पशु लोन के लिए क्या दस्तावेज होना जरुरी है ?

भारत सरकार द्वारा किसानों और पशुपालकों के लिए बहुत सी योजनाएं चलती रहती है। इन योजनाओं के जरिए पशुपालकों को कई तरह से आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती हैं। वहीं कुछ योजनाओं में पशु खरीदने या डेयरी निर्माण के लिए लोन तक दिया जाता है। लेकिन ज्यादातर पशुपालक इन योजना का लाभ ले ही नहीं पाते।

ऐसा इसलिए क्योंकि पशुपालकों को यह समझ ही नहीं आता कि लोन हेतु किस तरह के दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। वहीं कई मामलों में तो किसानों और पशुपालकों को बैंक के कर्मचारी भी गुमराह करते रहते हैं। पशुपालकों की इसी समस्या का अंत करने के लिए आज हम यह लेख लिख रहे हैं। अगर आप भी किसी सरकारी या निजी बैंक के जरिए किसी योजना से जुड़ा लोन लेने की सोच रहे हैं तो यह लेख आपके लिए है। 

पशु लोन के लिए दस्तावेज

किसान और पशुपालक भाइयों को यह बता दें कि किसी भी योजना में आवेदन हेतु पहले अपनी पात्रता जांच लेना बहुत जरूरी है। अगर आप योजना या लोन के लिए पात्रता नहीं रखते तो दस्तावेज होने के बाद भी आपको लोन नहीं मिलेगा। इसलिए किसी भी योजना में आवेदन की योग्यता क्या होनी चाहिए। इसके बारे में संपूर्ण जानकारी लेनी जरूरी है। 

  • अगर आप एक पशुपालक हैं और बैंक से लोन लेना चाहते हैं तो सबसे पहले आपके पास उस जमीन की रजिस्ट्रेशन का दस्तावेज होना चाहिए। जहां आप पशुओं को रखने वाले हैं। वहीं अगर किसान या पशुपालक भाई किसी किराए की जमीन पर पशु रख रहे हैं तो इसके लिए आपके पास एग्रीमेंट होना चाहिए। 
  • किसान और पशुपालक भाई को अपने पशु का पूरा ब्यौरा देना होगा और वह यह जानकारी खुद नहीं बल्कि किसी डॉक्टर से ही लिखवाकर देंगे।  
  • किसान को कितने पैसे की आवश्यकता है और किस चीज के लिए वह लोन लेना चाहता है। यह भी बैंक को बताना होगा। ध्यान रहे कि यह एक जरूरी कदम है अगर आवेदनकर्ता इस चीज की जानकारी सही तरह से नहीं देते, तो ऐसे में लोन की अर्जी खारिज हो सकती है। 
  • किसान और पशुपालक भाई किस जगह रहते हैं या उनका निवास का प्रमाण पत्र क्या है यह भी बैंक को बताना होगा। इसके लिए बिजली बिल या पानी का बिल जमा कराना होगा। 
  • किसान या पशुपालक को अपनी जाति का प्रमाण पत्र देना होगा। आपको बता दें कि ऐसी कई योजनाएं चलाई जाती हैं। जिनमें कुछ विशेष जातियों को अधिक लाभ दिया जाता है। इसलिए अपनी जाति का प्रमाण पत्र जरूर बनवाएं।  

आशा करता हूं हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपके काम आएगी। इसी तरह की महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के लिए आप हमारे ब्लॉग और ऐप से जुड़े रह सकते हैं। आप हमारी Animall App को डाउनलोड कर के पशु खरीद और बेच भी सकते हैं। आप इस ऐप के माध्यम से पशु चिकित्सक से भी बात कर सकते हैं और पशुओं की समस्याओं का तुरंत समाधान पा सकते हैं। हमारी Animall App डाउनलोड करने के लिए इस लिंक को चुनें। 

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दूध उत्पादन के लिए केंद्र सरकार की क्या क्या योजनाएं है ?

दूध उत्पादन के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी कई योजनाओं को संचालित किया जा रहा है। इसके लिए दुग्ध उत्पादकों को कई तरह के अनुदान दिए जाते हैं। डेयरी एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट स्कीम के तहत दुग्ध उत्पादन करने वालों को वित्तीय सहयोग किया जाता है। यह वित्तीय सहयोग छोटे किसानों तथा भूमिहीन मजदूरों को प्रमुख रूप से दिया जाता है। डेयरी इंटरप्रेन्योर शिप डवलपमेन्ट स्क्रीम भारत सरकार की योजना है, इसके तहत डेयरी और इससे जुड़े दूसरे व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

इसके तहत छोटे डेयरी फार्म खोलने, उन्नत नस्ल गाय अथवा भैस की खरीद के लिए 5 लाख रूपये की सहायता की जाती है। यह राशि दूध खरीद दुधारू मवेशी के लिए दी जाती है। दूध उत्पादन में रोजगार इसके अलावा जानवरों के मल में जैविक खाद बनाने के लिए एक यूनिट की व्यवस्था करने के लिए 20,000 की मदद मिलती है।

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जानिए क्या है राजस्थान पशु बीमा योजना के लाभ और योग्यता

पशुपालन के जरिए गुजारा करने वाले लोगों के जीवन से चुनौतियों और समस्याओं को समाप्त करने के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं चलाती रहती हैं। यूं तो पशुपालकों के सामने ढेरों समस्याएँ रोजाना मुंह बाए खड़ी रहती हैं। लेकिन इनमें से सबसे बड़ी समस्या पशुपालन करने वालों के समक्ष तब खड़ी होती है। जब पशु की मौत हो जाती है। ऐसे में जब पशु की मौत हो जाती है, तो इसकी वजह से पशुपालक को बड़ी मात्रा में आर्थिक नुकसान होता है। 

इसी नुकसान से बचाने के लिए राजस्थान सरकार की ओर से एक योजना शुरू की गई है। इस योजना का नाम है भामाशाह पशु बीमा योजना राजस्थान। इस योजना के तहत पशु की मौत पर पशुपालक को एक तय राशि दी जाती है। ताकि पशुपालक के नुकसान को कम किया जा सके। लेकिन इस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक को अपनी पात्रता सिद्ध करनी होगी। आइए जानते हैं इसी भामाशाह पशु बीमा योजना से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी।

भामाशाह पशु बीमा योजना का उद्देश्य

राजस्थान सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना का उद्देश्य  पशुपालकों की आय बढ़ाना है। आपको बता दें कि प्रदेश में रहने वाले पशुपालक अक्सर अधिक पशु नहीं खरीदते क्योंकि गर्मी या रोग की वजह से पशु की जान जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। पशुपालन करने वालों का यह डर दूर किया जा सके और वह बड़े पैमाने पर पशुपालन कर सके। इसके लिए ही यह योजना शुरू की गई है। 

राजस्थान पशु बीमा योजना की पात्रता

इस योजना का आवेदन करने के लिए आवेदनकर्ता को अपनी योग्यता सिद्ध करनी होगी। राज्य सरकार द्वारा इस योजना में आवेदन करने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • योजना में आवेदन करने वाले व्यक्ति का पशुपालक होना अनिवार्य है। 
  • पशुपालन करने वाले व्यक्ति के पास पशु होने चाहिए। 
  • पशुपालन करने वाला व्यक्ति राजस्थान का निवासी होना चाहिए। 
  • योजना में आवेदन करने वाले व्यक्ति की आयु 18 साल से अधिक होनी चाहिए। 

पशु बीमा योजना के फायदे 

किसान या पशुपालन से जुड़े हुए हजारों लोगों को इस योजना का लाभ कई तरह से हो सकता है। इस योजना से जुड़े लाभों की सूची हम आपको नीचे विस्तार से बता रहे हैं।

  1. इस योजना के जरिए महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। 
  2. देश के आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को गति मिलेगी। 
  3. लाभार्थी के बैंक खातों में योजना का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। 
  4. पशुओं की मौत होने पर पशुपालक को बीमित राशि दे दी जाएगी। 
  5. राजस्थान में दूध का व्यापार तेजी से बढ़ने लगेगा। 
  6. भारत की दुग्ध उत्पादन क्षमता बेहतर होगी। 

पशु बीमा योजना में आवेदन का तरीका

राजस्थान में जो भी पशुपालन करने वाले लोग इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं। वह इस योजना के लिए संबंधित वेबसाइट या कार्यालय में जा सकते हैं। योजना हेतु सभी जरूरी दस्तावेज आपको फॉर्म के साथ ही संलग्न करने होंगे। अगर आपके दस्तावेज और सभी जानकारी सही पाई गई तो आपके पशु का बीमा हो जाएगा। 

आशा करते हमारे द्वारा दी गई भामाशाह पशु बीमा योजना से जुड़ी जानकारी आपको पसंद आई होगी। अब अगर आप योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आप आवेदन कर सकते हैं। इस तरह की योजना के लिए आप हमारे ब्लॉग के साथ – साथ Animall App को भी डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के बाद आपके लिए पशु खरीदना और बेचना आसान हो जाएगा। इसके अलावा पशु के बीमार पड़ने पर आप तुरंत चिकित्सक से सहायता ले सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के लिए इस विकल्प का चुनाव करें। 

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नाबार्ड डेयरी सब्सिडी लोन क्या है ? कैसे मिलेगा?

योजना के उद्देश्य

  • स्व-रोजगार पैदा करना और डेयरी क्षेत्र के लिए सुविधाएं उपलब्ध करना
  • मिट्टी की उर्वरता और फसल की पैदावार में सुधार के लिए अच्छा स्रोत।
  • गोबर से गोबर गैस, घरेलू प्रयोजनों के लिए ईंधन के रूप में इस्तेमाल, इंजन चलने के लिए, अच्छी तरह से पानी के लिए।
  • दूध के उत्पादन के लिए डेयरी फार्म की स्थापना को बढ़ावा देना।

डेयरी फार्मिंग नाबार्ड सब्सिडी योग्यता

  • किसान व्यक्तिगत उद्यमी और असंगठित और संगठित क्षेत्र का समूह हो।
  • एक आवेदक इस योजना के तहत  केवल एक बार सहायता का लाभ उठाने के पात्र होंगे।
  • इस तरह के दो फार्मों की सीमाओं के बीच की दूरी कम से कम 5oo मीटर होनी चाहिए।

दुग्ध उत्पाद बनाने के लिए उपकरण पर सब्सिडी

  • डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत दुग्ध उत्पाद (मिल्‍क प्रोडक्‍ट) बनाने की यूनिट शुरू करने के लिए भी सब्सिडी दी जाती है|
  • योजना के तहत आप दुग्ध उत्पाद की प्रोसेसिंग के लिए उपकरण खरीद सकते हैं|अगर आप इस तरह की मशीन खरीदते हैं और उसकी कीमत 13.20 लाख रुपये आती है तो आपको इस पर 25 फीसदी (3.30 लाख रुपये) की कैपिटल सब्सिडी मिल सकती है|अगर आप एससी/एसटी कैटेगरी से आते हैं तो आपको इसके लिए 4.40 लाख रुपये की सब्सिडी मिल सकती है|

मिल्‍क कोल्‍ड स्‍टोरेज भी बना सकते हैं

  •  आप डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत दूध और दूधे से बने उत्पाद के संरक्षण के लिए कोल्‍ड स्‍टोरेज यूनिट शुरू कर सकते हैं|
  • इस तरह का कोल्ड स्टोरेज बनाने में अगर आपकी लागत 33 लाख रुपये आती है तो इसके लिए सरकार सामान्‍य वर्ग के आवेदक को 8.25 लाख रुपये और एससी/एसटी वर्ग के लोगों को 11 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है|

 डेरी फार्मिंग योजनाएं

1.संकर गायों / साहीवाल, लाल सिंधी, गिर, राठी आदि जैसे स्वदेशी विवरण दुधारू गायों / श्रेणीबद्ध भैंस 10 पशुओं के लिए छोटे डेयरी इकाइयों को बढ़ने के साथ स्थापना।

निवेश: 10 जानवरों की यूनिट के लिए 5.00 लाख रुपये – न्यूनतम इकाई का आकार 2 और अधिकतम 10 जानवरों की सीमा के साथ है।

सब्सिडी: परिव्यय (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33 .33%,) के 25% से 10 जानवरों की एक यूनिट के लिए 1.25 लाख रुपये की सीमा के रूप में वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी विषय (अनुसूचित जाति के लिए 1.67 लाख रुपये / अनुसूचित जनजाति के किसानों,) । अधिकतम अनुमेय पूंजी सब्सिडी 25000 रुपये 2 पशु इकाई के लिए (अनुसूचित जाति के लिए 33,300 रुपये / अनुसूचित जनजाति के किसानों) है। सब्सिडी इकाई आकार के आधार पर एक यथानुपात आधार पर प्रतिबंधित किया जाएगा।

2.बछिया बछड़ों के पालन – 20 बछड़ों के लिए ऊपर – पार नस्ल, स्वदेशी मवेशियों और वर्गीकृत भैंसों दुधारू नस्लों का विवरण।

निवेश: 20 बछड़ा इकाई के लिए 4.80 लाख रुपये –  5 बछड़ों की न्यूनतम इकाई आकार और 20 बछड़ों की अधिकतम सीमा के साथ।

सब्सिडी: परिव्यय (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33.33%) की 25% 20 बछड़ों (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 1.60 लाख रुपये) की एक इकाई के लिए 1.20 लाख रुपये की सीमा के रूप में वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी अधीन। अधिकतम अनुमेय पूंजी सब्सिडी 30,000 रुपये 5 बछड़ा इकाई के लिए (अनुसूचित जाति के लिए 40,000 रुपये / अनुसूचित जनजाति के किसानों) है। सब्सिडी इकाई आकार के आधार पर एक यथानुपात आधार पर प्रतिबंधित किया जाएगा।

3.वर्मीकम्पोस्ट (दुधारू पशु यूनिट के साथ अलग से नहीं दुधारू पशुओं के साथ विचार किया जा छेनी और)।

निवेश:  20,000 / -रु।

सब्सिडी: परिव्यय (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33.33%)                     के 25% या 5,000 रुपये की सीमा के रूप में वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी विषय – (रुपये      6700 / – अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए)।

4.दुहना मशीनों की खरीद / दूध परीक्षकों / थोक दूध ठंडा इकाइयों (2000 जलाया क्षमता)।

निवेश: 18 लाख रु।

सब्सिडी: परिव्यय (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33.33%) के 25% 4.50 लाख रुपये (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 6.00 लाख रुपये) की सीमा के रूप में वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी अधीन।

5.स्वदेशी दूध उत्पादों का निर्माण करने के लिए डेयरी प्रसंस्करण के उपकरण की खरीद।

निवेश: 12 लाख रुपये

सब्सिडी: परिव्यय (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33.33%) के 25% 3.00 लाख रुपये (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 4.00 लाख रुपये) की सीमा के रूप में वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी अधीन।

6.डेयरी उत्पाद परिवहन सुविधाओं और कोल्ड चेन की स्थापना।

निवेश: 24 लाख रु।

सब्सिडी: परिव्यय (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33.33%) के 25% से 6.00 लाख रुपये (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 8.00 लाख रुपये) की सीमा के रूप में वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी अधीन।

7.दूध और दूध उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज की सुविधा।

निवेश: 30 लाख रुपये।

सब्सिडी: परिव्यय (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33.33%) के 25% 7.50 लाख रुपये (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 10.00 लाख रुपये) की सीमा के रूप में वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी अधीन।

8.प्राइवेट पशु चिकित्सा क्लीनिक की स्थापना।

निवेश: मोबाइल क्लिनिक के लिए 2.40 लाख रुपये और स्थिर क्लिनिक के लिए 1.80 लाख रुपये।

सब्सिडी: – परिव्यय के 25% (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33.33%) वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी 45,000 / – रुपये और 60,000 / रुपये की सीमा  (रुपये 80,000 / – और 60,000 रुपये / – अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए)क्रमश: मोबाइल और स्थिर क्लीनिक के लिए।

9.डेयरी विपणन आउटलेट / डेयरी पार्लर।

निवेश: 56,000 रुपये / –

सब्सिडी: परिव्यय (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 33.33%) के 25% या14,000 रुपये की सीमा के रूप में वापस समाप्त पूंजी सब्सिडी विषय – (रुपये 18600 / – अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए)।

नाबार्ड डेयरी फार्मिंग सब्सिडी |ऑनलाइन आवेदन फॉर्म, रजिस्ट्रेशन 2020  

  • सबसे पहले नाबार्ड की आधिकारिक वेबसाइट(https://www.nabard.org/) पर जाएँ
  • मेनू में जाकर ” Govt. Sponsored Schemes” लिंक पर क्लिक करें
  • इसके बाद “Dairy Entrepreneurship Development Scheme” लिंक पर क्लिक करें
  • अब दी गई सारी जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ें
  • उसी पेज में नीचे जाकर आवेदन पात्र का प्रारूप डाउनलोड करें और आवेदन कर दें
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नाबार्ड डेयरी सब्सिडी के लिए योग्यता क्या है ?

1. किसान व्यक्तिगत उधमी और असंगठित क्षेत्र का समूह हो
2. एक आवेदक इस योजना के तहत केवल एक बार लाभ प्राप्त कर सकता है
3 . दो फार्मों के बीच दूरी कम से कम 500 मीटर होनी चाहिए

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