिस्पर्धा और कई कार्यक्रम कराए जाते हैं। पशु मेले के आयोजन से कई दिन पहले ही इस मेले में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है।
राजस्थान का बलदेव पशु मेला
बलदेव पशु मेले का आयोजन मार्च के अंत में शुरू होता है और अप्रैल माह के शुरुआती दिनों तक चलता है। यह मेला मेड़ता में हर साल आयोजित कराया जाता है। आपको बता दें कि इस पशु मेले का नाम किसान नेता बलदेव के नाम पर रखा गया है। बलदेव पशु मेला सन 1947 से हर साल राज्य के पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित कराया जाता है। इस मेले में नागौरी बैलों की बिक्री सबसे अधिक होती है।
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चंद्रभागा पशु मेला
चंद्रभागा नाम का यह पशु मेला करीब 250 साल से आयोजित कराया जा रहा है। यह मेला राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन कस्बे में आयोजित किया जाता है। आपको बता दें कि इस मेले की शुरुआत 18 वी सदी में झाला जालिम सिंह ने की थी। लेकिन 1958 के बाद इस मेले का संचालन पशुपालन विभाग द्वारा किया जाने लगा था। ज्ञात हो कि यह मेला हर साल कार्तिक सुदी ग्यारस से मिगसर बदी पंचम तक चलता है। इस मेले में सबसे अधिक मालवी नस्ल के बैलों को खरीदा और बेचा जाता है।
पुष्कर पशु मेला
यह पशु मेला अजमेर से दूर स्थित पुष्कर में आयोजित किया जाता है। इस मेले के अंदर दुधारू पशुओं की बिक्री अधिक देखने को मिलती है। पुष्कर मेले में गाय, भैंस, बकरी और कई दूसरे पशु भी बेचे और खरीदे जाते हैं। इस मेले में गिरी गाय भी देखने को मिलती है। आपको बता दें कि यह पशु मेला कार्तिक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। ज्ञात हो कि कार्तिक पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म के लोगों के लिए बहुत अधिक महत्व रखता है। माना जाता है कि इस दिन सभी देवी देवता झील में एकत्रित होते हैं। यही कारण भी है कि इस मेले में लोग झील के अंदर नहाते हैं। यह उन चुनिंदा मेलों में से एक है जहां आपको विदेशी सैलानी भी भारी मात्रा में देखने को मिल सकते हैं।
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भारत का सबसे प्रसिद्ध पशु मेला
सोनपुर पशु मेला भारत और एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है, जो बिहार में आयोजित होता है। इस पशु मेले को नवंबर या फिर दिसंबर महीने में लगाया जाता है। इस मेले को छत्तर और हरिहर क्षेत्र मेला के नाम से भी जाना जाता है। इस पशु मेले में बहुत सी अलग – अलग नस्लों की पशु आते हैं। मुख्यतौर पर इस मेले में अलग – अलग नस्ल के हाथी, ऊंट, घोड़े, गाय और भैंस आदि पशुओं को खरीदा और बेचा जाता है। यह मेला इतना बड़ा और विशाल होता है कि विदेशी लोग भी इस मेले को देखने आते हैं।
पशु मेलों का कार्यक्रम
भारत के अंदर हर साल बहुत मेले आयोजित किए जाते हैं। वहीं अगर आंकड़ों की बात करें तो केवल राजस्थान के अंदर ही हर साल 250 से ज्यादा पशु मेलों का आयोजन किया जाता है। इन पशु मेलों में न केवल पशु को खरीदा और बेचा जाता है। बल्कि कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा खेती से जुड़ी नई तकनीक और तरीकों से लोगों को रूबरू कराया जाता है। इन पशु मेलों में पशुओं का रैंप वॉक भी कराया जाता है। इसके अलावा खाने पीने के ठेले और कई अलग – अलग वस्तुओं की दुकानें भी लगाई जाती हैं।
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