आमतौर पर नवजात इससे ग्रस्ति होते है यह अन्तह क्रीमी के कारण होती है मुख्यत: एसकेदिदज| जिसके कारण जानवर कमज़ोर,सुस्त तथा भूख में कमी होती है| इससे बचाव के लिए साफ पानी की व्यवस्था, बिमार नवजात को स्वस्थ से अलग रखना आवश्यक है| क्रीमी एक से दूसरे जानवर को अण्डों के द्वारा फैलते है जोकि बिमार पशु के गोबर में होते हैं|
यह एक आम बिमारी है जो नवजात व उन जानवरों में होती है जो सलाब वाली जगह में बांधे जाते है ज्यादा तर यह बिमारी नवजात जिनकी उम्र 3-4 महीने में पाई जाती है| इसके मुख्य लक्षण है आंख व नाक से पानी, सुनाई न देना, बुखार, सांस में कठिनाई व बलगम निकालना| यदि समय पर ईलाज नहीं हुआ तो मृत्यु| नवजात को साफ हवादार भाड़े में रखना व अचानक मौसम व तापमान से बचाव रखना चाहिए|
नवजात बच्छे- बच्छडि़यों में निम्नलिखित बिमारियों का खतरा सर्दियों में अधिक रहता है:-
(क) नेवल “I”
(ख) वाईटस्करड
(ग) निमोनिया
(घ) पेरासाईकिइन्फेक्शन
(ङ) पेराटाईफाईड
आम लक्षण निम्नलिखित है:-
(क) जब पशु गर्भधार्ण कर लेता है तो 21 दिनों के बाद मद में नहीं आता|
(ख) 3-4 महीनों के बाद पेट सूजा हुआ लगता है|
(ग) जब गुदा के रास्ते निदान किया जाता है तो गर्भाश्य बड़ा हुआ महसूस होता है यह निदान केवल पशुपालन में प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही किया जाना चाहिए|
ज्यादा दूध देने वाले पशु भी दिन में तीन बार नियमित अन्तराल के बाद दुहना चाहिए व कम दूध देने वाले पशु को दिन में दो बार किन्तु समय अन्तरकाल बराबर होना चाहिए| इससे दूध उत्पादन क्षमता भी बडती है और पशु समय पर दूध देने को तैयार रहता है|

