गलघोंटू रोग किस जीवाणु के कारण होता है?

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गलघोंटू रोग क्लासटीडीयम सैपटीकम जीवाणु द्वारा होता है| यह जीवाणु रोग ग्रसित पशु की मांस पेशियों में तथा मिट्टी व खाने की चीजों में पाया जाता है|

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पशुओं में गलघोंटू रोग होने का खतरा कब रहता है?

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गलघोंटू रोग आमतौर पर बरसात के मौसम में होता है| ज्यादा बिमारी फैलने का खतरा गर्म व अधिक आर्धरता वाले क्षेत्रों में रहता है| इसे (ब्लेक लैग) के नाम से भी जाना जाता है|

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अफारा होने पर पशु का किस तरह बचाव किया जा सकता है?

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यदि समय पर अफारे का ईलाज नहीं किया गया तो पशु मर जाता है| निम्नलिखित उपाय सहायक है:-
(क) पशु को खिलाना बंद कर देना चाहिए व पशुचिकित्सक को सम्पर्क करना चाहिए|
(ख) नाल देते समय पशु की जीभ नहीं पकड़नी चाहिए|
(ग) पशु को बैठने नहीं देना चाहिए उसे थोड़ा-थोड़ा चलाना चाहिए|
(घ) जब पशु में अफारे के लक्षण समाप्त हो जाए उसके बाद 2-3 दिनों में धीरे-धीरे पशु को चारा देना चाहिए|

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हम नवजात को पेट के कीड़ों से कैसा बचा सकते है?

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पेट के कीड़ों से ग्रस्ति नवजात सुस्त, खाने में कम रूचि, दस्त लगना आदि लक्षण होते हैं तथा सही ईलाज के लिए नज़दीक के पशु चिकित्सक को सम्पर्क करें|

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कृपया पेराटाईफाईड बिमारी के बारे में बताएं जो आमतौर पर नवजात में होती है?

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यह बिमारी आम तौर पर 2 सप्ताह से 3 महीने के बीच की आयु वाले नवजात को होती है| यह उन गौशालाओं में ज्यादा होती है जो तंग है व स्वास्थ्यकर नहीं है| मुख्य लक्षणों में तेज़ बुखार, दाना खाने में रुची न होना, मुंह सूखा, सुस्ती, गोबर पीला या मिट्टी के रंग का व दुर्गन्ध| यदि आपको इस बिमारी का आभास हो तो तुरन्त नज़दीक के पशु चिकित्सक को सम्पर्क करें|

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