पशुओं में अफारा रोग से कैसे बचाव करना चाहिये?

(क) पशुओं को चारा डालने से पहले ही पानी पिलाना चाहिये।
(ख) भोजन में अचानक परिवर्तन नहीं करना चाहिये।
(ग) गेहूं, मकाई या दूसरे अनाज अधिक मात्रा में खाने को नहीं देने चाहिये।
(घ) हर चारा पूरी तरह पकने पर ही पशुओं को खाने देना चाहिये।
(ड़) पशुओं को प्रतिदिन कुछ समय के लिये खुला छोड़ना चाहिये।

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बछड़ों में पेट के कीड़ों (एस्केरियासिस) से कैसे बचा जा सकता है।

इस रोग की वजह से बछड़े को सुस्ती, खाने में अरुचि, दस्त हो जाते हैं। व इस रोग की आशंका होते ही तुरन्त पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

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बछड़े- बछड़ियों में नाभि का सड़ना क्या होता है? इसकी रोकथाम के उपाय बताएं|

इसे अंग्रेजी में’” नेवल इल ” कहते हैं। नवजात बछड़ों में सफाई की कमी से नाभि में पीप (मवाद) पड़ जाती है। नाभि चिपचिपी दिखाई देती है और उस में सूजन व पीड़ा हो जाती है। बछड़ा सुस्त हो जाता है और जोड़ों के सूजने से लंगडाने लगता है। इसकी रोक थाम के लिये नाभि को किसी कीट नाशक से साफ़ करके टिंक्चर आयोडीन तब तक लगाएं जब तक नाभि सूख न जाए।

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कृत्रिम गर्भाधान ( Artificial Insemination ) किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

गर्मी के मध्य या अंतिम काल में कृत्रिम गर्भाधान करना से चाहिए।
पशुओं में अक्सर गर्मी सांयकाल 6 बजे से प्रातः 6 बजे 14, के मध्य आती है।
भैंस अधिकतर अगस्त से जनवरी तथा गाय अधिकतर जनवरी से अगस्त माह के मध्य गर्मी पर आती है वैसे उत्तम वैज्ञानिक ढंग से पालन पोषण से वर्ष भर में गर्मी में आ सकती है।
कृत्रिम गर्भाधान के तुरन्त उपरान्त पशुको मत दौड़ायें।
बच्चा देने के बाद से तीन माह के अन्दर पुनः गर्भित करायें।
कृत्रिम गर्भाधान के समय शांत वातावरण हो तथा पशु को तनाव मुक्त रखें।
कृत्रिम गर्भाधान करने के पहले व बाद में पशु को छाया में रखें।
पशु को सुबह व सायंकाल के वक्त ही गर्भधारण करवाएं।

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डेयरी फॉर्म प्रारम्भ करने के लिए नाबार्ड से सब्सिडी कैसे प्राप्त करें ?

1. डेयरी को रजिस्टर्ड करवाएं ।
2. एक अच्छ एवम विस्तृत योजना तैयार करें ।
3. नाबार्ड द्वारा अधिकृत बैंक में जाएं और बैंक लोन के लिए आवेदन करें ।
4. एक बार लोन मिल जाये तो डेयरी का कार्य प्रारंभ करें।

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